मंगलवार, 18 जुलाई 2017

प्रश्न बड़ा है!

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प्रश्न बड़ा है!

पोखर में पूरी डूब मस्त तैरते, मात्र सिर नथुने पानी से निकाले बाहर को
आँखे बन्द कर जुगाली में तल्लीन है, एक पूरा का पूरा भैंसों का दल वो

रिमझिम बरसात में, तैयार किये, पानी भरे, चित्र से लगते अपने खेतों में
मुट्ठी से नाप नाप, धान की पौध रोपता है अन्नदाता और उसका परिवार

भर पेट बिरयानी खाने के बाद, कॉफी-सिगरेट पी उसे पचाने की जुगत में
टमाटर-सब्ज़ी के बढ़ते दामों से चिन्ता-रत, वह है सर्वहारा का नम्बरदार

बड़ी सड़क पर जलूस निकल रहा है, विश्वविजयी एक सम्राट का
रथ में जुते हैं पराजित योद्धा, हाँक रहा जिनको, सारथी राजदंड से

उड़ रहा आसमान में, क्रीड़ा करता, श्वेत कपोतों का वह जोड़ा
जिन पर नजर गढ़ाये, वृक्ष की पत्तियों में छुपा बैठा है बूढ़ा बाज

फिर गटर में घुसवा दिया गया, पव्वे का लालच दे लाचार मजबूर कोई
पिता का इंतजार करती उसकी बेटी को मिली, मल सनी-गंधाती लाश

खेल में हार गया है कोई, तो कोई जीत भी गया है उम्मीद से परे जाकर
एक वीर जवान शहीद हुआ है कहीं, दो दो दुश्मनों को जमींदोज़ कर 

आभासी विश्व को लड़ मरने के लिये, मिल गया है ताजा-गर्म एक मुद्दा
स्याही से सन लथपथ हो चुके हैं, दोनों ही पक्षों के की-बोर्ड महारथी

एक पुराने संदूक में ध्वज को कुतर कुतर चिन्दियाँ बना दे रहे हैं चूहे कई
सम्माननीय पर अब किनारे रखी पुस्तकों को अंदर से चाट गयीं हैं दीमकें

और इस सब के बीच न जाने कैसे क्यों, उठ गया है यह नामुराद प्रश्न भी
कि कौन है, कहाँ है, है तो क्यों और किसलिये भी, अभी तक कोई इंसान

क्या आपके पास कोई उत्तर है, मित्र ?

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