शनिवार, 1 जुलाई 2017

जी हाँ, हमारे हिन्दी ब्लॉग्स का जिन्दा रहना जरूरी है ! #हिन्दी_ब्लॉगिंग

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मेरे ब्लॉगर और फ़ेसबुकिया मित्रों,

थोड़ा सा भी सोचें अगर, तो सबसे बड़ी वह बात जो आपको मुझ से और मुझे आपसे जोड़ रही है वह है हम दोनों की भाषा, यानी आज के हिन्दुस्तान की हिंदी...

मैं कोई भाषा विशेषज्ञ नहीं, और न ही मैं हिन्दी अथवा किसी भी अन्य भाषा में शुद्धता और शास्त्रीयता का आग्रह कर उसको चन्द भाषिक अभिजात्यों के लिये ही सीमित कर देने का पक्षधर हूँ... मेरी अपनी सीमित समझ में जब एक अनपढ़ पंजाबी ट्रक ड्राइवर कश्मीर के श्रीनगर से ट्रक भर डेलिशियस कश्मीरी सेव लेकर अपने बिहारी क्लीनर के साथ कन्या कुमारी, इम्फाल, पुरी आदि आदि जगहों के लिये निकलता है तो जिस भाषा मे वह रास्ते भर संवाद करता जाता है, वह हिन्दी ही है...

हम जो इतिहास पढ़ते हैं अथवा जो हमें बताया जाता है उसके अनुसार हम पुरातन विश्व की एक श्रेष्ठ और शक्तिशाली-समृद्ध सभ्यता थे... आज फिर से हम विश्व की एक महाशक्ति बनने की आकांक्षा पाले हैं... पर आज का दौर अलग है, आज वही समृध्द और शक्तिशाली है या बन पायेगा जिसके पास ज्ञान है... दुख हो रहा है यह कहने में, पर हमारी हिन्दी आज भी ज्ञान-विज्ञान की भाषा नहीं है...

हिन्दी के ज्ञान-विज्ञान की भाषा न होने/हो पाने के कारण हिन्दी भाषी इस महादेश की 75 प्रतिशत से अधिक आबादी भी एक तरह से ज्ञान-विज्ञान से वंचित हो जाती है, उनमें से कुछ ही एक विदेशी भाषा अँग्रेजी के माध्यम से उच्च शिक्षा पाते हैं, परन्तु मातृभाषा में सोचने और विदेशी भाषा में कार्य करने के कारण वह प्रतिभाएँ अपनी ऊंचाइयां नहीं पा पातीं...

ज्ञान विज्ञान की भाषा बनने के लिये आवश्यकता है कि हिन्दी बोलने वाले अधिक से अधिक लोग लिखित रूप से हिन्दी में ही अभिव्यक्त हों... अधिकाधिक अनुभव, अभिव्यक्तियाँ, चर्चा-बहसें और जानकारी लिखित रूप से हिन्दी में आये... हिन्दी का शब्दकोश रोज नयी नयी चीजों और अभिव्यक्तियों को दर्शाते शब्दों को दूसरी भाषाओं से अपने में आत्मसात करे.... अपने व्यस्त जीवन से समय निकाल हममें से हरेक अपनी विशेषज्ञता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी हिन्दी में लिखे...

ऐसा हो भी रहा है/था... पर कतिपय वजहों से हम में से अधिकांश ब्लॉग की बजाय फेसबुक पर शिफ़्ट हो गये, त्वरित फीडबैक के लिये फेसबुक अच्छा माध्यम है, पर वहाँ कुछ भी स्थायी नहीं, चीजों को ढूंढना मुश्किल है... इसलिये हिन्दी ब्लॉग्स का बचे रहना जरूरी है... आपसे अनुरोध है कि हिन्दी को एक भाषा के तौर पर पुष्पित-पल्लवित करने और हिन्दुस्तान को एक महाशक्ति बनाने के लिये भी अपने ब्लॉग्स को जीवित रखिये...

आईये न सिर्फ अपने अपने ब्लॉग को जीवित रखें बल्कि अधिक से अधिक मित्रों को भी ब्लॉग बनाने की ओर प्रेरित करें...

चलो ब्लॉग की ओर !


प्रवीण

#हिन्दी_ब्लॉगिंग


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24 टिप्‍पणियां:

  1. फेसबुक दैनंदिन चौपाल है, जबकि ब्लॉगिंग संदर्भ, साहित्य, पुस्तकालय या कार्यालय जैसा है। हमारे हिन्दी ब्लॉग्स का जिन्दा रहना और पनपना वाकई जरूरी है!

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    1. दैनंदिन चौपाल है फेसबुक और गति बहुत है। ब्लॉग में स्थैर्य है।

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  2. हिंदी ब्लॉगिंग दिवस की शुभकामनाएँ

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  3. कतिपय वजहों से हम में से अधिकांश ब्लॉग की बजाय फेसबुक पर शिफ़्ट हो गये, त्वरित फीडबैक के लिये फेसबुक अच्छा माध्यम है, पर वहाँ कुछ भी स्थायी नहीं, चीजों को ढूंढना मुश्किल है... इसलिये हिन्दी ब्लॉग्स का बचे रहना जरूरी है...
    इन्हीं कुछ वजहों से मेरी फ़ेसबुक में मौजूदगी नगण्य सी है. मैं तो ब्लॉग में ही सक्रिय हूँ, और बचा हुआ हूँ! :(

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    1. हम भी कमोबेश आपकी राह के राही हैं!

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  4. बिलकुल जरूरी है ... सार्थक और विचारणीय पोस्ट है

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  5. फिलहाल ये पहला दिन है इसलिए कुछ कहना जल्दबाजी होगी की लोग यहाँ कितना टिकेंगे |

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  6. सार्थक रचना..
    अंतरराष्ट्रीय हिन्दी ब्लॉग दिवस पर आपका योगदान सराहनीय है. हम आपका अभिनन्दन करते हैं. हिन्दी ब्लॉग जगत आबाद रहे. अन्नत शुभकामनायें. नियमित लिखें. साधुवाद
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग

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  7. कह तो आप ठीक रहे हैं पर अंशुमाला जी की बात भी गौर करने लायक है।

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  8. हिंदी(या कोई भी) ब्लॉग्गिंग तभी तक जिंदा रह सकती है जब लोग वाकई में दिल से ब्लॉग पढ़ें(लिखता तो हर कोई है....) पढ़ के पोस्ट से जुड़े कमेन्ट करें... कॉपी पेस्ट वाले कमेंट्स की फॉर्मेलिटी करने वाले ब्लागरों के ब्लोग्स को कबका अन्फोल्लो कर चुका हूँ....

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  9. हिन्दी ब्लॉगिंग की गति बनाये रखने हेतु आपका प्रयास सराहनीय है -शुभकामनाएं

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  10. फेसबुक फास्ट फ़ूड है, ब्लॉग है राबड़ी।

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  11. जय हिंद...जय #हिन्दी_ब्लॉगिंग...

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  12. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  13. फेसबुक पर तुरत प्रतिक्रया पाने की ललक और चाहत ने ब्लॉग का बहुत नुकसान किया है! इसी चाहत ने ब्लॉग को भी चोट पहुंचाई थी! यह पहल फिर एक दिवस तक सीमित न रहे!!

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  14. फेसबुक पर तुरत प्रतिक्रया पाने की ललक और चाहत ने ब्लॉग का बहुत नुकसान किया है! इसी चाहत ने ब्लॉग को भी चोट पहुंचाई थी! यह पहल फिर एक दिवस तक सीमित न रहे!!

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  15. पढ़ना छूट गया था, लिखते रहने वाले तो लिख ही रहे थे ,अब फिर पढ़ना शुरू किया , बहुत सा नया ज्ञान मिला जो फेसबुक पर संभव नहीं ।

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