शुक्रवार, 29 अगस्त 2014

'पैंतालीस बरस का आदमी'

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क्या यह एक अज़ीब सा इत्तेफ़ाक नहीं, कि खाकसार भी इसी साल अपनी ज़िन्दगी के पैंतालीस बरस पूरे करेगा ?... 



'पैंतालीस बरस का आदमी'


किसी की भी गलत बात पर
पहले की तरह उसे अब
अनियंत्रित क्रोध नहीं आता
काफी शान्त जो हो गया है
पैंतालीस बरस का आदमी

नहीं सोचता अब बदलने की
दुनिया औ निज़ाम को एक साथ
अपने इर्द गिर्द की दुनिया को बस
करीने से सजा, खुश रहता है
पैंतालीस बरस का आदमी

हार्ट अटैक से किसी के मरने की
हर खबर को पढ़ता है ध्यान से
उस दिन फुल्के में घी नहीं लगाता
अपने दिल की सोच घबराता है
पैंतालीस बरस का आदमी

सोचता था वो अमर कभी खुद को
समझता था मौत है दूसरों के लिये
जब कुछ साथी अचानक चल दिये
तो अब हरेक को नश्वर मानता है
पैंतालीस बरस का आदमी

बहुत लम्बी नाक होती थी उसकी कभी
नहीं झेल पाता था निर्दोष मजाक भी
आज जमकर हँसता है उन बातों पर
अक्सर खुद का ही मज़ाक उड़ाता है
पैंतालीस बरस का आदमी

जो बातें वह छिपा लेता था दिल में
और अपने डर को नहीं करता था जाहिर
यह विश्वास लिये कि दोस्त समझेंगे उसे
आज उन बातों-डरों पर चर्चा चाहता है
पैंतालीस बरस का आदमी

पहले खुद को ही समझता था सही
इसी बात पर लड़ने-मरने को उतारू भी
पर कई कई एक साथ ही हो सकते सही
बख़ूबी अब इस सत्य को समझता है
पैंतालीस बरस का आदमी

वह पहल जो उसने कभी की ही नहीं
वो चुम्बन जो उसे नहीं मिले कभी
वह ठुकराया जाना, वह मौके गँवाना
आज उन बातों को शिद्दत से याद करता है
पैंतालीस बरस का आदमी

की नहीं फ़िक्र जिसने कभी समय की
जानता नहीं था, होता है उसका मोल भी
आज अपने दिन के एक एक लम्हे को
चाय की आखिरी चुस्की सा मानता है
पैंतालीस बरस का आदमी

था एक समय जब समझता था वो
हर आने जाने वाला देख रहा उसी को
निकलता था बाहर हरदम बन ठन कर ही 
आज अक्सर बेफिक्र बेतरतीब मिलता है
पैंतालीस बरस का आदमी

भाइयों बहनों से भरा पूरा घर था उसका
जिनसे बचपन में खूब उसने लड़ाइयां की
आज अपने उन्हीं भाई बहिन के साथ
बिताये हरेक पल को सहेजता रहता है
पैंतालीस बरस का आदमी....




...

6 टिप्‍पणियां:

  1. कल 31/अगस्त/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  2. बहुत खूब! सच कहा आपने ४५ वर्ष आधी से ज्यादा उम्र के बाद सोचने का वक्त जो मिलता है। पहले कहाँ सोचते हैं हम ,,

    उत्तर देंहटाएं
  3. vastvikta hai ye...lekin kabhi-kabhi iss pantalis baras ke aadmi ko 30 baras ka bna rahna padta hai....apni jimmedaariyo ko nibhaane aur ghar ka kharcha paani chalaane ke liye...... dhanywad...

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  4. सही कहा है...वक्त वक्त की बात है...

    उत्तर देंहटाएं
  5. यही आदमी जब साठ का हो जाएगा तो पन्द्रह साल पहले वाले दिन याद करके सोचेगा, अहा, वे भी क्या दिन थे !
    घुघूती बासूती

    उत्तर देंहटाएं

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