रविवार, 20 अप्रैल 2014

क्यों विरोध करूँ ?

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इस में
उस में
तुझ में
तुम सब में ही
है ऐसा कोई ?

जो काबिल हो
मेरे, हाँ, मेरे ही

विचार का
नजर का
भरोसे का
जिम्मेदारी का
गुस्से का
प्यार का
इल्ज़ामों का
आभार का
गालियों का भी

अब जब तुम 
किसी काम के
हो ही नहीं
तो पकड़ो मेरा
यह मौन समर्थन

या बताओ मुझे
कि मैं तुम्हारा
क्यों विरोध करूँ ?





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2 टिप्‍पणियां:

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