शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2014

दौड़ ?

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तुम चाहे
दौड़ो कितना ही 
तेज, हांफते हुए

या धकेलो
अनगिनतों को
कोहनी मार पीछे

और गिरा दो
बहुतों को
लंगड़ी मारकर

पर जब भी
थोड़ा रुककर
देखोगे आगे-पीछे

पाओगे केवल
एक नतीजा
हरदम, हमेशा

कि हर बार
उतने ही आगे हैं
औ उतने ही पीछे भी

एक बहुत बड़े
गोल घेरे में
दौड़ रही है दुनिया

अगर अब भी
बेदम, बिन सुस्ताये
दौड़ना चाहते हो

तो यह तुम्हारा
अपना फैसला
और तुम्हारी दौड़ भी

तुमको मुबारक !
तुमको मुबारक !
तुमको मुबारक !

मैं तो थोड़ा
सुस्ताना चाहूँगा
बगिया में, छाँव में...




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रविवार, 2 फ़रवरी 2014

हमारी दिल्ली, हमारी शान...??? आक्क थू sss

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अच्छा तो तुम्हारा 
एक नाम भी था
नीडो तानिया

हमें तो पता तक नहीं
कि तुम लोगों के भी
बाकायदा नाम होते हैं

हमारे लिए तो तुम
मिची मिची आँखों वाले
पहाड़ी शक्लोसूरत लिए
वो चिंकी लोग हो

जो पहनते हो
ढीले ढाले, अजीब कपड़े
बोलते हो कुछ
अलग तरह से


तुम्हारी लड़कियां
बहुत फ़ास्ट हैं
हमारी नजरों में


कुछ अलग सा है
तुम्हारा रहन सहन
उड़ाना जिसका मजाक
हक़ है हमारा


हम रोज कसते हैं
अनेकों फब्तियां
तुम लोगों पर और
तुम्हारे जैसे ही
कई दूसरों पर भी


जो दिखते हैं जुदा
अलग है जिनका रंग
या फिर जुबानें ही
या जिंदगी जीने का
लहज़ा और अंदाज


इस महानगर में
लगभग रोजाना ही
कहीं न कहीं
पीटे भी जाते हो तुम
और बदल लेते हो
अपना रहने का मकान


ये तुम्हारा कसूर था
नीडो तानिया
कि तुम मर गये


हद्द हो गयी यार
इतनी सी मार भी
नहीं झेल पाए तुम

तुम जैसों के लिए
दिल्ली के पास नहीं हैं
मार्च करने का वक़्त
या जलाने के लिए
चन्द मोमबत्तियां ही


तुम हमारी गिनती में
दिल्ली के नागरिक नहीं

तुम नागरिक ही नहीं

और तुम्हारी यह मौत
महज़ एक आँकड़ा है
हम दिल वालों की
दिलदार दिल्ली के लिए

नीडो तानिया
तुम्हें पता तो था न कि
हमारी दिल्ली, हमारी शान...




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