सोमवार, 28 अक्तूबर 2013

देख भाई देख, देख तमाशा देख !

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देख
देख
देख
देख भाई
देख तमाशा देख



उनको दुनिया संत बोलती
सोतों को जगाते हैं जो
दिनदहाड़े उनका सोना देख
सोने में सोने का स्वप्न देख
सोना सोना की रट कर के
जागतों को भी सुलाना देख



देख
देख
देख
देख भाई
देख तमाशा देख



पुरानी पोथा पत्री  बाँचते
ग्रहचालों की रफ्तार नापते
रत्न-जत्न सुझाते पाखंडी देख
और यह सब करते हुऐ भी
सच झुठलाते-मन भरमाते
उनके वैज्ञानिकता के दावे देख



देख
देख
देख
देख भाई
देख तमाशा देख



सदियों से काबिज हैं हमपर
लैंगिक भेद की अवधारणायें
उनका खुला महिमामंडन देख
जिनके जिम्मे काम था यह
महिलाओं को जगायेंगी ही वह
उनका करवाचौथ मनाना देख



देख
देख
देख
देख भाई
देख तमाशा देख




लाखों की रैली में हुंकारे भरते
गरजते हुऐ नेताओं को सुन
फिर रैली के बीच धमाके देख
आरोपों-प्रत्यारोपों के घमासान में
मरने वाले जीते जागते इंसानों का
महज चंद आंकड़ों में बदलना देख



 देख
देख
देख
देख भाई
देख तमाशा देख


जुल्म और अन्याय जो करता
बाँध देता है पट्टी आँखों पर
फिर भी धर्म का मंडन देख
हर उस कुरीति, जिसकी जड़ में
धर्म ही देता है खाद-पानी तक
के धार्मिक समाधान के दावे देख



देख
देख
देख
देख भाई
देख तमाशा देख





...


3 टिप्‍पणियां:

  1. सारा हिसाब एक ही बार में पूरा कर लिया आपने तो।

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  2. i wish u had put some links from news papers or web under each last line
    it would have highlighted the issue from a mere poem to a higher next level

    उत्तर देंहटाएं

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