सोमवार, 3 जून 2013

मैं...

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मैं
मस्त हूँ
खुश 
और
संतुष्ट भी
अपने
मैं
ही 
रहने में


मैं
कभी
ख्यालों में
तक नहीं
होना चाहता
तुम 
या 
किसी 
और सा


मैं
जो
मैं 
बना
खुद ही
मेरा
मैं 
बनना
मेरा ही
जागृत
निर्णय था

मैं
ही हूँ
जिम्मेदार
अपने
मैं 
होने का
और
इस कारण हुई
हर जीत
और
हरेक हार का


मैं
नहीं चाहता
दौड़ना
तुम्हारे
या 
तुम जैसे
कई औरों के
साथ
किसी भी
दौड़ में


मैं
दौड़ता हूँ
खुद के साथ
स्वयं
चुनकर
अपनी दौड़
दौड़
का समय
और
दौड़ने का
मैदान भी


मैं
हमेशा
खुद को
नापता हूँ
खुद की ही
नजरों से
अपने
ही
पैमानों पर


मैं
मानता हूँ
कि
तुम्हारे 
या किसी और
के पास
मुझे नापने
का पैमाना
और 
नजर नहीं


मैं
अपने
मैं बनने 
के लिये
अपने 
परिवार
के सिवा
किसी का
कृतज्ञ या
कर्जदार नहीं


मैं
मानता हूँ
कि मेरा
मैं 
रहना
नहीं जुड़ा
किसी के
भी स्वीकार 
या
अस्वीकार से


मैं
मैं ही रहूँगा
तुम्हारे
मुझ को
कुछ कुछ
या
बहुत कुछ
कहने के
बाद भी 


मैं
जानता हूँ
कि 
फिर भी
तुम
आँकोगे मुझे
लगाओगे 
अनुमान
मेरी हैसियत
और वजूद का


मैं
हमेशा की
तरह ही
कर दूँगा
दरकिनार
तुम्हारी
इस 
अनधिकार
चेष्टा को


मैं
मैं
ही रहूँगा
पर यह
पूछंगा जरूर
कि क्या
तुम्हें वाकई
यकीन था
कि मेरे
मैं 
ही रहने
के अलावा
कोई दूसरा 
परिणाम
संभव था ?












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14 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत स्पष्ट अवधारणा स्वयं के होने की, गहरी और स्पष्ट।

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  2. बहुत बढ़िया ! मुझे तो ये ज्वालामुखी भी माओ का भक्त लग रहा है ! बस यही कहूंगा कि महाराज ठन्डे हो जाइये, :) लोग जितना पसंद चाँद को उसकी शीतलता की वजह से करते है उतना सूर्य को नहीं।

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    उत्तर
    1. .
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      .
      माओ का भक्त ??? ज्वालामुखी ?

      बढ़िया है सर जी... :)


      ...

      हटाएं
  3. ईश्वर की प्रतिक्रिया!!!
    आश्चर्य है आपकी कलम से???

    उत्तर देंहटाएं
  4. उत्तर
    1. .
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      .
      नहीं संभव था न, यही तो मैं भी कह रहा हूँ देव... :)


      ...

      हटाएं
  5. आपकी किसी पोस्ट का ये सबसे छोटा शीर्षक है।हालाँकि बातें बड़ी की हैं।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. .
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      छोटे छोटे लोगों की बड़ी बड़ी बातें... :)

      धन्यवाद मित्र !


      ...

      हटाएं
  6. इतनी मैं, मैं न करते तो भी संभव था कि कहते मेरे मैं होने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं था। :)

    उत्तर देंहटाएं
  7. पिछले २ सालों की तरह इस साल भी ब्लॉग बुलेटिन पर रश्मि प्रभा जी प्रस्तुत कर रही है अवलोकन २०१३ !!
    कई भागो में छपने वाली इस ख़ास बुलेटिन के अंतर्गत आपको सन २०१३ की कुछ चुनिन्दा पोस्टो को दोबारा पढने का मौका मिलेगा !
    ब्लॉग बुलेटिन के इस खास संस्करण के अंतर्गत आज की बुलेटिन प्रतिभाओं की कमी नहीं (19) मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    उत्तर देंहटाएं

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