रविवार, 24 मार्च 2013

लीजिये, बाँट ही दी उपाधियाँ... भाई, बुरा न मानो होली है ssssss

.
.
.




सबसे पहले तो एक सूचना... आपने देख ही लिया होगा कि अब अपना नाम मैंने 'प्रवीण शाह' की बजाय 'प्रवीण' लिखा है... करना तो यह बहुत पहले से चाह रहा था पर न जाने क्यों, बार बार भूल सा जाता था... फिर रतन सिंह शेखावत जी ने लिखा जातिप्रथा को कोसने का झूठा ढकोसला क्यों ? (लिंक) जिसमें उन्होंने सवाल उठाया कि "जातिप्रथा को गरियाने वाले लोग भी अपने नाम के पीछे क्यों जातिय टाइटल चिपकाये घूमते है ? समझ से परे है !!"... तो मन किया कि सबसे पहले तो अपने पिछवाड़े खुद ही दो लात लगाई जाये... नतीजा और सबक अब यह है कि आगे से मैं 'प्रवीण' ही कहलाना पसंद करूंगा...

अब बात पिछली पोस्ट एडवांस ऑर्डर मिलने पर होली की उपाधियाँ बांट रहा हूँ... लेंगे क्या ? (लिंक) की... सबसे पहले तो एक स्वीकारोक्ति... यह मेरी एक सुविचारित तरकीब (Deliberate Ploy) थी जिसके तहत मैंने कुछ इस तरह का माहौल बनाया मानो उपाधि देने के नाम पर मैं किसी के कपड़े ही फाड़ बैठूंगा... जबकि मैं ऐसा कुछ नहीं करने वाला था... मैं सिर्फ यह चाहता था कि वही सहमति दें जिनके बारे में कुछ लिखा जा सके... यह मंतव्य कामयाब हुआ और मुझे यह बताते हुऐ खुशी हो रही है कि जिन तेरह ब्लॉगरों ने अपनी सहमति दी है वे विशाल हॄदय युक्त, उदारमना, संवाद व अभिव्यक्ति के महत्व को समझने वाले व सबसे बढ़कर स्वयं के प्रति आश्वस्त लोग हैं, जिन्हें विश्वास है कि वह किसी भी स्थिति को नियंत्रित कर सकते हैं... 

मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूँ कि मेरी इस पोस्ट से उनके यह गुण और बढ़ेंगे ही... 

मुझे लगता है कि कुछ और सहमतियाँ मुझे मिलनी चाहिये थीं, पर हो सकता है वह लोग अब मेरा ब्लॉग नहीं पढ़ते या मैं उनके स्तर का नहीं लिखता...  

खैर... शहरयार ने कहा भी है न कभी...  

किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता 
कहीं ज़मीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता
जिसे भी देखिये वो अपने आप में गुम है
जुबां मिली है मगर हमज़ुबां नहीं मिलता

 
मित्र विचारशून्य ने हिन्दी ब्लॉगिंग की मंदी का हवाला दे जितनी सहमतियाँ मिली हैं उन्हीं से काम चलाने को कहा है... और मुझे यह सलाह जंची भी है... इसलिये शुरू कर रहा हूँ उसी क्रम में, जिसमें यह सहमतियाँ मिली हैं...


संजय अनेजा :- उनका ब्लॉग 'मो सम कौन' ब्लॉगवुड के सबसे लोकप्रिय ब्लॉगों में से एक है... रोजमर्रा की जिंदगी में हास्य ढूंढते कमाल के किस्सागो हैं वह... अगर वह कहीं अपनी असहमति भी दर्ज करते हैं तो बड़ी नफासत से... जीवन का उत्सव अपनी पूरी शान से दिखता है उनके लेखन में...

तो होली पर उनके लिये तुम सम कौन सरल-सहज-निष्काम


सुज्ञ जी :- नका आभामंडल बहुत विशाल है, और अनेकों उनके भक्त-प्रशंसक हैं... वह ब्लॉगवुड में धर्म-अध्यात्म-आस्था-समर्पण के ध्वजवाहक हैं और मैं एक अदना सा संशयवादी... जाहिर है कि अनेकों बार हमारे विचार नहीं मिलते... उन्हें लगता रहा है कि मैं या तो उनका विधर्मी हूँ या विधर्मियों से मिला हुआ...पर उन्होंने हमेशा संवाद बनाये रखा है... कभी कभार जब वह यह तक कह देते हैं कि भले शोषण के बहाने हिंसा करे, अन्याय के बहाने हिंसा करे, किसी भी तरह शिकार करे या चाहे धर्म के बहाने हिंसा करे, हिंसको को मैँ हिंदु नहीं मानता. यह मेरा व्यक्तिगत अभिप्राय है और मेरा बस चले तो हिंसाचारियों को मैं भारतीय तक न मानूँ.क्योँकि अहिंसा भारतीय संस्कृति की महान परम्परा है.(लिंक) तो मुझे यह अतिवाद सा लगता है और मैं असहमति जताता हूँ... पर उनसे संवाद-प्रतिवाद करना मुझे अच्छा लगता है और यह चलता रहेगा...

तो होली के मौके पर 'भय्यू जी महाराज' की तर्ज पर सुज्ञ जी हैं ब्लॉगवुड के भैय्या-बाबा


पी. सी. गोदियाल 'परचेत' जी :- वह कार्टून, कविता, कहानी, लेख, व्यंग्य सभी विधाओं में अपना हाथ आजमाते हैं... हिन्दुत्ववादी-दक्षिणपंथी लगते हैं... 'अंधड़' में ज्यादातर बार वह बहुत धारदार होते हैं... मुझे उनका स्नेह हमेशा मिला है, बड़े भाई की तरह...

तो इस होली पर गोदियाल जी हैं हर अंधड़ पर ब्लॉगवुड की तिरछी नजर


सन्जय झा जी :- हालांकि उनका अपना ब्लॉग भी है पर उसमें उन्होंने बहुत कम लिखा है... मूलत: वह एक पाठक हैं... एक ऐसा पाठक जिसे पाकर हर ब्लॉगर अपने को धन्य समझेगा... जब मैं अपनी लंबी कहानी (लिंक) लिख रहा था... तो कई कई बार यह होता था कि मुझे लगता था कि कोई पढ़ तो रहा नहीं, सो लिखने का क्या फायदा... और अचानक संजय जी की टीप मिल जाती थी... हौसला देती हुई...

होली के मौके पर संजय जी के लिये पाठक-माईबाप तुझे प्रणाम !

अन्तर सोहिल जी :-  उनके ब्लॉगहेडर पर लिखा है, अन्तर सोहिल = Inner Beautiful.. और आप उनके आलेखों को पढ़ें तो उनकी इसी अंदरूनी सुन्दरता से रूबरू होते हैं... बिना किसी दिखावे, बनाव-श्रंगार के एकदम दिल से लिखते हैं... अपने संघर्ष के दिनों का बेहद ईमानदार और मर्मस्पर्शी वर्णन करते हैं वह... सांपला का यह ब्लॉगर मन-वचन और कर्म तीनों से अन्तर-सोहिल है...

होली के मौके पर उनके लिये तेरा अन्तर है सबसे सफेद !


रविकर जी :- दिनेश चंद्र गुप्त 'रविकर' जी ने पिछले कुछ समय से अपनी त्वरित काव्य टीपों के माध्यम से एक जबरदस्त उपस्थिति जताई है... मुझे तब बहुत आनंद आता है जब उनके राष्ट्रवाद पर कोई सवाल उठाता है और वह जवाब में आरएसएस के उन सब कैंपों को गिनाने लगते हैं जिन्हें उन्होंने अटैंड किया है और वह पद भी जिन पर वह रहे हैं... रविकर जी सब पर गहरी नजर रखते हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि उनके लिये कोई अछूत नहीं है, यह बहुत बड़ी बात है...


'काका हाथरसी' की याद दिलाते रविकर जी हैं ब्लॉगवुड-काका 


सतीश सक्सेना जी :- मैं उनका फैन हूँ... बेहद जज्बाती इंसान हैं वह... हरदिल अजीज, दोस्तों के दोस्त सतीश जी बेहद भावपूर्ण गीत रचते हैं... जितनी जल्दी वह गर्म होते हैं, ठंडा होने में उस से भी कम देर लगती है... उन्हें अलग अलग पोज-लिबास में अपनी फोटो देखना-दिखाना बहुत अच्छा लगता है... उनके लिये चंद लाइनें...

'मेरे गीत' नहीं मात्र तेरे गीत
वह तो हम सबके भी हैं, मीत
छोटी सी है  यह चाहत मेरी 
ताजिंदगी सुनता रहूँ 'मेरे गीत'

तो इस होली के मौके पर सतीश जी हैं ब्लॉगवुड का गीत-सबका मीत


शाह नवाज जी :- शाहनवाज बेहद सुलझे हुऐ ब्लॉगर हैं... अक्सर मेरे विचार उनके विचारों से मिलते हैं... वह हमारीवाणी को चलाते भी हैं शायद... उनके स्वधर्मी कुछ ब्लॉगरों के निशाने पर भी वे हमेशा रहते हैं जिनको लगता है कि शाहनवाज उनके लिये कुछ नहीं कर रहे... 'प्रेम रस' और 'छोटी सी बात' कभी आपको निराश नहीं करते...

होली पर शाहनवाज जी के लिये 'उस' का ईमानदार आशिक

'उस' का अर्थ शाहनवाज जी ही बतायें तो बेहतर...


वन्दना गुप्ता जी :- वन्दना जी बहुत अच्छी कवयित्री हैं... उन्होंने टैबू समझे जाने विषयों पर भी बड़ी निडरता से लिखा है... हालांकि एक बार दबाव के चलते उनका पोस्ट हटा देना मुझे अच्छा नहीं लगा पर स्त्री न होने के कारण मैं उन दबावों की कल्पना भी नहीं कर सकता जो उस समय वह झेल रही थीं... फिर भी वह निडरता से बोल्ड लिखना जारी रखे हैं...

तो वन्दना जी हैं ब्लॉग-दिलेर


अरविन्द मिश्र जी :- यह कोई छुपी हुई बात नहीं कि मैं उनको पसंद करता हूँ... कभी कभी मेरा उनको 'देव' संबोधित करना रचना जी को काफी खलता है... मुझे पता नहीं कि कैसे एक बार उनको लगने लगा कि मैं कोई और नहीं, अपितु 'रचना जी' ही हूँ... उनके मेरे विचार अनेकों बार एक से ही होते हैं... वह सबमें हिट हैं.. मासेज-क्लासेज दोनों में... पुरूषो-महिलाओं सभी में... अक्सर शरारत सी भी  कर बैठते हैं... सरे आम प्रणय निवेदन तक कर देते हैं ब्लॉग में... 

तो अरविन्द जी हैं ब्लॉगवुड के सलमान खान


रचना जी :- रचना जी ब्लॉगवुड नारीवाद की पुरोधा हैं और स्त्री हितों के लिये किसी भी हद तक जाकर लड़ सकती हैं... वह पिछली लड़ाईयों को भूलती नहीं कभी और अवसर मिलने पर उनका भी हवाला दे प्रहार कर देती हैं... कई बार मैं भी उनसे असहमत होता हूँ और उनसे जमकर बहस होती है... पर संवाद वे हमेशा बनाये रखती हैं... यह श्रेय भी उनको दूंगा कि उन्हें कभी यह नहीं लगा कि मैं 'अरविन्द मिश्र' हूँ... मैं चाहूँगा कि मेरी बेटियाँ रचना जी सी बनें, बड़े होकर...

होली पर रचना जी के लिये उपाधि है ब्लॉगवुड-देवि


विचार शून्य जी :- मेरी जानकारी के मुताबिक उनका नाम दीप पान्डेय है... भले ही उनके ब्लॉग का नाम विचार शून्य हो पर उनमें एक खासियत है कि किसी भी मुद्दे पर गहन विचार मंथन चल जाता है उनके ब्लॉग में... आजकल कुछ कम सक्रिय हैं... पर उनका अपनी बात कहने का अनूठा अंदाज उनकी टीपों में भी झलकता है...

तो विचारशून्य जी हैं ब्लॉगवुड-विचारदीप


शिखा गुप्ता जी :- 'स्याही के बूटे' उन्होंने फरवरी में बनाया... मुख्यत: कवितायें लिखती हैं... अच्छी लगी उनकी कवितायें... हम सभी उनको ज्यादा अच्छी तरह से तब जान पायेंगे जब वह विभिन्न मसलों पर अपने विचार टिप्पणियों के रूप में देंगी...

फिलहाल वह हैं ब्लॉग-संभावना




सोच रहा हूँ उनके लिये भी कुछ कहूँ जो पोस्ट तक आये तो... पर सहमति नहीं दी... :(


शालिनी कौशिक जी 

कभी उनकी 'महक' मिली थी
अब दिखता है 'नूतन' 'कौशल'


दिनेश पारीक जी

पढ़ आये भाई साहब
बहुत सुन्दर, आभार, आपने अपने अंतर मन भाव को शब्दों में ढाल दिया !


अली सैयद साहब 

एक लम्बे इंतजार के बाद, आखिर कार
वो भी आये हमारे दर पर, यह हमारी किस्मत है
कभी हम उनको, कभी अपने दर को, देखते हैं ।




आभार आप सभी का...
और होली की शुभकामनायें भी...












...

29 टिप्‍पणियां:

  1. .रोचक प्रस्तुति आभार आपको होली की हार्दिक शुभकामनायें शख्सियत होने की सजा भुगत रहे संजय दत्त :बस अब और नहीं . .महिला ब्लोगर्स के लिए एक नयी सौगात आज ही जुड़ें WOMAN ABOUT MAN

    उत्तर देंहटाएं
  2. मुझे लगा खाल खींच कर भुस भर देंगे इस होली में पर आपने ज़रा तकल्लुफ से काम लिया :)

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. अली सा.
      निष्प्रयोजन वाचिक हिंसा हुए जा रही है, सम्भालिए

      हटाएं
    2. रंगपर्व के सुअवसर पर इतना स्पेस तो दे ही दीजिए :)

      हटाएं
    3. खाल वाला स्पेस या भूसे वाला स्पेस ? :):)

      हटाएं
  3. "मैंने कुछ इस तरह का माहौल बनाया मानो उपाधि देने के नाम पर मैं किसी के कपड़े ही फाड़ बैठूंगा..." :)

    सर जी आपको भी होली की हार्दिक शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  4. ओह...चूक गये... :-)
    बेहतर...शुभकामनाएं...

    उत्तर देंहटाएं
  5. आज की ब्लॉग बुलेटिन होली आई रे कन्हाई पर संभल कर मेरे भाई - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  6. आप ने तो सभी को गौरवान्वित कर दिया -विशाल ह्रदय है आपका -
    दिल दरिया और जोश समन्दर
    होली की रंगारंग शुभकामनाएं!
    हाँ होली पर बजरिये आपके उन सभी का नाम सार्वजनिक देखना चाहता हूँ जिनसे मैंने सरे आम प्रणय निवेदन कर
    डाला -उन्हें सहेज तो लूं ! और होली की प्रणयी शुभकामनाएं दे दूं !
    ब्लॉग देवि जी तो मुझे भूल गयीं लगती हैं -आपके जरिये उन्हें ख़ास रंगभरी शुभकामनाएं!

    उत्तर देंहटाएं
  7. हल्की फुल्की ,त्यौहार के रंग में रंगी पोस्ट अच्छी लगी....
    सभी उपाधियाँ सटीक...

    सादर
    अनु

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत गलत बात है।

    जे मांगी ओहिके मिली होली में!
    दुश्मन के गले लगावा होली मे।

    सच्ची बात त कबो कहल जा सकेला
    गदहा के अकाश में उड़ावा होली में।

    ...होली की शुभकामनाएँ स्वीकार करें सर जी।

    उत्तर देंहटाएं

  9. सच में, मैं तो किसी धोती फाड़ धमाल की उम्मीद से था।
    पर लगता है किसी पुरुष का उम्मीद से होना आपको जचा नहीं
    आपने बड़ी शालीनता से उपाधियाँ बाटी और उतनी ही शालीनता से मैं आपको धन्यवाद देता हूँ।
    आपकी होली धमाकेदार और रंगीन रहे इसी कामना के साथ मेरी ओर से होली की शुभकामनाए स्वीकार करें।

    उत्तर देंहटाएं
  10. निकले तो हम भी आईना देखने थे, किंतु आईने की मालिकी के नाते अक्स धूँधला धूँधला सा ही उभरा.

    कैसा आभामण्डल और कैसे भक्त प्रशंसक जी? लोग कतरा कर निकल लेते है. :)आपके इस प्रमोशन से 10-20 अब शायद बन जाए,आभार!! :)

    धर्म-अध्यात्म-आस्था-समर्पण के ध्वजवाहक?.... :) आप सही कह रहे थे कि अक्सर मैं आपको समझ में ही नहीं आता :)

    वह 'कथन' अतिवाद!!! हाँ, वह अतिवाद ही है और यह मेरी दृढ धारणा या विचारधारा भी.

    मैँ आपको विधर्मी या विधर्मियों का सहयोगी नहीँ मानता, :) 'अ'धर्मी ही मानता हूँ. मुझे भी आपसे सम्वाद करना प्रिय है आप तार्किक है अतः प्रतितर्क कौशल उपार्जित करने में सहयोगी है.

    तो इस होली पर आप हैं--- "सतर्क बे-धर्मी"

    'भक्ति में शक्ति' के महापर्व होली की शुभकामनाएँ......

    उत्तर देंहटाएं
  11. बुरा ना मानो होली है, नहीं लिखते तो भी चलता क्योंकि ऐसी कोई उपाधि आपने बांटी ही नहीं :)
    पर्व की बहुत शुभकामनायें !

    उत्तर देंहटाएं
  12. आप की बेटियों को मेरी आशीष और मेरी कामना हैं उन्हे कभी भी "शब्दकोष " के शब्दों में अपने आज़ाद होने की परिभाषा को ना खोजना पड़े . आप के घर में जितने भी शब्दकोष हो उनको होली की अग्नि में समर्पित करवा दे अपनी बेटियों के हाथ से और उन्हे अपने "शब्दकोष " खुद रचने दे .
    ब्लॉग देवी की उपाधि वापस करती हूँ क्यूंकि इंसान हूँ वही रहना चाहती हूँ कुछ और सोचिये क्युकी जो ईश्वर के अस्तित्व पर विश्वास नहीं करता वो "देव" कैसे किसी को कह सकता हैं .
    होली की शुभकामना स्वीकार करे .

    उत्तर देंहटाएं
  13. जय हो …………
    होली की महिमा न्यारी
    सब पर की है रंगदारी
    खट्टे मीठे रिश्तों में
    मारी रंग भरी पिचकारी
    ब्लोगरों की महिमा न्यारी …………होली की शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत कम ही आना हो पा रहा है ब्लॉग पर इसलिए आप उपाधि बाँट रहे थे पता न था , किन्तु आज की पोस्ट देख कर लगा रहा है की होली का असली मतलब नहीं समझा आप ने :)

    कम से कम आप की पोस्ट पर होना तो वही चाहिए था जो अली जी ने कहा :)) उसके बाद " बुरा न मानो होली है " का कोई मतलब था ।

    "मैं तो 'काले' को 'काला' ही कहूँगा और 'सफेद' को 'सफेद' भी, आप की मर्जी आप मुझे जो कुछ भी कहो"

    उपाधिया आप के इस कहे से मेल नहीं खा रही है काला कहा गया यहाँ तो बस सफ़ेद ही सफ़ेद है

    और होली पर कुछ कहने के लिए सहमती की जरुरत कब से पड गई , देखिये अदा जी ने तो आप से ज्यादा हिम्मत दिखाई है ( धन्यवाद आप की पिछली पोस्ट से ही उनके पोस्ट की जानकारी मिली जहा हमें भी कुछ कहा गया है :)

    आप डर गए क्या " प्रवीण " जी ;)

    वैसे जानना चाहूंगी की डरे तो किससे ;)

    उत्तर देंहटाएं
  15. जी आपने सही समझा और 'उस' का नाम आप जानते हैं, मैं जानता हूँ और मुझे पता है कि जो जानना चाहते हैं वह भी जानते हैं। बाकियों को छोडिये!

    उत्तर देंहटाएं
  16. आपके तेवर देखकर उत्पाती उपाधियों की उम्मीद के साथ ही तेरहवाँ स्थान भी सहर्ष स्वीकारा था ...शायद ठीक से समझ नहीं पायी ...ये तो 'blog-fare' अवार्ड था :P ...कोई बात नहीं अगली होली तक उधार रहा .....होली मुबारक

    उत्तर देंहटाएं
  17. क्या प्रवीण भाई....
    अपने साथ तो वो बनी कि कुछ मसालेदार पाने के चक्कर में थे और आपने मीठी लस्सी पेश कर दी वो भी पेड़ा घोलकर और उसपर रूह अफ़ज़ा भी बिखेरकर:) मीठा अपने को बहुत पसंद है लेकिन इस मौके पर अपेक्षा(उम्मीद वाली बात पर ब्लॉगवुड विचारदीप पहले ही प्रकाश डाल गये हैं) तो कुछ तीते की ही करे बैठे थे, आपने भी बाकायदा ऐसा ही माहौल बना दिया था। खैर, सरप्राईज़ टर्न अराइइंड भी मस्त रहा।
    सदाशयता के लिये बहुत बहुत धन्यवाद। होली पर्व की आपको, परिजनों व आपके पाठकों को बहुत बहुत बधाई। अगली बार सच में खाल में भुस भरियेगा :)

    उत्तर देंहटाएं
  18. वाह !
    का बात है।

    दैहिक दैविक भौतिक तापा।
    'प्रवीण राज' नहहिं काहुहि ब्यापा।।

    हम भी अपने लिए चौदहवाँ स्थान सुरक्षित करवाए थे, लेकिन लगता है साईबर स्पेस में हमरी एप्लीकेशन गुम हो गई :):)

    उत्तर देंहटाएं
  19. holi hai so bura na mankar 'upadhi' swikar kiya.....barna, ek pathak ka mai-baap to mooltah: lekhak hi hota hai, aap jante hain......aur 'pranam' pe to boogwood me hamara-antar sohilji ke saath joint copyright hai.........

    yse, bari sadgi se aapne mana dala holi. par waqt-ki-najkta
    ko dekhte hue aise-ich thik hai..........

    holinam.

    उत्तर देंहटाएं
  20. हमें तो सभी प्रिय हैं ... बाँटी गयी उपाधियाँ भी सही हैं ...प्रवीण जी द्वारा की गयी प्रेम वर्षा में जो भी भीगा वही ठिठुरने लगा। हमें भी कभी 'उपाधियाँ' बाँटने का शौक रहा था ... लेकिन उसे जबरन छोड़ना पड़ा ... वे व्यंग्यात्मक जो बन पड़ती थीं, पास आते-आते 'अपने' ही दूर हो जाते थे।

    उत्तर देंहटाएं
  21. होली की हार्दिक शुभकामाएँ!!

    उत्तर देंहटाएं
  22. Greetings!
    If you're looking for an excellent way to convert your Blog visitors into revenue-generating customers, join the PayOffers.in Ad Network today!
    PayOffers India which is one of the fastest growing Indian Ad Network.
    Why to Join PayOffers India?
    * We Make Your Blog Into Money Making Machine.
    * Promote Campaigns With Multiple Size Banner Ads.
    * Top Paying and High Quality Campaigns/Offers...
    * Earn Daily & Get Paid Weekly Through check,Bank deposit.
    * 24/7, 365 Days Online Customer Support.
    Click here and join now the PayOffers India Ad Network for free:
    http://payoffers.co.in/join.php?pid=21454
    For any other queries please mail us at Neha@PayOffers.co.in
    With Regards
    Neha K
    Sr.Manager Business Development
    Neha@PayOffers.co.in
    www.payoffers.co.in
    Safe Unsubscribe, You are receiving this relationship message, if you don't want to receive in the future, Reply to Unsubscribe@PayOffers.co.in Unsubscribe

    उत्तर देंहटाएं
  23. ये पिछली होली थी? इस बार नहीं हुआ यह?

    उत्तर देंहटाएं

मेरे इस आलेख को पढ़ कर ही यदि आपके मन में कोई विचार उत्पन्न हुऐ हैं तो कृपया उन्हें 'नेकी कर दरिया में डाल' की तर्ज पर ही यहाँ टिप्पणी रूप में दर्ज करें... इस टिप्पणी के पीछे कोई अन्य छिपा हुआ मंतव्य न रखें, आप इसे उधार में मुझे दी गयी टिप्पणी न समझें, प्रतिउत्तर में आपके ब्लॉग पर टिप्पणी करने की किसी बाध्यता को मैं नहीं मानता व मुझसे या किसी अन्य ब्लॉगर से भी ऐसी अपेक्षा रखना न तो नैतिक है न उचित ही !... मैं किसी अन्य के लिखे आलेखों पर भी इसी नियम व भावना के तहत टिपियाता हूँ !

असहमति को इस ब्लॉग पर पूरा सम्मान दिया जाता है, आप मेरे किसी भी विचार का खुल कर विरोध या समर्थन कर सकते हैं, परंतु अशिष्ट या अश्लील भाषा यु्क्त अथवा किसी के भी ऊपर व्यक्तिगत आक्षेपयुक्त टिप्पणियाँ कृपया यहाँ न दें... आप अपनी टिप्पणियाँ English, हिन्दी, रोमन में लिखी हिन्दी, हिंग्लिश आदि किसी भी तरीके से लिख सकते हैं... नहीं कुछ लिखना चाहते हैं तो भी चलेगा... आपके आने का शुक्रिया... आते रहियेगा भविष्य में भी... आभार!