शुक्रवार, 15 मार्च 2013

एडवांस ऑर्डर मिलने पर होली की उपाधियाँ बांट रहा हूँ... लेंगे क्या ?

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होली 'त्यौहारों का त्यौहार' है... खूब मौज-मस्ती होती है इस दिन...न कोई बड़ा और न कोई छोटा... आप हर किसी के गले मिलते हैं, उसे रंगों से सराबोर करते हैं... और उससे वह बात भी कह देते हैं जो आप किसी न किसी लिहाज के चलते साल भर नहीं कह पाते... 

होली पर 'उपाधियाँ' बाँटने का दौर स्वप्न मंजूषा शैल 'अदा' (link) जी  शुरू कर ही चुकी हैं।(link)... 

अरविन्द मिश्र जी बता रहे हैं कि कई और जगहों से भी उपाधियाँ बंटेंगी... वह लिखते हैं होली की उपाधि देने की परम्परा बड़ी पुरानी है, और यह पढ़े लिखे लोगों का एक शगल है -होली के अवसर पर हंसी मजाक करने का बस -इसे दिल पर लेने की बात ही नहीं होनी चाहिए .मगर यह भी सही है कि प्रायः उपाधि देने वाले का निजी मूल्यांकन किसी के बारे में काफी भावनिष्ठ हो जाता है -उपाधि पाने वाले को चोट सी लगती है कि अरे लोग मेरे बारे में ऐसा सोचते हैं,जबकि मैं तो ऐसा नहीं , लोग कहें भले न कई बार उपाधियाँ लोगों को चुभ जाती हैं -मगर फिर भी उचित तो यही है कि इन्हें गंभीरता से न लिया जाय ,बस हल्के फुल्के ही लिया जाय . अभी ब्लॉग जगत में कुछ और उपाधियाँ नामचीन ब्लागरों से और आने वाली हैं ऐसी अन्दर की खबर मुझे मिली है और मैं मानसिक रूप से खुद को उन्हें हंसी खुशी स्वीकार करने के लिए तैयार कर रहा हूँ और आपसे भी यही गुजारिश है .वैसे कभी कभी दूसरों की निगाहों से खुद का मूल्यांकन जरुर करना चाहिए! (link)

उपाधि देने के दौरान उपाधि देने वाला एक तरह से आपकी खिंचाई सी करता है... कभी आपके किसी कथन या कृत्य को exaggerate कर के, या आपकी किसी विशेषता को हाईलाइट कर, या आपकी किसी आदत का मजाक उड़ा,  या आपके बारे में एक अनूठी सी राय जाहिर कर... तरीका कोई भी हो, मूल भाव यही रहता है कि आप थोड़ा सा चिढ़ें, थोड़ा खीजें, थोड़ा दाँत पीसें, थोड़ा शर्मा जायें, थोड़ा खिसियायें आदि आदि... पर उपाधियाँ किसी को भी उसके व्यक्तित्व के अनजाने अनछुऐ पहलुओं के बारे में भी बता जाती हैं कभी कभी...

अपना भी आपमें से कुछ को उपाधि देने का मन है... पर थोड़ा फर्क है मेरी दी गयी उपाधियों में... मैं लोकतंत्रीकरण सा कर रहा हूँ इस प्रक्रिया का...

पहला-    उपाधि केवल उसी को दी जायेगी जो अपनी टीप के माध्यम से अपनी रजामंदी यानी सहमति देगा मुझे !

दूसरा- कम से कम चौबीस ब्लॉगरों की रजामंदी मिलने पर ही मैं यह काम करूंगा ।

तीसरा- मैं अपनी दी गयी किसी उपाधि को एक्सप्लेन नहीं करूंगा... आप खीजें, गुस्सायें, मुझ से नाराज हो जायें, हमेशा के लिये कुट्टी कर लें... जो भी करें,आपकी मर्जी... मेरी बला से... हाँ आप अपने जवाब में मुझे जो चाहे कहें ( अपने को कोई फर्क नहीं पड़ता, आज तक कभी पड़ा क्या ? )...

मैं पढ़ता लगभग सभी को हूँ... यह बात अलग है कि अपनी कुछ मजबूरियों के चलते ज्यादा जगह टीप नहीं पाता... इसलिये कोई भी अपने लिये उपाधि आर्डर कर सकता है...

ऑर्डर २१ मार्च, २०१३ को रात्रि ग्यारह बजे तक ही लिये जायेंगे... और तेईस मार्च की पोस्ट में उपाधियाँ बाँटी जायेंगी...


तो,
सोच क्या रहे हैं...
अरे रे,
रूकिये जरा...
सोच ही लीजिये...
बार बार और कई बार
झेल पायेंगे क्या ?


... ;)







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28 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
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      शालिनी जी,

      आपकी टीप स्पष्ट नहीं है, आपकी रजामंदी है न ?


      ...

      हटाएं
  2. उत्तर
    1. हमारा निवेदन है, आप मुझे "महामना" या "अहिंसा के आक्रमक प्रचारक" से भिन्न, मौलिक उपाधि प्रदान करें.....

      उसी पोस्ट की टिप्पणी मेँ प्रतिदान स्वरूप हमेँ आपको भी उपाधि देने अवसर प्रदान करें

      मुझे प्रदत्त उपाधि मेँ अन्य पाठाकों को सुधार, सँशोधन, नई दृष्टि, तीव्रतर,ज्वलनशील बनाने का पूर्ण अधिकार रहेगा.

      हटाएं
  3. शाह जी , सीजन ख़त्म हो जाने की वजह से रजाई तो मैंने बंद कर दी बक्से में किन्तु हाँ , मंदी की जहां तक बात है तो मंदी ही मंदी है । :)

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  4. रजा मंदी

    jab aap rajaa me mandi khud hi jod dae rahey haen to kament 25 aanae sae rahey

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    उत्तर
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      हाँ रचना जी,

      आपकी बात में दम है... १९८ लोग पढ़ चुके हैं पर रजामंदी केवल पाँच ने दी... :(

      सहमति भी जोड़ दिया है... अब शायद कुछ बात बने... :)


      ...

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  5. सह मति

    yae to kuchh baat bani nahin

    mati bhrm hi hotii haen seh mati

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  6. म्हारा भी कोये नाम काढ द्यो जी
    रजामंदी+सहमति

    प्रणाम

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  7. खैर नहीं है किसी की-

    बढ़िया है आदरणीय--
    आभार आपका || Y

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  8. हम भी तैयार है! रज़ामंदी पूरी तरह से....

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  9. हाँ
    मगर आपने तो मियाँ की जूती मियाँ के सर मार दी है -दमित इच्छाओं ......
    अब ये कैसे ? इच्छाओं के खुल्लमखुल्ला प्रदर्शन के सरताज कहते तो कुछ बात होती :-)

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    उत्तर
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      सर जी,

      सुधार कर दिया गया है !


      ...

      हटाएं
    2. दमित quality compromise की सम्भावनाएँ!!!! अच्छा है:)

      हटाएं
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      सुज्ञ जी,

      ... :) आप भी न, कब समझ पायेंगे आप मुझे...



      ...

      हटाएं
    4. ..... :) जब आप मुझे यथार्थ स्वरूप समझ लेँगे..... :)

      हटाएं
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    अब तक का लेखा जोखा

    पोस्ट लगे हुऐ २४ घंटे
    कुल २६४ pageviews
    और सहमति मात्र बारह

    Come on guys (& gals also)... be a good sport !


    ...

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  11. बहुत सुद्नर आभार आपने अपने अंतर मन भाव को शब्दों में ढाल दिया
    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    एक शाम तो उधार दो

    आप भी मेरे ब्लाग का अनुसरण करे

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  12. हिंदी ब्लॉग्गिंग में मंदी का दौर है अतः बारह की रजामंदी से ही काम चलाइए। शाह जी मेरी सहमती को बोनस मानकर अपना कार्य शुरू कीजिए ।

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  13. ओह ! तेरहवाँ नम्बर मेरा है ...कोई बात नहीं हम चलायेगें भी और जरूरत पड़ी तो दौड़ा भी लेगें .
    यूँ तो ब्लॉग की दुनिया अपने लिए अभी बहुत नई है ...और हम आँखें फाड़ कर उधर से उधर दौड़ लगा रहे थे ...आपने पुकारा('सुनिए मेरी भी'...आप ही कह रहे हैं ना) तो सोचा आपकी भी सुन ही ली जाये ..वैसे भी ब्याह के बाद से सब की सुन ही तो रहे हैं ...माँ ने कितना समझाया था "बेलन चलाना सीख ले " ...पर जाने क्यूँ हमें लगा वो हमसे रोटी बनवाने की फिराक में हैं .......खाई हमारी छोड़िये ....हाँ ..तो आप उपाधि मुफ़्त देगें ना ......फिर ठीक है ...(साथ में कुछ free मिलेगा क्या)
    एक नजर के इंतज़ार में ...स्याही के बूटे ....

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  14. मैंने इसे गूगल पर प्लस वन किया था वो गोल दिख रहा है सो फिर से कर रहा हूं :)

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