गुरुवार, 21 फ़रवरी 2013

' बुढ्ढा मर जाये, तो अच्छा है '... देखना न भूलियेगा यह कॉमेडी, वह भी प्राइम टाइम पर

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सचमुच इसका जवाब नहीं, 

कल यों ही न्यूज चैनल सर्फ कर रहा था, अचानक एक चैनल पर जोर जोर से बोलते दीपक चौरसिया दिखे, शायद यह चैनल 'इंडिया न्यूज' उन्होंने कुछ ही दिन पहले ज्वायन किया है... एक चर्चा चल रही थी और पैनल में थे पत्रकार अशोक वानखेड़े, अन्ना की सहयोगी एथलीट सुनीता गोदारा, चैनल के पॉलिटिकल एडीटर मनीष अवस्थी, बीजेपी नेत्री आरती मेहरा, हमारा कांग्रेस डॉट कॉम के संजय झा, पूर्व में अन्ना का ब्लॉग चलाने वाले राजू पारूलेकर और आम आदमी पार्टी के संजय सिंह... 

उस गर्मागर्म बहस का मुद्दा था स्वामी अग्निवेश का भय़्यू जी महाराज समर्थित आरोप कि टीम अन्ना के कुछ सदस्य यह चाहते थे कि आमरण अनशन के दौरान किसी भी तरह अन्ना का बलिदान हो जाये, तो क्रान्ति आ जायेगी... जाहिर है उस गर्मागर्म बहस के दौरान आरोप थे तो प्रत्यारोप भी थे... ' बुढ्ढा मर जाये, तो अच्छा है ' यह डॉयलॉग भी बोला गया... क्यों, किसके द्वारा, किसके लिये और किसके हवाले से, यह आपको अभी बताना आपके साथ ज्यादती हो जायेगी... :)

बहरहाल चैनल के अनुसार आज रात आठ बजे स्वामी अग्निवेश, भय्यू जी महाराज, अरविन्द केजरीवाल और कुमार विश्वास का आमना सामना कराया जायेगा... जंतर मंतर पर, वह भी लाईव... लाई डिटेक्टर टेस्ट भी होने की बात कही जा रही है...

आपको बताने का मकसद सिर्फ इतना है कि आप भी देख लें... चयन कर खबर लगाने की नीति के चलते अन्य चैनल इस 'महाकॉमेडी' को इग्नोर मार रहे हैं...

देखना न भूलियेगा... 

It can't get better and funnier than this !

... :)

आभार !


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5 टिप्‍पणियां:

  1. मुझे तो उससे बड़ी कामेडी ये लग रही है की आप इण्डिया टीवी जैसे न्यूज ???? चैनल को देखते है :))))

    मै तो उसे एडल्ट टीवी कहती थी चैनल बदलते समय पहले कभी सामने आ जाता है तो उस पर दिख रहा कार्यक्रम सेक्स , भुत, रहस्य, क़त्ल, राज जैसे ही शब्द सुनाई देते थे , अब तो वो गलती से भी नहीं लगता है ।

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      अंशुमाला जी,

      पोस्ट दोबारा ध्यान से पढ़िये... रजत शर्मा जी वाले इन्डिया टीवी की बात नहीं कर रहा मैं... यह 'इन्डिया न्यूज' है... जो दीपक चौरसिया जी के नेतृत्व में शायद हाल-फिलहाल लॉन्च/रिलॉन्च हुआ है...



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    2. ये भी तो हंसने वाली ही बात है की ऐसे चैनलो को देखा जाये जिसका नाम तक सभी को पता न हो जिसकी खबर ही टी आर पी के लिए हो और उसका मालिक इतना महँ व्यक्ति हो वैसे सोच रही हूँ जिस पर व्यंग्य लिखने के बाद रात में फिर से उसे देखा जाये , उसे क्या कहते है :)

      वैसे ये चैनल मुझे मिला नहीं ।

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  2. गांधी जी को मारने से पहले भी यही सोचा था कि बुड्ढा मर जाए तो अच्छा लेकिन हुआ यह अच्छाई रास दूसरों को आ गई और मारने वाले हमेशा के लिए दाग़दार होकर रह गए। यहां बुड्ढे तो बहुत मर चुके हैं लेकिन क्रांति नहीं आई क्योंकि देश के अधिकतर लोग अनुशासन का जीवन जीने के लिए तैयार नहीं हैं। न वे अपने धर्म का अनुशासन मानते हैं और न ही संविधान का। इसीलिए ठोकरें इनका मुक़ददर हैं, खा रहे हैं और खाएंगे। कामचोरी और बेईमानी यहां अमीर ग़रीब सब कर रहे हैं। दूध के धुलों को यहां पब्लिक जिताती ही नहीं।

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    ताजा अपडेट :-

    अपने वादे के मुताबिक दीपक चौरसिया जंतर मंतर पहुंचे व लाईव बहस का इंतजाम भी किया... टेलीविजन पर स्वामी अग्निवेश व भय्यू जी महाराज भी दीपक चौरसिया से बात करते दिखे... पर अरविंद केजरीवाल, कुमार विश्वास या आम आदमी पार्टी से कोई और नहीं पहुंचा...

    इस तरह इस प्रहसन के सजीव प्रचारण से वंचित रहे हम... :(

    हाँ यहाँ पर यह भी बताना उचित रहेगा कि आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता संजय सिंह जो कल चैनल पर लाइव बहस में जंतर मंतर पर स्वामी अग्निवेश व भय्यू जी महाराज के आने पर अरविंद केजरीवाल व कुमार विश्वास को लेकर आने का सरेआम वादा कर गये थे... बाद में या तो वादे से मुकर गये या वह इस प्रहसन को बड़े दर्शक वर्ग के सामने ही दिखाना चाहते हैं, उन्होंने लिखा है कि "यह बहस किसी टीवी चैनल की टीआरपी के लिए नहीं, देश और लोकतंत्र के भविष्य के लिए बहुत जरूरी है। आप इस बहस को आयोजित कीजिए हम इसमें शामिल होने को तैयार हैं। पर ध्यान रखिए कि यह मुद्दा सिर्फ इंडिया न्यूज का नहीं। दीपक चौरसिया की यह पहल सिर्फ इंडिया न्यूज के लिए नहीं बल्कि देश के लिए होनी चाहिए। इसमें सभी टीवी चैनल्स को उसे प्रसारित करने के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए। ऐसे में अगर दीपक चौरसिया उसकी एंकरिंग करेंगे तो कोई दूसरा चैनल इसमें दिलचस्पी नहीं लेगा। इसलिए, इसकी एंकरिंग देश के किसी नामी गिरामी, निष्ठावान व्यक्ति से करायी जानी चाहिए। यह बहस जंतर-मंतर पर आम जनता की मौजूदगी में हो और 15-20 दिन तक इसका व्यापक प्रचार हो ताकि जनता को समय रहते सूचना मिल सके।"

    आप संजय सिंह जी के दीपक चौरसिया को लिखे खुले पत्र को यहाँ पढ़ सकते हैं:-

    हिम्‍मत है, तो पूरे देश के सामने आर-पार की बहस करें:दीपक चौरसिया को देशहित में खुली बहस करने की चुनौती (Link)...

    आगे देखते हैं कि क्या होता है, आप अनुमान लगायेंगे क्या ?... :)



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