शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2013

केवल आज के दौर में पैदा हो जाने से ही आप आज के इंसान नहीं हो जाते... यह भी हो सकता है कि समझ और विवेक के स्तर पर आप आज भी गुफाओं में वास कर रहे हों... चैक करिये जरा...

.
.
.



कुछ दिनों पहले यहाँ पर  यह पढ़ा...
मुझे लगा कि आपसे साझा करूँ...
बिना अपनी तरफ से कुछ भी जोड़े... :)

लेखक लिखते हैं...


आज के समय में पैदा हो जाने मात्र से कोई मनुष्य समय के साथ नहीं आ जाता, मानव जाति के ऐतिहासिक ज्ञान, विज्ञान व तकनीकि द्वारा प्रदत्त सुविधाओं का उपभोग करना सीख कर ही वह आधुनिक नहीं हो जाता। दरअसल वह सही अर्थों में तभी आधुनिक हो सकता है, तभी अपने समय के साथ हो सकता है जब वह अपने ज्ञान, समझ और विवेक के स्तर को विकसित करके उसे संपूर्ण मानव जाति के ज्ञान, समझ और विवेक के अद्यतन स्तर तक नहीं ले आता।


उन्होंने एक कैलेंडर भी दिया है... जो इस प्रकार है...



यदि किसी मनुष्य को प्रकृति की सामान्य शक्तियां रहस्यमयी और चमत्कारी लगती हैं,
तो यह समझा जा सकता है कि वह आदिम युग में यानि लाखों वर्ष पूर्व के समय में अवस्थित है।

यदि ये शक्तियां उसके मस्तिष्क में अलौकिक देव-शक्तियों के रूप में प्रतिबिंबित होती हैं जिन्हें खुश करके नियंत्रित किया जा सकता है,
तो वह दसियों हजार साल पहले के समय में अवस्थित है।

जो मनुष्य इस तरह से सोचता है कि इस अनोखी और विराट सृष्टि की नियामक एवं रचयिता एक अलौकिक दिव्य शक्ति है जिसकी इच्छानुसार दुनिया का कार्य-व्यापार चल रहा है,
तो यह कहा जा सकता है कि वह समय के सापेक्ष चार-पांच हजार साल पहले उत्तर-वैदिक काल में अवस्थित है।

यदि कोई मनुष्य इस अलौकिक शक्ति के विचार में संदेह करता है और दुखों से मुक्ति हेतु, यथास्थिति बनाए रखते हुए अपने आत्मिक आचरण की शुद्धि वाले विचार से आकर्षित होता है,
तो उसे बुद्ध-ईसा के काल यानि दो-ढ़ाई हजार साल पहले के समय मे अवस्थित माना जा सकता है।

यदि वह चीज़ों के पारंपरिक ज्ञान और प्रयोग से संतुष्ट नहीं है और उनमें नये नियम और संभावनाएं खोजने की प्रवृति रखता है और ’ऐसा ही क्यों है’ के नज़रिये से सोचने लगा है,
तो मान लीजिये वह सोलहवी शताब्दी तक आ पहुंचा है।

यदि वह प्रकृति के सुव्यवस्थित ज्ञान मतलब विज्ञान को आत्त्मसात करके अपना वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित कर चुका है, 
तो वह अठारहवीं शताब्दी में पहुंच गया है।

और इसी विकसित वैज्ञानिक दृष्टिकोण से वह जीव विकासवाद और प्राचीन समाज के क्रमिक विकास के अध्ययन और निष्कर्षों को आत्मसात करने की अवस्थाओं मे है, 
तो वह १५० साल पहले तक पहुंच गया है।

यदि वह दर्शन के क्षेत्र में द्वंदात्मक और एतिहासिक भौतिकवाद के सिद्धांतों और निष्कर्षों को आत्मसात करके अपना एक द्वंदवादी विश्वदृष्टिकोण निर्मित कर चुका है, 

तो यक़ीन मानिए वह १००-१२५ साल पूर्व से आधुनिक समय के अंतराल में पहुंच गया है और समझ और विवेक के मुआमले में लगभग समय के साथ चल रहा है।


तो मित्रों, ऊपर दिये कैलेंडर को देखें... अपनी समझ, विवेक व आस्थाओं का उसके अनुसार आकलन करें और यदि सही समझें तो बतायें कि आप अपने को कहाँ खड़ा पाते हैं... क्या यह सही नहीं कि हम में से अधिकाँश आज भी गुफावासी हैं... ;)



...



____________________________________________________________

साभार समय अविराम जिनकी पोस्ट अपने समय के साथ होना ने मुझे यह सवाल उछालने को मजबूर सा कर दिया।

____________________________________________________________





...

10 टिप्‍पणियां:

  1. वैसे मै पहले से भी अपने आप को आधुनिक नहीं कहती हूँ , अब देखती हूँ की इस कैलेण्डर के हिसाब से कहा हूँ :)



    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. mai to abhi us yug mai hu jaha se is sthal par pratham manav ka janm hone ke kuchh din bad mera janm hua hai.

      हटाएं
  2. इन ज्ञानी महाशय ने यह नहीं बताया कि जो सत्यता को ही नकार दे, कुतर्कों के बलपर कोर्ट में एक निर्दोष को दोषी करार देकर सजा दिलवा दे तो वह कौन से युग में जी रहा है। वैसे अभी यह पढ़कर मुझे एक सज्जन मित्र याद आ रहे है जिन्होंने एक बार ऐसे ही रामायण पर उठी बहस में यह शानदार तर्क दिया था कि रावण का असली नाम रावन नहीं बल्कि राघवन था, उत्तरभारतीयों ने उसके नाम की ऐसे-तैसी कर दी :)

    उत्तर देंहटाएं
  3. ...और जो यह समझे कि नारी बस नारी है और नर केवल नर है. जैसा कि साइंस कहती है, वह आधुनिक है .

    ...और जो नास्तिक हो कर भी अपनी माँ के साथ रिश्ते की पवित्रता वैसे ही निभाये जैसे कि धर्म बताये, वह बस कन्फ़्यूज़्ड है.

    ऐसे कन्फ़्यूज़्ड पीपुल्‍स के लिये भी आपके कैलेन्डर में कोई जगह होनी चाहिये.

    उत्तर देंहटाएं
  4. प्रभावशाली ,
    जारी रहें।

    शुभकामना !!!

    आर्यावर्त
    आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को editor.aaryaavart@gmail.com पर मेल करें।

    उत्तर देंहटाएं
  5. सादर नमन ।।
    बढ़िया है -
    शुभकामनायें- ||

    उत्तर देंहटाएं
  6. We live in a time where we can find people living from stone-age till modern age. Sometime I fill that I live in multiple ages, sometime in modern sometime in 18th century!

    उत्तर देंहटाएं
  7. इस हिसाब तो हम काफी आगे के हैं :-)

    उत्तर देंहटाएं

मेरे इस आलेख को पढ़ कर ही यदि आपके मन में कोई विचार उत्पन्न हुऐ हैं तो कृपया उन्हें 'नेकी कर दरिया में डाल' की तर्ज पर ही यहाँ टिप्पणी रूप में दर्ज करें... इस टिप्पणी के पीछे कोई अन्य छिपा हुआ मंतव्य न रखें, आप इसे उधार में मुझे दी गयी टिप्पणी न समझें, प्रतिउत्तर में आपके ब्लॉग पर टिप्पणी करने की किसी बाध्यता को मैं नहीं मानता व मुझसे या किसी अन्य ब्लॉगर से भी ऐसी अपेक्षा रखना न तो नैतिक है न उचित ही !... मैं किसी अन्य के लिखे आलेखों पर भी इसी नियम व भावना के तहत टिपियाता हूँ !

असहमति को इस ब्लॉग पर पूरा सम्मान दिया जाता है, आप मेरे किसी भी विचार का खुल कर विरोध या समर्थन कर सकते हैं, परंतु अशिष्ट या अश्लील भाषा यु्क्त अथवा किसी के भी ऊपर व्यक्तिगत आक्षेपयुक्त टिप्पणियाँ कृपया यहाँ न दें... आप अपनी टिप्पणियाँ English, हिन्दी, रोमन में लिखी हिन्दी, हिंग्लिश आदि किसी भी तरीके से लिख सकते हैं... नहीं कुछ लिखना चाहते हैं तो भी चलेगा... आपके आने का शुक्रिया... आते रहियेगा भविष्य में भी... आभार!