सोमवार, 4 फ़रवरी 2013

धर्म का मजाक और बेवकूफी का सार्वजनिक उत्सव... मेरा कमेंट वहाँ पर !

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एक पोस्ट है यहाँ पर...

http://www.bharatyogi.net/2013/02/blog-post.html

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महाकुंभ में इन दिनों एक पत्थर पूरे मेलें में सुर्खियां बटोर रहा है। इस अद्भुत पत्थर पर प्रभु राम का नाम भी लिखा गया है।


अदभुत
शेयर करो हिन्दुस्तानी भाइयो

महाकुंभ में इन दिनों एक पत्थर पूरे मेलें में सुर्खियां बटोर रहा है।
इसे लाने वाले महात्मा की मानें तो यह वही पत्थर है, जिन्हें समुद्र पर सेतु बनाने के लिए भगवान राम की सेना ने इस्तेमाल किया गया था।
कुंभ नगरी के जूना अखाड़े में एक बड़े से कुंड में यह विशेष पत्थर रखा गया है। कुंड में पत्थर डालने पर वह डूबता नहीं, बल्कि फूल की तरह तैरने लगता हैं। भक्तों को यकीन है कि इसके पीछे भगवान राम की लीला है।
जूना अखाड़ा में रखे इस पत्थर को देखने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी है।
हर रोज़ सैंकड़ों लोग इस विशेष पत्थर को देखने के लिए पहुँच रहें है।
मंदिर के महंत की मानें तों यह वही पत्थर जिस का इस्तेमाल नल और नील ने प्रभु राम के आदेश के बाद सेतु निर्माण के लिए किया था। फिलहाल इस पत्थर को एक बड़े से बर्तन में रखा गया है।
बर्तन में पानी भरा हुआ है और उस पानी में यह पत्थर आसानी से तैर रहा है और इस अद्भुत पत्थर पर प्रभु राम का नाम भी लिखा गया है।
महंत हरि गिरि महाराज का कहना है कि इस पत्थर को उन के गुरु के गुरु, अपने गुरु से कई सौ साल पहले लेकर आए और अब यह जूना अखाड़े की संपत्ति है।
अगर इस बड़े से पत्थर को पानी से बाहर निकाला जाए, तब इस के असली वजन का एहसास होता है।
करीब 25 किलो वजन का यह पत्थर पानी में डालते ही तैरने लगता है। हर दिन इस अद्भुत पत्थर को देखने के लिए भक्त आ रहे है। पानी में तैरने वाली नाव की तरह तैर रहे इस पत्थर को जूना अखाड़े के ठीक द्वार पर लगाया गया है। राम नाम के इस पत्थर को लोग चमत्कार के रूप में देख रहे हैं।
पत्थर को देखने के साथ ही कई लोग उस पर पैसे भी चढ़ा रहे हैं। कई श्रद्धालु इस पत्थर की पूजा भी कर रहे हैं। कौतूहल वश इसे छूते हैं और डूबाने की कोशिश भी करते हैं लेकिन पत्थर बर्तन के तल में जाकर तत्काल फिर ऊपर आ जाता है।
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मैंने कमेंट भी दिया है वहाँ पर, पर शायद मॉडरेशन { ???... :) } के चलते न छपे...
इसलिये यहाँ पर भी...

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धर्म का मजाक उड़ाया जा रहा है यहाँ... यह बेवकूफी का सार्वजनिक उत्सव है... साफ दिख रहा है कि यह Pumice Stone है जो तैरता ही है... क्यों और कैसे, देखिये यहाँ पर...

http://humantouchofchemistry.com/why-do-pumice-stones-float-in-water.htm


और कभी कभी तो तैरते हुऐ द्वीप भी दिखे हैं... देखिये...




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8 टिप्‍पणियां:

  1. आस्था और अंध विश्वास के बिच एक बड़ी महीन लकीर होती है लोगो को उसे पार करते जरा भी देर नहीं लगती है , अफसोस तब ज्यादा होता है जब पढ़े लिखे समझदार लोग ये करते है ।

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  2. प्रभावशाली ,
    जारी रहें।

    शुभकामना !!!

    आर्यावर्त
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  3. bhaiji aapne kha to shi he pr kya ye jruri he ki wo pumice stone hi he hr baat ke do mtlb hote hen ab dekhna ye he ki konsa shi he wese aapne jo jankari di uske liye aapka dhnyewad or mene aapka comnt chaap diya he

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  4. यही वे ढोंग हैं जिनसे धर्म का उदात्त स्वरुप दूषित होता है -धर्म मनुष्य के परित्राण के लिए हैं न कि अंधविश्वास के गहन कूप में ले जाने का -भर्त्सना योग्य कृत्य -मैं एक बार रामेश्वर जब गया था तो ऐसे पत्थर वहां देखे थे -वे काफी पोरस होते हैं और भौतिकी के नियमों का ही अनुसरण करते हैं जिसमें कोई चमत्कार नहीं होता!

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  5. agree with you praveen ji , on the fact that these people fool people.

    it is also a fact that they are able to fool people because the persons getting fooled are foolish enough to begin with and are willing to get fooled.

    anyway - nice links about the pumice - i did not know this. thanks for sharing :)

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