सोमवार, 10 दिसंबर 2012

वह दो रहस्यमय आदमी !

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गताँक से आगे...



अब बहुत सी घटनायें बेहद तेजी से घटीं...

उनमें से जो सबसे महत्वपूर्ण थीं वह यह हैं...

* विश्व के तमाम देशों की साझेदारी वाली एक कंपनी का गठन हुआ जिसने तेल व गैस की खोज के लिये बहुत बड़े पैमाने पर दुनिया के तमाम हिस्सों उत्तरी व दक्षिणी ध्रुव, पर्वतों की घाटियों व गहरे समुद्र में भी खुदाई करना शुरू कर दिया।

* एक नयी बहुराष्ट्रीय कंपनी का उदय हुआ जो केवल स्वास्थ्य जाँच का काम करती थी... इस कंपनी ने बहुत ही सस्ते दामों में हेल्थ चेकअप करना शुरू किया... सबसे विशेष बात यह थी कि समाज के प्रतिष्ठित लोगों के चेकअप कंपनी मुफ्त करती थी... 

* शिखरवार्ता में शामिल उन तीस में से एक की मौत दिमाग की रक्तवाहिनियाँ फटने के कारण हुऐ रक्त स्राव से हुई तथा एक का सिर मोबाइल पर बात करते करते अचानक हुऐ एक धमाके में उड़ गया... बताया गया कि बम मोबाइल में था... दोनों ही मामलों में पूरी दुनिया के सहयोग से सत्ता का सहज हस्तांतरण हो गया उन दोनों के उत्तराधिकारियों के हाथ...




और वह दो रहस्यमय आदमी


दुनिया के हर हिस्से में दो रहस्यमय आदमी लोगों से मिलने उनके आफिस, घर, कॉलेज या खेल के मैदानों में जाते थे... और हर जगह लगभग यही बातें होतीं थी..

" मिस्टर वंडरकिड, हमें राष्ट्रपति ने भेजा है और यह है हमारा अथॉराइजेशन, हमें अभी और अकेले में आपसे कुछ बातें करनी हैं "

आइये मेरे कमरे में चलते हैं वंडरकिड बोला... कमरे में जाते ही उन दोनों ने खिडकियों के परदे गिरा दिये और दरवाजा भीतर से बोल्ट कर दिया... उनमें से एक ने लैपटॉप खोला और एक छोटी सी फिल्म वंडरकिड को दिखाई... फिल्म मिशन-सर्वाइवल ऑफ द रेस के बारे में थी... वंडरकिड की आँखें मानो हैरानी से फटी जा रही थीं...

" मिस्टर वंडरकिड, मिशन के हिसाब से आप एक ऐसे आदमी हैं जिनका बचे रहने से मानव सभ्यता को अपने आगे के सफर में आसानी होगी... हमने यह भी पता कर लिया है कि आपको कोई भी आनुवांशिक, मानसिक व शारीरिक बीमारी नहीं है और न ही आपके शरीर में कोई असाध्य संक्रमण है... आपको मिशन के बारे में बता दिया गया है... अब मैं कैमरा निकालने जा रहा हूँ ताकि आपकी सूचित सम्मति (Informed Consent) ली व रिकॉर्ड की जा सके..."

उनमें से एक ने कैमरा ऑन किया व वंडरकिड पर फोकस किया...  दूसरे ने वंडरकिड को सामने रखे लैपटॉप से कुछ जोर से बोल कर पढ़ने को कहा... वंडरकिड के पूरा पढ़ने के बाद दूसरे आदमी ने उससे पूछा " क्या आप सब कुछ जानते-समझते हुऐ मिशन सर्वाइवल ऑफ द रेस का हिस्सा बनने को तैयार हो ?"

"मैं सब कुछ जानते-समझते हुऐ मिशन-सर्वाइवल ऑफ द रेस का हिस्सा बनने को तैयार हूँ" जोर जोर से बोल दो बार दोहराया वंडरकिड ने... पहला आदमी कैमरे से यह सब रिकॉर्ड कर रहा था, रिकार्डिंग पूरी होने के बाद भी उसने कैमरे का फोकस वंडरकिड के चेहरे पर ही रखा व तीन बटन एक साथ दबाये... कैमरे के लेंस के ठीक ऊपर से नीले-हरे रंग की किरणें निकल वंडरकिड के माथे पर पड़ीं, उसे कुछ महसूस नहीं हुआ... 

वह दोनों मुस्कुराते हुऐ कमरे से बाहर निकले... वंडरकिड ने मिशन का हिस्सा बनने की रजामंदी जाहिर की थी... उन नीली-हरी किरणों के चलते उसे पिछले दो घंटे व आने वाले आधे घंटे में हुआ कुछ भी याद नहीं रहने वाला था... यह कुछ इस तरह का था मानो उसकी जिंदगी में यह ढाई घंटे घटे ही नहीं...

यह सूचित सम्मति तकरीबन दो लाख लोगों से लेने का लक्ष्य था...




और अचानक ही


और अचानक ही मुझे एजेंसी से बुलावा आया एक दिन... हर हाल में तुरंत पहुंचना था मुझे... पहुंचने पर पता चला कि अल्फा को गंभीर हॄदयाघात हुआ था... अपने खाने पीने का बिल्कुल भी ख्याल नहीं रखता था वह... टोकने पर कहता था कि मैं हार्टअटैक से ही मरना चाहता हूँ... मैं अस्पताल पहुँचा वह बोलने की हालत में नहीं था... और कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया... काफी समय से साथ रहते रहते व उसके कारनामों को जानने के कारण अंदर ही अंदर बहुत लगाव हो गया था उससे मेरा... मशीनों-नलियों से जुड़े उसके शरीर को मशीनों-नलियों से अलग कर जब बाहर ले जाया जा रहा था तो मैंने स्ट्रैचर ट्रॉली रूकवायी, उसका चेहरा खोला, माथे को चूमा और बोला " बेफिक्र जाओ और खुश रहो, पॉप, तुमने अपना काम हमेशा अच्छे से किया!"... तब मुझे यह कतई महसूस नहीं हुआ पर देखने वालों ने मुझे बाद में बताया कि मेरी आँखों से आँसुओं की धार निकल रही थी तब...

अल्फा के किये नोमिनेशन के मुताबिक मैं ही नया अल्फा था... यह एक बहुत बड़ा दायित्व था... मैंने निश्चित कर लिया था कि मिशन को हर हाल में २०४० के सितम्बर महीने तक पूरा करना है...







 २०३९


जमीन के नीचे हमारे पाँचों स्टेशन २०३९ तक बन कर तैयार हो चुके थे... हरेक पूरी तरह से नाभिकीय उर्जा युक्त व ८०,००० आदमियों का साठ साल तक बाहर की दुनिया से कोई संपर्क रखे बिना भरण-पोषण करने में सक्षम था... इन स्टेशनों में भविष्य में आने वाली किसी भी आपात स्थिति से निपटने की क्षमता थी व पाँचों स्टेशन आपस में संपर्क में रहने वाले थे...

अभी भी थोड़े बहुत छोटे छोटे काम बचे थे... दुनिया में टकराव बढ़ रहा था ... मैंने ३० सितम्बर २०४० की डेडलाइन जारी कर दी... 




जारी...






पिछली कड़ियाँ हैं :-

भाग-१ ईश्वर की खोज में.... ' अल्फा '
भाग-२ ईश्वर की खोज में... ' अल्फा केवल एक ही होता है '....
भाग-३ और वह भिडंत...
भाग ४ - बहुत ही जल्दी खत्म हो जायेगी, नस्ल इंसान की ! 
भाग-५ और वह रोंगटे खड़े कर देने वाला खौफनाक नजारा...


पाठकों से :-

आप चाहें तो मेरी इस सीरिज को कुछ भी कह सकते हैं, भविष्य फैंटसी, विज्ञान कल्पना या भविष्य कल्पना आदि आदि... पर मैं इसे एक लंबी कहानी ही कहूँगा... कल्पना के घोड़े दौड़ाकर यह कहानी लिखी जायेगी आपके साथ साथ... कोशिश करूँगा कि हर सोमवार को यथासंभव शीघ्रता से आपको नई किस्त मिले...


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