रविवार, 25 नवंबर 2012

और वह रोंगटे खड़े कर देने वाला खौफनाक नजारा...

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गताँक से आगे...

शिखरवार्ता



वह २०३७ का सितम्बर का महीना था, जब दुनिया के ३० असरदार देशों के शीर्ष नेता जुटे थे उस शिखरवार्ता के लिये, मेरे देश की राजधानी में... एजेंडा था 'विश्व शांति'... पहले तीन दिन जमकर भाषणबाजी हुई, प्रेस वार्ताओं का दौर चला, विश्वशाँति के लिये अपने प्रतिद्वन्दी या शत्रु देशों को सबसे बड़ा खतरा बताया गया कईयों के द्वारा तथा यह चेतावनी भी दी गयी कि शाँति बनाये रखने की जिम्मेदारी बयान देने वाले नेता के देश की नहीं अपितु विश्व समुदाय की है... उधर एजेंसी में हम सभी चौथे दिन की तैयारी में लगे थे...




वह चौथा दिन

दुनिया को यह कहा गया कि आज के आखिरी दिन सभी शीर्ष नेता बंद कमरे में केवल अपने खासमखास सहायकों के साथ एक दूसरे के साथ 'वन टू वन' वार्ता करेंगे और मुद्दे सुलझाने का प्रयास करेंगे... और वह खास मीटिंग शुरू हुई... एक बड़ी सी गोल मेज के चारों ओर बैठे थे तीसों राष्ट्राध्यक्ष और उनसे थोड़ा पीछे उनसे सटी कुर्सी पर उनके खुफिया एजेंसी प्रमुख... हमारे राष्ट्रपति ने एक छोटा सा संबोधन देकर स्टेज अल्फा को सौंप दिया...

अल्फा ने फिर वही दो घंटे का प्रेजेंटेशन दिया जिसमें बताया गया था कि किस तरह इंसान की नस्ल अगले कुछ सालों में खत्म हो सकती है और उसके बाद 'मिशन- सर्वाइवल आफ द रेस' के बारे में बताया गया... मैं देख रहा था कि कुछ राष्ट्राध्यक्ष तो पूरी उत्सुकता से इसे देख रहे थे... कुछ उबासियाँ भरते भी दिखे... और चार पाँच ऐसे भी थे जिनके चेहरे पर यह सब देखने के बाद एक जहरीली मुस्कान चिपक सी गयी...

पर इस बार अल्फा ने अपना प्रेजेंटेशन देने के बाद स्टेज नहीं छोड़ा बल्कि एक वीडियो दिखाने लगा... यह सभी वीडियो पिछले आठ महीनों में अलग-अलग मुल्कों में अलग-अलग जगहों पर खींचे गये थे... और यह राष्ट्राध्यक्षों के मेज पर बैठने के क्रम में ही था... बारी बारी से बड़ी स्क्रीन पर सभी राष्ट्राध्यक्षों को बिस्तर पर लेटे हुऐ तथा उनकी कोहनी के पास की नस पर किसी डॉक्टर को एक चमकीला सा इंजेक्शन सा लगाते हुऐ दिखाया गया... वीडियों में अपने को देखते ही एक ने अपने खुफिया एजेंसी प्रमुख को फाड़ खाने वाली नजरों से देखा... स्टेज से अल्फा ने मुस्कुराते हुऐ कहा " कृपया किसी पर गुस्सा न करिये, वे सब मजबूर थे "... अब कई गहरी चिंता में पड़ गये... आखिरकार वीडियो खत्म हुआ तो उनमें से चार-पाँच दहाड़े " क्या है इस सब का मतलब ? "

इस बार अल्फा सीरियस हो गया और उसने एक अगला वीडियो दिखाना शुरू किया... स्क्रीन पर वही चमकीला इंजेक्शन दिखाई दिया और कैमरे ने उसकी पारदर्शी सुई पर फोकस किया... सुई के बीच में हल्के गुलाबी रंग का कुछ था...वह आलपिन के सिर का भी आधा ही रहा होगा आकार में... यह एक 'बायोअल्ट्रामाइक्रोरोबोटिक यंत्र' है... इसे किसी भी इंसान की किसी भी नस के अंदर प्रवेश करा देने के तीन घंटों के अंदर यह स्वयंमेव उसके दिमाग की रक्तवाहिनियों तक पहुँचकर वहाँ अपने को जमा लेता है...और यह हमारे केंद्रीय नियंत्रण कक्ष द्वारा नियंत्रित है... यह इस प्रकार के मटीरियल से बनाया गया है कि आज की तारीख में हमारे सिवाय दुनिया में किसी के पास वह तकनीक नहीं है कि किसी के शरीर के भीतर इसकी मौजूदगी को डिटेक्ट तक कर सके... अब अल्फा ने मुझे इशारा किया...

मेरे हाथ में एक हैंड-हैल्ड स्कैनर था... मैंने बारी बारी से उसे सभी नेताओं के चेहरे के सामने रखना शुरू किया और उधर बड़ी स्क्रीन पर बारी बारी से उनका कपाल और कपाल के बीच में एक चमकता बिन्दु दिखाई देना शुरू हो गया... अब उनमें से कुछ पसीने से भीग चुके थे जबकि हॉल का तापमान १७ डिग्री सेल्सियस था...

"आगे बताओ"... बुझी सी आवाज में उनमें से कुछ बोले...

" यह सब यह बताने के लिये कि हमारा यह अनूठा यंत्र आप लोगों के मस्तिष्क में स्थापित हो गया है, इसमें किसी को कोई शक न रहे" अल्फा की आवाज गूंजी...



और वह खौफनाक नजारा


 "अब मैं दिखाउंगा कि हमारा यह यंत्र क्या क्या कर सकता है" अल्फा बोला... और स्क्रीन पर एक और वीडियो चालू हो गया... अल्फा ने अपने हाथ में पकड़े रिमोट का बटन दबाया और चलता हुआ वीडियो रूक गया बीच में ही... "सबसे पहले आप सब को यह भरोसा दिलाने के लिये कि यंत्र आपके दिमाग के भीतर लगा है और काम भी कर रहा है, मैं आपको थोड़ा कष्ट दूँगा मात्र पाँच मिनट तक" और उसने ईशारा किया... अचानक विश्व के वह तीसों शीर्ष नेता अपनी आँखें झपकाने लगे, सामान्य आँखें झपकने से फर्क यह था कि एक साथ सबकी पहले बाँयी आँख झपकी और फिर दाहिनी... झपकने की रफ्तार धीरे धीरे बढ़ती रही, पाँच मिनट पूरे होने तक आप इसे आँखों का झपकना नहीं, बल्कि एक अविश्वस्नीय रफ्तार से फड़फड़ाना कह सकते थे... ठीक पाँच मिनट बाद सब सामान्य हो गया लेकिन वह सभी काफी समय तक अपनी आँखों व सिर को मलते रहे... डर उनके चेहरों से साफ झलक रहा था...

"यह सिर्फ इसलिये कि आप मेरी बातों का भरोसा करें" कहा अल्फा ने... और फिर से वीडियो को चालू कर दिया... सामने एक आदमी था... " यह हमारे देश का एक शत्रु है जिसके फैलाये आतंक ने हमें बहुत नुकसान पहुँचाया, इसे जीने का कोई हक नहीं, हमें इसे मारना ही था इसलिये सोचा कि क्यों न अपने वीडियो का हीरो इसी को बना लिया जाये" अब गंभीर था अल्फा...

"सज्जनों, हार्ट अटैक का दर्द मानव को अनुभव होने वाले सबसे तेज दर्दों में गिना जाता है, पर इस यंत्र के जरिये हम अपने शिकार को इस से भी कई हजार गुना तेज दर्द दे सकते हैं" यह देखिये... और अचानक वीडियो पर दिखता आदमी बेहद दर्द में अजीबोगरीब तरीके से अपने शरीर को मोड़ने तोड़ने लगा, उसने अपने हाथ की उंगलियाँ मुँह के अंदर डाल दीं और एक झटके में ही दो उंगलियाँ अपने ही शरीर से अलग कर दीं... वीडियो यहीं पर बंद हो गया... "चार पाँच सेकेंड भी इस दर्द को झेलने के बाद पंद्रह दिन तक इंसान आइने में अपने आप को पहचानने लायक भी नहीं रहता" अल्फा का स्वर गूँजा...

"इस यंत्र को हमने विस्फोटक क्षमतायुक्त भी बनाया है, अगर हम हल्का विस्फोट करें तो दिमाग की रक्तवाहिनियाँ फटेंगी और 'ब्रेन हैमरेज' से मौत होगी, जैसी 'मुल्कविशेष' के पागल कुत्ते की हुई थी... और"... वीडियो फिर चालू हो गया, स्क्रीन पर वही पहले वाला आतंकी था... " अगर हम उच्च शक्ति का विस्फोट करें तो" अल्फा का चेहरा भावशून्य था... अचानक स्क्रीन पर दिख रहे आतंकी की खोपड़ी एक धमाके से उड़ गयी, सरविहीन शरीर काफी देर तक हरकत करता रहा...

पूरे हॉल में सन्नाटा था... अल्फा ने मुझे ईशारा किया... मैंने फोन पर कुछ निर्देश दिये... और एक बड़ी सी ट्रे में सुनहरे ब्रेसलेट व अंगूठियाँ लिये एक शख्स हॉल में आया... " यह अंगूठी या ब्रेसलेट आपको पहनने हैं, आपके पल-पल की खबर हमें इनसे मिलती रहेगी, किसी भी हाल में इनको अपने शरीर से तीन फुट से ज्यादा दूर नहीं होने देना है, ऐसा होते ही आपके दिमाग में जमे यंत्र में स्वयम ही विस्फोट हो जायेगा" बोला अल्फा... और जल्दी से जल्दी अंगूठी या ब्रेसलेट पहनने के लिये भगदड़ सी मच गयी...

यह सब हो जाने के बाद उनमें से दो-तीन से साहस जुटा पूछा " क्या चाहते हो हमसे"... अब पहली बार अल्फा मुस्कराया, एक गर्वीली व आश्वस्त मुस्कान थी वह " ज्यादा कुछ नहीं, केवल दो चीजें, पहली अगले चार साल तक किसी भी हाल में कोई मिसएडवेंचर नहीं और दूसरा 'मिशन-सर्वाईवल ऑफ द रेस' को सम्पूर्ण सहयोग तन-मन और धन का, मेरे ख्याल से कुछ ज्यादा नहीं मांग रहा मैं"...

अब बारी हमारे राष्ट्रपति की थी " यह देखना हमारा काम है कि अगले चार सालों तक आपलोग ही सत्ता में रहें, चाहे इसके लिये हमें आपके पड़ोसी से युद्ध की धमकी दिलानी पड़े या भूकंप-सुनामी पैदा करने पड़ें, यह हम पर छोड़ दीजिये "

इसी के साथ शिखरवार्ता समाप्त हो गयी...



बाद में


वह तीसों अगले दिन हमारे देश के एक खूबसूरत रिसोर्ट पर पिकनिक मनाने चले गये... सारे मीडिया में उनकी मित्रवत बॉन्डिंग के चर्चे थे...


और 'मिशन-सर्वाइवल ऑफ द रेस' अपने सबसे महत्वपूर्ण दौर में पहुँच चुका था...अब हमें दिन-रात भी कम पड़ने वाले थे काम करने को...








जारी....



पिछली कड़ियाँ हैं :-

भाग-१ ईश्वर की खोज में.... ' अल्फा '
भाग-२ ईश्वर की खोज में... ' अल्फा केवल एक ही होता है '....
भाग-३ और वह भिडंत...
भाग ४ - बहुत ही जल्दी खत्म हो जायेगी, नस्ल इंसान की ! 


पाठकों से :-

आप चाहें तो मेरी इस सीरिज को कुछ भी कह सकते हैं, भविष्य फैंटसी, विज्ञान कल्पना या भविष्य कल्पना आदि आदि... पर मैं इसे एक लंबी कहानी ही कहूँगा... कल्पना के घोड़े दौड़ाकर यह कहानी लिखी जायेगी आपके साथ साथ... कोशिश करूँगा कि हर सोमवार को यथासंभव शीघ्रता से आपको नई किस्त मिले... आपकी प्रतिक्रियायें अहम हैं क्योंकि वही इस कहानी की भविष्य की दिशा तय करेंगी...अगर आप टिप्पणी कर रहे हैं तो थोड़ा कल्पना को जोर दे यह भी बतायें कि अगर आप इसे लिख रहे होते तो अगली किस्त में क्या होता... तथ्यों को सही रखने के लिये हो सकता है कि मैं पहले के लिखे में कुछ बदलाव भी करूँ, जब भी ऐसा होगा, आपको बताया जायेगा... मुझे पाठकों से फीडबैक की आशा थी, है और भविष्य में भी रहेगी... फीडबैक इस कहानी को बेहतर बना सकता है ऐसा मैं मानता हूँ...


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