शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

और वह भिडंत...

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भाग-१  ईश्वर की खोज में.... ' अल्फा '
व 
भाग-२  ईश्वर की खोज में... ' अल्फा केवल एक ही होता है '....
 
से आगे...


दिसंबर २०३२

दिसंबर २०३२ को मैं अपनी पहली फील्ड पोस्टिंग पर गया, मुझे एक 'मुल्क विशेष' के इरादों के बारे में पता लगाने का टास्क दिया गया था... बहुत स्रोतों से सूचना 'अल्फा' तक पहुँचती थी और उन में से ही एक स्रोत मैं भी था...

२००१ से २०३२ तक के विश्व की कुछ प्रमुख घटनायें इस प्रकार से थीं...

* ११ सितम्बर २००१ को कुछ इस्लाम को मानने वाले आतंकियों ने अमेरिका पर आतंकी हमला कर हजारों लोगों की जान ले ली...
* आतंक के सरगना को मारने के इरादे से अमेरिका ने अफगानिस्तान पर अपनी फौजें उतार दीं और मई २०११ में अपने एक सहयोगी मुल्क पाकिस्तान के भीतर जा सरगना को मार गिराया...
* ईरान नामक एक देश के राष्ट्रपति ने २०१२ में यहूदी देश इजरायल को दुनिया के नक्शे पर एक नासूर बताते हुऐ जल्दी ही उसे मिटाने की बात कही, जवाब में इजरायल ने कहा कि वह कभी भी किसी भी हालात में ईरान को एटम बम नहीं बनाने देगा...
* २०१५ की गर्मियों में अमेरिका व उसके सहयोगी देशों ने अफगानिस्तान की सत्ता अफगानी सरकार को सौंप अपनी फौजें वहाँ से हटा लीं...
* २०१७ में इस्लामी आतंकियों ने फिर एक बार अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया...
* २०१९ में पाकिस्तान के अधिकाँश भागों पर भी इस्लामी आतंकियों का कब्जा हो गया व पाकिस्तानी फौज का एक बड़ा हिस्सा उनके साथ मिल गया, इस्लामाबाद की चारों ओर से घेराबंदी कर दी गयी ...
* २०२० में इस्लामी आतंकियों का इस्लामाबाद पर भी कब्जा हो गया व वे भी पाकिस्तानी सेना में शामिल हो गये...पाकिस्तान पर कट्टरपंथियों का एक समूह शासन करने लगा... इसके तुरंत बाद ही पाकिस्तान ने अपनी पूर्वी सीमा पर स्थित पड़ासी मुल्क भारत से कुछ हिस्सों को आजाद कराने के लिये खुली व छिपी दोनों तरह की जंग का एलान कर दिया...
* २०२२ में बार बार पाकिस्तान की ओर से एटमी हमले की धमकी से आजिज आ भारतीय नेतृत्व ने पूरे विश्व के सामने ऐलान कर दिया कि कहीं से भी भारत पर ऐटमी हमला होने की स्थिति में भारत उस देश पर ३०० से ज्यादा नाभिकीय हमले एक साथ करेगा, चाहे इसके परिणाम दुनिया के लिये कुछ भी हों...
* इसके तुरंत बाद २०२२ में इजरायल ने भी समूचे विश्व के सामने यह ऐलान किया कि उसकी हवाई सीमा में कोई हमलावर मिसाईल या विमान घुसते ही स्वचालित रूप से उसके सारे नाभिकीय हथियार दुनिया के विभिन्न इलाकों के उसके दुश्मन मुल्कों की ओर रवाना कर दिये जायेंगे...
* २०२३ में यह भी साबित हो गया कि एड्स जैसी महामारी का कारण HIV एक कुदरती वायरस नहीं बल्कि बायोलॉजिकल वारफेयर के लिये विश्व के एक विकसित मुल्क द्वारा तैयार किया जा रहा वायरस था... जो जानबूझ कर छोड़ा गया... जिससे इसकी वैक्सीन विकसित हो सके... तथा HIV परिवार के उससे भी घातक अन्य वायरस जैविक युद्ध के लिये विकसित किये जा सकें जिनकी वैक्सीन केवल उसी देश के पास मौजूद हो...
* २०२४ में HIV के खिलाफ १००% प्रतिरोधक क्षमता वाली वैक्सीन विकसित कर ली गयी...
* २०२८ में चीन दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक व सैन्य शक्ति, अमेरिका दूसरी व भारत तीसरी सबसे बड़ी शक्ति के तौर पर जाना जाने लगा, विश्व में जिनका पहले प्रभुत्व था उन मुल्कों को यह नागवार गुजरा और कई ऐसे गुप्त समूह बन गये जो हर हाल में चीन व भारत को उनके पुराने हाल में फिर भेज देना चाहते थे...
* २०२९ में यूरोप के एक ताकतवर मुल्क के एक वैज्ञानिक ने यह आरोप लगा सनसनी फैला दी कि कुछ प्रयोगशालाओं में दशकों पहले विश्व से खत्म कर दी गयी महामारी चेचक व पोलियो के वायरसों का जैविक युद्ध के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने पर काम किया जा रहा है... वह वैज्ञानिक तीन दिन बाद अपने घर में मृत पाया गया... पत्नि ने बताया शायद वह पागल हो गया था और उसी पागलपने में उसने जहर खा लिया था...
* २०३० में दुनिया की ५५ प्रतिशत आबादी डायबिटीज, मोटापा, हाइपरटेंशन, हॄदय रोग, गु्र्दा रोग आदि लाईफ स्टाइल डिजीज से ग्रस्त हो चुकी थी... २०१२ में मुम्बई, भारत के एक अस्पताल द्वारा पहली बार रिपोर्ट किया TDR TB (टोटली ड्रग रेजिस्टेंट ट्यूबरकुलोसिस) एक बहुत बड़ी समस्या बन चुका था व हर साल उससे समूचे विश्व में २० लाख मौतें होने लगीं थी... कोई भी ज्ञात दवाई इस बीमारी के खिलाफ काम नहीं कर रही थीं...
* २०३१ में यह खबर आई कि पाकिस्तान के एक आतंकी-जनरल ने अपने नियंत्रण के तीन नाभिकीय हथियार एक बहुत बड़ी रकम के बदले एक मुल्क को बेच दिये थे...
* २०३१ में ही एक 'मुल्क विशेष' का कट्टरपंथी शासक अपने करीबियों को यह कहते सुना गया कि दुनिया शायद जल्द ही खत्म होने वाली है, ऐसा उसने सपने में देखा है...

मुझे भी उसी 'मुल्क विशेष' में ही भेजा गया था... मेरे टास्क दो थे, पहला यह पता लगाना कि क्या वह 'तीन बम' उसी देश ने खरीदे थे, दूसरा यह कि उनका क्या प्रयोग होना था... मेरा काम मुख्य रूप से 'एजेंसी' के उस देश में मौजूद अनेकों इन्फॉर्मर्स से सूचना संकलित कर उनका विश्लेषण कर अपनी राय अल्फा को देना था...

मैं जाते ही अपने काम में जुट गया... धीरे-धीरे सूचनायें मुझ तक आने लगीं... पर निश्चितता से किसी नतीजे पर पहुँचने लायक सूचना मेरे से अभी बहुत दूर थी...

तभी वह फोन आया... वह भी उसके ऑफिशियल नंबर से... उसका नाम कुछ और था पर मैं उसको जूलू (Zulu) कहूँगा... मैं फोन उठाते ही बोला '"ठीक है, मैं अपनी एम्बेसी जा रहा हूँ, और पहली फ्लाइट से ही वापस चला जाउंगा "... बहुत जोर से ठहाका लगाकर हंसा वह " प्रोफेसर, (उसे मेरा नाम पता था) अगर मुझे तुमसे यही कहना होता तो क्या मैं खुद फोन करता, मेरे आदमी तुम्हें सड़क से उठा सीधा फ्लाईट में बैठा देते"... मैं झेंप सा गया... मुँह जब भी खोलो, समझदारी की ही बात बोलो, खास तौर पर अपने हमपेशा से, वरना तुमको ही शर्मिन्दा होना होगा, यह मेरे लिये बड़ा सबक था... " सॉरी" बस इतना ही मेरे मुँह से निकल पाया... " कोई बात नहीं बेटा, आओ साथ लंच करेंगे" वह अचानक मेरे पिता समान हो गया...

एक मैक्सिकन रेस्त्रां में हम मिले... खूब जमकर खाया-पिया... खूब सारी बातें की... उसने अपनी बेटी के बारे में बताया... बोला कि मेरे जैसा वर खोज रहा है उसके लिये... खाना खाते खाते अचानक उसने प्लेट में थोड़ा ज्यादा सॉस डाल दिया, मैंने सामान्य रूप से बातों के क्रम को बनाये रखा पर अब मेरी नजरें उसके हाथ के चम्मच काँटे पर थीं... खाना खाते खाते अचानक उसने काँटे की नोक से सॉस पर दो आकार बनाये  '+ α' ... मेरे होंठो पर हल्की मुस्कुराहट उभरी... उसने चम्मच से जल्दी जल्दी सारी प्लेट साफ कर दी...

वह अल्फा से मिलना चाहता था।

यह एक इमरजेंसी थी... उसी शाम मैं अपने देश के लिये फ्लाईट पर सवार हो गया... १२ घंटे बाद मैं एजेंसी के आफिस में था, मैंने 'कनेक्शन' को खबर दी कि जुलू अल्फा से मिलना चाहता है... और कनेक्शन मुस्कुराने लगा... शायद मैंने कोई बड़ा काम कर दिखाया था...

अल्फा और जुलू आपस में कैसे मिले, यह बताना यहाँ जरूरी नहीं... पर 'अल्फा' को 'अल्फा' क्यों कहते थे यह बताना अब जरूरी हो गया है... तब दुनिया का लगभग हर मुल्क अपनी एक जासूसी एजेंसी रखता था... मुल्कों में सत्ता परिवर्तन होते रहते थे, कभी कभी सरफिरे, जनूनी यहाँ तक कि पागल भी शासक बन जाते थे... पर जासूसी एजेंसियाँ हमेशा ही समझदारों के ही हाथ में रहती थीं... दुनिया की सारी जासूसी एजेंसियों के प्रमुखों का एक अनौपचारिक क्लब सा होता था, यह दुनिया का सबसे रहस्यमयी और एक्सक्लुसिव क्लब था... ' अल्फा' इस क्लब के सरगना को कहा जाता था... मुल्क एक दूसरे के खिलाफ आतंक फैलाते थे, रहस्यों को खरीदते थे, एक दूसरे के जासूसों को बेनकाब करते थे, कभी कभी इस काम में जानें भी ली जाती थीं... पर यह झगड़े, राजनीति व नफरत कभी पूरी मानवता को ही न निगल बैठे, इसीलिये यह क्लब बना था... एक तरह से 'अल्फा' केवल अपने देश का ही नहीं पूरी मानवता का रक्षक था...

जुलू अल्फा से मिलना चाहता था क्योंकि जुलू की निगाह में दुनिया खतरे में थी...

वो दोनों मिले, कहाँ मिले कैसे मिले, यह मैं नहीं बताना चाहता, पर जुलू ने अल्फा को बताया कि उसके 'मुल्क विशेष' के हुक्मरान ने ही वह तीनों बम खरीदे हैं, और बहुत जल्द ही उसकी उन्हें भारत व इजरायल के खिलाफ इस्तेमाल करने की योजना है... उसका ख्याल था, जो सही भी था कि ऐसा होते ही अपने खुले ऐलान के मुताबिक दोनों देश अपने सारे नाभिकीय हथियार, जो हजारों की संख्या में थे, अपने अपने दुश्मनों की ओर रवाना कर देंगे और महज एक दो दिनों में ही पूरी दुनिया नष्ट हो जायेगी...

पर अल्फा को हर हाल में इसे रोकना था...

और उसने यह किया भी...

और वह भिडंत

अचानक घटनायें तेजी से घटित हुई और तीन दिन के भीतर ही हमारे राष्ट्रपति उस 'मुल्क विशेष' के प्रधान मंत्री से 'तेल के दामों के उतारचढ़ाव व विश्व की अर्थव्यवस्था पर इसके कुप्रभाव' को रोकने के लिये शिखरवार्ता के लिये उस 'मुल्क विशेष' की राजधानी को रवाना हो गये... यह अभूतपूर्व था... और राष्ट्रपति की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिये हमारी वायुसेना के लड़ाकू विमान, हैलीकॉप्टर व एक बहुत बड़ा सुरक्षा दल भी साथ गये... अल्फा भी दल का हिस्सा था और पूरे घटनाचक्र के दौरान मैं उसके साथ रहा...

एयरपोर्ट पर स्वागत के तुरंत बाद दोनों नेता शिखरवार्ता के लिये निर्धारित जगह पहुँचे... मीडिया के लिये मुस्कुराने व फोटो खिंचाने के बाद घोषणा हुई कि अब वे दोनों बंद कमरे में एक दूसरे से वार्ता करेंगे व केवल अनुवादक व निजी सचिव ही उनके साथ रहेंगे... बहरहाल अब राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री दोनों एक कमरे में थे जिसे 'एजेंसी' व 'मुल्क विशेष' के खुफिया विभाग ने पहले से ही सैनिटाइज किया हुआ था... हमारी ओर से अल्फा, मैं और राष्ट्रपति थे और उनकी तरफ से प्रधानमंत्री, जुलू और उनकी फौज का एक बंदा... वार्ता शुरू होते ही राष्ट्रपति ने इशारा किया... अल्फा उठा और प्रधानमंत्री के पास गया, अपने टेबलेट पीसी पर उसने प्रधानमंत्री को एक वीडियो दिखाया... अचानक प्रधानमंत्री के चेहरे का रंग उतर सा गया... फिर अल्फा ने एक दूसरा वीडियो प्रधानमंत्री को दिखाया... प्रधानमंत्री को उस एयरकंडीशन्ड रूम में ही पसीना सा आ गया... जुलू की ओर देख वह चिल्लाया " हरामी, तूने हमारे महान देश को धोखा दिया है "... जुलू चेहरे पर कोई भाव लाये बिना बैठा रहा... अब अल्फा ने राष्ट्रपति की ओर इशारा किया... और पहली बार राष्ट्रपति ने मुँह खोला "मिस्टर प्राइम मिनिस्टर आपको अगले पाँच मिनट के भीतर ही कुछ जरूरी फोन कॉल करनी होंगी"... निस्तेज, सर झुकाये बैठे प्रधान मंत्री ने फौजी बंदे को इशारा किया, पर जुलू ने अपना फोन आगे बढ़ा दिया... कुल तीन मिनट तक बातें हुई...

'मुल्क विशेष' की राजधानी के हवाई अड्डे पर अचानक गतिविधियाँ बढ़ गयीं... मुल्क विशेष की सेना के तीन भारी भरकम हैलीकॉप्टर उतरे व उनमें से तीन काफी भारी बड़े बक्से क्रेन द्वारा उतारे गये... हरेक हैलीकॉप्टर से चार चार वैज्ञानिक से दिखते आदमी भी उतरे... बड़ी ही शीघ्रता से यह सारा सामान व आदमी हमारे कार्गो प्लेन में चढ़ाये गये... और प्लेन रनवे पर दौड़ता उड़ान भर आँखों से ओझल हो गया...

उधर मीटिंग रूम में राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के साथ बड़ी तल्लीनता से वीडियो गेम खेल रहे थे... मैं, अल्फा, जुलू और फौजी मेज पर लगे खाने पीने के सामान का सफाया करने में जुट गये... तकरीबन सवा घंटे के बाद अल्फा के फोन पर कॉल आई, वह खुश नजर आया... " मेरा ख्याल है अब हम मीटिंग खत्म कर सकते हैं सर, पंछी उड़ कर सरहद से पार निकल गया है "...

अब राष्ट्रपति को अपना काम करना था... मुस्कुराते हुऐ राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री के गले में हाथ डाला और बाहर चलने को कहा... बाहर पूरी दुनिया के मीडिया के कैमरे लगे थे... " हमारे दोनों महान देशों ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को तेल की कीमत के उतारचढ़ाव के नुकसान से बचाने के लिये एक रणनीति तैयार की है, सभी स्टेकहोल्डर्स से बात करने के बाद यह दुनिया के सामने होगी " कहा राष्ट्रपति ने...

तय यह हुआ कि यहीं से दोनों नेता रात के खाने पर जायेंगे और रात का खाना खाने के बाद राष्ट्रपति अपने देश रवाना हो जायेंगे... बहुत शानदार रात्रिभोज था, और उतना ही लजीज खाना भी... जुलू लगातार चिंतित लग रहा था... वह अल्फा के पास आया... अल्फा ने उसका हाथ दबाया और बोला "चिंता मत करो, पागल कुत्ता जिंदा नहीं छोड़ा जायेगा"... ठीक डेढ़ घंटे में रात्रिभोज खत्म हुआ और विदाई के बाद राष्ट्रपति का प्लेन रनवे की ओर बढ़ा... अल्फा और मैं पीछे की सीट पर बैठे थे... अल्फा ने अपनी जेब से फोन निकाल एक मैसेज किया... और रेडियो खोल न्यूज चैनल लगा दिया... पाँच मिनट के बाद खबर आने लगी... ' दिमाग की रक्त वाहिनियों में रक्तस्राव के कारण 'मुल्क विशेष' के प्रधानमंत्री को कोमा की अवस्था में अस्पताल ले जाया गया है, सूत्र बताते हैं कि पिछले एक दिन की अतिव्यस्तता व तनाव के चलते ऐसा हुआ होगा' रेडियो कह रहा था... "पागल कुत्ता अपने अंजाम तक पहुँच गया है" मुस्कुरा कर कहा अल्फा ने और अगले ही पल खर्राटे भरने लगा... अस्पताल में जाने के कुछ घंटे बाद ही प्रधानमंत्री की मृत्यु की घोषणा कर दी गयी...

(जारी)...

अगली किश्त में पढ़ियेगा 'मिशन-सर्वाइवल ऑफ द रेस'...

पाठकों से :-

आप चाहें तो मेरी इस सीरिज को कुछ भी कह सकते हैं, भविष्य फैंटसी, विज्ञान कल्पना या भविष्य कल्पना आदि आदि... पर मैं इसे एक लंबी कहानी ही कहूँगा... कल्पना के घोड़े दौड़ाकर यह कहानी लिखी जायेगी आपके साथ साथ... कोशिश करूँगा कि हर सोमवार को यथासंभव शीघ्रता से आपको नई किस्त मिले... आपकी प्रतिक्रियायें अहम हैं क्योंकि वही इस कहानी की भविष्य की दिशा तय करेंगी...अगर आप टिप्पणी कर रहे हैं तो थोड़ा कल्पना को जोर दे यह भी बतायें कि अगर आप इसे लिख रहे होते तो अगली किस्त में क्या होता... तथ्यों को सही रखने के लिये हो सकता है कि मैं पहले के लिखे में कुछ बदलाव भी करूँ, जब भी ऐसा होगा, आपको बताया जायेगा... मुझे पाठकों से फीडबैक की आशा थी, है और भविष्य में भी रहेगी... फीडबैक इस कहानी को बेहतर बना सकता है ऐसा मैं मानता हूँ...






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3 टिप्‍पणियां:

  1. निकट का भविष्य आकलन प्रायः खतरे भरा होता है मगर मुझे अच्छा लगा कि लेखक ने यह चुनौती ली है .
    विज्ञान कथाकार भविष्यवक्ता की पदवी पर आसनारूढ़ नहीं होता बल्कि वह मौजूदा हालात को देख समझ कर
    भविष्य का एक तार्किक विश्लेषण करता है सम्भावनाओं को तलाशता है -आपने यह काम इस अंक में बखूबी निभाया है
    साधुवाद!

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  2. "२०२२ में बार बार पाकिस्तान की ओर से एटमी हमले की धमकी से आजिज आ भारतीय नेतृत्व ने पूरे विश्व के सामने ऐलान कर दिया कि कहीं से भी भारत पर ऐटमी हमला होने की स्थिति में भारत उस देश पर ३०० से ज्यादा नाभिकीय हमले एक साथ करेगा, चाहे इसके परिणाम दुनिया के लिये कुछ भी हों"...

    आदरणीय शाह जी ; यह नहीं लिखा आपने कि हालांकि भारत ने तैश में आकर यह सब तो कह दिया लेकिन पाकिस्तान बखूबी जानता था कि भारत के परमाणु जखीरे के इस्तेमाल की चाबी एक गूंगे रोबोट के हाथ में थी वह रोबोट भी रिमोट से ही चलता था और उसका रिमोट एक बहुत ही शातिर महिला के हाथ में था !..................... :) :) खैर, आपको दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये !

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  3. देर से आने की सजा के तौर पर पहली किश्त भी पढ़नी पड़ी।

    इस किश्त में रोचकता अपने चरम पर है। आप कल्पना के घोड़े इस खूबसूरती से दौड़ा रहे हैं कि इसमें राजनैतिक समझ की झलक भी मिलती है। यह कथा अभी शुद्ध रूप से जासूसी कथा लग रही है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना तो लेखक की मजबूरी है।

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