सोमवार, 1 अक्तूबर 2012

किया जा रहा है एक धोखा, नाम 'वास्तु' है !...

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इंसान सभ्य हुआ तो उसने वर्षा, धूप व तेज रोशनी से बचने के लिये आसरे बनाना भी सीखा... खाना भी घरों में बनने लगा और नहाने व नित्य क्रिया से निवृत्ति के स्थान भी बनने लगे... धीरे धीरे संपत्ति भी होने लगी उसके पास तो इन आसरों में अनिश्चित भविष्य के लिये धन-धान्य भी रखे जाने लगे... इन्हीं आसरों को आज हम घर कहते हैं... हर सभ्यता ने इन घरों के निर्माण के लिये कुछ नियम भी बनाये... यह सारे नियम कॉमन-सेन्स यानी सहज बुद्धि पर आधारित थे... एक ही उद्देश्य था इनका कि घर में रहने वालों को रोशनी व हवा की कमी न रहे तथा बारिश व सीलन से वे बचे रहें, तापमान के चरम से वे भरसक बचे रहें, उनका सामान सुरक्षित रहे, भवन निर्माण में कम से कम साधन लगें व स्थानीय तौर पर उपलब्ध साधनों से ही उनका काम चल जाये...

आजकल एक खेप सी खड़ी हो गयी है तथाकथित वास्तु शास्त्र के स्वयंभू जानकारों की... ये हर जगह हैं... टी.वी. पर, नेट पर, आपके शहर या कस्बे में और ब्लॉगवुड में भी...




इन लोगों के मुताबिक हरेक घर में वास्तु पुरूष की स्थिति कुछ ऐसी होती है... कभी कभी यह स्थिति बदलता भी है...इस व्याख्या के मुताबिक हर घर में बाथरूम-किचन-बेडरूम-स्टोर-डाइनिंग रूम की पोजीशन यह होनी चाहिये...

  • North – treasury
  • Northeast – prayer room
  • East – bathroom
  • Southeast – kitchen
  • South – bedroom
  • Southwest – armoury
  • West – dining room
  • Northwest – cowshed.

अगर किसी घर में ऐसा नहीं है तो यह तोड़फोड़ करने की राय देते हैं... इनकी राय के मुताबिक कई बेचारे अपना अच्छा भला शयन कक्ष छोड़ बाथरूम में सोने को मजबूर हैं... कभी कभी यही विशेषज्ञ कुछ अजीब से उपाय भी बताते हैं जिनमें आइने लगाना, लाल-पीले बल्ब लगाना, तांबे या प्लास्टिक के पिरामिड लगाना, फर्श-दीवार दरवाजों पर ताबें की पत्तियां ठोकना आदि आदि शामिल हैं... यदि यजमान कुछ न करने को राजी हो तो यह विशेष पूजा या हवन बता वास्तु दोष का शमन करने का दावा भी करते हैं...

अब आप आज की आधुनिक ईमारतों के कुछ नक्शे देखिये...








आप स्वयं देख सकते हैं कि शयन कक्ष, रसोई, बाथरूम, डाइनिंग रूम व लिविंग रूम आदि आदि अलग अलग फ्लैटों में अलग अलग हर संभव दिशाओं में हैं... इसी तरह बड़े संस्थानों के होस्टलों व नियोजित कालोनियों में बने मकानों में भी यह सभी कक्ष हर संभव दिशाओं में होते हैं... यह जमीन व जगह की उपलब्धता पर निर्भर होता है... ऐसी कोई शोध नहीं हुई कि एक विशेष दिशा के फ्लैटों-मकानों में रहने वाले दुखी व असफल हैं व अन्य विशेष दिशा में रहने वाले सुखी व सफल...


आपके घर में रोशनी आये, हवा का आना जाना न रूके, बारिश व सीलन से घर बचा रहे व कीमती सामान सुरक्षित रहे... यदि आपका घर यह सब कर रहा है तो उसमें कोई वास्तु दोष नहीं... बेफिकर उसमें रहिये... जीवन की अपनी सफलताओं व विफलताओं व अपने आसपास के लोगों से अपने अच्छे-बुरे संबंधों के कारण अपने अंदर ढूंढिये... और कोई स्वयंभू वास्तु विशेषज्ञ यदि आपको फिर भी  घर के वास्तुदोष गिना रहा है तो आप सीना तान के उस से कहिये...


बंधु, 

कर रहे हो एक धोखा, तुम सबसे, नाम वास्तु है !










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8 टिप्‍पणियां:

  1. "जीवन की अपनी सफलताओं व विफलताओं के कारण अपने अंदर ढूंढिये"
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    bas itni si baat hi log samajh len to kaafi hai.
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    aabhaar !!!

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  2. सच कह रहे हैं आप. अब जिन्हें सरकारी मकान आबंटित होते हैं, उनके पास तो कोई चारा ही नहीं है कुछ फेर बदल करने का. वो लोग क्या करें. वैसे भी अगर घर में सब लोग ईमानदारी से अपनी-२ ज़िम्मेदारी नहीं निभाएं, तो कितना भी वास्तु ठीक करा लो, कुछ नहीं होने वाला.

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  3. वस्तु है तो वास्तु भी है.
    मकान में हवा और रौशनी का प्रवाह सही हो. पानी की सप्लाई ठीक हो. मालो-ज़र घर के अंतिम कोने में हो और उस कोने की दीवारें मोटी हों . घर की औरतें हर दम उसके पास रहें चाहे वे मोटी हों या पतली हों. लिचन बेडरूम से दूर हो और बच्चे बेडरूम से दूर हों . टॉयलेट बाथरूम और पानी बच्चों के पास हो. बच्चे गेट के पास रहें ताकि वे आने जाने वालों पर नज़र रख सकें. इस तरह तिजोरी से गेट तक सब कुछ सुरक्षित रहता है.
    यह एक वैज्ञानिक विधि है लेकिन जब इसे ग्रहों से जोड़ दिया गया तो इसका विज्ञान छिप गया और अज्ञान छा गया. ग्रहों से डरने वाले अब अपने मकान के कोनों से भी डरने लगे और पीले बल्ब जलाने लगे.
    अगर इनकी अक्ल रौशन हो जाए तो वे जान लेंगे कि वास्तु के अनुसार सही बने हए महलों में रहने वाले राजाओं को भी उनके कुलगुरु मुस्लिम हमलावरों से बचा नहीं पाए जबकि हमलावरों के मकान में दस तरह के वास्तु दोष हुआ करते थे. कुलगुरु खुद न बच पाए. सोमनाथ मंदिर का वास्तु ठीक ही रहा होगा लेकिन फिर भी उसमें रहने वाले गज़नवी की तलवार की भेंट चढ़ गए.
    क्यों ?
    क्योंकि खुद अपने विचार का वास्तु ठीक न था.
    विचार और कर्म ठीक हों तो वास्तु जैसा भी हो, नफ़ा ही देता है.
    चाइनीज़ वास्तु ज्यादा वौज्ञानिक है. उसका ज्ञान भारतीय वास्तु में शामिल कर लिया है और उसका नाम भी न लिया.
    अजब इत्तेफ़ाक़ यह है कि जैसे जैसे लोगों में वास्तु का ज्ञान बढ़ रहा है वैसे वैसे महंगाई भी बदती जा रही है.
    प्राचीन ज्ञान चाहे चीन का हो या भारत का, उसे अंधविश्वास से अलग कर लिया जाए तो उसका वैज्ञानिक रूप सामने आ जाता है. तब हम उससे लाभ उठा सकते हैं.

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  4. पता नहीं, ये चित्र क्या कह रहे हैं। बस यही कह रहे हैं कि ये लोग वास्तु को नहीं मानते हैं, यह उनका व्यक्तिगत विश्वास है, पर इससे असिद्ध क्या होता है?

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  5. अच्छा लेख है प्रवीण भाई !
    अंधविश्वास कितने घरों को बर्वाद कर देता है !

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  6. वास्तु कमाई का जारिया बना हुआ है भाई ! ये दोष अब तो हमेशा रहेगा। :)

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  7. विचार भी वास्तु मात्र हैं. घर-दुकान और वस्तुओं का वास्तु ठीक करने के बाद भी समस्या से नजात न मिले तो अपने विचार का वास्तु ठीक कर लीजिये आपकी समस्या दूर हो जायेगी.
    Please see
    http://blogkikhabren.blogspot.in/2012/10/praveen-shah.html

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  8. बिलकुल बकवास -आपकी पोस्ट नहीं ,वास्तु!

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