रविवार, 2 सितंबर 2012

उबाऊ जिंदगी और एक बेहद साधारण सा दिन...

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रात चैन से सोया
शायद देखे भी होंगे
ढेर सारे रंगीन सपने
सुनहरे और हसीन से

सुबह उठा समय पर
नहीं याद था सपना कोई
बाहर जा अखबार उठाया

खबरें वही पुरानी थीं
शोर था घोटाले का
संसद फिर से ठप थी

चाय पी पत्नी संग
कुछ देर साझा की
वही बेबात की बातें

नहाया बड़े आराम से
समय बहुत था मेरे पास

नाश्ते में मन भर खाये
बघारी भिंडी-भरवा पराँठे
गर्मागर्म कॉफी थी साथ

सहजता से भूल गया
वजन बढ़ रहा है मेरा

गेट पर बॉय किया फिर
पत्नी, बिटिया दोनों को

ऑफिस पहुंचा समय पर
नहीं लगा था कोई जाम
मेरे रोज के रास्ते पर

खुशनुमा माहौल था आज
मजे में निपटाया काम
कैंटीन में लंच खाया
की थोड़ी देर गपशप भी

बचा खुचा काम निपटा
इंतजार करने लगा
शाम के पाँच बजने का

घर पहुँचते ही पाया
तैयार खड़ी हैं बेटियाँ
बाहर घूमने जाने को

फटाफट फ्रेश हुआ फिर
पहने कैजुअल कपड़े

निकल पड़े हम चारों
पैदल हौले-हौले टहलते
नजदीकी बाजार तक

खरीदा छोटा मोटा सामान
फास्ट फूड स्टॉल पर
हल्का सा कुछ खाया भी

प्रसन्न चित्त लौटे घर
देखा फिर कुछ देर टीवी
वही एक से लगते हुऐ
सीरियल,डांस, रियलिटी शो
और वही उबाऊ खबरें भी

कुछ ही देर  के बाद
सो गयीं दोनों बेटियाँ
शायद थक गयीं थी वे
यो हो गयीं थी बोर भी
टीवी के वे प्रोग्राम देखकर

हो गया है सोने का समय
अब हम दोनों का भी

सोचता हूँ, आज का दिन
कितना साधारण सा था, न
कुछ भी खास नहीं था जब
बोर भी कह सकते हैं इसे

एक और पन्ना पलट गया
जिन्दगी नाम की किताब का

पर मेरी इस किताब के
ज्यादातर पन्ने इसी तरह
साधारण, उबाऊ क्यों हैं


क्या जिंदगी ऐसी ही होती है ?


बता सकते हो क्या आप ?







...

8 टिप्‍पणियां:

  1. जब तलक हमने गधा नहीं पाला था। हमारी ज़िंदगी भी उबाऊ थी।
    जब तलक हमारे पास हमारे वालिद मोहतरम की मीरास रही तब तक हमारी ज़िंदगी में भी लुत्फ़े हक़ीक़ी न था।
    जब तलक हमारी बेगम अपने मायके नहीं जातीं तब तक हमारी ज़िंदगी भी बेनूर ही रहती है।
    असल में नूर हमारे पड़ोस में रहती है और वह हमारी बेगम के रहते हमारे घर आती नहीं।

    बीवी को उसके मायके भेजकर एक गधा ख़रीद लो।
    फिर देखो कैसा लुत्फ़ आता है ज़िंदगी में।

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  2. सबको नसीब नहीं होता ऐसा दिन.

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  3. हमको तो ऐसे ही कुछ न होने वाले दिन अच्छे लगते हैं, शान्त और उबाऊ..

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  4. पुस्तक के एक पन्ने ने पूछा, "क्या जिंदगी ऐसी ही होती है?"
    एक साथ सभी पन्ने फड़फड़ाने लगे, "नहींsss, ऐसी होती है।"

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  5. दिन को रोचक बनाने के लिए दूसरे लोग या मौसम कुछ न करे तो न सही. ऐसे में अपनी तरफ़ से भी कोशिश करनी चाहिए कर्मवीरों को.

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  6. बहुत बड़ी बात है की जिंदगी आसानी से और इस तरह साधारण कट रही है आपकी, बरना सिंपल तरीके से जिंदगी जीना ही आज के दौर में सबसे काम्प्लेक्स चीज हो गयी है

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  7. वैसे प्रवीण जी , मुझे टिप्पणियों में अपनी पोस्ट्स के लिंक देना अच्छा नहीं लगता, किन्तु आपके प्रश्न का उत्तर मेरी एक पोस्ट में है | यह मेरा लिखा नहीं है - ओशो का कहा हुआ कहीं सुना / पढ़ा था | आप कहेंगे तो लिंक दे दूँगी | पोस्ट का नाम "आनंद" है - जिसमे तीन मजदूर एक ही काम कर रहे थे, किन्तु एक दुखी था, एक न्यूट्रल था और एक आनन्दित | आप ये keywords दे कर मेरा ब्लॉग सर्च कर सकते हैं, यदि IF AND ONLY IF आप interested हों इसे पढने में | मेरा आपको बोर करने का कोई इरादा नहीं है :)

    @ बोरिंग / उबाऊ - जीवन को बस exist करने के लिए जिया जाए तो वह बोरिंग और उबाऊ ही है :) हाँ, जीने का आनंद लेना हो तो वह बिलकुल बोरिंग / उबाऊ नहीं होता, अनगिनत नयी चीज़ें हैं करने को | अभी तक तो मैंने कभी भी routine / boredom / etc की हद तक जाने का समय नहीं पाया, आशा है आगे भी न मिले समय |

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