शनिवार, 29 सितंबर 2012

रस्सी पीटने वाले 'वो'.....

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वो भी हमारी ही कॉलोनी में रहते हैं... मैं तो हाल ही में आया हूँ पर वह यहाँ तभी से हैं जब यह कॉलोनी बस रही थी... पहले झाड़ झंखाड़ था हर तरफ... नये नये मकान बन रहे थे... अक्सर साँप निकला करते थे... मैंने सुना है कि तब उन्होंने कुछ साँप मारे थे... बड़ी तारीफ भी हुई उनकी... यह बात उनके दिमाग पर इतना घर कर गयी कि अब केवल और केवल साँप ही उनके दिमाग पर छा गये... चौबीसों घंटे एक लाठी लेकर चलने लगे वो... क्या पता कब साँप दिख जाये... साँप न मिलने की स्थिति में उन्हें लगता कि जीवन में कुछ मजा ही नहीं रहा अब...

एक दिन सुबह सुबह मेरे गेट से आवाज लगायी उन्होंने..." जरा बाहर आईये "...

मैं भाग कर बाहर गया... 

" यह क्या पड़ा है आपके दरवाजे पर ? "... 

मैंने तब जमीन की ओर देखा गौर से ... " कुछ नहीं यह रस्सी का एक टुकड़ा है।"... 

"अरे नहीं नहीं, रस्सी नहीं यह साँप है, लाठी लाइये और मेरे साथ मिल इसे मारिये", उन्होंने आदेश सा दिया... 

" पर मुझे तो यह रस्सी ही लगती है", मैंने कहा... 

कुछ गुस्से से बोले वे... " अच्छा बताओ यह काला है कि नहीं?"- "हाँ"... 

"लम्बा है कि नहीं"- "हाँ"... 

"क्या इसके हाथ पैर हैं?"- "नहीं"... 

" तो फिर यह साँप ही तो हुआ", उन्होंने फैसला सुना दिया... 

और उस रस्सी की पिटाई शुरू कर दी...

कुछ और भी उनके साथ लग गये...

कुछ इसलिये कि उनको साँपों का डर है... 

तो कुछ इसलिये कि उनको साँप और रस्सी की समझ ही नहीं है... 

और कुछ सब कुछ जानते बूझते भी महज इसलिये ताकि उनको लाठी भाँजने का मौका मिले... 

शाम को घर आया तो देखा कि पिटते-पिटते रस्सी के कुछ डोरे जो अलग हो गये हैं उनकी भी पिटाई हो रही है, साँप का बच्चा बता कर... 

सड़क पर एक छोटा सा गोला बनाया गया है जिसमें मेरा नाम लिखा है, इसकी भी पिटाई हो रही है , साँपों का संगी होने के अपराध में...

पिटाई का यह क्रम अभी भी बदस्तूर जारी है...

उधर मुझे पता चला है कि उनके खुद के घर के लॉन में साँप ने बांबी बना ली है... 

उनको अपना देवर कहता है... 

और रस्सी पीटने के काम में हर समय सहयोग का वादा भी करता है !





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13 टिप्‍पणियां:

  1. आजकल यही ज़माना चल रहा है -
    'जिसकी लाठी उसका सांप'

    इससे प्राप्त होता है समाज सुधार का प्लेसिबो इफ़ेक्ट.
    :)

    एक सवाल यह उठता है की अगर
    इंसानी दिमाग स्त्री और पुरुषों को अलग-अलग तरीके से देखता है. स्त्रियों का दिमाग भी यह भेदभाव करता है.
    तो क्या इंसान का दिमाग़ सांप और मादा सांप को भी अलग अलग तरह से देखता है ?

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  2. सड़क पर एक छोटा सा गोला बनाया गया है जिसमें मेरा नाम लिखा है, इसकी भी पिटाई हो रही है , साँपों का संगी होने के अपराध में...
    great you realized whey you became the target

    उधर मुझे पता चला है कि उनके खुद के घर के लॉन में साँप ने बांबी बना ली है...

    उनको अपना देवर कहता है...

    Looks like snake is female else devar is not correct

    and if the snake is female then why use saanp use saanpin :))

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    उत्तर
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      मित्र बेनामी 'देव',

      १- टीप तो आपने आपत्तिजनक नहीं दी है, फिर बेनामी क्यों... खैर मुझे क्या, आपका अपना फैसला है, सही ही होगा...

      २- @ and if the snake is female then why use saanp use saanpin :))

      देखने वाले थोड़ा दूर से ही देखते हैं न, बेचारे नर-मादा का फर्क नहीं कर पाये... इसलिये सांप ही लिखा है... :))


      ...

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    2. घटना चाहे झूठी हो या सच्ची है !
      पर पाखण्ड-खंडन की यह रीति अच्छी है |
      विज्ञान के युग की यह 'प्रौढ़ दुनियाँ'-
      'सोच के संसार' में अभी बच्ची है !
      अच्छी बात के लिये साधुवाद !!

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  3. कल ही डिस्कवरी पर देख की सांप के जानकार बता रहे थे की भारत में हर साल कितने सांप मार दिये जाते है सांप के जानकार है उन्हें उनसे लगाव है बुरा लग रहा था उन्हें , पास में खड़े भारतीय ने उनकी जानकारी दुरुस्त की की उससे ज्यादा सांपो के काटने से लोग मर जाते है क्योकि ये भारत है यहाँ सांप काटे की दवा इतनी आसानी से नहीं मिलती है बेचारा पीड़ित तड़प तड़प के मर जाता है , आप तो जानकार है आप को सांप थोड़े ही कटेगा और काट भी लिया तो दवा है आप के पास जिन्हें कटता है उनसे पूछिये की दर्द और मौत क्या होती है या अपने छोटे बच्चो के साथ उसके काटे जाने के डर में रहना , बेचारे मुस्करा के रहा गये और कहा ये तो है | जैसे अपना पालतू कुत्ता सभी को प्यारा होता है वो अपने मालिक को नहीं काटता है , काटे तब भी मालिक उसका बचाव ही करता है , आखिर उनमे एक रिश्ता जो है , दर्द तो उसको होता है जो किसी और के पालतू कुत्तो द्वारा काटा जाता है , और उसके बाद उसे डर लगता है की मोहल्ले से इन कुत्तो को नहीं हटाया तो कल को हमारी बेटियों को भी काट खायेगा , उनका दर्द तो बर्दास्त नहीं होगा , ठीक है की अब १४ इन्जेकशन नहीं लगाने पड़ते है किन्तु काटने का दर्द तो होगा ही ना , याद रखियेगा की कुत्ते के काटने पर दोष मालिक का होता है | वैसे वो रस्सी है ये तो आप कह रहे है ये आप का नीजि नजरिया है क्या पता वो सांप ही था गलती आप से हुई आप ने उसे ठीक से देख ही नहीं , क्या पता की किसी ने आप के प्राण बचाये और आप अभी भी उन्हें मुर्ख कहे जा रहे है , क्या पता आप ही गलत का साथ दे सभी के जान के दुश्मन बन गये हो , क्या पता की सच क्या है , सभी का अपना नजरिया होता है चीजो को देखने का :)

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      अंशुमाला जी,

      "वैसे वो रस्सी है ये तो आप कह रहे है ये आप का नीजि नजरिया है क्या पता वो सांप ही था गलती आप से हुई आप ने उसे ठीक से देख ही नहीं , क्या पता की किसी ने आप के प्राण बचाये और आप अभी भी उन्हें मुर्ख कहे जा रहे है , क्या पता आप ही गलत का साथ दे सभी के जान के दुश्मन बन गये हो , क्या पता की सच क्या है , सभी का अपना नजरिया होता है चीजो को देखने का :) "

      यह क्या कह रही हैं आप ? रस्सी की पिटाई से पहले खींची इतनी साफ क्लोज-अप फोटो लगायी है फिर भी आपको उसके साँप ही होने का शक हो रहा है... :(

      मेरी न मानती हों तो फोटो किसी दूसरे को दिखा ही पूछ लीजिये कि साँप है या रस्सी... :))


      ...

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    2. १- फोटो तो रस्सी की है किन्तु फोटो से ये तो नहीं पता चल रहा है की फोटो उसी रस्सी की है जिसे लोगों ने पिटा , हा मेरे पास ऐसे कई लिंक जरुर है जिसे देख कर आप को कोई शक नहीं होगा, जहा आप भी लोगों के साथ मिल कर उस सांप को पिट रहे थे जिसे वो लोग रस्सी रस्सी कह चिल्ला रहे थे जिनके अपनो ने उस सांप को छोड़ा था , आज ये सांप आप के अपनो ने छोड़ा है तो आज आप रस्सी रस्सी बोल रहे है , बोलिये तो लिंक दे दू आप को :)
      २- सांप अपनी बांबी में रहता है यदि कोई उसे छेड़ने के लिए उसकी बांबी में हाथ डालेगा तो सांप तो कटेगा ही , उसके बाद लोग धडियाली आँसू बहाते है , इसमे गलती सांप की नहीं हाथ डालने वालो की होती है |
      ३- @ मैं तो 'काले' को 'काला' ही कहूँगा और 'सफेद' को 'सफेद' भी, आप की मर्जी आप मुझे जो कुछ भी कहो . .
      ये क्या आप ने तो कहा की आप हमेसा स्पष्टवादी रहेगे काले को काला कहेंगे किन्तु आप ने भी काले को गहरा ग्रे कहना शुरू कर दिया , अफसोस ! :(
      दिमाग में एक गाना गूंज रहा है ,
      वक्त ने किया क्या हंसी सितम तुम रहे ना तुम हम रहे ना हम .........................:(

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  4. :-) जान गुडी का एक उपन्यास है द स्नेक ,,बहुत ही रोचक -सारी तैयारियों ,मिलट्री आपरेशन के बाद वह भयानक माम्बा मारी गयी तो पता लगा वह मादा थी और किसी को यह पता नहीं था कि अभी पिछले महीने बसंत में उसने छः अंडे दिए थे जो बिल्कुल स्वस्थ थे और कुछ ही दिनों में अंडे फूटने वाले थे और लोग अब निश्चिंत थे ---कहाँ एक ही काफी थी अब तो ...... :-)

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  5. यह सत्य है कि जिसके दिमाग में साँप छा जाता है वह रस्सी को भी साँप समझकर पीटने लगता है। सिक्के का दूसरा पहलू भी उतना ही सत्य है। वह साँप को भी रस्सी समझ कर गले में लपेट लेता है। किस्मत वाला हुआ तो साँप काटता भी नहीं लेकिन हर बार यह पूर्वाग्रह पालने वाला व्यक्ति अधिक दिनो तक साँप के काटने से बचा नहीं रह सकता। तुलसी बाबा पत्नी के प्रेम में दीवाने थे उन्होने साँप को भी रस्सी समझ कर चढ़ लिया और पत्नी के हाथों अपमानित हुए। बुद्धिमान वही है जो साँप को साँप और रस्सी को रस्सी देख पाये।

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  6. http://mypoeticresponse.blogspot.in/2012/09/proficient-satisfied-lotus-means-tug-of.html

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  7. एक जगह खाली थी ।

    आभार आपका लिंक है यहाँ -

    अच्छी है रस्सा-कसी, हंसी-रुदन है साथ ।

    रस्सी अपने हाथ में, नागिन उनके हाथ ।

    नागिन उनके हाथ, लिया गिन गिन के बदलें ।

    बदले न हालात, मोरचे चलते अगले ।

    मारक विष तैयार, बड़ी भारी नर-भक्षी ।
    जो भी जाए हार, हार डाले वो अच्छी ।।


    उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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  8. शुक्र है, रस्सी ही पिटती है। पिटने दीजिये, आप आनन्द में रहिये।

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