शनिवार, 15 सितंबर 2012

दोबारा यही कहूँगा कि आने दो एफडीआई को मल्टी ब्रान्ड रिटेल में... देख ली जायेगी...

13 टिप्‍पणियां:

  1. मेरे कुछ प्रश्न है :
    1.अमरीका मे वाल-मार्ट जैसे महाकाय रीटेल माल होने के बात 10x10 कमरे वाले 7/11 बंद हो गये है क्या ?
    2.क्या थम्स अप/लिम्का जैसे ब्रांड की बिक्री कम होने का कारण पार्ले का लालच नही था जिसने इन्हे कोक को बेच दिया ?
    3.भारत मे पेप्सी के नमकीन ज्यादा बिकते है या हल्दीराम के ?
    4.क्या वालमार्ट भारत के हर नुक्कड़ चौराहे पर दुकान खोल रहा है ? दिल्ली जैसे शहर मे वालमार्ट कितने माल खोल पायेगा ?
    5. क्या वालमार्ट नुक्कड़ के पंसारी की तरह उधारी पर घर पहुंच किराना देगा ?

    और सबसे महत्वपूर्ण

    6.क्या नुक्कड़ का पंसारी वालमार्ट की तरह पक्का बिक्री कर वाला बिल देगा ?
    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  2. हम कोई मध्यमार्ग नहीं अपना सकते क्या ? कुछ सुझाव देगें ? सनम न तुम हारे न हम !
    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  3. मध्यम मार्ग अधिकातर घाटा पहुँचाता है शायद…कम कीमत पर सामान…हा हा हा , यह कम कीमत ने ही सब की जान ली न!…चार इंच कैसे फूलेगा…गुब्बारा नहीं है…इक़बाल साहब ने अपने को कुछ अधिक ईमानदार दिखाने के लिए यह पँक्तियाँ लिख मारीं थीं कि सब भारतीय इस नशे में ऐसे डूबें कि उतरने में शताब्दियों का या सहस्राब्दियों का समय लग जाय। ……अंग्रेज भी भारत में सिर्फ़ एक ही जगह व्यापार कर रहे थे न शुरू में, फिर देखा गया कि क्या होता है…और हाल से सारा मुल्क वाकिफ़ है…
    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  4. बदलाव को कोई रोक न पायेगा। हम आर्थिक प्रगति भी चाहें और प्रोटेक्शन भी, यह चल नहीँ पायेगा। अपने घर में जहां अक्षमता है, वह हटानी ही होगी।
    आप की पोस्ट से लगभग सहमत।
    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  5. आज के ज़माने में बड़ा मुश्किल है यूं दरवाज़े बंद करके बैठ पाना
    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  6. गणित तो हमारे पक्ष में है पर राजनीति कभी साथ नहीं रही।
    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  7. मेरी टिप्पणी कहाँ गायब हो गई?…देखिए शायद स्पैम में हो…वैसे गणित और हिसाब-किताब अच्छा रहा।
    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  8. .
    .
    .
    @ प्रिय चंदन कुमार मिश्र जी,

    धन्यवाद, स्पैम में केवल एक आपकी ही नहीं आशीष जी की टिप्पणी भी फंसी थी... दोनों को उबार दिया है... :)



    ...
    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  9. .
    .
    .
    @ आशीष श्रीवास्तव जी,

    2.क्या थम्स अप/लिम्का जैसे ब्रांड की बिक्री कम होने का कारण पार्ले का लालच नही था जिसने इन्हे कोक को बेच दिया ?

    जहाँ तक मुझे याद है पारले के रमेश चौहान कोक-पेप्सी का मुकाबला नहीं कर पाये इसलिये लिम्का-थम्स अप कोक को बेच कर कोक के ही बॉटलर बन गये थे...


    6.क्या नुक्कड़ का पंसारी/चौराहे का होटल वाला/मेन मार्केट का रेडीमेड वाला वालमार्ट की तरह पक्का बिक्री कर वाला बिल देगा ?

    आपने सही जगह चोट मारी है मझोले शहरों में कई बार मेरे साथ ऐसा हुआ है कि मैंने कोई महंगी जैकेट आदि खरीदी और पक्के बिल की माँग की तो मुझे वह सामान ही देने से मना कर दिया गया... एकाध अपवाद को छोड़ हमारे अधिकाँश खुदरा दुकानदार खुल्लम खुल्ला कर चोरी करते हैं और व्यापार मंडल आदि बना कर कर चोरी रोकने के लिये किये जा रहे प्रयासों में अवरोध डालते हैं... आज हमारे मूलभूत ढांचे में जो कमियाँ है उसका अहम कारण है सरकार के पास आर्थिक संसाधनों की कमी... और छोटे-मझोले दुकानदारों व व्यापारियों द्वारा की जा रही कर चोरी इसका एक अहम कारण है।... यह वर्ग सबसे ज्यादा मुखर व राजनीतिज्ञों को साध लेने में निपुण भी है ।




    ...
    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  10. .
    .
    .
    @ प्रिय चंदन कुमार मिश्र जी,

    ईस्ट इन्डिया कम्पनी के समय स्थितियाँ दूसरी थीं... सैकड़ों राजे-रजवाड़ों-निजाम-रियासतों में बंटा मुल्क... आज हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं... २१ वीं सदी के आत्मविश्वासी भारत को अपना बाजार खोलने से बाकी दुनिया के बाजार भी अपने लिये खुले मिलेंगे... जब पहली बार भारत में कंप्यूटर टैक्नॉलॉजी लाने की बातें हुई थी तो भी कइयों ने विरोध किया था... आज आइटी हमारा सबसे बड़ा एक्सपोर्ट है...

    प्रयोग के तौर पर ५३ शहरों में आजमाने में कुछ बुराई नहीं है... हो सकता है कि इम्प्रोवाइज करने की हमारी क्षमता के कारण १०-२० साल बाद 'हिन्दमार्ट' अमेरिका में जाकर वालमार्ट को टक्कर दे... नये दौर के हिन्दुस्तानी को प्रतिस्पर्धा में अव्वल आना सीखना ही होगा !



    ...
    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  11. आदरणीय,

    यह ब्लागर इन दिनों पगलाया हुआ है, टिप्पणियों को इस हाल तक रोज पहुँचाया जा रहा है। धन्यवाद स्वीकार है।

    -----

    स्थितियाँ दूसरी या और थीं। ये हर तरह के लोग, हर तरह से प्रयोग करते रहे हैं। …

    यहाँ या इस बार तकनीक नहीं, घुमावदार सीढी आ रही होगी। और बात रही साफ्टवेयर की तो…भारत, हमारा देश हार्डवेयर में उधार और भीख से ही काम चला रहा है। साफ्टवेयर का क्या है, वह तो भारत ऐसा बनाता है कि दुनिया के सबसे बेहतरीन साफ्टवेयर डाटाबेस, सर्वर आदि किसी जगह कोई स्थान नहीं दिखता। निर्यात तो होता है लेकिन पता नहीं किस तरह का कि बस सामान्य ज्ञान की पत्रिकाओं-किताबों में या अखबारों में 'देखने' भर के लिए और खुश होने भर के लिए।

    खुला बाजार…और पक्का बिल…कुछ बातें सही तो हैं ही आप सबकी। लेकिन कागजी काम और धोखे का, और लूट का होता है। इसका गणित भी अधिक मुश्किल नहीं। हम इससे इत्तेफाक नहीं रखते कि खुला बाजार, अर्थतंत्र, सकल घरेलू उत्पाद…ये सब क्या है, कितना है कि भारत तेजी से बढता देश है जैसे जुमलों पर ताली बजाएँ बल्कि इन बातों का, इन तालियों का भारत पर वास्तविक (कागजी नहीं)असर कैसा और क्या पड़ता है और हम देखते क्या हैं, हर रोज सच कैसा है?…

    धीरे-धीरे एकाधिकार का ही इतिहास रहा है ऐसे कामों का। …जरा कम समझते हैं हम। मॉल और ऐसे मार्ट में घूमते भी नहीं, साधारण दुकान और साधारण खरीदार…इसलिए कुछ खास असर व्यक्तिगत भी नहीं पड़ेगा हमपर। फिर भी, कुछ इधर उधर हुआ, तो क्षमा चाहेंगे।

    और हाँ, 53 क्या जहर का पैकेट एक आदमी पर आजमाना भी काफी होता है परिणाम के लिए।
    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  12. मेरी टिप्पणी फिर कहाँ गायब हो गई? मेरे साथ कुछ अधिक हो रहा है ऐसा…
    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
  13. हा भाई देख ली जाएगी क्योकि हमारा तो कोई नुकशान तो होने वाला नहीं है | जब देशी लोगो को बड़े बड़े मॉल खोलने की इजाजत दी गई थी तब भी यही दलील दी गई थी की लोगो को सस्ता सामान मिलेगा और मिला क्या आज भी इन मॉल में १०- ५० पैसे की भारी भरकम छुट हमें मिलती है इन शानदार मॉल में और बदले में ५०० की जगह १००० का बिल बनवाके आते है | किसानो के बारे में भी यही कहा था की उन्हें सीधी खरीद से दाम अच्छे मिलेंगे देखिये पिछले दसक में किसान कितने अमीर हो गये आत्महत्या कर मुआवजा पा कर | मंत्री जी कहते है की देशी को छुट दी थी तब भी ऐसे ही हल्ला हुआ था बताइए क्या फर्क बड़ा किराने वाले को, सही कहा मंत्री जी मॉल में खरीदने वाले तो आसमान से टपके है न किराने वाले के ग्राहक तो कही गये ही नहीं | आ जाने दीजिये फिर देखि जाएगी फिर होगा वही "भयल बिया मोर करबो का " उसके बाद मर के जी के निभानी ही पड़गी क्योकि तलाक तो हमारे यहाँ मान्य नहीं है | तैयार रहो जनता रूपी बेटी सरकार की साख के लिए सरकारी ऑनर किलिंग के लिए |
    प्रत्‍युत्तर देंहटाएं
     
     
     
     
    ________________________________________________________
    ________________________________________________________
     
    विशेष :- यह पोस्ट पहली बार इस ब्लॉग पर  ३० नवम्बर, २०११    को लगाई गयी थी, तब सरकार ने कदम पीछे खींच लिये थे, अब फिर वही फैसला हुआ है, इसलिये पोस्ट टिप्पणियों सहित जस की तस लगाई जा रही है ।

    ______________________________________________________________
    ______________________________________________________________
     
     
     
     
     
     
     
    आभार !
     
     
     
     
     
    ... 

4 टिप्‍पणियां:

  1. पुरानी बातों से सहमत...हमें परोपकार का शौक है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. कोई अर्थशास्त्री ही अब विवेचन करे ०हमतो कन्फ्यूजिया गए हैं अब !

    उत्तर देंहटाएं
  3. हर तरफ़ चीज़ें बिक रही हैं लेकिन न तो वे चीज़ें हमारी बिक रही हैं और न ही उन्हें हम बेच रहे हैं। वे चीज़े मल्टीनेशनल कंपनियों की बिक रही हैं और हम उन्हें ख़रीद रहे हैं।
    अगर हम आपके गुणा भाग से देखें तो साफ़ नज़र आता है कि
    धन वर्षा अब आपके अपने हाथ में है

    उत्तर देंहटाएं
  4. विदेशी पूंजी निवेश से देश का नुकशान ही होगा क्योंकि ये कंपनियां यहाँ पर किसानो ,उपभोक्ताओं का फायदा करने के लिए तो आ नहीं रही है इनको तो अपने मुनाफे से मतलब है !!

    उत्तर देंहटाएं

मेरे इस आलेख को पढ़ कर ही यदि आपके मन में कोई विचार उत्पन्न हुऐ हैं तो कृपया उन्हें 'नेकी कर दरिया में डाल' की तर्ज पर ही यहाँ टिप्पणी रूप में दर्ज करें... इस टिप्पणी के पीछे कोई अन्य छिपा हुआ मंतव्य न रखें, आप इसे उधार में मुझे दी गयी टिप्पणी न समझें, प्रतिउत्तर में आपके ब्लॉग पर टिप्पणी करने की किसी बाध्यता को मैं नहीं मानता व मुझसे या किसी अन्य ब्लॉगर से भी ऐसी अपेक्षा रखना न तो नैतिक है न उचित ही !... मैं किसी अन्य के लिखे आलेखों पर भी इसी नियम व भावना के तहत टिपियाता हूँ !

असहमति को इस ब्लॉग पर पूरा सम्मान दिया जाता है, आप मेरे किसी भी विचार का खुल कर विरोध या समर्थन कर सकते हैं, परंतु अशिष्ट या अश्लील भाषा यु्क्त अथवा किसी के भी ऊपर व्यक्तिगत आक्षेपयुक्त टिप्पणियाँ कृपया यहाँ न दें... आप अपनी टिप्पणियाँ English, हिन्दी, रोमन में लिखी हिन्दी, हिंग्लिश आदि किसी भी तरीके से लिख सकते हैं... नहीं कुछ लिखना चाहते हैं तो भी चलेगा... आपके आने का शुक्रिया... आते रहियेगा भविष्य में भी... आभार!