शुक्रवार, 31 अगस्त 2012

बार-बार बवाल पर बवाल, आखिर क्यों... हमें ब्लॉगिंग के चरित्र को ठीक से समझना होगा !

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ऑक्सफोर्ड एडवान्स्ड लर्नर्स डिक्शनरी
blog noun
(also weblog) a website where a person writes regularly about recent events or topics that interest them, usually with photos and links to other websites that they find interesting

डिक्शनरी.कॉम
blog
[blawg, blog] Show IPA noun, verb, blogged, blog·ging. noun
1.a Web site containing the writer's or group of writers' own experiences, observations, opinions, etc., and often having images and links to other Web sites.

ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी
Definition of blog noun
a personal website or web page on which an individual records opinions, links to other sites, etc. on a regular basis.



ब्लॉग आखिर है क्या ? ऊपर मैंने तीन विभिन्न स्रोतों से ली गयी शब्द 'ब्लॉग' की परिभाषायें दी हैं... Weblog के संक्षिप्तीकरण से बना यह शब्द एक सीधा सरल अर्थ रखता है वह यह कि यह ब्लॉगलेखक (या समूह ब्लॉग लेखकों की भी) की एक तरह की ऑनलाइन डायरी है जिसमें वह अपने अनुभव, प्रेक्षण व विचार आदि के बारे में लिखता है व उनको और विस्तार देने के लिये नेट पर उपलब्ध अन्य स्रोतों से लिंक भी करता है...


स्पष्ट है कि जिस तरह डायरी लेखन हर कोई कर सकता है उसी तरह ब्लॉगिंग भी पूरी तरह लोकतान्त्रिक है... हर कोई ब्लॉगिंग कर सकता है... सामान्य डायरी लेखन व ब्लॉगिंग में फर्क सिर्फ इतना है कि ब्लॉगिंग में यदि ब्लॉगलेखक चाहे तो वह पाठक के लिये टिप्पणी देने का विकल्प खुला रख सकता है... ब्लॉग लिखने के लिये और कोई शर्त नहीं है... ईमानदार-भ्रष्टाचारी, सद्विचारी-लंपट, आस्तिक-नास्तिक, वैज्ञानिक-रूढ़िवादी, वैज्ञानिक-पुरातनज्ञानवादी, आधुनिक-परंपरावादी, नारीवादी-नारीद्वेषी misogynist, शाकाहारी-माँसाहारी, धर्मस्नेही-धर्मविरोधी, अमीर-गरीब, विद्वान-जाहिल, गुरू-चेले, एकलिंगी-उभयलिंगी, धर्म मंडक-धर्म खंडक, पाखंड मंडक-पाखंड खंडक, मठाधीश-महंत... हर किस्म का इंसान ब्लॉग लिख सकता है... यह भी जरूरी नहीं कि यहाँ हर कोई किसी अच्छे मंतव्य के साथ ही आये... कोई धर्म प्रचार के लिये आयेगा तो कोई किसी दूसरे का धर्म परिवर्तन करने के लिये ब्लॉग लिखेगा... किसी को अपनी पत्नि या पति के अतिरिक्त भी एक दो और के साथ संबंध बनाने की चाह होगी... तो कोई अपना कुछ माल भी बेचने का प्रयत्न करेगा... किसी को अपनी छपास की भूख मिटानी होगी... तो कोई अपना पांडित्य बघारना चाहेगा... कोई सरकारी अनुदान पाने व उनको हजम करने का उद्देश्य ले ब्लॉगिंग में उतरेगा... तो कोई अपने लिये किसी कुर्सी या पीठ का जुगाड़ कर भविष्य सुरक्षित करने का यत्न करेगा.. कोई खाली टाइमपास करेगा... तो कोई वाकई कुछ कालजयी भी लिख जायेगा...कोई छद्म विचारधारा का प्रसार करेगा... तो कोई केवल भ्रांतियों व अफवाहों को अपने स्वार्थ के लिये पोषित करने आयेगा... किसी को सम्मान की चाह होगी तो किसी को थोड़ी सी पहचान की भी... कोई केवल इनाम बाँटने आयेगा तो कोई उन ईनामों को बटोरने भी... सीमा पर तैनात सैनिक भी ब्लॉग लिखेंगे तो जेल से हाल ही में छूटे कैदी भी... कुल मिलाकर समाज का हर रंग, हर अच्छाई, हर बुराई, हर विद्रूप, हर त्रासदी, हर न्याय, हर अन्याय, हर सौन्दर्य, हर कुरूपता, हर खुशी,हर गम.... जो कुछ भी है समाज में... आपको दिखेगा ब्लॉगिंग में भी... यही ब्लॉगिंग की असल ताकत भी है...


हर ब्लॉगर अपनी मर्जी का मालिक है यहाँ... आप उसको किसी खास तरह से सोचने या किसी खास तरह से बर्ताव करने को बाध्य नहीं कर सकते... आप को उसका कथ्य या कृत्य उचित नहीं लगता तो आप उसके ब्लॉग पर न जायें... इससे अधिक कुछ करना न उचित है और न ही इसकी जरूरत है...


तो ऐसे में किसी के ईनाम बाँटने या ईनाम बाँटने के बहाने कुछ ईनाम खुद ले लेने को लेकर यह सब बवाल क्यों भाई... और हाँ, लंपट कहे जाने पर भी इतना बवाल करने की आवश्यकता नहीं है... लंपट के अर्थ इस प्रकार बताये गये हैं...

लंपट 

कामुक (lecherous)
गुंडा (hooligan)
छलकर्ता (deceiver)
परगामी (पुरुष) (adulterous(male))

लीजिये मैं यहाँ पर खुल्लम खुल्ला खम ठोक कर कह रहा हूँ कि हिन्दी ब्लॉगिंग में लंपटों की संख्या किसी भी मायने में आज के हमारे समाज की तुलना में कम नहीं है...


लो अब बन पड़े तो कर लो बवाल...


मेरे (यानी एक ब्लॉगर के)  ठेंगे से... 




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10 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ बातो से सहमत हूं और कुछ से नहीं , जैसे की ब्लॉग कोई भी लिख सकता है , ब्लॉग पर आप कुछ भी लिख सकते है , किसी भी विषय पर लिख सकते है अपनी अच्छी गन्दी जो भी सोच है लिख सकते है किन्तु परन्तु लेकिन but कोई आलोचना पसंद नहीं करता है तो उसके ब्लॉग पर जा कर बार बार आलोचना कर उसे चिढाने या परेशान करने का प्रयास, गलत है ( जैसा की आप ने कहा की नहीं पसंद है तो मत जाइये ), आप ने ब्लॉग तो सभी के लिए बनाया और निरंतर उस पर व्यस्क सामग्री डालने लगे किसी पोर्न साईट का लिंक , तो कभी महिलाओ की नग्न तस्वीरे , या महिलाओ के अंगो पर चर्चा, ब्लॉग पर आप आराम से अपनी मर्जी से व्यस्क सामग्री डाल सकते है कोई रोक नहीं है किन्तु उसे उस श्रेणी में डालिये ताकि लोगों को पता रहे की वो किस तरह के ब्लॉग को पढ़ने जा रहे है , शब्दों को तो हम फिर भी अनदेखा कर सकते है किन्तु फोटो तो खुल कर सामने आ जाता है, जिन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है उसके लिए तो कोई बात नहीं किन्तु जिन्हें पड़ता है उनका ख्याल तो आप को रखना पड़ेगा ( मै इसे झेल चुकि हूं ) , किसी की आलोचना करनी है बिल्कुल कीजिये किन्तु किसी का नाम ले का गन्दी गालिया लिखना या गंदे अश्लील पोस्ट लिखना खास कर महिला ब्लोगरो के नाम ले कर बिल्कुल सहमत नहीं हूं , ब्लॉग पर हसी मजाक जितना करना है कीजिये किन्तु किसी का नाम लेकर या फिर महिला ब्लोगरो से या पुरुष ब्लोगरो से मेरे ऐसे रिश्ते है जैसे मजाक करने की छुट नहीं दी जा सकती है आप के जिससे रिश्ते है उन्ही को मजाक में शामिल कीजिये इस तरह बोल कर सभी को उसमे शामिल मत कीजिये ,विचारो को लेकर जितना कहना है कहिये किन्तु किसी ब्लोगर के व्यक्तिगत जीवन को ले कर कटाक्ष करना फलाने ने शादी नहीं की तो ऐसी है फलाने को बच्चे नहीं है तो ऐसा है फलाने का परिवार ऐसा है ये बिल्कुल ठीक नहीं है |
    लम्पट वाली बात पर आप से कुछ कुछ सहमत हूं कि वाकई यहाँ लंपटो की कोई कमी नहीं है किन्तु उससे ज्यादा अच्छे लोग है तो केवल कुछ ख़राब लोगों के कारण इस शब्द को इतनी प्रमुखता नहीं देनी चाहिए दूसरे अपना बच्चा कितना भी बुरा हो उसे मारने का अधिकार सिर्फ हमें होता है कोई और कुछ कहे तो बुरा तो लगता ही है ना :)))) और भी बाते है याद आने पर उसे भी लिख दुँगी बाद में फ़िलहाल के लिए इतना ही , मुझे लगता है अपने कलम की लम्बाई अपने नाक की लम्बाई तक ही सिमित रखनी चाहिए |

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    1. बिलकुल सहमत अशुमाला जी से… शानदार कोटेशन…
      "अपने कलम की लम्बाई अपने नाक की लम्बाई तक ही सिमित रखनी चाहिए|"
      अपनी कलम का रगड़ा इतना ही फैलाना चाहिए जिसे आपकी ही मर्यादा की चादर ढ़क सके।

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  2. ब्लॉग लिखने के लिये और कोई शर्त नहीं है... ईमानदार-भ्रष्टाचारी, सद्विचारी-लंपट, आस्तिक-नास्तिक, वैज्ञानिक-रूढ़िवादी, आधुनिक-पोंगापंथी, नारीवादी-misogynist, शाकाहारी-माँसाहारी, धर्मप्रचारक-धर्मद्रोही, अमीर-गरीब, विद्वान-जाहिल, गुरू-चेले, एकलिंगी-उभयलिंगी, धर्म मंडक-पाखंड खंडक, मठाधीश-महंत... हर किस्म का इंसान ब्लॉग लिख सकता है...

    यह बात तो आपकी सही है किन्तु कुछ पर्यायवाची युग्म भ्रामक है……
    आधुनिक-पोंगापंथी नहीं, आधुनिक- परम्परावादी.
    वैज्ञानिक-रूढ़िवादी नहीं, वैज्ञानिक-पुरातनज्ञानवादी.
    धर्मप्रचारक-धर्मद्रोही नहीं, धर्मप्रचारक-दृढधर्मी और धर्मसमर्पित-धर्मद्रोही या धर्मस्नेही-धर्मविरोधी।
    धर्म मंडक-पाखंड खंडक नहीं, धर्म मंडक- धर्म खंडक या पाखण्ड़ मण्डक-पाखण्ड़ खण्डक

    और सबसे बड़ा तत्व आपकी लेखनी से छूट गया…
    छद्म विचारधारा प्रसारक, भ्रांतियाँ व अफवाह प्रसारक

    आपने खम ठोक कर भली कही रे भले मानुष………
    "हिन्दी ब्लॉगिंग में लंपटों की संख्या किसी भी मायने में आज के हमारे समाज की तुलना में कम नहीं है..."
    ब्लॉगिंग में लालंपट अधिक ही मुखर है।

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  3. मीसोजिनिस्ट की हिन्दी =नारी विद्वेषी -जैसे अरविन्द मिश्र एक घोषित नारी विद्वेषी हैं ... :) (केवल उदाहरणार्थ )
    बाकी आपने धाँसू लिखा है -अब जितना लिखा है उससे बड़ी टिप्पणी आवश्यक नहीं लगती ..ब्लागिंग पर मैंने कुछ बोला है उस पर आयगें कि केवल टाईम खोटी वाली पोस्ट पर ही आते रहेगें ?:-)
    अब ब्लागिंग ..हम जो करें हमारी मरजी.....तुम साले********ओ तेरी मरजी ...मैं तो ***** करूँगा मेरी मरजी ....भी नहीं है प्रवीण जी :-)

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    आदरणीय सुज्ञ जी व अरविन्द मिश्र जी के सुझाये सुधार कर लिये गये हैं...
    आभार!



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  5. बहुत से बुरे लोग तो यहाँ है ही लेकिन पूरे ब्लॉगजगत को देखें और लम्पट शब्द को ध्यान में रखें तो जिसने भी ये आलोचना की है वह थोड़ी ज्यादा मालूम होती है इतना जरूर है कि यहाँ का माहौल अच्छा नहीं है बहुत से लोग मामूली बातों पर भी मतभेद की बजाए मनभेद पालने लगते है इसलिए विवाद खूब होते हैं लेकिन फिर भी उन्हें लम्पट तो नहीं कहा जा सकता हाँ जो वास्तव में लम्पट है उनका प्रतिशत कितना है?ये पाँच सात लोग ही बार बार गाली गलौच करते है या महिलाओं के नग्न चित्र लगाते है अश्लील कविता लिखते है जबकि हिन्दी ब्लॉग्स की संख्या चार पाँच हजार के बीच है।सभी ऐसा नहीं करते पर हमारा ध्यान नकारात्मक चीजों की तरफ ही ज्यादा जाता है।और देखिए अंग्रेजी के ब्लॉगो की तरह वर्डप्रेस पर भी हिंदी ब्लॉगो पर वैसी गंदगी नहीं मिलेगी जैसी ब्लॉगस्पॉट पर है।हमें ध्यान रखना चाहिए कि ऐसे लोगों का विरोध करें और न करें तो बहिष्कार ही करें।बाकी अंशुमाला जी कि इस बात से सहमत हूँ कि लिखने का अधिकार सबको है लेकिन कुछ बातें तो ध्यान रखनी पड़ेगी निजी डायरी से इसकी तुलना नहीं कर सकते यहाँ हमें दूसरे लोग भी पढ़ते है और उन पर इसका असर पड़ता है।

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  6. पहली नजर में उलझी सी, लेकिन एकदम सुलझी सीधी-सपाट बात.

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  7. बड़े लोगो की बड़ी बातें . सीधी सपाट चर्चा का आग्रही कहीं चुक हुई माफ़ी मांग लेंगे , हम भगवान नहीं बनना चाहते .

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