रविवार, 1 जनवरी 2012

'पारस' पत्थर को खोजने के लिये 'फलित ज्योतिष शास्त्रियों' द्वारा निकाले शुभ मुहूर्त में 'कीमियागिरी' का एक शोध विभाग खोले भारत सरकार... आइये मिल कर यह माँग करी जाये...

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भारतीय मूल के ब्रिटिश वैज्ञानिक व नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ० 'वेंकी' वेंकटरमण रामाकृष्णन ने चेन्नई में भारतीय विद्माभवन में आयोजित द्वितिय के०वी० नरसिंहम स्मृति व्याख्यान में यह बयान देकर हलचल सी मचा दी है...

उन्होंने कहा...

"He termed astrology and alchemy fake disciplines that depended on the power of suggestion and said homeopathy was based on belief."

यानी 'फलित ज्योतिष शास्त्र' व 'कीमियागिरी' छद्म विज्ञान हैं तथा सलाह-सुझाव की ताकत पर आधारित हैं व होम्योपैथी लोगों के विश्वास पर आधारित है ।

उन्होंने यह भी कहा कि...

"Both can lead people away from taking more effective actions based on logic and contemplation." 

यानी 'फलित ज्योतिष शास्त्र' व होम्योपैथी दोनों ही लोगों को तर्क व अवलोकन पर आधारित अधिक प्रभावी फैसले लेने से विरत करते हैं...

आगे वे कहते हैं कि...

"A culture based on superstition will always do worse than that based on science,"

अंधविश्वास पर आधारित कोई भी संस्कृति हमेशा ही विज्ञान पर आधारित संस्कृति से पिछड़ी ही रहेगी !


पर इस सबसे हमें क्या...    

डॉ० वेंकटरमण रामाकृष्णन को हमारे देश की अति प्राचीन व महान संस्कृति के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं है... वह केवल उसी के बारे में जानते हैं जो इंद्रियों से ग्राह्य है... जबकि यह सारे मामले हमारे व उनके ज्ञान व समझ से परे हैं...

इसलिये मैं आज ही भारत सरकार से माँग करता हूँ कि डॉ० वेंकटरमण रामाकृष्णन को मुँहतोड़ जवाब देने के लिये...

फलित ज्योतिष  को उसका प्राचीन गौरव फिर से लौटाने के लिये...
१- 'फलित ज्योतिष शास्त्र' को भारत का राष्ट्रीय विज्ञान घोषित किया जाये ।
२- भारत के हर विद्मार्थी को शब्दज्ञान होने के तुरंत बाद से ही फलित ज्योतिष का अध्ययन अनिवार्य हो।
३- भारत के हर विश्वविद्मालय में ज्योतिष विभाग हो।
४- प्रत्येक सरकारी व निजी संस्थान में फलित ज्योतिष शास्त्री का पद सृजित किया जाये...जन्मपत्री देख कर नयी भर्तियाँ हों तथा हर काम का समय शुभमुहूर्त देख कर ही तय किया जाये।

भारत को विश्व का सर्वाधिक अमीर देश बनाने के लिये...
१- कीमियागिरी का अखिल भारतीय संस्थान खोला जाये।
२- श्रेष्ठ भारतीय वैज्ञानिक वहाँ दिन रात पारस पत्थर बनाने के लिये या लोहे, जस्ते व ऐलुमिनियम जैसी सस्ती धातुओं को सोने में बदलने के लिये दिन रात रिसर्च करें... यह कला पहले हमें ज्ञात थी...
३- सफलता प्राप्त होते ही भारत के अंदर की हर लोहे की चीज, चाहे वह मैनहोल का ढक्कन ही क्यों न हो को सोने का बना दिया जाये ।
४- इस तरह भारत दुनिया का सबसे अमीर देश हो फिर से एक बार सोने की चिड़िया कहलाये।

होम्योपैथी जैसी परा-वैज्ञानिक पद्धति का लाभ जन-जन को देने के लिये...
१- होम्योपैथी हमारी राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित हो।
२- भारत के हर अस्पताल व क्लीनिक में होम्योपैथ की तैनाती हो।
३- प्रत्येक मरीज को अपनी किसी भी बीमारी के लिये सबसे पहले होम्योपैथ को दिखाना अनिवार्य हो... किसी भी दूसरी पद्धति की चिकित्सा तभी दी जाये जब होम्योपैथी से सफलता न मिले।
४- होम्योपैथी का प्रयोग पशु चिकित्सा में, फसल-सब्जी उगाने में व बागवानी में तो सफलतापूर्वक हो ही रहा है... अब इससे भी आगे जाकर रॉकेट फ्यूल में, आटोमोबाइल में, भवन-पुल-राजमार्ग निर्माण में, आदि आदि जीवन के हर क्षेत्र में होम्योपैथी का प्रयोग व इसके असर पर शोध की जाये ।




बताइयेगा जरूर कि क्या आप इन माँगों में मेरे साथ हैं कि नहीं ...








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16 टिप्‍पणियां:

  1. मुरली मनोहर जोशी को इन सभी कार्य का प्रभारी बनाया जाये।

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  2. प्रधानमंत्री बनाइए तो माँग सब पूरा कर देंगे।

    होमियोपैथी से कुछ जादे ही नाराज रहते है आप:)

    मतलब जब तक ई वेंकट जैसे बिदेसी कहें नहीं, माना नहीं जाय ? भाव कुछ जादे मिल रहा है इनको:)

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  3. आप की पहली दो मांगों में आप के साथ हूँ। लेकिन होमियोपैथी के मामले में नहीं। मैं ने अपने बच्चों, पत्नी और खुद की पिछले पच्चीस वर्ष में सिर्फ और सिर्फ होमियोपैथी से चिकित्सा की है। मैं पहले इस का असर देख कर चमत्कृत हुआ था। फिर इस का अध्ययन किया और इस का उपयोग। मेरा निष्कर्ष तर्क, अवलोकन और बिलकुल निजी अनुभव पर आधारित है और पूरी तरह सच्चा है।

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    1. महोदय होम्योपैथी के बारे में जैसे आपका अनुभव है वैसा ही मेरा भी है लेकिन जहाँ तक मेरी समझ में आया है वो ऐसा है की होम्योपैथी से जो परिणाम मिलते है वो होम्योपैथी दवा के न होकर शारीर के self healing power के होते है हालाँकि होम्योपैथी दवा में कोई दवा या केमिकल का अंश मौजूद नहीं होने से किसी विपरीत प्रभाव की आशंका नहीं होती इसलिए इसे प्लेसिबो के रूप में प्रयोग किया जा सकता है

      हटाएं
  4. आपने एक भूल की है आगे से सुधार कर तदनुसार लिखियेगा ..
    एस्ट्रोलोजी को हिन्दी में फलित ज्योतिष कहते हैं ज्योतिष विज्ञान नहीं..
    बाकी तो राम ही राखें... होमियोपैथी में कुछ ब्लागरों के तर्कातीत अभिरुचि से मैं खुद स्तब्ध और स्तंभित रहता हूँ!

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  5. आपके लेख को पढकर जितना आनन्द आया लेकिन उसका मजा आखिर की इस्माईली ने किरकिरा कर दिया :)

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    @ अरविन्द मिश्र जी,

    मेरी भूल की ओर ध्यानाकर्षण के लिये आभार... सुधार लिया है।



    @ नीरज रोहिल्ला जी,

    आपसे सहमत हूँ, स्माइली गैर जरूरी है यहाँ, हटा दी है।


    ...

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  7. वास्ते आशीष श्रीवास्तव ,
    गज़ब... :)

    वास्ते प्रवीण शाह जी ,
    ध्यान रहे ( आशीष जी के कहे अनुसार प्रभार में ) प्रस्तावित विभाग में धार्मिक अल्पसंख्यकों को 4.50 प्रतिशत विशुद्ध धर्माधारित आरक्षण का प्रावधान ज़रूर किया जाये :)

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  8. स्पैम नहीं चेक करते आप :)

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  9. दिमागी दिवालिएपन की दवा की खोज पहले करने की जरुरत है.


    बाकी का विज्ञान खुद ब खुद उद्घाटित हो जायेगा...


    तर्क और कुतर्क में भेद है...

    उत्तर देंहटाएं
  10. दिनेश राय द्विवेदी जी से सहमत हूँ....
    जिस विषय के बारे में हमारा ज्ञान सीमित हो उसपर आधिकारिक कमेन्ट नहीं करने चाहिए प्रवीण जी !
    शुभकामनायें आपको !

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  11. सिद्धार्थ जी से सहमत्……

    दिमागी दिवालिएपन की दवा की खोज पहले करने की जरुरत है.

    बाकी का विज्ञान खुद ब खुद उद्घाटित हो जायेगा...

    निरामिष शाकाहार प्रहेलिका 2012

    उत्तर देंहटाएं
  12. नोबल पुरस्कार का अर्थ वह विश्व और प्रकृति की हर विधा का जानकार हो गया है , कम से कम मैं इसे स्वीकार नहीं करता ! मैं एक नोबल पुरस्कार विजेता सिविल इंजिनियर हूँ और एलेक्ट्रोनिकी पर अपनी विशेषज्ञता दिखाते हुए अपनी राय देने का प्रयत्न, मंत्रमुग्ध भीड़ के सामने करूँ तो यह प्रयत्न सिर्फ शान बघारना ही माना जाना चाहिए ! उस भीड़ में खड़े ताली बजाते हुए आप भले सर हिलाते रहें पर मैं वहां से हटना बेहतर मानूंगा प्रवीण भाई !
    आपके इन सर्व विषय विशेषज्ञ ने, जीवन में शायद ही कभी मैटेरिया मेडिका पढ़ा होगा मगर होमेओपैथी को पारिभाषित कर अपनी राय ठोक दी !
    नोबल पुरस्कार विजेता का जीवन हमारे जितना ही होता है प्रवीण भाई ...... हाँ वे अपने विषय के पंडित अवश्य होते हैं, उनका आदर उसी पांडित्य के अनुसार होता है ! क्यों न इन नोबल पुरस्कार विजेता के हाथ में बैट देकर क्रिकेट में सेंचुरी बनाने को भेजा जाए ! आजकल हमें अच्छी बैटिंग की बहुत आवश्यकता है !
    मैं खुद ज्योतिष के बारे में कुछ नहीं जानता, मगर उसका खंडन इसलिए करने में अपने आपको योग्य नहीं मानता हूँ क्योंकि मैंने उसे कभी समझा ही नहीं !
    आशा है कि मैं अपनी बात को आपको समझाने में सफल रहा हूँ !
    :-)
    सादर....

    उत्तर देंहटाएं
  13. नोबल पुरस्कार का अर्थ वह विश्व और प्रकृति की हर विधा का जानकार हो गया है , कम से कम मैं इसे स्वीकार नहीं करता ! मैं एक नोबल पुरस्कार विजेता सिविल इंजिनियर हूँ और एलेक्ट्रोनिकी पर अपनी विशेषज्ञता दिखाते हुए अपनी राय देने का प्रयत्न, मंत्रमुग्ध भीड़ के सामने करूँ तो यह प्रयत्न सिर्फ शान बघारना ही माना जाना चाहिए ! उस भीड़ में खड़े ताली बजाते हुए आप भले सर हिलाते रहें पर मैं वहां से हटना बेहतर मानूंगा प्रवीण भाई !
    आपके इन सर्व विषय विशेषज्ञ ने, जीवन में शायद ही कभी मैटेरिया मेडिका पढ़ा होगा मगर होमेओपैथी को पारिभाषित कर अपनी राय ठोक दी !
    नोबल पुरस्कार विजेता का जीवन हमारे जितना ही होता है प्रवीण भाई ...... हाँ वे अपने विषय के पंडित अवश्य होते हैं, उनका आदर उसी पांडित्य के अनुसार होता है ! क्यों न इन नोबल पुरस्कार विजेता के हाथ में बैट देकर क्रिकेट में सेंचुरी बनाने को भेजा जाए ! आजकल हमें अच्छी बैटिंग की बहुत आवश्यकता है !
    मैं खुद ज्योतिष के बारे में कुछ नहीं जानता, मगर उसका खंडन इसलिए करने में अपने आपको योग्य नहीं मानता हूँ क्योंकि मैंने उसे कभी समझा ही नहीं !
    आशा है कि मैं अपनी बात को आपको समझाने में सफल रहा हूँ !
    :-)
    सादर....

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  14. बीजेपी की सरकार आने दीजिए आपकी सारी मांगे पूरी होगी फिर नास्तिकों का भी पक्का ताविज बनाया जाएगा। हा.हा.हा...

    पढ़ें- धर्म की भूमिका पर एक नजर

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