रविवार, 6 नवंबर 2011

भारत महादेश के 'नागरिक समाज' की जबरिया प्रतिनिधि बनी एक 'चौकड़ी' और उसके चंगुल में अन्ना !

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Very soon, I am thinking on the lines of restructuring the Core Committee. I am hereby informing all the members of Team Anna. The reason being I have received letters from all over the country and states in favor of this agitation saying, ‘I am ready to pledge my life for this noble cause.’ The letters are written by retired Supreme Court Judges, retired High Court Judges, Brigadiers and Colonels from Army, Professors and Principals and educated people with idealism. Soon, these people will be categorized taking in to consideration the type of work they are willing to do. I have decided to put to use such people from all over the country and states who are willing to do voluntary service to the society.
The applicants have no expectations whatsoever and have applied with the aim of serving the nation and the society at large. Now we need to ensure these people and expand the members of Team Anna. Also we need to have able people and form a working committee. All members from every state will be given preference when forming a Core Committee. For effective communication they will be linked on-line.
The expenses of food and shelter for say 100 volunteers will be fulfilled by donations from people having clean character. It will enable us to build an effective agitation throughout the country. We have a long battle to fight ahead. In order to have a corruption-free India we can put all this to use.The people who have been alienated from this agitation…. I believe that not only India but for other countries too this will serve as a good example to rid their country off corruption. We do not want to form organizations but create volunteers on District and State level.
When there is an agitation happening at national level you will see people rising for the occasion from every state. In this struggle there won’t be a President, a Secretary or a treasurer. People will only work in the capacity of volunteers. Naturally we will need financial aid. No cash will be accepted. Donations in form of cheque or draft are welcome. But it should come from people having belief in lakhs of martyrs like Bhagat Singh, Rajguru and Sukhdev.
K.B Hazare
23.10.2011



ऐसा चाहा था अन्ना ने !

आंदोलन की 'कोर कमेटी' को और व्यापक व विस्तारित करने की इस इच्छा में कुछ भी गलत नहीं है...


अब इस बात का पुख्ता सबूत भी पेश कर दिया गया है कि वाकई अन्ना हजारे ने ही ऐसा चाहा था, फिर भी ऐसा लिखने पर राजू पारूलेकर को निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा टारगेट कर बदनाम व अपमानित किया जा रहा है... 

फिर भी मौन हैं अन्ना...

यद्मपि मैं इस आंदोलन के तौरतरीकों को सही नहीं मानता और परिणामों को लेकर भी अन्ना जितना आशावान नहीं, परंतु एक व्यक्ति के तौर पर अन्ना का प्रशंसक हूँ... इसलिये इस प्रकरण पर उनका रवैया खलता है... क्या यह आशा नावाजिब है कि एक ऐसा शख्स जिसकी ओर देश एक आशा से देख रहा हो, और कुछ नहीं भी तो कम-से-कम सत्य को कहने-स्वीकारने का साहस दिखाये...

मैं आपके लिये दिल से चिंतित हूँ अन्ना... 

आप कुछ कुपात्रों के चंगुल में फंसे दिखते हैं अब...

मेरी शुभकामनायें आपके साथ हैं !

 










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4 टिप्‍पणियां:

  1. अन्ना तो शुरू से इशारे से और उधार की बुद्धि से चल रहे हैं इस पूरे प्रकरण में…

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  2. अन्ना को इस विवाद को स्पष्ट करना चाहिए और राजू की ओर से उठाए गए प्रश्नों का उत्तर देना चाहिए।

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  3. बहुत उम्दा!
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    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है! सूचनार्थ!

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