शुक्रवार, 22 जुलाई 2011

लाइट लो यार ... :)

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बड़ी अजीब चीज है यह सावन का महीना भी... जब तक मेघ बरसता है तो ठंडा-ठंडा कूल-कूल लगता है... पर जैसे ही बरसना रूका और धूप निकली तो... बाप रे बाप... कभी देखा है कि कितनी तेज होती है सावन की धूप... हवा बारिश से धुली हुई होती है, वातावरण में लेश मात्र भी धूल नहीं होती... कोई रूकावट या ठहराव नहीं धूप के रास्ते में... देहात में कहते हैं कि सावन की यही धूप तो हिरन के बच्चे तक को काला कर देती है... पर अपनी दिक्कत कुछ और ही है... एकाध घंटे इस धूप में गये नहीं कि पूरे सिर पर अनेकों छोटे छोटे खुजली करते दाने हो जाते हैं... और पिछले कई साल से इलाज भी सीधा सादा है वह है सर घुटवा देना... आज छुट्टी मिली थी मुझे, सिर घुटवा और चंपी करवा आया हूँ... खाना लगने वाला है मेज पर... बहुत दिनों से कुछ लिखा भी नहीं है ब्लॉग पर... सोच रहा हूँ कि कुछ तो लिख टाँग ही देता हूँ अपने भी जिंदा होने की सनद देते हुए...

आजकल टीवी बहुत देखता हूँ... ध्यान देकर कुछ नहीं देखता बस सुबह होते ही ऑन कर देता हूँ उसे... जितना समय घर में बिताता हूँ वह चलता ही रहता है...

बहुत कुछ घट रहा है दुनिया में, या फिर सब कुछ वैसा ही है पहले जैसा ही... कई दिन से चैनल वाले परेशान हैं सचिन की सौंवी सेंचुरी के लिये... एंकर ऐसे बिहेव करते हैं मानो दुनिया का भविष्य उसी पर टिका हो... सुबह सुबह ' जीवन का आधार ' चैनल पर बाबा युवक और युवतियों से देश सेवा के लिये जीवनदान देने की अपील करते हैं... वही बाबा, जो गिरफ्तारी देने पर गीदड़ की मौत मरने के भय से स्त्री वेश धारण कर बाहर जाने की फिराक में थे... आज सोचता हूँ कि यदि वे उस दिन बाहर जाने में कामयाब हो जाते और तीन चार दिन तक उनका पता ठिकाना न मिल पाता तो क्या कुछ घट जाता देश में... गाँधी टोपी धारी दूसरे नागरिक समाज के प्रतिनिधि अपनी बताई तारीख पर आमरण अनशन करने पर दॄढ़ हैं फिर से... पर ऐसा करने से पहले सुप्रीम कोर्ट से यह आश्वासन भी ले लेना चाह रहे हैं कि उनके खिलाफ कोई कारवायी न हो...

एक बंदा पकड़ा गया है अमेरिका में... जो आईएसआई से पैसे लेकर कश्मीरी अलगाववादियों के लिये लाबिईंग करता था... अपने यहाँ ऐसे न जाने कितने होंगे, हरदम गाल बजाते हुए... पर उनके खिलाफ कुछ नहीं होगा... इंग्लैंड में फोन हैकिंग के मामले में 'न्यूज ऑफ द वर्ल्ड ' अखबार बंद हो गया है, रूपर्ट मरडोक ने माफी माँगी है, कई कैरियर खत्म हुऐ हैं,  कई इस्तीफे हुऐ हैं... पर अपने यहाँ नीरा राडिया के टेपों में उजागर मीडिया के दलाल बदस्तूर अपने ऊँचे पायदानों पर टिके हुऐ हैं... मुंबई बम धमाकों के मास्टर माईंड की तलाश जारी है... कभी कभी तो लगता है कि ' वाईटल-क्लू ' देने का काम अपने चैनल वाले और दिग्विजय सिंह जैसे राजनीतिज्ञ कर रहे हैं...

आदर्श घोटाले के सारे कागज गायब हैं सभी जगहों से और जमीन को राज्य सरकार की बताया जा रहा है... लग रहा है इमारत फिर से खुलेगी और कोई रिटायर्ड सर्विस चीफ फीता काट कैमरों के सामने उद्घाटन करेगा उसका... नौएडा एक्सटेंशन के जमीन अधिग्रहण पर फैसले-दर-फैसले आते जा रहे हैं... किसान सरकार को कसूरवार बताते हैं... बिल्डर किसान को... सरकार कानूनों को... अपने को लगता है कि तीनों में से कोई कसूरवार नहीं है... कसूर तो जमीन का है... यह मगरूर जमीन दिल्ली के इतना नजदीक क्यों है ?

सरकार बचाने के लिये आर्थिक रूप से कमजोर विरोधी सांसदों को पैसे का लालच दे वोटिंग से बाहर रखने के मामले में संजय सक्सेना और सोहेल हिंदुस्तानी अंदर हैं... अमर सिंह जी से पूछताछ होगी... यह सब कोर्ट के कहने पर किया जा रहा है... पर एक बार फिर किसी का कोई कसूर नहीं है... कसूर तो उन नोटों के बंडलों का है जो गलत जगह खुदबखुद चले गये, और कैमरों से अपनी फोटो खिंचा ली...

टूजी घोटाले और कॉमनवेल्थ घोटाले के आरोपियों के दिन भी अच्छे ही कट रहे हैं तिहाड़ में... बेचारे जेलर साहब को खालीपीली अंडमान जाना पड़ गया... अब जल्दी ही उनकी पहले जमानत और फिर ससम्मान बरी होने का रास्ता भी खुल ही जायेगा... टॉप के लीगल ब्रेन लगे हैं इस काम में... वैसे भी उनका कसूर तो कोई है नहीं... कसूर तो खेलों का है... भाई जब खेल होंगे तो खेल होगा ही... इसी तरह कसूर स्पेक्ट्रम का भी है ही... गरीब देश का स्पैक्ट्रम गरीबों में से ही कुछ की गरीबी मिटाने के काम आ गया तो क्या गलत हो गया...

देखा आपने... लिखने को इतना सब कुछ है... पर नहीं लिखूंगा कुछ भी... खाना अच्छा बना है... हल्की हल्की नींद की खुमारी छा रही है मुझ पर... सोने जा रहा हूँ मैं...



कितना सही कहा गया है न  ?

किस-किस को याद कीजिए, किस-किसको रोइए 
आराम बड़ी चीज है, मुंह ढककर सोइए।


लाइट लो यार !!!
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13 टिप्‍पणियां:

  1. सो जाओ प्रवीण भाई , सोने के अपने फायदे हैं ....
    शुभकामनायें !

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  2. कुछ दिनों से मैं भी टी.वी. अखबारों से दूर ही रही...आपकी पोस्ट ने सारी ख़बरें अपडेट कर दीं ...पर लगा, कुछ भी मिस नहीं किया....यही सब तो चलता आ रहा है....नया कुछ भी नहीं.....

    मुहँ ढँक कर सोना ही ठीक है...:)

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  3. लाइट लेते हुए अब आप जा पहुंचे हैं कल कि चर्चा मंच पे.

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  4. अच्छा तो आप जिंदा होने के सबूत दे रहे हैं! हम भी जिंदा हैं। कुछ खबरें लिखकर इस बार आपने संवाददाता की भूमिका अदा की है।

    खेल यानि क्रिकेट-ग्रस्त मूर्खों की बात छोड़ ही देते हैं। लार्ड्स के मैदान की बात! सारे देशद्रोही इसमें शामिल हो गए हैं।

    मैं तो अब अखबार और समाचार में अधिक रुचि नहीं रखता या कहिए अच्छा नहीं लगता अब।

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  5. लिखना क्या जरूरी है?
    सोना जरूर जरूरी है। उठ कर जागने के लिए और फिर कुछ करने के लिए।

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  6. बढ़िया लगा आपके ब्लॉग पर आकर !

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  7. खूबसूरत प्रस्तुति ||
    बधाई ||

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  8. हम भी रात में जल्दी सो जाते हैं।

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  9. गज़ब की पोस्ट! दर्द हमारे दिल में है तो क्या हुआ, खैराती अस्पताल तो किसी और को ही खोलना चाहिये।

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