रविवार, 5 जून 2011

अनशन पर बाबा, सिस्टम का पलटवार और इस बार तो निराश ही किया योगऋषि ने... (भाग-२)

.
.
.



४ जून की सुबह से चल रही यह लीला अब बेहद अप्रिय दौर पर पहुंच चुकी है...

भ्रष्टाचार और काले धन के विरूद्ध चल रहा यह आंदोलन एक  'आवासीय योग विज्ञान प्रशिक्षण एवं अष्टांग योग व्याख्यानमाला शिविर' के बैनर तले चल रहा था... साध्य के लिये प्रयुक्त साधनों की शुचिता को भी उतना ही महत्व देने के परंपरा वाले हम लोगों में से कईयों को यह बात बहुत ही असहज कर रही थी, मैं भी उनमें से एक हूँ... अपने पिछले आलेख में इसीलिये मैंने इस बात को लिखा भी था... जब इस अनशन की योजना व प्रचार महीनों पहले से चल रहा था तो क्यों नहीं इस बात के लिये निर्धारित जगह की ही अनुमति ली गई... सरकार यदि मना करती तो यह बात जनता के सामने रखी जा सकती थी और अनुमति पाने के लिये उपलब्ध अन्य तरीकों का प्रयोग किया जा सकता था... विडंबना तो देखिये कि रामलीला मैदान को खाली करवाने के लिये प्रशासन ने ठीक इसी तर्क का प्रयोग किया...

पुलिस व प्रशासन अब यह कहता है कि उन्हें योगऋषि रामदेव व उनके एक अन्य सहयोगी की जान के ऊपर खतरे की स्पेसिफिक सूचना मिली थी इसीलिये वह देर रात को उन दोनों लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिये वहाँ गये थे... यह मान भी लिया जाये कि यह प्रशासन की एक चाल थी फिर भी ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर पद के अधिकारी के रामलीला मैदान पर जा बाबा को यह बताने के बाद जो हुआ वह टीवी कैमरों ने दुनिया को दिखाया... बाबा योगऋषि रामदेव ने झटके से हाथ छुड़ाया, स्टेज के एक कोने तक गये जहाँ से उनके अति उत्साही समर्थकों ने उनको मंच से नीचे समर्थकों की भीड़ के बीचों-बीच कुदवा दिया... योगऋषि एक भक्त के कंधों पर बैठ जन-समूह को संबोधित करने लगे... उनकी महिला समर्थकों ने उनके चारों ओर घेरा सा बना लिया... इसके बाद योगऋषि के कथन के अनुसार ही भयातुर हो वह स्टेज के नीचे या पीछे कहीं काफी देर छुपे रहे व महिला के वस्त्रों में चेहरे व बालों को ढके हुऐ रामलीला मैदान से बाहर निकल जाने के प्रयत्न में पुलिस के कब्जे में आ गये...


शाम को प्रेसवार्ता में योगॠषि ने कहा कि उन्होंने यह सब इसलिये किया कि उनको यह अंदेशा था कि सरकार-पुलिस या तो उनको गायब कर देती या उनका एनकाउंटर कर देती... उनका यह भी कहना था कि जिस पुलिस ने उनको एयरपोर्ट पहुंचाया वह तो अच्छी थी परंतु जो पंडाल के अंदर उनको लेने आई थी वह कतई दुष्ट थी... सवाल यह है कि क्या पल-पल की खबर को लाईव प्रसारित करते हुऐ इलेक्ट्रानिक मीडिया की मौजूदगी में ऐसा संभव था ?... क्या इतने उच्च पुलिस अधिकारी की बात पर विश्वास नहीं किया जाना था... योगऋषि के जिन रणनीतिकारों, सलाहकारों व खबर देने वालों ने उनके मस्तिष्क में इस तरह का भय पैदा किया या इन  विचारों के बीज बोये वह आंदोलन के बहुत बड़े दुश्मन थे...


इस पूरे आंदोलन में दूसरी पंक्ति के नेतृत्व का अभाव है... योगऋषि के यों मंच छोड़ छिप जाने से नेतृत्वहीन हो चुकी भीड़ ने भी आपा खोया और मौके पर मौजूद पुलिस बल ने वही किया जिसके लिये वह कुख्यात है... सभी को शुक्र मनाना चाहिये इस बात का कि पचास हजार से अधिक की इस भीड़ के बीच मची भगदड़, दोनों ओर से चल रही ईंट-पत्थरबाजी, फूटते आंसू गैस के गोलों व पंडाल के एक हिस्से में लगी आग के बीच कोई बड़ी जन-हानि नहीं हुई... पुलिस बल ने जो कुछ किया कैमरों ने लाइव दिखाया... जिस किसी भी अधिकारी या जवान ने किसी भी महिला-पुरूष-बच्चे  पर अनावश्यक व अनुचित बल प्रयोग किया हो तो न्याय का तकाजा है कि उसे चिन्हित कर कड़ी से कड़ी सजा मिले... योगऋषि ने ठीक ही कहा है कि वह इस पूरे मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ले जायेंगे... उम्मीद कीजिये कि आयोग से सभी को न्याय व दोनों पक्षों के दोषियों को सजा मिलेगी...


यह तो थी रात की बात... शाम को हुआ यह कि योगऋषि ने सभी की उपस्थिति में घोषणा की कि सरकार ने उनकी सारी बातें मांग ली हैं... लगभग ठीक उसी समय केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने आचार्य बालक़ृष्ण द्वारा हस्ताक्षरित एक कागज मीडिया को दिखाया जिसमें उन्होंने चार तारीख शाम को अनशन खत्म करने व छह तारीख तक तप करने के बारे में लिखा था... मीडिया तुरंत पूरे मामले को पहले से फिक्स कह योगऋषि की आलोचना करते हुऐ चीखने सा लगा... इसका पता चलते ही योगऋषि ने मंत्री कपिल सिब्बल व सरकार पर विश्वासघात का आरोप लगाते हुऐ अनशन को जारी रखने का निर्णय ले लिया...


अब पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार पहुंच योगऋषि ने अपने अनशन को जारी रखने व शीघ्र ही दिल्ली या दिल्ली के आसपास किसी जगह जा अनशन जारी रखने संबंधी बयान दिया है... पर इसबार का यह अनशन क्या पहले सा प्रभाव रखेगा इसमें संदेह है...


कांग्रेस के कुछ पदाधिकारियों ने योगऋषि की आलोचना व उन पर हमले करते हुऐ मर्यादा का उल्लंघन किया है उन्हें यह याद रखना चाहिये कि यह देश एक सन्यासी के प्रति ऐसी भाषा के प्रयोग को कभी माफ नहीं करेगा...


कुल मिलाकर यही कह पाउंगा कि इस पूरे प्रकरण ने योगऋषि के कद व उनके प्रभाव को कम किया है, अब उनकी हर बात में पहले सा वजन शायद ही आ पायेगा ...

इस बार तो सभी के सम्मुख दिखलाये अपने नेतृत्व से आपने निराश ही किया है हर किसी को योगऋषि रामदेव जी...


पर न तो यह लड़ाई आखिरी है और न ही यह आकलन ही ...






...

28 टिप्‍पणियां:

  1. सँयोगवश उसी समय मैंने एक पोस्ट लिखने के बाद अपना पी.सी. ट्यूनर ऑन किया था । समय रात्रि 1.35 AM ..... सबकुछ इस बुरी तरह बदला हुआ था, बदलता जा रहा था , कि देखते देखते सुबह के चार बज गये । ईँट पत्थर चलने के बाद ही आँसू-गैस के गोले दागे गये । सवाल यह है कि आनन फ़ानन मँच पर इतने ईँट पत्थर कहाँ से आ गये । बाबा किसी के कँधे पर चढ़ कर ( स्मरण रहे कि कँधे पर चढ़ना प्रतीकात्मक चित्रण नहीं, बल्कि कैमरों में कैद वास्तविक दृश्य है ).. बाबा किसी के कँधे पर चढ़ कर माइक से कुछ बोल रहे थे, अचानक वह नटों की फ़ुर्ती से कूद कर मँच के पीछे चले गये । डँडा फ़टकारा गया और वह सरफ़रोशी की तमन्ना भूल कर सलवार ढूँढने लग पड़े । आज देखा कि मुलायम सिंह, राजनाथ सिंह जेटली सहित कई नेता बाबा का जूठा पत्तल चाट रहे हैं । बाबा का बयान टिप्पणी बक्से के लिये उपयुक्त नहीं है ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सचमुच असलियत लिखा है आपने, समस्यायें हैं तो हमारे देश के सिस्टम में ही उनका समाधान भी है.
    रामदेव प्रसंगः कानून के सवाल
    कनक तिवारी

    sanjai gupta.

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपके विश्लेषण से सहमत |
    जब पुलिस बाबा को गिरफ्तार करने पहुँच गयी थी तभी बाबा को गिरफ्तार हो जाना चाहिए था, मंच से कूदना ,छुपे रहना फिर स्त्री वेश धारण करने बाबा ने ये साबित कर दिया कि वे अभी तक राजनैतिक तौर पर परिपक्व नहीं है | चिट्ठी सार्वजनिक होने के बाद बाबा उस चिट्ठी पर भी जिसमे कोई गलत बात नहीं का सही तरीके औचित्य साबित नहीं कर पाए | उस चिट्ठी में सिर्फ यही तो था कि मांगे माने जाने के तुरंत बाद अनशन ख़त्म कर दिया जायेगा | इसमें गलत क्या था ? मांगे मानी जाने के बाद तो अनशन ख़त्म ही होना था |

    उत्तर देंहटाएं
  4. मुझे तो अभी भी यह सारा ड्रामा फिक्स लग रहा है... मैंने आपके ही ब्लॉग पर पहले ही कहा था कि बाबा और सरकार के बीच पहले ही समझौता हो गया था... और फिर वही निकला...

    समझ में नहीं आता कि जब समझौता हो गया था, तो अगले दिन रात तक अनशन का ड्रामा क्यों चल रहा था?

    उत्तर देंहटाएं
  5. क्या कहूँ अपने सब कुछ कह ही दिया है... मैं तो बस यूँ ही उपस्थिति दर्ज करवाने चला आया. वहां जो कुछ भी हुआ हो हम ब्लोग्गेर्स की लट्ठम लट्ठा भी खूब मजेदार चल रही है :-))

    उत्तर देंहटाएं
  6. योग गुरु पर आपके तर्क वाजिब हैं !

    मुझे हमेशा से यह लगता आया है कि विरोध और असहमति की नैतिक तथा शालीन विधा बतौर अनशन या सत्याग्रह , आज की तिथि में अन्ना हजारे को ही शोभा देते हैं !

    उत्तर देंहटाएं
  7. जो अखबार मे पढ़ा हैं आज सुबह और जो कल से दिख रहा हैं
    रात १२ बजे तक की समय सीमा थी जिसका नोटिस श्री रामदेव जी के पास था { अब ये बाबा रामदेव कहना मुझे उचित नहीं लगता क्युकी वो कोरपोरेट फ्य्सिकल ट्रेनर मात्र हैं } . उस नोटिस के अनुसार उनके पास योग शिविर { रैली } नहीं चलने के परमिशन थी .
    समय सीमा समाप्त होते ही पुलिस ने उनको नोटिस दिया और पंडाल खाली करने का आग्रह किया .
    वो सत्याग्रही थे तो रैली के लिये आज्ञा लेते , योग शिविर के लिये क्यों ली
    उस पंडाल मे पाइप लाइन बिछी थी जहां से पानी की सप्लाई की जा रही थी
    किसने दिया इतना पैसा ??
    जो भी उस शिविर में गया उसका बाकायदा रजिस्ट्रेशन किया गया , एक पहचान पत्र दिया गया और एक अलिखित आश्वासन भी की उनको ट्रस्ट से पैसा मिलेगा दिन के हिसाब से .
    लाठियां पुलिस ने नहीं बरसाई हां पुलिस ने पत्थर जरुर खाए
    एक रैली मे bhagdadh मचती हैं क्यूँ , क्युकी राम देव जी ऐसा चाहते थे
    वो खुद महिला के कपड़ो मे पुलिस को मिले
    देश की राज धानी मे सिविल disobedience का नाटक चल रहा था
    जो खुद कानून को नहीं मानते वो कानून के रक्षक बन भ्रष्टाचार मिटाने की बात करते हैं
    रामदेव जी के संरक्षक हैं नारायण दत्त तिवारी जो खुद एक निर्लज इंसान हैं , जो बच्चा पैदा तो कर सकते हैं पर नाम नहीं दे सकते
    ५००० लोगो का शिविर था , इतने की ही परमिशन थी फिर उस से ऊपर लोगो को क्यूँ आने दिया
    पिछले बीस सालो में ना जाने कितने " युग परुष !!!!!!!" आये और चले गए जनता को ठग कर क्युकी आज भी भारत मे इनकी "जरुरत " हैं . आसा राम हो , सुधांशु हो , या बालाजी मंदिर मोडल town के "संत जिन्होने ने कई महिला का शोषण किया " सब एक से हैं .

    अगर राम देव जी को आम जनता की फ़िक्र होती तो समय सीमा के अन्दर पंडाल खाली होता .
    कानून को मान कर आम आदमी खुद भ्रष्टाचार से लड़ सकता हैं
    कोई राष्ट्रिये शोक नहीं था कल , बेवकूफ लोग इन लोगो को गुरु मानते हैं किसी पढे लिखे को गुरु मानिये अपने आप इन लोगो से मुक्ति का रास्ता मिलेगा

    जो वहाँ थे वो अपनी कम अकली से थे , पुलिस के पास भीड़ को हटाने का क्या रास्ता हैं अगर भीड़ जगह से ज्यादा हो जाए और मत भूलिये बे पढी लिखी जनता अंध भक्त होती हैं और उनको जागरूक करना पड़ता हैं ,
    जिनको चोटे आयी उनके लिये मन द्रवित हैं क्युकी पहले भी वो बिचारे बेवकूफ बनते रहे हैं , कुछ पैसे देकर भीड़ जमा कर के कौन सी पार्टी रैली नहीं करवाती रही हैं .

    उत्तर देंहटाएं
  8. सटीक और सही बात। जिस समय बाबा को जनता का साथ देना चाहिये था उस समय वो अपनी जान बचाने के लिये छुप गया और बेचारी जनता लाठियाँ खाती रही। जब जनता उनके साथ मरने मराने के लिये तैयार है तो क्यों जनता को अकेली छोद कर भागे/ शायद उन्हें भी आम आदमी से अधिक अपनी जान प्यारी थी।

    उत्तर देंहटाएं
  9. रामदेव का पक्ष मुझे नहीं भाता। बन्दा अपनी पॉलिटिक्स चमका रहा था। पर रात में सोते लोगों पर लाठी चार्ज जमा नहीं।

    उत्तर देंहटाएं
  10. अब मै कांग्रेस की बाबा रामदेव के खिलाफ घिनौनी रणनीति के बारे मे बताता हूँ.

    बाबा रामदेव ने जबसे चार जून को आंदोलन का ऐलान किया था.
    तब से ही सरकार ने अपनी घिनौनी रणनीति बनानी शुरु कर दी थी.रही बात माँगो की तो मांगे तो कांग्रेस कभी भी किसी भी हालत मे नही मान सकती थी.
    क्यो कि क्या कोई चोर और उसके साथी कभी भी ये मान सकते है कि वो अपनी चोरी का खुलासा करे.

    जब सुप्रीम कोर्ट कह कह के थक गया कि कालेधन जमा करने वालो की सूची जारी करे. जब इस भ्रष्ट सरकार ने आज तक सूची तक नही जारी की.

    तो काले धन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करना और उसको वापस लाना तो बहुत दूर की बात है.
    क्यो कि ये बात 100 % सही है की खुद इस गांधी फैमिली का अकूत धन स्विस बैँक मे जमा है.

    इस बारे मे सनसनी खेज खुलासे बाबा रामदेव की 27 फरवरी की रामलीला मैदान की विशाल रैली मे भी हुये थे.

    जिसमे विशाल जनसमूह उमड़ा था और इस बिके मीडिया ने उस रैली को प्रसारित नही किया था.

    और जब आस्था चैनल ने उस रैली को दिखाया तो तुरंत इस सरकार ने आस्था चैनल पर इस रैली को दिखाने पर प्रतिबंध लगा दिया.

    उसके बाद से
    कांग्रेस का केवल एक ही उददेश्य था कि कुछ ऐसा किया जाये जिससे बाबा रामदेव पे लोगो का विश्वास उठ जाये.

    जारी....
    क्यो कि कांग्रेस जानती थी की उसको किसी भी विपक्षी पार्टी से इतना खतरा नही है जितना बाबा रामदेव से है. क्यो कि उनके साथ विशाल जन समर्थन है.

    इसलिये कांग्रेस ने एक ऐसी घिनौनी साजिश रची . कि जिससे लोगो का विश्वास रामदेव से उठ जाये.

    एक जून को जब चार मंत्री एयरपोर्ट पर बाबा को लेने गये
    तो आम जनता या मीडिया को तो छोड़ो .
    स्वयं बाबा रामदेव भी नही समझ पाये.
    कि ये उल्टी गंगा कैसे बही?

    जब कि कांग्रेस के इस पैतरे का केवल एक ही उद्देश्य था.
    कि किसी तरह बाबा को प्रभावित करके एक चिटठी लिखवा ली जाये. ताकि बाद मे ये साबित किया जा सके.
    कि अनशन फिक्स था और लोगो का विश्वास बाबा से उठ जाये.
    लेकिन बाबा ने कोई पत्र नही लिखा.

    कांग्रेस ने हार नही मानी
    दुबारा मीटिँग की फिर भी असफल रही.

    और फिर उसने तीसरी मीटीँग होटल मे की .
    वहाँ उन नेताओ के पास बाबा की गिरफ्तारी का आदेश भी था.
    और होटल के बाहर काफी फोर्स भी पहुच गयी थी.
    नेताओ ने बाबा पर बहुत दबाब बनाया.
    और ये कहा कि आप की सारी मांगे मान ली जायेँगी लेकिन आप एक पत्र लिखे कि आप अपना अनशन खत्म कर देँगे.
    आपको ये पत्र लिखना बहुत जरुरी है. क्यो कि ये पत्र प्रधानमंत्री को दिखाना है.और ये एक आवश्यक प्रक्रिया है.
    बिना पत्र लिखे वो बाबा को छोड़ ही नही रहे थे.
    इसीलिये उस मीटीँग मे 6 घंटे का समय लग गया. उस समय
    बाबा रामदेव ये समझ गये थे कि कुछ षडयंत्र बुना जा रहा है.
    तब उन्होने संयम से काम लेते हुये पत्र लिखवाने पर तो मान गये लेकिन खुद साइन नही किया बल्कि आचार्य बालक्रष्ण से करवाया.
    हालाकि कांग्रेस बाबा से खुद साइन करने का दबाब डालते रहे लेकिन बाबा ने समझदारी से काम लेते हुये खुद साइन नही किया.

    तब जाकर बाबा उस होटल से बाहर निकल पाये.
    उन्होने रामलीला मैदान पहुचते ही ये बता दिया कि उनके खिलाफ षडयंत्र रचा जा रहा है और वक्त आने पर खुलासा करेँगे.

    उसके बाद चार तारीख को नेताओ ने बाबा को फोन करके झूठ बोल दिया. कि आपकी अध्यादेश लाने की मांगे मान ली गयी है और आप अनशन खत्म करने की घोषणा कर दे.
    कांग्रेस इस बात का इंतजार कर रही थी कि एक बार बाबा अनशन खत्म की घोषणा कर दे तो उसके बाद वो पत्र मीडिया मे जारी कर दिया जाये जिससे ये साबित हो जाये की अनशन फिक्स था और लोगो की नजर मे बाबा नीचे गिर जाये.
    बाबा ने फिर घोषणा भी कर दी की सरकार ने हमारी माँगे मान ली है और वो जैसे ही हमे लिखित मे दे देगी .हम अनशन खत्म कर देँगे.

    सरकार फिर फस गयी क्यो कि उसने बाबा से झूठ बोला था कि वो अध्यादेश लाने की बात लिख कर देगी .जब कि वास्तव मे उसने कमेटी बनाने की बात लिखी थी. और बाबा जब तक अध्यादेश लाने की बात लिखित रुप से नही देखेँगे. तब तक वो आंदोलन नही खत्म करेँगे.

    तब कांग्रेस के चालाक वकील मंत्री सिब्बल ने तुरंत मीडिया को पत्र दिखाया और ये जताया कि ये अनशन पहले से फिक्स था. क्यो कि सिब्बल जानता था कि मीडिया बिना कुछ सोचे समझे बाबा की धज्जियाँ उड़ाने मे लग जायेगा.
    और यही हुआ भी .मीडिया ने बिना कुछ समझे भौकना शुरु कर दिया की बाबा ने धोखा किया.
    लोगो की भावनाओ से खेला आदि.

    जब बाबा को पता चला कि सिब्बल ने एक कुटिल चाल खेली है.

    तब उन्होने बड़ी वीरता से उस धज्जियाँ उड़ाने को आतुर मीडिया को सारे सवालो के जबाब दिये और स्थिति को संभाल लिया.

    कांग्रेस अपनी इतनी बड़ी चाल को फेल होते हुये देख बौखला गयी.
    और उस मूर्ख कांग्रेस ने मैदान मे रावणलीला मचा कर अपनी कब्र खोदने की शुरुआत कर दी.

    उत्तर देंहटाएं
  11. Anonymous जी...आप का क्या नाम है ? विद्वान नाम के अभाव में आपकी बातों पर यकीन कैसे करें ?

    उत्तर देंहटाएं
  12. तर्क सम्‍मत चर्चा पढ़कर अच्‍छा लगा।

    उत्तर देंहटाएं
  13. fnxfot; flag ckSjk x;s gSa ftldh otg ls ckck jkenso dks Bx dg jgs gS]vxj ckck Bx gS rks dkaxzsl ds ea-=h muls feyus D;ks x;s Fks]dkaxzslh ljdkj ds ea=h;ks dk iSlk fons’kks esa gksus ds dkj.k gh ljdkj dqN ugha dj jgh gS]var esa eueksgu th dgsxsa fd eSa etcwj gaw bl dkj.k dqN ugha dj ldkA

    उत्तर देंहटाएं
  14. जिस अनामी ने ऊपर लिखा है उन्हें मैं नहीं जानता लेकिन वास्तविकता यही है।

    तीन जून की मीटिंग जहा प्रस्तावित थी, स्वामी रामदेव वहां न जाकर बाराखंबा रोड पर आर्यसमाज के ओर्फनेज में पहुंच गया और वहीं उन्होंने सुबोध कांत सहाय और सिब्बल को बुलाया। लेकिन सिब्बल ने स्वामी रामदेव को निर्धारित जगह पर आने की जिद की जहां रामदेव के लिये तैयारियां पूरीं थीं।

    अंत में दोनो पक्ष यह मीटिंग पब्लिक प्लेस पर खुली जगह क्लैरिज होटल में करने के लिये तैयार हो गये।

    कपिल सिब्बल ने उसी समय अपने नाम से व्यक्तिगत हैसियत से क्लैरिज होटल में एक सुइट बुक कराया। यह मीटिंग खुली जगह के बजाय सुइट में हुई। वहां वही हुआ जो ऊपर वाले अनामी ने लिखा है। क्लैरिज होटल में आनन फानन में कितनी पुलिस की गाडियां आई, यह वहां मौजूद सभी लोग जानते हैं।

    4 जून की दोपहर को एक रिपोर्ट दर्ज की गई कि स्वामी रामदेव व एक अन्य व्यक्ति की जान को खतरा है।

    यह प्लान किया गया कि अनशन के लिये इकट्ठे हुये लोगों में आपस में हुई लड़ाई की बात बताकर रात को पुलिस को घुसाया जाय।

    यही बताकर पुलिस वहां घुसी। मीडिया के कैमरे उस समय नहीं चल रहे थे। बाहर खड़ी मीडिया ने जब पुलिस के आला अधिकारी से पूछा तो उसने यही बताया था कि स्वामी रामदेव के साथ के लोगों में आपस में झड़प हुई है। पुलिस चुपचाप वहां निशब्द घुसी।

    सारे लोग सो रहे थे। रामदेव के पास सादी वर्दी में पुलिस पहले से ही मौजूद थी। योजना रामदेव को चुपचाप उठाकर आपस की लड़ाई में मार डाला दिखाने की थी। रामदेव की हत्या की सूचना होने की खबर वे पहले ही दे चुके थे। रामदेव की हत्या का आरोप RSS पर लगाने की पूरी योजना तैयार थी कि RSS ने भाजपा का वोट बैंक बिखर जाने के डर से और फायदा उठाने के लिये रामदेव की हत्या कर दी। इसके बाद क्या होना था वह सभी कल्पना कर सकते हैं।

    लेकिन रामदेव को इस योजना की भनक लग चुकी थी। वह तब तक अपने आपको बचाता रहा जब तक कि मीडिया के कैमरे खुल नहीं गये। पुलिस ने मीडिया के कैमरे बंद कराने की कितनी कोशिश की वह आप उस समय की वीडियो देखकर जान सकते हैं। अपनी जान बचाने के लिये ही स्वामी रामदेव महिला के वेश में भागने पर मजबूर हुआ।

    राजनीति की गंदी साजिश भरे गटर में स्वामी रामदेव एक बहुत छोटा मच्छर था। किस्मत अच्छी थी कि वह मसले जाने से बच गया।

    प्रतीक्षा कीजिये कि इस घिनौनी पटकथा के असफल अंत का खामियाजा कौन भुगतता है।

    उत्तर देंहटाएं
  15. @प्रवीण जी,
    सहज मानवों से आकलन की ऐसी भूलें भी मानवीय ही हैं जो इस समय आपसे हो रही है ..
    मेरे स्वभाव, मनःस्थति ,प्रवृत्ति को आप शायद कुछ समझ सकते हैं ...
    मैं बाबाओं से दूर रहता आया हूँ मगर पहली बार देख रहा हूँ यह बाबा तो अलग किस्म का है ...
    इसके मूल्यांकन में आप सही हैं या मैं यह आने वाला समय साबित कर देगा !
    बाकी असहमतियों के खिलाडी आपकी पोस्ट पर भी नत्गीरी दिखा रहे हैं एक तो कानूनविद भी हैं जिन्हें उनके आका ही सबक देगें बस तनिक इंतज़ार !

    उत्तर देंहटाएं
  16. दुखद स्थितियाँ हैं देश के लिये।

    उत्तर देंहटाएं
  17. बहुत संतुलित और बेबाक समीक्षा की है आपने.....

    उत्तर देंहटाएं
  18. आपकी पोस्ट चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच

    उत्तर देंहटाएं
  19. आभार आपका आपने हमें इस चर्चा में शरीक करवाया .अपनी बात कहके जाने का आग्रह भी किया सो -चाटुकार चमचे करें ,नेता की जयकार ,
    चलती कारों में हुई ,देश की इज्ज़त तार .
    छप रहे अखबार में ,समाचार सह बार ,
    कुर्सी वर्दी मिल गए भली करे करतार ।
    बाबा को पहना दीनि ,कल जिसने सलवार ,
    अब तो बनने से रही ,वह काफिर सरकार ।
    है कैसा यह लोकतंत्र ,है कैसी सरकार ,
    चोर उचक्के सब हुए ,घर के पहरे -दार ,
    संसद में होने लगा यह कैसा व्यापार ,
    आंधी में उड़ने लगे नोटों के अम्बार ।
    मध्य रात पिटने लगे ,बाल वृद्ध लाचार ,
    मोहर लगी थी हाथ पर ,हाथ करे अब वार ।
    और जोर से बोल लो उनकी जय -जय कार ,
    सरे आम लुटने लगे इज्ज़त ,कौम परिवार ,
    जब से पीज़ा पाश्ता ,हुए मूल आहार ,
    इटली से चलने लगा ,सारा कारोबार ।
    वीरेंद्र शर्मा (वीरुभाई ).,डॉ .नन्द लाल मेहता .

    उत्तर देंहटाएं
  20. देशप्रेमी12 जून 2011 को 4:29 pm

    @रचना : आपकी भाषा और टिप्पणी पढ़कर कह सकता हूं कि आप कांग्रेसी हैं।

    उत्तर देंहटाएं

मेरे इस आलेख को पढ़ कर ही यदि आपके मन में कोई विचार उत्पन्न हुऐ हैं तो कृपया उन्हें 'नेकी कर दरिया में डाल' की तर्ज पर ही यहाँ टिप्पणी रूप में दर्ज करें... इस टिप्पणी के पीछे कोई अन्य छिपा हुआ मंतव्य न रखें, आप इसे उधार में मुझे दी गयी टिप्पणी न समझें, प्रतिउत्तर में आपके ब्लॉग पर टिप्पणी करने की किसी बाध्यता को मैं नहीं मानता व मुझसे या किसी अन्य ब्लॉगर से भी ऐसी अपेक्षा रखना न तो नैतिक है न उचित ही !... मैं किसी अन्य के लिखे आलेखों पर भी इसी नियम व भावना के तहत टिपियाता हूँ !

असहमति को इस ब्लॉग पर पूरा सम्मान दिया जाता है, आप मेरे किसी भी विचार का खुल कर विरोध या समर्थन कर सकते हैं, परंतु अशिष्ट या अश्लील भाषा यु्क्त अथवा किसी के भी ऊपर व्यक्तिगत आक्षेपयुक्त टिप्पणियाँ कृपया यहाँ न दें... आप अपनी टिप्पणियाँ English, हिन्दी, रोमन में लिखी हिन्दी, हिंग्लिश आदि किसी भी तरीके से लिख सकते हैं... नहीं कुछ लिखना चाहते हैं तो भी चलेगा... आपके आने का शुक्रिया... आते रहियेगा भविष्य में भी... आभार!