शनिवार, 4 जून 2011

अनशन पर बाबा, ठेंगे पर लोकतंत्र और सकते में देश... (भाग-१)

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यह एक विद्रूप नहीं तो और क्या है कि अनशन पर बैठे बाबा योगऋषि रामदेव के पीछे लिखा बैनर बता रहा है कि यह एक आवासीय योग विज्ञान प्रशिक्षण एवं अष्टांग योग व्याख्यानमाला शिविर है... हर चीज को मॉडरेशन में करने-बरतने की शिक्षा देने वाले योग प्रशिक्षणार्थियों के लिये यह अनशन भी कुछेक दिन मात्र नींबू-पानी पीकर डिटॉक्सीफिकेशन का मौका देता हो शायद...

जंतर-मंतर पर जनलोकपाल बिल के लिये अन्ना के अनशन के बाद यह दूसरा मौका है कि 'राष्ट्र-हित' के मुद्दों पर मनमाफिक कानून बनाने के लिये सरकार को मजबूर करने के लिये जनसमूह रामलीला मैदान पर बैठा है... चौबीसों घंटे खबरिया चैनल चलाने वालों के लिये तो एक तरह का स्वर्णिम अवसर सा है यह, बिना कुछ किये-धरे दिन भर दिखाने के लिये मसाले व विजुअल्स व साउंड बाईट्स की कमी नहीं रहेगी...

पहले के इसी तरह के आंदोलनों की तरह ही यह अनशन भी कुछेक दिन में अपनी तार्किक परिणति को प्राप्त होगा... आखिर  आडियन्स फटीग ( Audience Fatigue ) भी कोई चीज होती है... मैं तो इससे एक कदम आगे की सोचने जा रहा हूँ कि अब आगे कौन-कौन बैठने जा रहा है बोट क्लब, रामलीला मैदान या जंतर-मंतर पर...

१- तैंतीस फीसदी आरक्षण के लिये महिलायें ।
२- आरक्षण के लिये संघर्षरत राजस्थान के गुज्जर आंदोलनकारी ।
३- आरक्षण के लिये संघर्षरत जाट समूह ।
४- निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की माँग करने वाले जन-समूह ।
५- आत्मनिर्णय (???) की माँग करने वाले कश्मीरी विखंडनकारी जो निश्चित तौर पर अरूंधती व स्वामी अग्निवेश जैसे अपने रहनुमाओं की अगवाई में होंगे...
६- मुल्क में कोई भी बाँध-बिजलीघर न बनने देने को कृतसंकल्प पर्यावरणवादी, जिनके लिये इंसान की परेशानियों का कोई मोल नहीं...

लिस्ट और लंबी हो सकती है पर मैं सब कुछ खुद ही क्यों जोड़ूं, कुछ आप भी जोड़िये न...

पर इस सब के पीछे जो सबसे अहम बात छूट जाती है और जिसका भुला दिया जाना मुझे असहज कर देता है वह है कि हम एक लोकतंत्र हैं... २७३ लोकसभा सांसदों को यदि आप अपनी बातों-मांगों से सहमत कर सकते हैं तो आप जो चाहे वह बिल पास करवा सकते हैं... हजारों-लाखों या फिर आयोजकों के मुताबिक करोड़ों का यह हुजूम महज कालेधन ही नहीं देश की हर समस्या का निदान करते कानूनों का एक ड्राफ्ट बनाये और फिर अपने अपने लोकसभा क्षेत्र के सांसदों को पकड़ें व उनको लोकसभा में उन बिलों का समर्थन करने को मजबूर कर दें... कौन रोकता है इससे...

पर यह सब करने से न तो चैनलों पर २४ X ७ लाइव कवरेज मिलेगी... न ही एसएमएस का विश्व रिकार्ड बनेगा... न ही एक खाई-पीयी-अघाई भीड़ (यह मैं जानबूझ कर लिख रहा हूँ, क्योंकि मेरी नजर में यही सत्य है )  को धार्मिक भजनों व गीतों पर झूम-झूम ताली बजा गाने का मौका मिलेगा... न ही भुला से दिये गये हर रंग के कपड़े पहने धर्मगुरूओं को चैनलों को ताकती भीड़ के सामने अपनी वाक-क्षमता प्रदर्शित करने का सुअवसर मिलेगा... न ही लोगों को खुद की तुलना गाँधी व सुभाष जैसे महानायकों से करने-करवाने का सुख मिलेगा...

इसीलिये बाबा आज अनशन पर हैं...

लोकतंत्र ठेंगे पर है...

और मुझ जैसे लोग एक किसिम के सकते में भी हैं...



हमें कहाँ जाना-पहुंचना था और यह कहाँ आ गये हम ?






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25 टिप्‍पणियां:

  1. अब वो समय दूर नहीं हैं जब सरकारी तंत्र कहेगा की आम आदमी पर सब कानून लागू कर दो .
    और ये भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहीम . लोकपाल इत्यादि अपने आप बंद हो जायेगा
    सोच कर देखिये आम आदमी यानी आप और मै रोज कितने कानून तोड़ते हैं
    कितने लोग सड़क पार करते हैं ज़ेब्रा क्रोस्सिंग से
    कितने लोग पानी की सुप्लाई से गाडी धोते हैं
    कितने लोग किरायेदार रखते हैं पर हाउस टैक्स वालो को नहीं बताते
    कितने लोग बिना बिल के समान खरीदते हैं
    कितने लोग लोकर में कैश रखते हैं
    कितने लोग १८ साल की उम्र से कम बच्चो को घर के काम के लिये रखते हैं
    कितने लोग बच्चो के साथ यौनिक सम्बन्ध रखते हैं
    ज़रा और लोग भी इस लिस्ट में कुछ जोड़े और फिर किसी को समर्थन दे
    पूरा देश जेल जा सकता हैं अगर हर कानून पुरी तरह लागू कर दिया जाये

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  2. लोकतंत्र ठेंगे पर जरूर है। पर उसे ठेंगे पर रखने के लिये राजनेता और वे सब जिम्मेदार हैं, जो लोकतंत्र चलाने के लिये जिम्मेदार हैं।
    ये बाबाजी तो इंसीडेण्टल हैं जो अपना स्पेस तलाश रहे हैं। --- और स्पेस उनको मिलता नजर आता है! :)

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  3. योग शिविर के नाम पर इसलिये मैदान बुक किया गया था क्यो कि बाबा रामदेव से डरी सरकार अनशन के नाम पर कभी भी उनको मैदान बुक नही करने देती.

    और कांग्रेसियो की चालबाजी का एक नमूना देखिये कि कांग्रेसियो ने जंतर मंतर को पहले ही कब्जे मे कर रखा है और वहाँ अपने आठ दस कार्यकर्ता को बैठा दिया ताकि वहाँ रामदेव जी अनशन न कर सके.

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  4. ab abhi bawa mansoon me kai jagaj
    'jugali' chal rahi hai...........

    nutral sence me likhi gai....aur padhi bhi gai........

    mere samajhe me...
    'ek rastra.....ek kanoon'........

    sandarbh>>>>>>>>

    dharm
    jati
    ling
    kshetra
    rojgar

    bassss....kafi hai........lekin aisa likhte hue jaise hi hamari nazar pahli comment par parta hai
    ..........age kuch likhte hue hame
    hamari atma kachot-ti hai........

    pranam.

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  5. बेहतर...
    पहले के इसी तरह के आंदोलनों की तरह ही यह अनशन भी कुछेक दिन में अपनी तार्किक परिणति को प्राप्त होगा...

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  6. बढ़िया चिंतन है प्रभावशाली रचना पढवाने के लिए आभार आपका !

    रचना की बातें प्रभावित करती हैं कडवी मगर सच है ! हम सब लोग जेल जाने योग्य हैं !!

    भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी बड़ी बाते करते हम लोग, अपना बिल कम कराने के लिए क्या क्या करने को तैयार रहते हैं यह हम सबको पता है !

    सारे कुएं में भांग पड़ी है !

    शुभकामनायें प्रवीण भाई !

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  7. बाबाओं के देश को बाबा जी के हवाले करने में हर्ज़ ही क्या है...

    जय हिंद...

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  8. इस चक्कर में दो-तीन दिन से टी.वी. न्यूज़ नहीं देख पाएं हैं, जब भी खोलो एक ही चिल-पौ मची हुई है...

    क्या आपको नहीं लगता कि यह अनशन सरकार और बाबा की बीच की मैच फिक्सिंग है? मुझे लगता है कल सारी सौदेबाजी हो गयी है, लेकिन इससे लोग नाराज़ ना हो जाएँ, इसलिए कुछ दिन अनशन का ड्रामा करना ज़रुरी समझा गया है... क्या इस तरह भ्रष्टाचार समाप्त हो सकता है? वह भ्रष्टाचार जो हममे से हर एक के अंदर कूट-कूट कर भरा हुआ है...

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  9. .बाबा अपने को युगपुरुष साबित करने की चाह में हर रास्ते टटोल चुके हैं, अब एक यह भी... हो जाने दो भाई !
    वैसे मैं रचना जी के साथ हूँ, मेरा कहना यही रहा है कि पहले अपने को सुधारें, फिर ऎसी किसी नौटँकी को समर्थन दें ।

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  10. अब खेल शुरु हुआ है ...."यथा स्थिति" चाहने वालों या बस "कुछ और रिफार्म" नाम के पैबदं लगाकर काम चलाने वालों के लिये पहचान का संकट !!

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  11. भ्रष्टाचार ही नहीं इस बाबा के कारण कईं विचारधाराएँ भी संकट में है। अफसोस!!

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  12. कुछ पाने के लिए कुछ खोना पडता है !मेरे ब्लॉग पर आए ! आपका दिन शुब हो !
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  13. लोग कांग्रेस के 55 सालो के भ्रष्टाचारी शासन मे ऐसे मोहित हो गये है कि उनको अच्छे आदमी मे भी बुराई नजर आती है.
    दुःख होता है ऐसे लोगो की सोच पर

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  14. रचना से पूरी तरह से सहमत...हम लोग खुद को सुधार ले तो देश खुद ब खुद सुधर जाएगा...

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  15. जब देश का बैण्ड बजा हो तो एक पर आक्षेप कैसा।

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  16. बाबा लोगों की बल्ले बल्ले

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  17. सही कहा है...टी.आर.पी बढ़ रहा है न...

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  18. बुरा न मानियेगा प्रवीण भाई -एक ठू आजमाईश आप भी करके देखिये न तेल नून का भाव नजर आ जायेगा ..
    सब के बूते की बात नहीं है यह .....हमारे और आपके तो कत्तई नहीं !

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  19. न ही एक खाई-पीयी-अघाई भीड़ (यह मैं जानबूझ कर लिख रहा हूँ, क्योंकि मेरी नजर में यही सत्य है ) को धार्मिक भजनों व गीतों पर झूम-झूम ताली बजा गाने का मौका मिलेगा..


    अब देखिए प्रवीण जी कि उस खाई पीयी अघाई भीडं को लाठी खाकर अस्पताल जाने का मौका भी मिल गया है , अब तो उन्हें कतई बख्शना नहीं चाहिए क्यों ?? सिर्फ़ शब्दों के सहारे किसी को कटघरे में खडे कर देने की कवायद कब तक चलती रहेगी क्या जानें ?

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  20. आदर्श या बेहतर स्थितियों के लिए कल्‍पना हो, विचार या प्रयास, स्‍वागतेय होना चाहिए.

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  21. हां जी, पुलिस भी आगे की सोच रही है... सभी कर्मचारियों की छुटियाँ केंसिल और अपने अपने लठ को तेल पिलाया जा रहा है.

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  22. क्या अब भी पार्ट २ आएगा ?
    मैं समझता हूँ प्रवीण जी आप ऐसे असंवेदनशील तो न होंगे :)

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  23. ६- मुल्क में कोई भी बाँध-बिजलीघर न बनने देने को कृतसंकल्प पर्यावरणवादी, जिनके लिये इंसान की परेशानियों का कोई मोल नहीं...
    प्रवीणजी ऐसा लिखने से पहले एक बार आप उन ग्रामीणों और आदिवासियों से मिल लेते जो बांध के कारण डूब में आ गए है तो बेहतर था

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  24. आपने बात तो बहुत पते की की है पर आपने जिन आंदोलनों से इस आन्दोलन की तुलना की है उनमे थोडा सा अंतर है. ये अंतर उतने का है जितने का हिटलर और भगत सिंह के अपने देश के प्रति प्रेम का है. आप शायद मेरा आशय समझ सकेंगे.

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