रविवार, 8 मई 2011

भ्रष्टाचार मुक्त भारत का आधार बन सकता है यह !

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भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ( Unique Identification Authority of India )  द्वारा दिया जाने वाला आधार ( AADHAAR )  जो कि बारह अंकों का रैन्डमली जेनरेटेड नंबर होगा तथा Basic demographics and biometric information – photograph, ten fingerprints and iris – of each individual से लिंकित होगा, भ्रष्टाचार के विरूद्ध लड़ाई में एक बहुत बड़ा हथियार बन सकता है...

जानिये कैसे ?

१- सबसे पहले हमें अपने सारे बैंकों को कोर बैंकिंग सिस्टम के अंदर लाना होगा तथा पूरे देश में ब्रांच-फ्री बैंकिंग लागू करनी होगी ।

२- क्योंकि भारत के हर नागरिक को एक आधार मिलेगा, एक आधार पर किसी भी नागरिक का देश में एक ही खाता खुले, आधार नंबर बैंक अकाउंट नंबर के साथ हर ट्रान्जेक्शन में लिखा जाये, कोई भी नागरिक चाहे तो विभिन्न प्रयोजनों के लिये उप खाते खोल सकता है पर वह मूल खाते के डाटा-बेस में शामिल रहेंगे हमेशा...

३- विभिन्न कंपनियों, व्यवसायों व प्रतिष्ठानों, केन्द्र व राज्य सरकारो, सरकारी विभाग व स्थानीय निकायों आदि को भी आधार जैसे ही विशिष्ट पहचान नंबर दिये जायें व उनका भी एक ही मुख्य बैंक खाता व एकाधिक उपखाते हों... एरियल फोटोग्राफी, सैटेलाईट इमेजिंग व जमीनी सर्वे की मदद से पूरे भारत देश की अचल संपत्तियों की मैपिंग हो व उसके हर टुकड़े, हर भवन को भी विशिष्ट नंबर दिया जाये, यह नंबर ऐसा हो जो भविष्य में उस संपत्ति के विभाजन और विस्तार की संभावना को ध्यान में रखते हुऐ बढ़ाया जा सके...  इसी तरह नयी कंपनी के प्रमोटर, साझीदार, शेयर-बाजार, बीमा या म्युचुअल फंड के हर इंवेस्टमेन्ट को भी संपत्ति जैसा ही माना जाये... अब इसके बाद का काम बहुत आसान है... प्रत्येक संपत्ति के मालिक के तौर पर कोई न कोई आधार नंबर दर्ज होना अनिवार्य हो... एकाधिक मालिक होने पर नंबर के आगे मालिकाना प्रतिशत भी दर्ज हो...

४- इस तरह का एक दूसरे से जुड़ा डाटाबेस हो कि किसी भी आधार नंबर को टाइप करते ही अधिकृत व्यक्ति को उस आधार नंबर के मालिकाना हक वाली सभी चल-अचल संपत्तियों व बैंक खातों की सारी जानकारी मिल जाये ।

५- पचास हजार से ज्यादा का कोई ट्रान्जेक्शन नगद में करना अपराध हो ।

६- पाँच हजार से ज्यादा का हर ट्रान्जेक्शन हाई वैल्यू माना जाये व इसके लिये लिखित बिल देना तथा दोनो पार्टियों को अपना आधार उस पर अंकित करना अनिवार्य हो... इस की मॉनिटरिंग के लिये एक समर्थ टास्कफोर्स खड़ी हो ।

७- समय समय पर पाँच सौ व हजार के नोटों का करेंसी रिकॉल हो ।


यह सब उपाय जटिल हैं, सरकार की ओर से इच्छाशक्ति की माँग करते हैं पर इनको करना असंभव कतई नहीं है... यदि लागू हो जाये तो प्रॉपर्टी-होर्डिंग व काले धन के आधार पर बना प्रॉपर्टी बबल फूट जायेगा, सभी को आवास सुलभ होगा व काले धन की अर्थव्यवस्था अपने अंत की ओर बढ़ेगी...

पर क्या आप सोचते हैं कि एक समाज के तौर पर हम लोग अपने छुद्र हितों की कुरबानी दे अपनी सरकार से यह सब करवा पायेंगे ?

सोचिये, यह हमारी अगली पीढ़ी के भविष्य का मामला है !

आप चाहें तो इन उपायों में कुछ जोड़ या सुधार भी सकते हैं !





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11 टिप्‍पणियां:

  1. काले धन की अर्थव्यवस्था का ढ़ांचा अपने-आप से अपना अंत थोड़े ही चुनेगा...
    मजबूर करना होगा...

    बेहतर...

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  2. मैं हरियाणा का रहने वाला हूँ और दिल्ली में काम करता हूँ. सेलरी के लिए खाता खुलवाना था. लेकिन बैंक वाले 100 नखरे कर रहे हैं. हरियाणा में मेरा खाता है. अगर आधार लागू हो जाए तो मैं वही खाता कहीं भी इस्तेमाल कर सकूँगा.
    ये बहुत अच्छा होगा.

    मेरे ब्लॉग दुनाली पर देखें-
    मैं तुझसे हूँ, माँ

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  3. सब आगे आयें तभी सबको लाभ होगा।

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  4. बस इच्छा शक्ति की ही तो कमी है वरना काले धन से लेकर भार्शताचार तक सभी पर सर्कार आज के कानूनों द्वारा ही रोक लगा सकती है उसके लिए अलग से किसी आधार की जरुरत ही नहीं पड़ेगी | फिर इस आधार से भी क्या उम्मीद करे जब फोटो पहचान पत्र की सुरुआत हुई थी तब भी इस तरह की कई बाते कही गई थी किन्तु जमीनी रूप से क्या है सब जानते है |

    रही बात सेटलाईट वाली जो सेटलाईट एक मुख्यमंत्री के हेलीकाफ्टर को खोजने में चार दिन लगा दे और बताये भी तो गलत जगह उससे किस बात की उम्मीद करे | करोडो अरबो के ये किस कम के है क्या ये युद्ध में भी कम आयेंगे |

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  5. मैं आर्थिक विषयों का बहुत अच्छा जानकर नहीं हूँ (सच कहूँ तो किसी भी विषय का अच्छा जानकर नहीं हूँ वर्ना ब्लोग्गिं ही क्यों करता) इसलिए प्रथम दृष्टया तो एक से सात तक के सभी उपाय मुझे बड़े सोलिड लग रहे हैं.

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  6. आधार की संभावनाएं असीम हैं पर एक बात तय है कि रानीतिज्ञ इसे केवल कुछ उन्हीं चुनींदा सेवाओं से जुड़ने की आज्ञा देगें जो उन्हें सुविधाजनक होंगी

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  7. 21 अप्रैल 2010 को मैंने सुझाया था कि- 'इस तरह हर नागरिक की पहचान संख्‍या सरलतम और विशिष्टतम होनी ही चाहिए। इस दृष्टि से व्यक्ति के जन्म का वर्ष, माह, दिनांक, समय (घंटा, मिनट और सेकंड) तथा इसके बाद सरल क्रमांक के तीन अंक और पंजीयन क्षेत्र का क्रमांक तीन अंक, इस प्रकार कुल 20 अंक, व्यक्ति की विशिष्ट पहचान संख्‍या होनी चाहिए। यानि 31 मार्च 2010 को शाम चार बजकर पैंतीस मिनट छत्तीस सेकंड पर पैदा होने वाले बच्चे की विशिष्ट पहचान संख्‍या होगी- 20100331163536। ठीक इसी वक्त पैदा होने वाले एकाधिक बच्चों के लिए पंजीयन क्रम में तीन अंकों में सरल क्रमांक दिया जा सकता है तथा इसके बाद पंजीयन क्षेत्र को तीन अंकों में दर्ज किया जा सकता है।'

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    @ राहुल सिंह जी,

    आप जो सुझा रहे हैं वह व्यक्ति के बारे में बहुत कुछ बता रहा है जबकि आधार की अवधारणा व्यक्ति की उम्र, जाति, धर्म, क्षेत्र आदि आदि के बारे में कुछ भी जाहिर न करने की है इसीलिये यह रैन्डमली जेनरेटेड नंबर है ।

    इसके पीछे की सोच के बारे में जानने के लिये यहाँ देखें...

    कुछ प्रासंगिक नीचे छाप दिय़ा है...

    1. The UID program does not issue a smartcard or any type of card or mandate any machine-readable format such as a barcode or RFID. Even if a barcode were used on the UID letter delivered to the citizen, it would merely encode the UID itself, and not personal information pertaining to the citizen. For example, even thename of the card-holder would not be in the barcode. This would make it difficult for an unauthorized entity to glean any information about the resident.

    2. The UID number has been carefully designed to not disclose personal information about the resident including - the regional, ethnic and age information. The US Social Security Number, for example, has enough of a pattern that an expert can guess a person’s number from their birth-date and from the location at which it was issued.

    3. The UID approach is designed on an on-line system – data is stored centrally and authentication is done online. This is a forward-leaning approach that makes it possible to avoid the problems associated with many ID card schemes. It is also possible to guess the date and location at which the card was issued from the Social Security Number. The UID is a random number that makes guesswork virtually impossible.


    ...

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  9. सुचिंतित उपाय -लागू हो जायं तो राहत हो जाय

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