रविवार, 29 मई 2011

सही लक्षित कल्याणकारी आर्थिक सहायता ( Accurately Targeted Monetary Welfare Assistance )... एक बहुत देरी से उठाया जा रहा सही कदम है यह !!!

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मेरे कल्याण-कामी मित्रों,


कभी-कभी ही ऐसा होता है कि कोई खबर एकदम से मन खुश कर देती है...


एक कल्याणकारी राज्य ( Welfare State ) का आदर्श ढोते देश हैं हम... आजाद हुऐ ६४ साल हो जायेंगे इस पंद्रह अगस्त को... ६४ साल से गरीबों का कल्याण कर रहे हैं हम... पर आश्चर्य की बात यह है कि हमारे गरीब अभी भी गरीब ही हैं... 


कल्याणकारी राज्य की बुनियाद टिकी है निर्बल या गरीब के लिये दी जा रही विभिन्न सबसिडियों पर...


सबसिडी दी जाती है मिट्टी के तेल पर... पर वह उस को नहीं मिलता जिसके लिये दिया जा रहा है, उसका इस्तेमाल हो जाता है पैट्रोल पंपों में पेट्रोलियम पदार्थों में मिलावट करने में, उद्योगों में, मिट्टी तेल से जनरेटर चलाने में...


१६.५० रूपये प्रति लीटर की अंडर रिकवरी की जाती है गरीब के हित के नाम पर डीजल में... फायदा उठाते हैं ट्रांसपोर्टर, जो कि ग्राहक से लागत लेने में सक्षम हैं... दौड़ते हैं धन-झोलाओं के SUV... रोशन रहती हैं प्रभु वर्ग की 'गेटेड कम्यनिटीज्' २४ X ७ पावर बैकअप से उसी डीजल की बदौलत...


सबसिडी दी जाती है घरेलू गैस के सिलिंडर पर ३५० रू० प्रति सिलेंडर से ज्यादा... सारे मिठाई वाले, चाट वाले, होटल वाले, केटरिंग वाले और आम लोग भी जलाते हैं उसी सिलेंडर को अपने आयोजन में... जाड़ों में गैस-गीजर चलते हैं ( बिजली से सस्ता जो पड़ता है न )... अब तो कारें भी उसी से चलाते हैं प्रैक्टिकल लोग...


हजारों हजार करोड़ हर साल खर्च होता है पीडीएस के मार्फत गरीब को सस्ता अनाज देने को... बहुत कम गरीबों को नियम से सही दर पर मिल पाता है यह... लग जाता है मुनाफाखोरों व भ्रष्टों की भूख शान्त करने को...


कुछ इसी तरह की ही है खाद ( कैमिकल फर्टिलाइजर ) सबसिडी भी... खाद करखानों को हर स्टैप पर सबसिडी मिलती है... इसका भी अधिकाँश जाता है प्रभु वर्ग की ' गरीबी ' दूर करने में...


ऐसे में कुछ सुधार की आशा जगाती है यह खबर...


देखिये यहाँ पर ( साभार हिन्दुस्तान टाइम्स )


Fuel subsidy: Govt to give Rs 400 to BPL families
As part of India’s first direct cash transfer scheme, every below poverty line family may get over Rs 400 per month from the government from April next year in lieu of fuel subsidy for kerosene and liquefied petroleum gas cylinders. The move, which is expected to be considered by the Empowered Group of Ministers (EGoM) on June 9, is aimed at checking use of kerosene for fuel adulteration and reduce financial loss to fuel companies.
New methodology, if accepted, will benefit around 40 crore poor Indians.http://www.hindustantimes.com/Images/HTEditImages/Images/28_05_pg12a.jpg
The smart cardOnce the new regime is introduced, a below poverty line (BPL) family will get approximately Rs 300 per month on a smart card to be registered in name of a household woman for kerosene and another Rs 100 for LPG cylinder.
“These smart cards will have Aadhaar numbers to prevent any leakages,” as official said.
Kerosene and LPG cylinders will be available at the market rate and the poor will get it at the existing subsidised price after the money will be deducted from their smart card.
The work for introducing the regime has already started in states such as Haryana and Andhra Pradesh.
Lessening burdenThe fuel subsidy burden on the Centre in 2010-11 was Rs 38,336 crore in the last financial year, of which about R16,000 crore was meant for providing kerosene at subsidised rates to the poor. In this budget, the total petroleum subsidy is Rs 23,640 crore.
Till now, the government had to bear a cost of Rs 28 per litre to provide kerosene at highly subsidised rate of Rs 12 per litre and over Rs 150 for a LPG cylinder.
The low cost meant incentive to sell kerosene for adulteration of petrol, whose market price is Rs 63 per litre.
“As the product will move in the entire distribution chain at full price, there will be no incentive left for diversion of kerosene,” says a proposal mooted for empowered group of ministers (EGoM) headed by Pranab Mukerjee.
The government intends to introduce the new regime from April 2012.


कुछ इसी तरह की सही लक्षित कल्याणकारी आर्थिक सहायता ( Accurately Targeted  Monetary Welfare Assistance ) को खाद्मान्न, केमिकल फर्टीलाइजर, शिक्षा, स्वास्थ्य व सैनिटेशन के क्षेत्र में भी लागू करने की जरूरत है...


एक मुल्क के तौर पर हम कल्याणकारी योजनाओं में से हो रहे रिसाव ( Pilferage ) को अब और नहीं झेल सकते और न ही अब हमें इसे और झेलना भी चाहिये...


आपका क्या सोचना है इस बारे में...










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11 टिप्‍पणियां:

  1. इस तरह की बातों को और अधिक बर्दास्त नहीं किया जाना चाहिए।

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  2. डिब्बे कितने ही मजबूत बनाएँ
    चूहे हर बार कुतर डालते हैं
    नया डिब्बा आया है
    चूहे मशगूल हैं
    उसे कुतरने की
    तरकीब ईजादने में

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  3. प्रवीण भाई खबर तो वाकई खुश कर देने वाली है मगर हम खुश नहीं हैं -आपने सरकारी योजनाओं पर मेरी दो तीन पहले वाली पोस्ट नहीं पढी ...यह एक और वोट खेंचू योजना होने जा रही है -
    जिस बेलो पावर्टी लाईन की बार आप कर रहे हैं वह भयंकर रूप से त्रुटी पूर्ण है -गरीब ही तो नहीं हैं उसमें -पिछले आठ सालों से इसी सूची पर खैरात इमदाद बात रहा है (२००२ में तैयार हुयी थी यह सूची ) अब २०१२ में नए सिरे से बनेगी !
    देखिये तब शायद यह सही बन सके -

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  4. सरकार नन्दन नीलेकनी को इस तरह की तकनीक का ब्राण्ड एम्बेसडर बना कर वाहावाही लूटना चाहती है। अन्यथा इस यू.आई.डी. की परियोजना को जिस स्पीड से लागू करना था, वह देखने में नहीं आती।

    राजनेताओं को तो नरेगा छाप मेगा खर्चे की योजनाओं में रुचि है, जिसमें से पैसा साइफन किया जा सके।

    सॉरी, मैं आजकल बहुत स्केप्टिक हो गया हूं। :(

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  5. हर सब्सिडी का दुरुपयोग होते देखा है।

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  6. इस तरह की बातों को और अधिक बर्दास्त नहीं किया जाना चाहिए। धन्यवाद|

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  7. हर सब्सिडी का दुरुपयोग तो होता ही है जिसको रोका जाना चाहिए....

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  8. महंगाई तो महसूस होती है, लेकिन इसका अर्थशास्‍त्र समझ में नहीं आता.

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