सोमवार, 11 अप्रैल 2011

भारतीय प्रबंधन संस्थानों ( IIM's ) को धन-झोलाओं ( Money Bags ) के कब्जे में डालने की तैयारी... वह भी स्वायत्तता, सशक्तीकरण व उदारीकरण के नाम पर...

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मेरे अशक्त मित्रों,


अभी-अभी अंग्रेजी साप्ताहिक 'आउटलुक' की यह खबर पढ़ी... आप भी पढ़िये...


आज भारत यदि वैश्विक परिदॄश्य में एक उभरती ताकत के तौर पर जाना-माना जाता है तो इसके पीछे हमारे IIT's व IIM's का एक अहम योगदान है... परंतु हमारी सरकारें स्वायत्तता की दुहाई देकर पिछले दरवाजे से IIM's के निजीकरण की तैयारी कर रही हैं... 


Key structural changes proposed by the R.C. Bhargava and Ajit
Balakrishnan committees set up by the HRD ministry

IIM Societies
  • A substantial donation should be made to become a member. 
  • Society to be trimmed to 20 members.
  • Investment to be treated as equivalent to having an equity.
  • Society will ratify appointment of board members and directors


सीधा साफ है कि सौ-पचास करोड़ दान में देकर कोई भी धन्ना सेठ सोसायटी का
सदस्य बन जायेगा... 

धीरे-धीरे यही लोग सोसायटी पर कब्जा कर लेंगे...


और हिन्दुस्तान के काबिल (पर गरीब) बच्चे का IIM में पढ़ने का सपना गया
पानी में...


मुझे यह अचानक 2G की क्यों याद आ रही है ???...




अन्ना को भी यह बता देना कोई...










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11 टिप्‍पणियां:

  1. इन संस्थानों के छात्र सेवा भी तो उन्हीं धन झोलाओं की करते हैं।
    सामाजिक क्षेत्र को तो प्रबंधन की जरूरत नहीं, वहाँ आने लगे तो नेताओं का क्या होगा?

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  2. यहां कौन आम आदमी के बच्चे जाते हैं, कोई गाहे—बगाहे एकआध फंस भी गया तो फांस सा दिखता है सा​​थियों को, वर्ना बुर्जुआ लोगों की जगह है ये यूं भी.

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  3. वैसे भी प्रबंधन शिक्षण है क्या? वही कौशल जो अपने कंधे पर भी वही धन-झोला लटकाने का सामर्थ्य प्रदान करे।

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  4. एक खास किस्म का समाजवाद झेल रहा है ये मुल्क !

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  5. कहाँ हो ? कभी कभी लिखते रहा करो यार !
    शुभकामनायें !

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