गुरुवार, 7 अप्रैल 2011

पुरूष, पुरूषार्थ, नारियाँ भी... और IF ( यदि/अगर )...



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मित्र गौरव की इस पोस्ट पर प्रस्तुत इस आलेख को पढ़ा... एक वाक्य पर नजर अटक सी गई... " व्यक्ति को किसी भी विषय पर सिर्फ सांसारिक लोकाचार (जो असल में मायाजाल है) के अनुसार नहीं सोचना चाहिए। बल्कि वेदों में वर्णित पुरुषार्थ की व्याख्या के आधार पर अपने कर्मों को सुधारना चाहिए।"  



सोच में पढ़ गया मैं... क्या होता है पुरूषार्थ ?... अंग्रेजी में इसका समानार्थी शब्द ढूँढने में नाकामयाब रहा मैं... आप को ज्ञात हो तो बताईयेगा...

तभी याद आया बचपन में खरीदा वह अंग्रेजी कविता पोस्टर जो जीवन भर साथ रहा है मेरे... जो बतलाता है कि कौन कहलायेगा संपूर्ण या आदर्श पुरूष... यहाँ पुरूष शब्द का लैंगिक प्रयोग नहीं है... नारियों पर भी यह लागू होता है... संपूर्ण या आदर्श नारी भी ऐसी ही होगी, यह मेरा मानना है... सोचता था कभी हिन्दी में अपने तरीके से अपने शब्दों में अनुवाद करूँगा इसका...  ब्लॉगर ने मौका व प्लेटफार्म दोनों उपलब्ध कराये हैं... अत: आपके सामने पेश है यह...





अगर


अगर तुम रख सकते हो अपने होशोहवास व क्रोध  को नियंत्रण में

जब गुस्से से पागल हों  सारे और ठहराते हों तुम ही को इसका कसूरवार

भरोसा रख सकते हो खुद पर जब सभी तुम पर कर रहे हों शक

लेकिन उनके इस अविश्वास को भी तुम जायज ही कहते हो

अगर कर सकते हो तुम इंतजार, बिना इंतजार से थके
 
 शिकार बन जाने के बावजूद गर तुम दूर रहते हो झूठ से

न तुम देवता से दिखते हो न ही बहुत बुद्धिमान नजर आते हो



देखते हो सपने जरूर पर नहीं बनते उनके गुलाम कभी

सोच सकते हो पर  विचार मात्र करना नहीं रहता मकसद कभी

अगर तुम गले लग कर मिल सकते हो जीत और हार से

और इन दोनों से ही बिल्कुल एक सा बर्ताव रहता है तुम्हारा

अगर तुममें हिम्मत है अपने ही कहे उस सत्य को सुनने की

जिसे मूर्खों को फंसाने के लिये दिया गया हो तोड़-मरोड़

अगर तुम देख सकते हो खुद की बनाई चीजों को टूटते

और एक बार फिर बना लेते हो उनको उन्हीं पुराने औजारों से



अगर अपनी सारी जीतों का लगा सकते हो एक बड़ा सा ढेर

और दाँव पर लगा सकते हो इसको सिक्के की एक उछाल पर

और हारने पर फिर से कर सकते हो शुरूआत प्रारम्भ से

बिना अपने इस नुकसान के बारे में एक लफ्ज भी किसीको कहे

अगर तुम अपने दिल, दिमाग और जज्बे को कर सकते हो मजबूर

अपनी बारी निकल जाने के बाद भी दौड़ में बने रहने को

अगर खड़े रह सकते हो जिंदगी की जंग में बिना कुछ साथ लिये

सिवाय अपनी इच्छा शक्ति के जो न मानती हो कभी हार



गर तुम संवाद कर सकते हो भीड़ से, बिना सिद्धांतों पर समझौता किये

या साथ चल सकते हो राजाओं के, अपना देहातीपन रखे बरकरार 

अगर न तो दुश्मन तुम्हें आहत कर सकें न दोस्त ही

वैसे सब हैं तुम्हारे पर नहीं है कोई भी एकदम अहम-अनिवार्य


अगर तुम भर सकते हो प्रत्येक मिनट रूपी क्रूर काल को

साठ सेकेंड की लंबी अनवरत व फलदाई दौड़ से



तुम्हारी ही यह दुनिया है और इसकी सब चीजें भी तुम्हारी हैं

और सबसे बड़ी बात यह कि तुम एक पुरूष कहलाने के लायक हो, मेरे पुत्र !

तभी तुम पुरूषार्थी कहलाओगे, हे मानव !
साभार  ' सुज्ञ  ' जी ...



यह कालजयी कविता है Rudyard Kipling ... रूडयार्ड किपलिंग की ... IF...








मूल रूप में भी इसका आनंद लीजिये...


IF you can keep your head when all about you
Are losing theirs and blaming it on you,
If you can trust yourself when all men doubt you,
But make allowance for their doubting too;
If you can wait and not be tired by waiting,
Or being lied about, don't deal in lies,
Or being hated, don't give way to hating,
And yet don't look too good, nor talk too wise:

If you can dream - and not make dreams your master;
If you can think - and not make thoughts your aim;
If you can meet with Triumph and Disaster
And treat those two impostors just the same;
If you can bear to hear the truth you've spoken
Twisted by knaves to make a trap for fools,
Or watch the things you gave your life to, broken,
And stoop and build 'em up with worn-out tools:

If you can make one heap of all your winnings
And risk it on one turn of pitch-and-toss,
And lose, and start again at your beginnings
And never breathe a word about your loss;
If you can force your heart and nerve and sinew
To serve your turn long after they are gone,
And so hold on when there is nothing in you
Except the Will which says to them: 'Hold on!'

If you can talk with crowds and keep your virtue,
' Or walk with Kings - nor lose the common touch,
if neither foes nor loving friends can hurt you,
If all men count with you, but none too much;
If you can fill the unforgiving minute
With sixty seconds' worth of distance run,
 
Yours is the Earth and everything that's in it,
And - which is more - you'll be a Man, my son!
आभार !
...

18 टिप्‍पणियां:

  1. मैं पुरुष को मानव ही समझ रही हूँ ...
    वाकई ये अगर हो सके तो फिर कोइ मग ना रहे !
    कविता बहुत प्रेरक है !

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  2. हो सके तो
    "प्रेक्टिस मेक्स अ मेन परफेक्ट "
    पर भी विचार करें :)

    मैं तो बस मुस्कुराता हूँ आजकल ..........
    कुछ भी बोलना बंद कर दिया है :)

    चाहे उत्तर पता हो तब भी चुप ही रहता हूँ :)

    उत्तर देंहटाएं
  3. खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी
    मे जो अर्थ आप मर्दानी का समझते हैं वही पुरुषार्थ का हैं .
    हिंदी के बहुत से शब्दों का अर्थ इंग्लिश मे नहीं हैं और इंग्लिश के बहुत से शब्दों का अर्थ हिंदी मे नहीं हैं . ब्लॉगर शब्द को ही ले लीजिये .

    इस के अलावा एक इंग्लिश का शब्द हैं earth जो बहु अर्थी हैं

    कर्म से जुडा हैं पुरुषार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर कविता पढवा दी……………शायद ज़िन्दगी के सारे अर्थ इस मे सिमट आये हैं।

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  5. पुरूषार्थ को समझने के एग्रीगेटर को समझ लें तो भी समझ जायेंगे जैसे शाहनवाज जी कभी इनकी अन्‍जुमन के मेम्‍बर थे अब उसे ही एग्रीगेटर से निकाल दिया है
    क्‍या आरोप है उस पर?

    इस लिए कि इनकी दूकान चलती रही उस पर हिन्‍दू ब्‍लागर आते रहें, मुसलमानों के इनकी दूकान पर दिखायी देने से से दुकानदारी खराब होती है

    यह पैसे के लिए पल्‍टी मारना ही है पुरूषार्थ

    दोस्‍त जिन्‍दाबाद

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  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  7. (Rudyard Kipling)रूडयार्ड किपलिंग की कविता IF... का हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत करते हुए, समानता दर्शी अर्थ सम्प्रेषण में दुविधा और विवशता आपकी इस पोस्ट के शिर्षक में ही झलक रही है।

    पुरूषार्थ शब्द में पुरूष ही अभिप्रेत नहीं है।
    पुरूषार्थ का अर्थ है 'सार्थक उध्यमशीलता'

    यदि आशय यही है तो……

    you'll be a Man, my son!

    तभी तुम पुरूषार्थी कहलाओगे, हे मानव

    उत्तर देंहटाएं
  8. यह कविता मन के भाव ऊँचे कर जाती है, अनुवाद भी बहुत अच्छा है, किसने किया?

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  9. बहुत ही अच्छे शब्दों का मिश्रण !हवे अ गुड डे ! मेरे ब्लॉग पर आये !
    Music Bol
    Lyrics Mantra
    Shayari Dil Se
    Latest News About Tech

    उत्तर देंहटाएं
  10. .
    .
    .
    यदि आशय यही है तो……

    you'll be a Man, my son!

    तभी तुम पुरूषार्थी कहलाओगे, हे मानव


    @ सुज्ञ जी,

    आभार! आपका किया अनुवाद ज्यादा सही है, मैंने संशोधन कर दिया है ।


    ...


    अनुवाद भी बहुत अच्छा है, किसने किया?

    @ प्रवीण पान्डेय जी,

    देव, आग्रह रहेगा कि पोस्ट एक बार फिर से पढ़ें, जान जायेंगे... ;))



    ...

    उत्तर देंहटाएं
  11. सोच में पढ़ गया मैं... क्या होता है पुरूषार्थ ?
    भाई साहब ! पुरुषार्थ सोचने की नहीं बल्कि करने की चीज़ है .
    आप चाहें तो अपने बच्चों की मम्मी जी से पूछ लीजिये.
    :) :)

    http://blogkikhabren.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  12. .
    .
    .
    @ डॉ० अनवर जमाल साहब,

    मैं बुरा नहीं मान रहा... पर सोचियेगा जरूर कि क्या इस तरह की टिप्पणी देकर आप एक 'स्टीरियोटाइप' को पुष्ट करने का काम नहीं कर रहे ?


    ...

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  13. कालजयी कविता और परिश्रम से किये गए उसके अनुवाद से दीगर पुरुषार्थ का अर्थ भारतीय वांग्मय में है -
    जो धर्म अर्थ काम मोक्ष को साध ले वही सच्चा पुरुषार्थी है -इसकी लम्बीर व्याख्या हो सकती है मगर आप सरीखे विज्ञ पुरुष को इतना संकेत काफी है !यही चार पुरुषार्थ भारतीय ज्ञान मनीषा बताती आयी है !
    बाकी लोक जीवन में शारीरिक शक्ति को भी अज्ञानता वश सीधे साधारण लोग "पौरूख" मानते हैं . 'स्टीरिओटाइप 'भी देखिये वैसा ही कुछ कह रहे हैं ...
    "क्या करें भैया अब उतना पौरुखे ही नाय रहा नाहीं त ... ई कर देते ऊ कर देते "
    मर्दानी बोले तो ब्रेवरी -मगर केवल ब्रेवरी ही पुरुषार्थ नहीं है .....इसे व्यापक अर्थ में लिया गया है !
    घोड़े गधे भी बड़ा पराक्रम करते हैं तो क्या वे सभी पुरुषार्थी हो गए?

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  14. @इ लगा कि थोड़ी व्याख्या कर ही दी जाय पता नहीं सुज्ञ और गौरव या अमित को फुर्सत मिले या नहीं :)
    धर्म =मानवता ,मानवीय सहज गुण, परहित सरिस धर्म नहीं भाई
    अर्थ =धन प्राप्ति मगर नीतिगत तरीकों से ,नैतिकता से ...
    काम =सृष्टि के मूल प्रयोजन ,संतत्ति संवहन हेतु काम केलि ....और इसलिए ही यह क्रिया इतनी रिवार्डिंग है!
    मोक्ष =सबसे दुर्लभ पुरुषार्थ .....आवागमन से सदा के लिए मुक्ति !
    ये पुरुष के लिए आवश्यक बताये गए हैं ..अगर कोई नारी यह अर्जित कर ले तो वह भी निसंदेह पुरुषार्थी होगी .....
    पुरुषार्थ ही परमार्थ है मनुष्यता के लिए !

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  15. @पुनश्च :
    अब देखिये आधुनिक पुरुष और आज की नारी इन चारों परमार्थों को कहाँ तक साध पाते हैं ?

    उत्तर देंहटाएं
  16. देसज प्रत्यय का अंग्रेजी समानार्थी तब मिलता जब उन्हें भी मायाजाल का बोध हो गया होता :)

    इधर मैं , अपने समाज और समय के प्रति जबाबदेह बंदे को आदर्श मानूंगा भले ही वो मायाचारी हो :)

    सुन्दर कविता ! सुन्दर अनुवाद !

    उत्तर देंहटाएं

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