बुधवार, 27 अप्रैल 2011

द साईं फिनोमिना : चमत्कार को नमस्कार... अलविदा सत्य साईं, अब आयेंगे प्रेमा साईं...


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बताया जाता है कि २३ नवंबर १९२६ को आंध्रप्रदेश के एक गुमनाम से गाँव पुट्टापर्थी में जन्मे एक बालक ने बिच्छू द्वारा काटे जाने के बाद अचानक ही अपना व्यवहार बदल सा दिया, कभी वह बालक हंसते -हंसते अचानक रोता तो कभी संस्कृत का ज्ञान न होने के बावजूद भी संस्कृत के श्लोक बोलने लगता... २३ मई १९४० को उन्होंने अपने को शिरडी के साईं बाबा का अवतार घोषित कर दिया... शिरडी के साईं बाबा जीवन भर एक आम आदमी की तरह रहे व भिक्षायापन कर जीवन निर्वाह करते रहे, उनका देहावसान १५ अक्टूबर १९१८ को हुआ था... उन्होंने कभी किसी चमत्कार का दावा नहीं किया व न ही वे संस्कृत में बोलते थे...

बहरहाल पुट्टापर्थी का वह बालक ' सत्य साईं बाबा ' के रूप में जाना जाने लगा... उन्होंने हवा में हाथ घुमाकर भभूत, स्विस घड़ियाँ, रत्न जड़ित सोने की अंगूठियाँ, सोने की चेन, देव मूर्तियाँ आदि आदि चीजें उत्पन्न कर भक्तों को देना शुरू कर दिया... भक्त की आर्थिक-सामाजिक हैसियत से यह निर्धारित सा होता था कि बाबा उसके लिये क्या चीज निकालेंगे... साधारण-सामान्य-दीन-हीन भक्त के लिये भभूत निकलती थी तो वीवीआईपी भक्तों के लिये बेशकीमती व उन द्वारा शरीर पर धारित किये जाने योग्य चीजें...

अब्राहम टी कोवूर जैसे रैशनलिस्टों, जादूगर पी सी सरकार, बासव प्रेमानन्द आदि ने इसे हाथ की सफाई बताया, जो कि वह है भी... बंगलौर विश्वविद्मालय के तत्कालीन कुलपति एच नरसिम्हैया ने बाबा को अपने चमत्कार नियंत्रित परिस्थितियों में सबके सामने करने की चुनौती दी... बाबा का जवाब था कि "    शून्य से कुछ भी नहीं पैदा किया जा सकता, यह सीमित सोच विज्ञान के लिये तो सही हो सकती है, परंतु आध्यात्म व पराविज्ञान के लिये यह नियम नहीं लागू होता "   ... बाबा ने चुनौती स्वीकार नहीं की...

नेट पर उपलब्ध तमाम वीडियो यदि आप देखेंगे तो पायेंगे कि साईं मूर्ति पर भभूत वर्षा के दौरान बाबा बार बार हाथ हिला कलश से भभूत निकाल गिरा रहे हैं... सीधा सवाल होता है कि यदि भभूत स्वयं हाथ से ही प्रकट हो रही है तो कलश की आवश्यकता ही क्या है... शिवरात्रि के दिन मुँह से स्वर्ण का अंडाकार शिवलिंग उगलने के दौरान एक मोटा सफेद तौलिया बाबा के हाथ में मौजूद है... कई कोणों से खींचा वह वीडियो भी मौजूद है जो साफ दिखा रहा है कि मुँह से थोड़ी सी लार मात्र निकली परंतु तौलिये की तहों से बाबा नें अंडाकार शिवलिंग निकाल दिखा दिया...

बाबा ने अपने इन तथाकथित चमत्कारों की आलोचना का कोई उत्तर नहीं दिया, उनका कहना था कि वे यह सब लोगों को ईश्वर की शक्ति के प्रति आकर्षित करने के लिये करते हैं... भक्तों के लिये तो वे साक्षात ईश्वर यानि किसी भी तरह के संदेह से परे व किसी भी कार्य को करने में सक्षम भी... यदि इस तरह के सवाल किसी भक्त के मन में भी आते तो शायद स्विस घड़ी की स्विटजरलैंड स्थित फैक्टरी से भक्त की कलाई तक पहुंचने की चमत्कारिक यात्रा के पड़ावों व सहयोगियों का भी खुलासा हो जाता...

भक्तों के दिमाग में यह सवाल भी शायद ही कभी आता था कि किसी भक्त की अवरूद्ध कॉरोनरी धमनियाँ तो बाबा सपने में जाकर दिल की तस्वीर पर एक क्रॉस लगाकर खोल देते हैं और किसी बेचारे को बाबा के बनाये अस्पताल में जा कॉरोनरी बाईपास ग्राफ्टिंग करवानी पड़ती है, ऐसा क्यों...

अस्सी के दशक में फिल्म आई 'अमर-अकबर-एन्थोनी ', उसमें गाया रफी का गाना था " जमाने ने कहा टूटी हुई तस्वीर बनती है, तेरे दरबार में बिगड़ी हुई तकदीर बनती है "... इस गाने ने शिरडी साईं के प्रति उत्सुकता बढ़ा दी और लाभ उनके स्वघोषित अवतार को भी मिला... नब्बे के दशक में बाबा के भक्त नरसिंहराव प्रधानमंत्री, चव्हाण ग्रह मंत्री व शिवराज पाटिल लोकसभाध्यक्ष रहे, इस दौरान बाबा की प्रसिद्धि में भी काफी इजाफा हुआ... बाबा साक्षात भगवान माने जाने लगे... और उसी तरह दर्शन सत्र भी आयोजित होने लगे...

बाबा के भक्तों में खाये-पीये-अघाये शहरी उच्च वर्ग व शहरी उच्च मध्य वर्ग की बहुत बड़ी संख्या है... न्यायाधीश, राजनेता, नौकरशाह, उद्मोगपति, खिलाड़ी, फैशन-फिल्म-टीवी-मीडिया जगत की हस्तियाँ, वैज्ञानिक, शिक्षाविद आदि आदि उनके भक्त थे... यह लोग सत्य साईं ट्रस्ट द्वारा शिक्षा, चिकित्सा व पेयजल उपलब्धता के कार्यों से प्रभावित थे... उनके राजनीतिक व नौकरशाह भक्त बड़ी ही सहजता व से यह तथ्य भूल जाते थे कि यह सब चीजे आम आदमी तक उपलब्ध करवाने का प्राथमिक दायित्व स्वयं उन्हीं का था, इसे भूल वह ट्रस्ट का गुणगान करते थे...

कथित रूप से ४५००० करोड़ से लेकर डेढ़ लाख करोड़ रू० की चल व अचल संपत्ति वाले इस ट्रस्ट ने पिछले कई सालों से अपनी आय-व्यय का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया... सही भी है भगवान से हिसाब कैसा ?... वैसे भी दान, सेवा, खैरात आदि देकर पुण्य कमाने के लिये सबसे बड़ी व जरूरी चीज है दीन-हीन, दुखियारे, असहाय व मदद को हाथ फैलाते इंसान का वजूद... धर्म को यथास्थितिवाद की सबसे बड़ी ताकत इसीलिये कहा जाता है क्योंकि वह इस दीन-हीन, दुखियारे, लाचार व हाथ फैलाये इंसान के वजूद को बचाये रखता है व उसे यह भी कहता है कि इसी में उसका कल्याण है... ताकि प्रभुवर्ग पुण्य अर्जन कर सके...

दया/भीख/खैरात नहीं काम दो
किये काम का वाजिब दाम दो

है ऐसा कोई धर्म, धर्मगुरू, आध्यात्मिक गुरू, बाबा, योग गुरू ? जो यह कहता हो और ऐसा न करने वाले को अपना भक्त न मानते हुऐ धर्मस्थल व पंडाल से बाहर निकलने को कहता हो...

२००६ से सत्य साईं बाबा शरीर के एक हिस्से के काम न करने के कारण व्हील चेयर पर ही सीमित थे... भगवान के अवतार की यह दशा सभी को बहुत दुखी करती थी पर सत्य साईं भक्तों के अनुसार बाबा यह सब दुख भक्तों के कल्याण के लिये उठा रहे थे... बाबा ने भविष्यवाणी की थी कि वह ९६ वर्ष की आयु अर्थात २०२२ तक जीयेंगे व उनके देहावसान के आठ वर्ष बाद अगले साँई अवतार 'प्रेमा साईं बाबा' अवतरित होंगे कर्नाटक के माँड्या जिले में जो १४ वर्ष की आयु में २०४४ में अपने को अवतार घोषित करेंगे...

परंतु अवतारों की यह लीला अवतार ही जानें... सत्य साईं ११ वर्ष पहले ही सबको छोड़ गये... हो सकता है कि प्रेमा साईं भी जल्दी ही प्रकट हो जायें भक्तो के सम्मुख...

सत्य साईं बाबा की लोकप्रियता के साथ साथ पिछले दशक में शिरडी के साईं बाबा की भी अवतारी पुरूष से ऊपर उठ साक्षात भगवान के रूप में स्थापना हुई है समाज में... बड़े शहर ही नहीं छोटे कस्बों यहाँ तक कि गाँवों में भी साईं मंदिर, साईं धाम, साईं संकीर्तन मंडल खुल चुके हैं... नियमित साईं भजन संध्या आयोजित होती हैं... शिरडी साईं मंदिर का एकमात्र असली फ्रेंचाइजी होने का दावा करते 'साईं सेवक' अक्सर 'साईं दरबार' लगाते हैं...

अगला दौर सत्य साईं मंदिरो का अब आने ही वाला है...

विश्व का प्राचीनतम सनातन धर्म जिसे आज हिन्दू धर्म भी कहा जाता है, ने कई दौर देखे हैं... और इन्हीं अनुभवों से विकसित की है बृह्मा-विष्णु-महेश की त्रिमूर्ति... अर्थात उत्पत्ति-विस्तार-अंत अथवा सृजन-विकास-विनाश का कभी न रूकने वाला सिलसिला... वास्तव में यही सृष्टि का एकमात्र उद्देश्य  है और यही है जीवन सत्य भी... व्यक्तित्वों, राज्य व्यवस्थाओं, मजहबों, पंथों, सभ्यताओं, संस्थाओं और यहाँ तक कि  ' फिनोमिनाओं ' को भी इसी सिलसिले से गुजरना होता है... कोई इस चक्र से पार नहीं पा सकता...

साईं फिनोमिना भी अपने पूरे उठान पर है आज ,और आगे और भी बढ़ सकता है... इस चमत्कार को मेरे साथ-साथ आप भी नमस्कार करिये !

सत्य साईं बाबा ने एक बार यह कहा था :-

"  मैं भगवान हूँ, आप भी भगवान हैं, मुझमें और आपमें अंतर सिर्फ इतना है कि मैं इस बात को जानता हूँ और आप इससे पूर्णतया अनजान हैं। "

निश्चित तौर पर मेरे कुछ स्नेही पाठक मेरे इस आलेख के उद्देश्य पर सवाल उठायेंगे... उनके लिये यह मैं भी कहना चाहूँगा :-

"  आप भगवान नहीं हैं, मैं भी भगवान नहीं हूँ, कोई भी भगवान नहीं हो सकता, शायद कहीं कोई भगवान है ही नहीं... मुझमें और आपमें फर्क सिर्फ इतना है कि मैं अपने इस संशय को जगजाहिर कर देता हूँ और आप सब कुछ देखते-जानते-समझते हुऐ भी अपने मस्तिष्क में उठते इन संशयों को भगवान के ही भय से दबा देते हो और ऊपरी तौर पर अपने मन में ऐसे संशयों का वजूद ही न होने का दिखावा करते हो "

आभार!





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24 टिप्‍पणियां:

  1. पर विडम्बना देखिये ऐसे तथाकथित अवतारों को देश के राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री, तेंदुलकर जैसे महान क्रिकेटर पूजते है !! तो देश की धर्मभीरु जनता को क्या कहें !!

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  2. निसंदेह बाबा ने बहुत से अच्छे कार्य किये... परन्तु एक बात मेरी समझ में नहीं आई कि जब बाबा सब कुछ जानते थे तो फिर उन्होंने अपने परम भक्त भ्रष्ट नेताओं के चरित्र को ठीक क्यों नहीं किया? और अगर वह सुधरने के इच्छुक नहीं थे तो उनसे मिलने वाले लाभ की इच्छा को समाप्त कर उन्हें अपने सानिध्य से दूर क्यों नहीं किया? क्यों नहीं सबके सामने उन्हें धक्के मार कर बाहर किया गया?

    इस प्रकरण पर बाबा की बीमारी के समय अनुराग मुस्कान की पोस्ट के कुछ शब्द निरुत्तर कर गए.... "मैं असमंजस में हूं कि 'भगवान' के स्वास्थ्य लाभ की कामना करूं भी तो किससे?" उनके इन शब्दों में जितनी गहराई है, लाखों शब्द भी उसकी बराबरी नहीं कर सकते हैं.

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  3. मुझे यह लेख अच्छा लगा|
    विवेचन तथ्याधारित है|
    भारत-भू की अजीब समस्या है जो ३३ करोड़ देवता के बाद भी आदमियों को देवता बनाने पर आमादा है|
    मेरी निगाह में सत्य साईं बाबा कुछ सकारात्मक कार्य करने के बाद भी मदारी और बड़े लेबल के सेटर हैं| कतिपय विदेशियों द्वारा उनके जबरिया होमो-सेक्सुअल होने के आरोप भी हैं| पर जनता भेड़ तंत्री है, सो किसी सच्चे बाबा - फ्राड सत्य साईं टाइप के नहीं - की वाणी याद आ रही- 'यहाँ केहि समझाऊं सारा जग अंधा' !!

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  4. दान तो सलमान खान ऊर्फ चिंकारा शिकारी और संजयदत्त ऊर्फ ए के छप्पन भी देते है !

    ये भगवान क्यों नही हुये ?

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  5. साईं पर एक संतुलित और सम्पूर्ण आलेख ...
    आम आदमी चमत्कार प्रिय है..इन सर्च आफ मिरैकुलस ....
    बाबा लोग इस मनोविज्ञान को समझते हैं ....
    यह भीड़ तंत्र है ,अशिक्षा संचेतना का घोर अभाव. ..ऐसे में इन चमत्कारी बाबाओं की बनती/छनती ही रहेगी
    रही बात नेता परेता और संवैधानिक पदों पर बैठे उल्लुओं का इन बाबाओं का चरण चापन
    करते रहने का तो वे मक्कार यह जानते हैं कि बाबा के हाथ में एक विशाल वोट भण्डार है -
    और न्यायाधीश .आई ये एस आफीसर की नजर हमेशा ऐसे ट्रस्टों की अकूत संपदा पर रहती है ...
    हाँ साईं ने मानवता की सेवा के लिए भी जो कुछ किया उसका मैं आदर करता हूँ !

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  6. Main bhi sahmat hun, dukh tab hota hai jab Sarkari Machinery bhi Andhvishwash ke chakkar main pad jati hai.

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  7. गनीमत है, भक्‍तों ने 96 वर्ष पूरा होने के इंतजार में उन्‍हें जीवित नहीं मान लिया.

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  8. do din pehlae buzz kiyaa tha
    सत्य साई बाबा के निधन पर हिंदी ब्लॉग जगत मे एक दम शांति हैं . कोई पोस्ट नहीं दिखी . ऐसा पहली बार देख रही हूँ अन्यथा बधाई , शोक इत्यादि की खबरे ब्लॉग जगत मे जरुर दिखती हैं . मुझे कल से आश्चर्य हो रहा हैं . मेरी उनमे आस्था नहीं थी पर आज विस्तार से उनके किये हुए कामो को ,गरीबो के लिये उनके द्वारा चलाये स्कूल और अस्पताल इत्यादि के बारे मे पढ़ा तो लगा की अगर दो चार ऐसे लोग और हो जाये तो हमे आस्था हो ना हो पर उन के लिये आदर खुद उत्पन्न हो जाता हैं

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  9. सब तरफ चमत्कार ही चमत्कार हैं.टी वी लगाओ तो वहाँ भी चमत्कार चर्चा होती है.कहीं भगवान के स्वस्थ होने की प्रार्थना होती है तो कहीं किसी व्यक्ति को किसी खेल का ही भगवान घोषित कर दिया जाता है.फिर वही भगवान किसी अन्य भगवान की मृत्यु पर दुखी हो रोता है.
    इतने मूर्ख होते हुए भी हम आत्ममुग्ध हो अपने को संसार को राह दिखाने लायक मानते हैं.
    लगभग हर सफल व्यक्ति अपनी सफलता का श्रेय किसी मानव शरीरधारी भगवान को देने में व्यस्त हैं. शायद वे स्वयं को सफल होने के योग्य ही नहीं मानते.
    फिर भी यह देश चल रहा है, आगे भी बढ़ रहा है, यह क्या कम चमत्कार है?
    घुघूती बासूती

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  10. बहुत पहले एक पत्रिका में एक स्टोरी पढी थी। जिसमें इन सत्य सांई बाबा को स्मगलर भी बताया गया था। और शायद कारावास की सजा भी हुई बताई थी।

    प्रणाम

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  11. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  12. लोगो की भक्ति का एक रूप देखिये एक परचित शिर्डी से आये और कहने लगे की आज सभी बाबा के भक्त बनते जा रहे है क्योकि लोगो को तुरंत रिजल्ट मिलता है मतलब आप ने यहाँ मन्नत मांगी और वह पूरा मेरी सारी मन्नते तुरंत पूरी होती है अब तक वो चार काम शुरू कर उसे बिच में बंद कर चुके है आलस के करना घाटे के कारण उनकी मन्नत किस रूप में पूरी हुई यही समझ नहीं आया | ये असल में लालच की आस्था है जो लालच झूठी उम्मीद के करना होती है और बाबा लोग लोगो की इसी लालच का फायदा उठाते है |

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  13. प्रवीण भाई,
    मैं हमेशा से आपके विवेचनात्मक लेखन का मुरीद रहा हूँ… आप भगवान, ज्योतिष इत्यादि की जमकर खबर लेते हैं। परन्तु एक बात होती है व्यक्ति को मिलने वाला "मानसिक सहारा", एक प्रकार का "मनोवैज्ञानिक हिप्नोटिज़्म" जिसके वशीभूत होकर दुखी एवं पीड़ित व्यक्ति अपने दुख कुछ देर के लिये भूल जाता है। कई बार ऐसी स्थिति में उसकी "अंदरूनी ताकत" उसे कुछ ऐसा विचार दे जाती है, अथवा उसमें कुछ ऐसा "पॉजिटिव" बदलाव ला देती है, जिसकी हम कल्पना नहीं कर सकते… यही वह घड़ी होती है जब कोई व्यक्ति उस "जादूगर" को भगवान का दर्जा दे डालता है। आप और मैं चाहे लाख प्रयत्न कर लें, उस मनःस्थिति एवं उस "अनुभव" से गुज़र चुके व्यक्ति को, पलट कर वापस पुरानी स्थिति पर नहीं ला सकते…।

    हम सिर्फ़ इतना कर सकते हैं कि "नए मुर्गे" को उस जाल में फ़ँसने से बचा सकते हैं उसके दिमाग की खिड़कियाँ खोलकर…। यह भी उसी समय तक सम्भव होगा, जब तक कि उस पर कोई विपत्ति न टूट पड़े, क्योंकि निश्चित जानिये विपत्ति आते ही वह एक "मानसिक आधार" (झूठा ही सही) तलाश करने निकल पड़ेगा… :) और साँई नहीं तो कोई और, कोई और नहीं तो अन्य कोई और की भक्ति(?) में जा फ़ँसेगा ही…।

    अब एक दूसरे मुद्दे पर बात उठाना चाहूँगा, क्योंकि आपके ब्लॉग पर टिप्पणी देने वाले अधिकतर विचारवान सुधीजन होते हैं…। मैं भी साँई बाबा, आसाराम बापू या सुधांशु महाराज जैसे बाबाओं, प्रवचनकारों द्वारा दिखाए जाने वाले कथित चमत्कारों एवं नौटंकियों का विरोध करता रहा हूँ। परन्तु इस बात को स्वीकार करना ही पड़ेगा कि इन जैसे लोगों ने "धर्म परिवर्तन" की प्रवृत्ति पर अंकुश तो निश्चित ही लगाया है, साथ-साथ कई प्रकार के समाजसेवा कार्य भी किये हैं चाहे अस्पताल हों, स्कूल हों। दक्षिण भारत में जिस तेजी से मिशनरी द्वारा धर्मान्तरण किया जा रहा है उसकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा सत्य साँई बाबा ही थे। अब वह रुकावट हट गई है तो मैं आज से 25 वर्ष बाद की शर्त आपसे आज ही लगाने को तैयार हूँ कि प्रेमासाँई नामक जिस "अवतार" की बात की जा रही है (और जिसका चेहरा "अनायास"(?) ही क्राइस्ट से मिलता है)। यह तय जानिए कि "प्रेमासाँई" को जीसस का अवतार सिद्ध करने में अब "चर्च पोषित मीडिया" को अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ेगी, और उस वक्त की कल्पना कीजिये कि किस प्रकार का "Mass Conversion" होगा…

    हो सकता है आप मेरी इस बात को "कुतर्क" कहें, कुछ बुद्धिजीवी टाइप के लोग इस टिप्पणी को "साम्प्रदायिक" भी बता सकते हैं… परन्तु जो मैंने ऊपर कहा है उस दिशा में पहला कदम होगा, साँई ट्रस्ट का अधिग्रहण करना…
    (नोट:- सरकारी अधिग्रहण सिर्फ़ हिन्दुओं की संस्थाओं का किया जाता है)

    हिन्दू धर्मगुरुओं, हिन्दू धर्म परम्पराओं, भारतीय संस्कृति की खिल्ली उड़ाने वाले सभी टिप्पणीकारों का स्वागत है मेरे विरोध में… :) :) परन्तु साँई बाबा जैसे धर्मगुरुओं की तरफ़ देखने का मेरा नज़रिया थोड़ा अलग है, वह है 1)"दुख की घड़ी में मनुष्य को मानसिक आधार देने वाले" 2)"समाजसेवी" और 3)"धर्मान्तरण रोकने वाले"… बाकी का जादू-मंतर-छूमंतर वगैरह सब बेकार की बातें हैं…। यदि किसी को इन तीनों बिन्दुओं पर भी असहमति है तो इस बारे में मैं कुछ नहीं कर सकता… लोकतन्त्र है भई

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  14. शाह जी मैं तो original साईं बाबा का अनन्य भक्त हूँ. उनके अनेक चमत्कारों में से एक का मैं भी गवाह रहा हूँ जिसका जिक्र मैं अपनी एक पोस्ट साईं बाबा का चमत्कार- मेरे जीवन की सत्य घटना में भी किया है. समय मिले तो जरुर पढ़ें.

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  15. साईं पर एक संतुलित और सम्पूर्ण आलेख| धन्यवाद|

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  16. बहुत अच्छा विश्लेषण !
    सामाजिक कार्यों में उनकी भागीदारी को सम्मान दिया जा सकता है ... !

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  17. बहुत अच्छा विश्लेषण .....

    यह सच में विडम्बना है की जनता सच से मुह फेरे है ....
    अब जल्दी ही प्रेमा साईं प्रगट होंगे और भक्त गन उन्हीके भजन गायेंगे .... समाज की उन्नति में इनके जैसे लोग एक बहुत बड़ा रोड़ा है ...पर इनकी जड़े इतानी फैली है की कटना इतना आसान नहीं है.....

    समाज सेवा के नाम पर ये लोग कितना घिनौना कार्य करते है इससे हर कोई वाकिफ है.....

    इनकी समाज सेवा काम से जादा दिखावा होता है जो आम आदमीको असनिसे वशित करता है ....

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  18. अब तो हमें मीडिया द्वारा प्रचारित भगवान सचिन के मंदिरों का इन्‍तजार है। सच कहा है साई ने कि भारत में हर इंसान भगवान है। तुम मानों या ना मानो उन्‍होंने तो माना और पुजवा लिया अपने आपको। सारे ही जा पह‍ुंचे दरबार में। यह है भारत।

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  19. हमने सोचा इस ब्लॉग में सुनने को मिलेगा...बहुत पढ़ना पडा! लेख ऐसा है कि कमेंट भी पढ़ना पड़ा..! अच्छा लगा।

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  20. बहुत ही अच्छा लिखा आपने, हाल ही में आपके दृष्टिकोण से संबन्धित एक फिल्म आई है OMG (Oh My God) जो बिलकुल सही है आज के मायने में, मुझे ऐसे ही दृष्टि कोण वाले दोस्तों की तलाश है।
    मेरा ब्लॉग है।--http://dharmendra61.blogspot.com - यहाँ आपकी तरह कुछ अच्छा तो नहीं लिख पाता, लेकिन सोचता हूँ कि एक ऐसा मंच {वैबसाइट} जरूर बनाऊँ जिसमें इसी तरह के दृष्टिकोण रखने वाले लोग अपने लेखों को एक ही जगह लिखें। कैसा है? मेरा यह विचार मुझे जरूर बताएं।

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  21. लेकिन उसको नहीं देखा हमने कभी इसलिए सदा माता-पिता ही श्रेष्ठ लगे ..आस्था गलत नहीं लगी ,उससे विश्वास बढ़ा खुद पर मगर भोगी बाबाओं के बारे में क्या कहें ...

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