मंगलवार, 5 अप्रैल 2011

सलीम खान से डरते हो आप, आपके दिल में भी कोई जगह तक नहीं उसके लिये... इतने छोटे दिल के साथ कैसे ' हमारी वाणी ' कहला सकते हो आप ?

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सच कहूँ तो मेरे लिये यह पोस्ट लिखना बहुत ही दुखदायी है... परंतु जब ब्लॉगवुड के अपने वरिष्ठजनों को इस मुद्दे पर धृतराष्ट्र की तरह आँखें बंद किये... भीष्म की तरह निगाहें फेरते... या विदुर की तरह गोलमोल बातें करते देखता हूँ तो यह पोस्ट लिखना मेरे लिये बहुत जरूरी, लगभग अनिवार्य सा हो जाता है ताकि मैं बिना किसी शर्म के आईने में कल अपना चेहरा देख सकूँ...


संकलक का सौंदर्य बिगड़ने को आधार बना कर कुछ ब्लॉग हमारी वाणी से हटा दिये गये हैं या ब्लॉग मालिक को उनको हटा लेने को बाध्य कर दिया गया है... आज तक वैसे ब्लॉगवुड को यह नहीं बताया गया है कि हमारी वाणी का असली मालिक कौन है ? ...


व्यथित हो सलीम खान ने पोस्ट डाली है कैसे और क्यों बिगड़ता है संकलक का सौन्दर्य , सलीम लिखते हैं कि ऐसा केवल और केवल पूर्वाग्रहों से ग्रसित   होकर किया गया है। एक अन्य ब्लॉग ने भी अपनी आपत्ति कुछ ऐसे जताई है...  


खुशदीप जी लिखते हैं कि "हमारी वाणी सभी ब्लॉगरों को लेवल प्लेइंग फील्ड देने में विश्वास रखता है...इसलिए सभी ब्लॉगरों को भी इसकी शुचिता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सहयोग देना चाहिए...आशा है जो ब्लॉगर एक ही पोस्ट को अलग-अलग ब्लॉग पर लगाते हैं, वो दूसरे ब्लॉगरों को समान मौका देने के सिद्धांत को चोट पहुंचाते हैं...हमारी वाणी का बिना किसी भेदभाव तत्काल कार्रवाई करना सराहनीय है"... 

मैं सलीम खान की तरह घुमा फिरा कर यह नहीं कहूँगा कि "क्रिकेट के इस मौसम में ब्लॉग एग्रीगेटर पर स्लॉग ओवर इतनी बार खेलें कि कैप्टन (एग्रीगेटर मालिक) का नाम ओ निशान तक नज़र न आये" ...  


मैं तो सीधा सवाल करता हूँ  कि चुटकुले तो गजेन्द्र सिंह और अमित जैन (जोक्पीडिया) भी बेहतरीन लिखते हैं तो संकलक के मुखपृष्ठ पर स्लॉग ओवर शीर्षक के नीचे एक ही ब्लॉगर के नाम से लगाये २५ लिंक क्या संकलक के सभी को लेवल प्लेयिंग फील्ड देने के दावे का मजाक नहीं उड़ा रहे ???


कोई पोस्ट एक बार लगाई जाये या पचास बार... सामूहिक ब्लॉग में ब्लॉग प्रवर्तक का चित्र दिखते रहे या ब्लॉग का लोगो ही... यह मान कर चलना कि हमारा पाठक इतना भी दिमाग नहीं रखता कि वह उस चीज को भी पढ़ने पहुंच जाता है जिसे शुचितावादियों के अनुसार नहीं पढ़ना चाहिये... या यह मानना कि इससे संकलक का सौंदर्य घट रहा है... तंगदिली की पराकाष्ठा है यह... 


अपना दिल बड़ा रखिये हमारीवाणी... निश्चित रूप से इसमें सलीम खान व अन्य मुस्लिम ब्लॉगर्स के लिये जगह होनी ही चाहिये... अतिवाद यदि कहीं नजर आता हो तो संवाद करें, नजर अंदाज करें... परंतु किसी की मौजूदगी मात्र से डरना या उसे उलजलूल तर्कों के बहाने बाहर कर देना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिये सही नहीं...


मेरा विरोध दर्ज किया जाये !






आभार !








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लाल रंग से जो कुछ आपको लिखा दिख रहा है वह लिंक हैं... आप उन्हें खोल-पढ़ ही इस आलेख का मूल्याँकन करें, यह प्रार्थना व अपेक्षा रहेगी ।




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41 टिप्‍पणियां:

  1. चार जूते मारो इस मुल्ले को .....

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  2. praveen ji
    haamari vani muslim blog aggregator ban kar rehgayee thee salim , anwar jamaal aur aman kae paegaam ne isko gatar kae maafik banaa diyaa thaa

    hamari vani ko shahnavaaz ne banaya haen aur marg darshak haen
    dinesh ji
    satish ji
    sameer ji
    khushdeep ji
    aur ab
    masum ji
    aur geeta ji

    ab jaa kar kahin ham gandgi ko hatvaa paaye haen

    blogger associations kae naam par subah sae shaam tak hamari vani par bas ek hi post diktee thee

    hindu dharm aur mahila sambandhi aur bhi yaa to anwar jamal ki yaa salim ki yaa masum ki

    ab theek haen aur aap phir galat karvaana chahtey ho

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  3. प्रवीण जी,

    मैं आपकी इन सवालों का जबाब जानता हूँ और अपने ब्लॉग में धीरे-धीरे दे भी रहा हूँ|

    क्यूंकि मैं भी एक एग्रीगेटर चला रहा हूँ, अतः मैं ब्लॉग एग्रीगेटरों की समस्या भी समझ रहा हूँ|

    अभी तक मैंने सामूहिक ब्लॉग को टारगेट करते हुए लेख लिखे हैं तथा एक ही लेख को कई जगह लिखे जाने पर होने वाली समस्या को भी समझाया है

    मेरा आने वाला लेख "कैसे कार्य करते हैं ब्लॉग एग्रीगेटर" है, उम्मीद है इस लेख से काफी सवालों के जबाब आपको मिल जायेंगे

    हाँ वह स्लोग ओवर वाली बात तो मुझे भी सही लगी, उसको साइड बार में नहीं होना चाहिए|

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  4. प्रवीण जी
    आप भूल गए ब्लागवाणी के खिलाफ जाकिर और अन्य मुस्लिम ब्लोगर का यही आरोप था कि वहाँ इनकी पोस्ट नहीं दिखती हैं और कुछ सेकुलर बनाने के चक्कर मे हमारीवाणी के मार्गदर्शक बन गए . उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनको भी मजबूर किया जा सकता हैं सलीम . अनवर जमाल को हमारिवानी से हटाने के लिये

    ब्लोग्वानी को बड़े नितिबध तरीके से बंद करवाया था . कोई बात नहीं हमने हमारीवाणी से इनको ही बेदखल करवा ही दिया .

    शिकायत मे बड़ा जोर हैं

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  5. प्रवीण शाह भाई,
    आपकी आपत्ति सर माथे पर...पहली बात तो आपके उठाए बिंदुओं पर हमारी वाणी ही अच्छी तरह से जवाब दे सकता है, लेकिन क्योंकि आपने मेरा नाम लिया है तो मेरी तरफ़ से स्पष्टीकरण देना भी ज़रूरी हो जाता है...

    आपने जिस स्लॉग ओवर पर आपत्ति उठाई है, उसे मैंने हमारी वाणी के होम पेज से पूरी तरह हटाने के लिए कह दिया है...

    दूसरी बात, मैं मार्गदर्शक मंडल में हूं, इसलिए हमारी वाणी को सुचारू रूप से चलाने के लिए मेरी ज़िम्मेदारी बनती है...हमारी वाणी का उद्देश्य ब्लॉगर्स को भरोसेमंद एग्रीगेटर देना है...इस दिशा में वह निरंतर प्रयत्नशील है...ये सेवा पूरी तरह निशुल्क है...लेकिन किसी भी एग्रीगेटर को हवा में नहीं चलाया जा सकता...इसके लिए पैसा भी खर्च करना पड़ता है...इसके लिए या तो ब्लॉगर्स से ही कुछ शुल्क लिया जाए या फिर एग्रीगेटर को कॉमर्शियली वायबल बनाने के लिए प्रयत्न किए जाएं...हमारी वाणी ने दूसरा विकल्प चुना है...इसके लिए साइड बार में एड स्पेस के लिए कुछ जगह छोड़ी गई है...साथ ही कोशिश ये भी है कि हमारी वाणी की रैंकिंग निरंतर अच्छी होती रहे जिससे कि स्पेस सेलिंग की संभावनाएं तलाशी जाएं...रही स्लॉग ओवर की बात तो उसे मैंने अपने ब्लॉग से हटाकर उसका लिंक स्लॉग ओवर.हमारी वाणी.कॉम पर दे रखा है...सिर्फ इसी उद्देश्य से हमारी वाणी पर ट्रैफिक बढ़े...इस पर औसतन दो या तीन दिन में ही नई पोस्ट आ पाती है...हां एक तकनीकी दिक्कत की वजह से पुराने लिंक भी वहां दिख रहे थे...इस पर मैं हमारी वाणी का ध्यान दिला भी चुका था...लेकिन पहली बार ब्लॉग जगत में मेरे से सीधा सवाल उठा है तो मैं स्लॉग ओवर को फौरन हमारी वाणी के होम पेज से हटाने की गुज़ारिश करता हूं...

    और, एक बात और...किसी सज्जन की गतिविधियों से आज़िज़ आकर कार्रवाई करने वाला हमारी वाणी पहला एग्रीगेटर नहीं है...पहले कुछ दूसरे एग्रीगेटर्स को भी इसी तरह की परिस्थितियों में ऐसे ही फैसले लेने पड़े थे...कुछ तो आत्मावलोकन भी करना चाहिए...

    जय हिंद...

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  6. अवध बिहारी5 अप्रैल 2011 को 3:21 pm

    दोस्‍त आपने बात को बहुत अच्‍छे तरीके से रखा है,

    यह तो चार दिन में ही एग्रीगेटर से एग्रीकटर बन गया, लानत है ऐसी कमाई पर (खास तरफ खास भाई को इशारा)

    दूध पीने दो, फलने फूलने दो, चिटठाजगत या ब्‍लागवाणी जैसे रूतबे पे 5 साल लगेगें तब तक अल्‍लाह ने ने चाहा तो बहुत रंग बदलेंगे,

    आपका एक बार फिर शुक्रिया, धन्‍यवाद

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  7. कोई टिप्पणी नहीं,
    कृपया अन्यथा न लें,
    आज कोई टिप्पणी नहीं !

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  8. ब्लौग एग्रीगेटर्स को निष्पक्ष होना चाहिए।

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  9. प्रवीण जी,

    जरूरी नहीं कि किसी एग्रीगेटर से ब्लॉग जोर जबरदस्ती हटवाये ही जायें....कुछ ऐसे भी ब्लॉग होते हैं जो खुद ब खुद ऐसी जगहों से हट जाते हैं.....मैं भी हमारीवाणी पर अपनी पोस्टें पब्लिश करता था लेकिन जब देखा कि मेरी पोस्ट के अगल बगल सब तड़ीपार पोस्टें ही दिख रही है तो खुद ब खुद उस जगह से हट जाना ठीक समझा।

    फिलहाल मेरी कुछ पिछली पोस्टें जरूर वहां दिख रही हैं.

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  10. और हां....ये साफ सफाई अभियान जो चलाया गया है....वह सराहनीय कदम है। इसी बहाने कुछ तड़ीपार पोस्टें कम होंगी।

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  11. पहले प्रष्ट पर 20 से 25 पोस्ट प्रकाशित की जाती हैं, इसमें से अगर 3-4 पोस्ट अगर एक ही ब्लोगर की अलग-अलग ब्लॉग पर पोस्ट कर दी जाएं और ऐसा हर घंटे लगातार होता रहे तो आप इसे क्या उचित कहेंगे? क्या इससे दुसरे ब्लॉग लेखकों की पोस्ट ज़बरदस्ती मुख्य प्रष्ट पर से नहीं हट जाएंगी. ब्लॉग जगत में बहुत सारे ब्लॉग लेखक ऐसे हैं जो कि दिन में 15-20 तक पोस्ट लिखते हैं, थोडा सा विचार कीजिये कि अगर यह ब्लोगर अलग-अलग नामों से ब्लॉग बनाकर अपनी पोस्ट 15-20 पोस्ट को 3-4 और ब्लोग्स पर भी लिखें तो पोस्ट की संख्या कितनी अधिक बढ़ जाएगी? क्या आप फिर भी कहेंगे कि ऐसे ब्लोग्स को एक ही पोस्ट को बार-बार प्रकाशन की सुविधा दी जानी चाहिए. इस पर भी टीम ने ईमेल करके अवगत कराया था कि अगर ऐसे ब्लॉग भविष्य में इस पर नियंत्रण रखने का वादा करें तो निलंबन को बहाल किया जा सकता है. साथ ही इस बाबत सभी ब्लोगर्स को पोस्ट लिखकर सूचित किया गया था. लेकिन फिर भी कुछ ब्लॉग लेखक गलत पोस्ट लिखकर अन्य ब्लोगर्स को भ्रमित करते फिर रहे हैं.

    http://www.blog.hamarivani.com/2011/03/blog-post_12.html


    स्लोग ओवर अथवा मीडिया में ब्लोग्स के लिंक का प्रश्न भी सही नहीं है. इन लिंक्स को पोस्ट की बीच में ना लगाकर साइड बार में ऐसी जगह लगाया गया है जो कि प्रोमोशनल स्पेस है. उस जगह का प्रयोग हमरीवाणी अपने ब्लोग्स, पत्रिका तथा विज्ञापन तथा सुविधा अनुसार अन्य जानकारियों इत्यादि के लिए करती है.

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  12. I have now officially updated naari blog on hamarivani

    It was all trash there but after this cleaning spree its better

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  13. praveen bhaijee apke spastvadita ke hum prasansak hain........lekin hame
    lagta hai......jis anargal 'atmpralap' ko 3/4 blogger pichle 2 mahine se link tankte rahe....ek blogger ya pathak ke hasiyat se....hame/apko/unko kisi ko bhi koi.....khas firk nahi parne wala tha....lekin ek 'agrigator' jo nisandeh blogwood ke shresht evam sammanit blogger ke samooh dwara prayojit hai.....ko paristhitiyon ko avlokan karte hue uchit nirnay lene ki kshmta ko......protsahan milni chahiye thi..........

    3/4 baar padhne ke baad bhi apke virodh ka samuchit adhar hame nahi
    mila.........kahin apni baat rakhne me balak se bhool hue ho to muaf karenge.....apka anuj...

    pranam.

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  14. डेंगू और मलेरिया से बचने के लिए ओडोमास, कछुआ इत्यादि का प्रयोग करने का मतलब यह बिलकुल नहीं होता कि मनुष्य मच्छरों से डरता है. लगता है आप भी हमारीवानी को खत्म करा कर ही रहेंगे. लोगों की अच्छाई की बजाय बुराइयों की ओर ध्यान दिलाने के लिए हल्ला क्यों होता है?
    मुझे लगा था कि हिन्दी ब्लोगिंग अब सही देशा में चलने लगी है, लेकिन लगता है कि अभी भी परिपक्वता आने में बहुत समय लगेगा. पीछे मुड़ कर देखिएगा.. आपकी ही अधिकाँश चर्चित रही पोस्ट इसी तरह के मुद्दों पर रही हैं. ना चाहते हुए भी आप अतार्किक हो ही जाते हैं बंधुवर.. ये अच्छी बात नहीं.............. हिन्दी ब्लोगिंग के हित में तो बिलकुल नहीं. आपके द्वारा दिए गए सारे लिंक्स देखे, ज्यादातर बेमतलब के झगड़े लगे.
    आपकी सुन ली और अब क्षमासहित यही कहूँगा कि, ''इस पोस्ट के विरोध में मेरी असहमति दर्ज की जाए''.

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  15. विरोध आपका या इस पोस्ट का नहीं.. सिर्फ आपके इस विचार का है. इसलिए पोस्ट के विरोध की बजाय ''इस कुतार्किक विरोध का विरोध'' पढ़ा और माना जाए.

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  16. आप को प्रिय कहने की वजह आपकी यही न्यायप्रियता है .
    हमारा काम चेतावनी देना था कि जिन लोगों ने ब्लॉगवाणी पर नाजायज़ प्रेशर बनाने की कोशिश की और नाकाम रहे वही लोग अब हमारी वाणी की कब्र खोद रहे हैं. हमने अपना काम कर दिया है . हमारी वाणी के मालिकों को कुछ अरसे बाद खुद पता चल जायेगा कि किसने क्या राजनीती की और हमारीवाणी को क्या नुकसान पहुँचाया है ?
    ईश्वर का एक नाम काल भी है .
    समय बहुत जल्द बताएगा सब कुछ लेकिन क्या मैं तब तक पूछ सकता हूँ कि

    क्या इसे ‘वर्चुअल कम्युनलिज़्म‘ का नाम दिया जा सकता है ? virtual communalism

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    @ Anonymous no. 1,

    चार जूते ही सही मित्र, आपने कुछ तो दिया ही मुझे... आभार!... :)

    @ Anonymous no. 2,

    आपकी राय का सम्मान करते हुऐ भी अपनी असहमति जाहिर करता हूँ, Virtual Thought Space को खुला व पाबंदी रहित होना चाहिये... १२२४ ब्लॉग शामिल होने पर यह हाल है, याद कीजिये चिठ्ठाजगत में १६००० से ज्यादा ब्लॉग शामिल थे, वहाँ कभी किसी को यह समस्या नहीं लगी...

    @ योगेन्द्र पाल जी,

    अपना ब्लॉग का प्रशंसक हूँ मैं, परंतु आप ही सोचिये, ज्यादा नियम बनाने व मनवाने से ही कालांतर में निरंकुशता व तानाशाही उपजती है...


    @ Anonymous no. 3,

    यदि आप वाकई में ब्लॉगर हैं तो आपका यह कहना कि... "ब्लोग्वानी को बड़े नितिबध तरीके से बंद करवाया था . कोई बात नहीं हमने हमारीवाणी से इनको ही बेदखल करवा ही दिया "... साफ जाहिर कर रहा है कि कहीं न कहीं बदला-अन्याय हो रहा है।

    @ खुशदीप जी,

    वैसे मैंने अपनी बात कह ही दी है, आपका उत्तर देना अच्छा लगा, पर मेरा प्रश्न फिर भी अनुत्तरित रह जाता है कि क्या हमारा बहुमत सलीम खान की हरकतों से कुछ ज्यादा और जल्दी ही आजिज नहीं आ जाता ?

    @ अवध बिहारी जी,

    शुक्रिया दोस्त !

    @ डॉ० अमर कुमार जी,

    आपके आकर न टिपियाने को बिल्कुल भी अन्यथा लेने की धृष्टता मैं नहीं कर सकता...

    आभार, सर जी !

    @ ZEAL,

    धन्यवाद!

    @ सतीश पंचम जी,

    आभार अपने विचार रखने के लिये, पर इतनी सफाई (???) असहिष्णुता की चुगली कर रही है ऐसा मुझे लगता है।

    @ हमारी वाणी,

    क्या मुखपृष्ठ पर रहना-दिखना ही ब्लॉगर का अभीष्ट है... जब ५०००० हजार सक्रिय ब्लॉग होंगे तो मुखपृष्ठ पर यदि केवल २५ पोस्ट दिखने का स्कोप है तो सलीम खान के ब्लॉगों को बाहर रखने के बावजूद चंद मिनटों में कोई भी पोस्ट अगले पेज पर चली जायेगी, अंग्रेजी संकलकों में आप यह देख भी सकते हैं...


    ...

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    @ रचना जी,

    चलिये इसी बहाने 'नारी' ब्लॉग हमारीवाणी में शामिल तो हुआ ... :)

    @ प्रिय अनुज संजय झा जी,

    आपको मेरे विरोध का समुचित आधार नहीं मिल सका, निश्चित तौर से यह मेरी कमी है, भविष्य में बेहतर करने का प्रयास रहेगा ... :)

    @ प्रिय दीपक मशाल जी,

    आपके इस विरोध का सम्मान करते हुऐ भी मैं अपने लिखे पर टिकना चाहूँगा...

    @ आदरणीय डॉ० अनवर जमाल खान साहब,

    शुक्रिया !

    @ आदरणीय अख्तर खान अकेला जी,

    मिल-जुल कर शामिल करने व शामिल रखने को ही तो मैं भी कह रहा हूँ, मेरा मानना है कि किसी को भी मिल-जुल कर निकाला न जाये...


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    उत्तर देंहटाएं
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    @ सभी पाठकगण,

    यह 'बहुमत' व 'बहुमत की राय' किसी चुनाव के लिये तो ठीक है... पर ब्लॉगिंग जैसे आपसी संवाद के माध्यम के लिये यही शब्द गुमराह करने वाले हैं... आपको कोई शख्स, विचार या समुह पसंद नहीं हैं तो क्या उनको उपलब्ध मंचों से इसी तरह बाहर किया जायेगा... मैं विरोध इसलिये कर रहा हूँ क्योंकि निष्कासन-बहिस्कार की यह दुधारी तलवार कल हमारा भी गला रेत ही देगी, इसमें संशय नहीं...


    आभार!


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  20. प्रवीण जी लगता है की शाहिद अफरीदी ने अपने बयान से आपको भावुक कर दिया है. मियां सलीम को अगर सिर्फ इसलिए बैन किया गया है की वो किसी संकलक का सौंदर्य बिगड़ रहे हैं तो गलत है उन्हें तो बहुत सी दूसरी वजहों से बैन किया जाना चाहिए था. शायद ब्लोग्वानी के संचालकों में सत्य स्वीकारने की हिम्मत नहीं होगी और मुझे पूरा विश्वास है की ऐसे साहस हीन लोग सलीम मियां को दोबारा मौका जरुर देंगे.

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  21. @ टीम हमारीवाणी, नमस्कार भाई आप अपने हिसाब से अपना एग्रीगेट्र चलाये, किसी कि ना सुने, क्योकि किसी भी ऎग्रीगेटर को बनाना आसान नही, मैने हिम्मत तो नही हारी लेकिन अभी तक बना नही सका, आप का एग्रीगेट्र तभी चलेगा, जब आप लोग सख्त होंगे, ओर हर किसी की बात पर अमल नही करेगे, लोगो का क्या जितने मुंह उतनी बाते, तो भाईयो लगे रहो मस्ती से... ओर इस एग्रीगेटर को खुब आगे बढाओ, जिस ने जुडना हे मर्जी से जुडे, नही जुडना तो ना जुडे, आप भी जब नये ब्लाग को जोडे तो उस के पुराने इतिहास को एक बार ध्यान से जरुर देख ले,ओर तभी जोडे जब आप को पुरा विस्वास हो ,जिसे हटाये किसी कार्ण तो उसे कारण जरुर बता दे, वैसे तो जब ध्यान से शामिल करेगे तो हटाने की नोबत ही कम आयेगी, मेरी शुभकामनाऎ, याद रखे कोई भी काम चलाने के लिये सख्त होना पडता हे, तो कानो मे रुई डाल कर अपना काम करे, ओर दिन दुनी रात चोनी तरक्की करे

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  22. ओ शाह बाबा,
    हमारीवाणी की नीतियों के भुक्तभोगी होने के बावजूद यहाँ आपकी बातों से सहमत होने को जी नहीं चाह रहा। कारण आप गलत बात की तरफ़दारी कर रहे हैं। हाँ मगर आपकी स्लॉग ओवर वाली बात एकदम सही है। और सलीम खान कोई हौवा नहीं हैं जो हमारीवाणी वाले उनसे घबराएँ। वो सिर्फ़ एक मुँह चलाने वाले जरूर हो सकते हैं और डॉ. अन्वर जमाल उनके मौसेरे भाई। मैं हमारीवाणी का पहला ब्लैकलिस्ट हूँ और वो भी बिना किसी गलती के। मगर फिर भी यही कहूँगा के हमारीवाणी ने यहाँ सही स्टैप लिया है। नमस्कार।

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  23. और सुनिये,
    ये राज भाटिया जी का एग्रीगेटर इसीलिये नहीं चल पा रहा कि ये एग्रीगेटर चलाने की जगह इस चक्कर में ज्यादा रहते हैं कि ब्लॉगर की हिस्ट्री जियोग्राफी क्या है ? ही ही।
    मुश्किल है प्रमोशन इनका भी, हमारीवाणी की ही तरह।
    बाय बाय।

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  24. @प्रवीण जी,

    यदि आप सच में हर बात पर नजर रखते हैं और गलत बात का पुरजोर विरोध करते हैं तो नजर रखिये "अनवर" के ब्लॉग पर और उस पर आने वाली टिप्पणियों पर|

    कोई परेशानी न हो इसलिए "अपना ब्लॉग" के द्वारा नियम बनाये गए हैं और सभी को बता भी दिए गए हैं|

    सभी को सात दिन का समय भी दिया गया है, सभी सामूहिक ब्लॉग तथा तीन से अधिक ब्लॉग के मालिकों को सूचित भी कर दिया गया है, लगभग सभी के जबाब भी आ गए हैं, सिवाय "अनवर" के, और मुझे पक्का यकीन है कि इनके ब्लॉग हटाने के बाद ये "अपना ब्लॉग" पर भी इस तरह के लांछन लगाने से चूकेंगे नहीं|

    एग्रीगेटरों की मजबूरी को जानने के लिए मेरे अगले लेख का इंतज़ार करें - आपको आपके सभी सवालों के जबाब मिल जायेंगे तथा "हमारी वाणी, चिट्ठाजगत, ब्लॉग वाणी इन सब से आपको जो शिकायतें हैं अथवा थीं दूर हो जायेंगी|

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  25. प्रवीण जी मैं हमारीवाणी के मार्गदर्शक मंडल में शामिल हूँ और तकनीकी काम भी संभाल रहा हूँ, इसलिए दावे के साथ कह सकता हूँ की हमारीवाणी में आज तक किसी भी व्यक्ति विशेष के खिलाफ कोई निर्णय नहीं लिया गया है, नहीं जानता कि सलीम ने इतना कुछ क्यों और क्या सोच कर लिखा है... अब तक २५ से ज्यादा ब्लोग्स को निलंबित किया गया है (और सबने अपनी त्रुटी मानी है) लेकिन पहली बार यह शोर सुन रहा हूँ.... केवल इतना ही कह सकता हूँ कि जैसा बवाल मचाया जा रहा है वैसा कुछ भी नहीं है....

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  26. प्रवीण शाह जी,

    मैं भी हमारीवाणी का सदस्य बना था, लेकिन उसके बाद जब देखा ज्यादा पढेगये और ताजा लिस्टों में एक विचारधारा विशेष ब्लॉग ही दिखते है।
    तो मैने महसुस किया यह किसी पंथ विशेष का प्रचार-तंत्र ही है। तत्काल मैने स्वयं अपने ब्लॉग वहाँ से हटा लिए। लोग भले बात सौजन्यतावश सौन्दर्य की करे पर इस तरह एक प्रचार-तंत्र का ही दिखाई देना हमारीवाणी पर साम्प्रदायिकता का असौन्दर्य बोध तो कराता ही था।

    वाज़िब कारणों के होते हुए भी आपका संरक्षण में आना संशयप्रद है।

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  27. द्विवेदी जी के विरोध पर हमारे दो ब्लॉग्स का निलंबन क्यों ?
    दिनेशराय द्विवेदी जी अपनी उम्र और अपने इल्म की वजह से हमारे लिए आदरणीय हैं लेकिन वे धर्म का विरोध करते हैं और दूसरे लोगों को भी धर्म के विरोध के लिए उकसाते हैं और नहीं समझते कि एक मर्द के लिए मां, और बेटी का रिश्ता पवित्र होता है। यह बात दुनिया में केवल धर्म बताता है। ऐसे में धर्म का विरोध मेरी नज़र में ग़लत और अनर्थकारी है और मैं उनकी इस बात का विरोध अनिवार्य समझता हूं। पिछले दिनों जनाब वकील साहब ने औरतों से कहा कि वे धर्म के खि़लाफ़ बग़ावत कर दें ताकि वे समानता का अधिकार पा सकें। ऐसा कहते हुए उन्होंने यह भी न देखा कि जिन देशों में औरतों ने धर्म से बग़ावत कर रखी है, वहां उन्हें समानता कितनी मिल पाई है ?
    इसी के साथ उन्होंने भविष्यवाणी कर दी कि कुछ लोगों के ज्ञानदीप को भी बुझाया जाने वाला है।
    समाज की सभी औरतों पर उनकी बात का नकारात्मक विरोध न पड़े मैंने उनकी बात का विरोध किया लेकिन मेरी टिप्पणी को वे बार-बार मिटाते रहे। ऐसा उन्होंने 5 बार किया। वे अपने ब्लॉग के मालिक हैं, मिटाना चाहें तो मिटा सकते हैं लेकिन यह एक सैद्धांतिक विरोध था। मैं अपने ब्लॉग का मालिक हूं। मैंने उस कमेंट को अपने ‘कमेंट गार्डन‘ ब्लॉग पर लगाया और इस मिटा-मिटाई की ख़बर ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ पर भी दी जो कि वर्चुअल दुनिया को ताज़ातरीन घटनाओं की जानकारी देने के लिए ही बनाया गया है। मेरे दोनों ही ब्लॉग्स को तुरंत ही निलंबित कर दिया गया।
    हमारी वाणी बताए कि इसमें ग़लती मेरी है या हमारी वाणी की ?
    ग़लती मुझे माननी चाहिए या कि हमारी वाणी को ?
    दूसरे बहुत से व्यक्तियों के विचारों का विरोध करने वाली पोस्ट्स आए दिन हमारी वाणी पर प्रदर्शित होती रहती हैं लेकिन उन ब्लॉग्स को तो निलंबित नहीं किया जाता, फिर द्विवेदी जी के विरोध पर हमारे दो ब्लॉग्स का निलंबन क्यों ?
    इसी के साथ हमारे साझा ब्लॉग ‘प्यारी माँ‘ को भी निलंबित कर दिया गया। भाई साहब, उसमें तो हमने वकील साहब का विरोध भी नहीं किया था और न ही उसमें वे लेखक हैं जो कि एक दिन में एक ही लेख कई जगह लिखते हों। ऐसा करके हमारी वाणी ने हमारे उस अभियान को नुक्सान पहुंचाया जो कि मातृत्व को आदर देने और उसे सुरक्षित रखने के लिए बहुत से सम्मानित बुद्धिजीवी मिलकर चला रहे हैं।
    जहाँ ग़लती होगी तो उसे हम ज़रूर मानेंगे लेकिन हम केवल इसलिए अपनी ग़लती नहीं मान लेंगे कि दूसरे बहुत से लोगों ने मान ली है। दूसरों ने मानी है तो या तो उन्होंने ग़लती की होगी या फिर उनमें आत्मबल की कमी है। यहाँ ऐसा कुछ भी नहीं है।
    आत्मबल के धनी भीष्म को मारने के लिए धोखेबाज़ों को एक शिखंडी की ज़रूरत हमेशा पड़ती है। भीष्म की मजबूरी है कि वह हाथ नहीं उठा सकते। धोखा खाने और हार जाने के बावजूद वे सम्मान पाते हैं।
    साझा ब्लॉग ने षडयंत्रकारी संगठन को यह दिखा दिया है कि ब्लॉगर उनके बंधुआ नहीं हैं। वे जिसके साथ उचित समझेंगे, जुड़ने के लिए स्वतंत्र हैं। अनवर हो या सलीम या फिर जनाब मासूम साहब, उनके साथ ब्लॉगर्स का जुड़ना इन तंगदिलों को पसंद नहीं है। इसी वजह से साझा ब्लॉग के खि़लाफ़ मुहिम छेड़ी गई है। तिल जितनी ग़लती को ताड़ बनाकर पेश किया जा रहा है।
    पसंद तो इन्हें हमारे एकल ब्लॉग भी नहीं हैं, तो क्या हम ब्लॉग लिखना ही छोड़ दें या फिर आप यह चाहते हैं कि हम अपने विचार मुख्य धारा के किसी एग्रीगेटर में सामने ही न लाएं।
    जो भी ब्लॉगर एक लेख को कई जगह पेस्ट करे, उसके निजी ब्लॉग को निलंबित कर दीजिए, वह खुद कॉपी पेस्ट करना बंद कर देगा। सही कार्रवाई न करके रंजिशें निकालना एग्रीगेटर को नुक्सान ही देता है। ब्लॉगवाणी बंद हुई तो उसके पीछे भी ऐसी ही बेतुकी कार्रवाई की मांग का शोर मचाया जाना था।
    अनवरत: औरत और मर्द बराबर हैं लेकिन "एक जैसे' हरगिज़ नहीं हैं हर महीने औरतें कुछ ऐसी चीज़ें भी खरीदती हैं जो मर्द कभी नहीं खरीदते Women are different

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  28. कोई विशेष व्यक्ति जब एक तरह से एक प्राकृतिक क्रिया निपटाने के बाद एक विशेष प्रक्रिया अपनाता है, वैसी ही प्रक्रिया दूसरा क्यों नहीं अपनाता. जमाल जी की टिप्पणी अंत वाली के हाइपरलिंक का जबाव इसमें शामिल है..

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  29. अनवर भाई,

    या तो आप खुद भ्रमित हैं या फिर जानबूझ कर भ्रम फैला रहे हैं... आपकी शिकायत पर मैंने खुद हमारीवाणी पर चैक किया. आप खुद चैक सकते हैं कि आपके इस ब्लॉग का कभी निलंबन नहीं हुआ, बल्कि लगातार इसकी पोस्ट पब्लिश हो रही है, यहाँ तक कि विजिटर भी क्लिक कर रहे हैं. ऐसा कैसे हो सकता है कि यह आपको पता ही ना हो???

    http://hamarivani.com/blog_post.php?blog_id=1155

    वैसे आपको बता दूँ कि द्विवेदी जी हमारीवाणी मार्गदर्शक मंडल के प्रमुख हैं इसलिए किसी भी मसले पर उनके वोट की ज़रूरत केवल विवाद के समय ही पड़ती है. यानी बचे हुए 6 सदस्यों में से किसी विषय पर 3-3 वोट होने पर ही उनका वोट काम करता है. मंडल में फैसला हमेशा सर्वसम्मिति से लिया जाता है. और आपके अगर किसी ब्लॉग का निलंबन किया गया है तो उसके लिए आपको बताया भी गया होगा कि क्यों किया गया है. हमारीवाणी ने घोषणा की हुई है कि एक ही पोस्ट को अलग-अलग ब्लॉग पर पोस्ट करने और ऐसा बार-बार करने तथा किसी धर्म / जाती / लिंग अथवा व्यक्ति विशेष को अपमानित करने के उद्देश्य से अगर लेख लिखा जाएगा तो ब्लॉग का निलंबन हो सकता है.

    अगर आपको लगता है कि आपने ऐसा कुछ नहीं लिखा है तो आप हमारी वाणी के पेज पर जाकर 'राय' के लिए दिए गए लिंक पर शिकायत करिए.

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  30. यहाँ मुँह-जबानी फ़ाइट से बेहतर है आप लोग सब अखाड़े में दो दो हाथ कर लो यार हाँ नहीं तो।
    हमारीवाणी जिंदाबाद
    और सलीमखान और डॉ. जमाल फ़ालतूबाद। केवल इस मामले में।
    ही ही।

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  31. यह एक अच्छी बहस की शुरुआत है. इस पर मैं एक पोस्ट लिखूंगा अपने ब्लॉग पर.

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  32. शाहनवाज़ भाई !
    आप कहते हैं कि
    ‘एक ही पोस्ट को अलग-अलग ब्लॉग पर पोस्ट करने और ऐसा बार-बार करने तथा किसी धर्म / जाती / लिंग अथवा व्यक्ति विशेष को अपमानित करने के उद्देश्य से अगर लेख लिखा जाएगा तो ब्लॉग का निलंबन हो सकता है.‘
    आप कहते हैं कि
    ‘आपके अगर किसी ब्लॉग का निलंबन किया गया है तो उसके लिए आपको बताया भी गया होगा कि क्यों किया गया है ?‘

    इस संबंध में आपको जानना चाहिए कि कोटा वाले वकील द्विवेदी जी ने औरतों को सार्वजनिक रूप से धर्म के खि़लाफ़ बग़ावत करने के लिए उकसाया जिस पर आपने भी आपत्ति की है और जब जनाब मासूम साहब ने उनके कथन पर आपत्ति जताई तो उन्होंने मासूम की नीयत पर ही संदेह जता दिया।
    1- क्या यह धर्म के खि़लाफ़ विष वमन करना नहीं कहा जाएगा ?
    2- क्या किसी सम्मानित ब्लॉगर की नीयत पर बिना किसी सुबूत के संदेह करना उसे अपमानित करना नहीं कहा जाएगा ?
    इसके बावजूद भी आपने उनके ब्लॉग को हमारी वाणी से निलंबित क्यों न किया ?
    जबकि हमने विरोध किया तो उन्होंने 5 बार हमारी टिप्पणी मिटाकर सच का गला घोंटने की नाकाम कोशिश की और जब हमने वह कमेंट अपने निजी ब्लॉग पर पब्लिश कर दिया तो उसे निलंबित कर दिया जो कि अभिव्यक्ति की आज़ादी का खुले तौर पर हनन है। वकील साहब के ब्लॉग को भी निलंबित कर दिया जाता तो हमें हमारी वाणी से पक्षपात की शिकायत न होती।
    ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ हिंदी ब्लॉग जगत का एकमात्र समाचार पत्र है। जब इस घटना की रिपोर्टिंग इस अनुपम समाचार पत्र ने प्रकाशित की तो इसे भी तुरंत निलंबित कर दिया गया। इस तरह तो भारत सरकार भी नहीं करती। आए दिन प्रधानमंत्री के खि़लाफ़ अख़बारों में लेख लिखे जाते हैं और उनके कार्टून बनाए जाते हैं और उनकी आलोचना की जाती है। इसके बावजूद सरकार अख़बारों को सस्ते दामों काग़ज़ उपलब्ध कराती रहती है और अपने हरेक आयोजन में उन्हें सम्मान सहित आमंत्रित करती है।
    क्या दिनेशराय द्विवेदी जी भारत के पी. एम. से भी ऊँचे किसी रूतबे पर बिठा दिए गए हैं कि उनके किसी विचार का विरोध करते ही हमारी वाणी बिना किसी सूचना के तुरंत हमारे ब्लॉग निलंबित कर देगी। आज तक भी हमारी वाणी की ओर से हमें अधिकारिक रूप से यह तक नहीं बताया गया कि हमारे कुल कितने ब्लॉग निलंबित किए गए हैं और किस ब्लॉग को किस जुर्म में निलंबित किया गया ?
    तंग आकर हमने आपसे फ़ोन पर संपर्क किया तो आपने भी मोटे तौर पर यही बताया कि साझा ब्लॉग को निलंबित कर दिया गया है। हमने हमारी वाणी से निराश होकर दूसरे एग्रीगेटर्स पर अकाउंट बनाने में अपना समय लगाया और हमारी वाणी को देखना कम कर दिया। इस बीच जब कभी हमारी वाणी पर ‘प्यारी मां‘ की किसी पोस्ट पर नज़र पड़ी तो उसमें हमें यही नज़र आया ‘पिछली पोस्ट 3‘। आप खुद भी देख सकते हैं। एक ताज़ा पोस्ट इस समय हमारी वाणी के बोर्ड पर नज़र आ रही है। यह देखकर हम यही समझे कि शायद इसे निलंबित करने के बाद पुनः जोड़ लिया गया है तभी यह पिछली पोस्ट 3 दिखा रहा है। हमें क्या मालूम कि यह हमारी वाणी का कोई दोष है ?
    हम इसका ज़िक्र करना भी नहीं चाहते थे लेकिन जब कहा जा रहा है कि या तो आप भ्रमित हैं या फिर जानबूझकर भ्रम फैला रहे हैं तो हमें बताना पड़ा कि भ्रम हमारी वाणी के गणना दोष की वजह से फैल रहा है। इसी को सिद्ध करने के लिए हमें आज इस ब्लॉग पर एक पोस्ट भी पब्लिश करनी पड़ी।
    हमारी वाणी के कई मार्गदर्शकों में से हमें अभी तक किसी से भी कोई शिकायत नहीं है, सिवाय प्रमुख के। द्विवेदी जी नास्तिक हैं और वे अपने विचार रखने और कहने के लिए वे स्वतंत्र हैं लेकिन क्या उनके विरूद्ध उठने वाले हरेक स्वर को हमारी वाणी दबा देगी ?
    अगर हमारी वाणी यही नीति जारी रखती है तो अभिव्यक्ति की आज़ादी में विश्वास रखने वालों का इस पर बने रहना कठिन है। आप चाहें तो हमारे सारे ब्लॉग ख़त्म कर दीजिए ताकि आपके लिए भविष्य में किसी प्रकार की कोई असुविधा उत्पन्न न होने पाए।
    हमारी वाणी फले फूले, मालिक से हम यह दुआ हमेशा से करते आए हैं और आगे भी करते रहेंगे।

    http://blogkikhabren.blogspot.com/

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  33. "क्या हमारा बहुमत सलीम खान की हरकतों से कुछ ज्यादा और जल्दी ही आजिज नहीं आ जाता?"

    यह वह शख्स है जिसके बारे में यह उक्ति सटीक है कि एक मछली सारे तालाब को गन्दा कर देती है-
    अनवर मियाँ ,सलीम मियां सहज लोग नहीं हैं इसलिए इनके साथ सहजता सौजन्यता की जरुरत नहीं है !
    यह अकारण ही सलीम व्यामोह क्यों ? :)

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  34. सौजन्यता से केवल सहज लोगों के साथ ही पेश आना चाहिए.
    सहज वे होते हैं जो जीवन को भरपूर तरीके से जीते हैं .
    औरतों में आकर्षण रखते और करते हैं . वासना को दिल्लगी कहते हैं और इसमें रुसवा होने के बावजूद भी यथावत रहते हैं .
    सलीम और अनवर जब ऐसे नहीं हैं तो इन्हें ब्लॉग जगत में 'सहज ब्लॉगर्स' के मध्य घूमने नहीं दिया जाना चाहिए .
    बड़ी मुश्किल से और बहुत मिल मिलाकर यह गेम सैट किया गया है . ईमानदारी और निष्पक्षता के इस्तेमाल का यह सही मौक़ा नहीं है.
    आप जैसों के कारण ही इस देश से मुसलमानों का उन्मूलन नहीं हो पा रहा है .
    मैं नया हूँ परन्तु आप ने बहुमत के साथ मुझे भी निराश किया है .

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  35. अक्ल से और सब्र से काम लिया जाये. यहाँ लिखने और पढने आये हैं हम . तालीम के बाद भी झगडे ख़तम नहीं होंगे तो आखिर इस तालीम का फायदा क्या है ?
    एक दुसरे से मतभेद होते हैं लेकिन इसके बावजूद आपस में साथ रहने के लिए एडजस्ट करना पड़ता , बर्दाश्त करना पड़ता है . हमारी वाणी के मालिकों ने भी आखिर पैसा लगाया है और जब आदमी काफी पैसा और मेहनत खर्च करता है किसी काम में तो उससे कुछ पाने की उम्मीद भी करता है . आमदनी भी ज़रूरी है और ब्लॉगिंग भी ज़रूरी है. ज़रूरी मुद्दों पर बात होती तो अच्छा था . एक द्विवेदी साहब की गलती के कारण हमारी वाणी पर नुक्ता चीनी ठीक नहीं है . वे भी आदमी हैं , गलती उनसे हो गयी तो हो गयी , रफा दफा कीजिये सारी बात को . यह सारा तूफ़ान बेवजह का लगता है हमको तो साहब .

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  36. अनवर भाई,
    आप शायद सोचते हैं कि एक ही बात को बार-बार बोलते रहेंगे तो वह सच हो जाएगी. बहरहाल आपकी सोच आपके साथ है और क्योंकि शिकायत द्विवेदी जी से है तो आप और द्विवेदी जी जाने. मैं तो केवल इतना ही कह सकता हूँ कि नैतिक आधार पर देखा जाए तो नास्तिक आस्तिकता का और आस्तिक नास्तिकता का समर्थन / विरोध कर सकता है, बशर्ते कि किसी धर्म विशेष को अपमानित ना किया जाए... मैंने खुद एक-दो बार प्रवीण जी के साथ धर्म के पक्ष-विपक्ष में विचार मंथन किया और इसमें किसी ओर से भी कोई कडुवाहट नहीं आई थी.

    जहाँ तक आपके ब्लॉग 'प्यारी माँ' का सवाल है तो मैंने लिंक ऊपर भी दिया था, फिर से दे रहा हूँ...

    http://hamarivani.com/blog_post.php?blog_id=1155

    आप खुद देख सकते हैं कि सभी पोस्ट पब्लिश हुई थी या नहीं और आपकी कितनी पोस्ट दिखाई दे रही हैं... लेकिन आप जगह-जगह यह कहते रहे कि आपका यह ब्लॉग निलंबित कर दिया गया है... जबकि हमारी वाणी टीम ने सबको बताया था कि किसका कौनसा ब्लॉग और क्यों निलंबित किया है... मैंने खुद ई-मेल्स देखी हैं... फिर भी मैंने आपसे कहा था कि आप अपना पक्ष हमारी वाणी के मुख्य प्रष्ट पर दिए गए लिंक के ज़रिये दर्ज करिए, मार्ग दर्शक मंडल में उस पर ज़रूर मशवरा किया जाएगा...

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  37. सिर्फ एक वर्ड गोली मारदो !हवे अ गुड डे ! मेरे ब्लॉग पर आये !
    Music Bol
    Lyrics Mantra
    Shayari Dil Se
    Latest News About Tech

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  38. वक्त के आईने में दोस्त दुश्मन सब साफ़ नज़र आएंगे
    जब से मार्गदर्शक मंडल बना है तब से हमारे लिए तरह तरह की दिक्क़तें खड़ी की जा रही हैं और अगर कोई वाजिब शिकायत करते हैं तो उसमें भी नए नए शोशे खड़े कर दिए जाते हैं कि बाल सुलग कर रह जाते हैं ‘कनपटी के‘।
    अभी हमने आकांक्षा यादव जी द्वारा नियम भंग करने की जानकारी हमारी वाणी को भेजी तो उस पर केवल आवश्यक कार्यवाही की जानी थी लेकिन उस मामूली सी बात पर ही बेवजह कोटा वाले वकील साहब ने एक पोस्ट खींच मारी और दो बार कह डाला कि ’शिकायतकर्ता ने अपनी पहचान छुपाई है।‘
    इसका मक़सद आखि़र था क्या ?
    जबकि ईमेल में हमारा नाम मौजूद था।
    चलिए हो सकता है किसी वजह से वे हमारा नाम न देख पाए हों। आपका फ़र्ज़ था कि आप बताते कि यह शिकायत अनवर जमाल की तरफ़ से मिली है। आपने क्यों न बताया ?
    चलिए ख़ैर, हो सकता है कि आप भूल गए हों। लेकिन जब हमने टिप्पणी की कि यह शिकायत हमने की है तो हमारी टिप्पणी को आज तक भी आपने क्यों पब्लिश न किया ?
    http://www.blog.hamarivani.com/2011/04/blog-post_02.html
    यह कौन सा तरीक़ा है कि आदमी पर इल्ज़ाम लगाओ और उसकी टिप्पणी को पब्लिश न करो। ऐसे में हमारी वाणी के किसी भी पेज पर जाकर कुछ दर्ज कराने में हतोत्साहित होना स्वाभाविक है।
    हमें हमारी वाणी से हमदर्दी थी, इसलिए इतना शोर पुकार मचा भी दिया कि ये मार्गदर्शक हमारी वाणी को तबाही के मार्ग पर ले जा रहे हैं। हमारा फ़र्ज़ हो गया अदा। अब हम इस मुददे पर बात करने से बचना चाहेंगे। अब सारी स्थिति आपके सामने है। जैसे चाहे नियम बनाओ भाई। जिसे चाहे अपना माई बाप बनाओ और जो अपने लिए अच्छा समझो करो। वक्त के आईने में दोस्त दुश्मन सब साफ़ नज़र आएंगे। जो झूठा है वह मक्कार है और जो मक्कार है वह दग़ा ज़रूर देगा।

    ...और यह भी आकर देख लीजिए कि समाचार पत्र ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ की आवाज़ को पाठकों तक पहुंचने से रोकने के लिए उसका निलंबन कर दिया गया लेकिन उसे पढ़ने के लिए पाठक कितनी संख्या में पहुंच रहे हैं और हरेक संप्रदाय, मत और विचार के पत्रकार उस पर सूचना शेयर कर रहे हैं।

    माफियाओं के चंगुल में फंसकर 'Help, Help' चिल्ला रही है हिंदी ब्लॉगिंग

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  39. अच्छा है मेरे समझ में ये नुराकुस्ती नहीं आ रही है..
    मुझे लगता है ब्लॉग के संस्थापक की थोड़ी मनमानी चलती है हर ब्लॉग पर..अगर पसंद नहीं टी लेखक को हट जाना चाहिए और निजी ब्लॉग को लिखना चाहिए..
    जायद जानता नहीं सभी महारथियों के बारें में तो आगे कुछ कह नहीं सकता..

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