रविवार, 13 मार्च 2011

एक जोर का झटका धीरे से है लगा sss ... सही समय पर मिला एक सही सबक !

.
.
.

ओह ! क्या मैच था...

यह रहा स्कोरकार्ड...

विस्फोटक शुरूआत वीरू और सचिन की... १० ओवर में ८७ रन, इस विश्व कप में सबसे ज्यादा... सहवाग जब आउट हुऐ तब तक १०७ गेंदों में १४२ रन बन चुके थे... रन रेट था आठ... इसके बाद सचिन व गंभीर ने बिना रिस्क लिये, अपने विकेटों को बचाते व रनरेट को लगभग साढ़े छह-पौने सात के आसपास रखते हुऐ खेला... इरादा था कि आखिरी के १२-१३ ओवर में दस रन के आसपास की दर से रन बना ३६०-३७० के आस-पास का टारगेट दिया जाये... पर इस महान खेल की अनिश्चितताओं का अंदाज किसे था... २६७ के स्कोर पर सचिन ने अपना पहला व एकमात्र क्रॉसबैटेड व बदन से दूर शाट खेला, मिसटाइम किया व लपक लिये गये... भारत ने अपने आखिरी नौ विकेट मात्र २९ रन पर गंवा दिये... इससे पहले एक दिवसीय क्रिकेट के इतिहास में ऐसा केवल दो बार हुआ था किसी भी टीम ने अपने आखिरी आठ विकेट २९ रन से कम में गंवा दिये... बहरहाल १११ (नेल्सन फिगर) पर आउट होने से पहले सचिन ने दिल खुश कर दिया... डेल स्टेन के बाउंसर को हुक कर मारा गया छक्का व आठवें ओवर में मोरने मोर्केल को मारा कवर ड्राइव, क्या कहूँ इनके बारे में... एक क्रिकेट प्रेमी इस तरह के शॉट देखने के लिये धूप में घंटों बिना किसी शिकायत के बैठ सकता है...

सचिन के आउट होने के बाद एक बेहतरीन कैच से कैलिस ने गंभीर को विदा किया... देखना चाहता था कि युसुफ व स्टेन एक दूसरे के लिये क्या रणनीति अपनाते हैं परंतु युसुफ मात्र दो गेंदें खेल स्मिथ को कैच दे चल दिये...

डेल स्टेन की यॉर्कर गेंदों पर किल्ली उड़वाने के बाद हरभजन व मुनाफ का Sheepish एक्सप्रेशन देखने काबिल था... दोनों उस छोटे बच्चे की तरह लग रहे थे जिसे अचानक गहरी नींद से उठाकर खूंखार शेर से लड़ने को भेज दिया गया था... और वह भी बड़ी उम्मीदों के साथ... डेल स्टेन समकालीन क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाज क्यों कहे जाते हैं यह उन्होंने अपने दूसरे स्पैल में दिखाया...

सच कहूँ तो भारत के कमजोर गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका २९७ रन बना लेगा इसमें शायद ही किसी को शक होगा... स्मिथ एक बार फिर जहीर के Bunny साबित हुऐ, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में जहीर तेरह बार उनका विकेट ले चुके हैं अबतक... रणनीति के तहत पहले आमला व कालिस व बाद में कालिस व डीविलियर्स ने पौने पाँच के आसपास की रनरेट बनाये रखते हुऐ रिस्क फ्री बल्लेबाजी की... उनकी टीम का अनुमान था कि यदि विकेट पास में रहें तो आखिरी पंद्रह ओवर में ८-८.५ के रनरेट से आसानी से चेज किया जा सकता है... केवल दो-तीन अच्छे ओवर (१४-१५ रन वाले) चाहिये होते हैं... आखिर में वही हुआ...

कुछ बातें टीम चयन व कप्तानी के बारे में... इस पिच पर पीटरसन व बोथा का प्रदर्शन जाहिर करता है कि तीन पेसरों की जगह यदि टीम हरभजन व अश्विन दो स्पिनरों को उतारती तो शायद हालात कुछ बेहतर होते... आखिरी ओवर डालने के लिये नेहरा के चयन पर भी सवाल उठता है, वर्तमान फॉर्म में जहीर इसके लिये बेहतर होते... युसुफ ने जहीर के बाद सबसे इकॉनॉमिकल बॉलिंग की, फिर भी उसे चार ही ओवर मिले...

कुल मिलाकर यह झटका सही समय पर लगा है... केवल बैटिंग के भरोसे विश्वकप जीतने का सपना सपना ही रह सकता है... हमें जल्दी से जल्दी अपनी गेंदबाजी व गेंदबाजी की रणनीति सुधारनी होगी... और टीम को जीतने के लिये पूरे देश की शुभकामनाओं ब भाग्य की जरूरत पड़ेगी...

उम्मीद करिये मेरी तरह ही कि अगले मैच में रैना व अश्विन को मौका मिले...




क्रिकेट मसाला:-

यॉर्कर:- तेज गेंदबाज की फेंकी वह गेंद जो बल्लेबाज के पंजों के आसपास टप्पा खाये व जिसका मकसद बल्ले व पैड के बीच के गैप से जा विकेट हिट करना हो यॉर्कर कहलाती है... इनस्विंगिंग यॉर्कर तेज गेंदबाजों का सबसे मारक हथियार है...

सीखिये कैसे डालते हैं यॉर्कर गेंद

देखिये...

१- क्रिकेट इतिहास की कुछ बेहतरीन यॉर्कर

२- शोएब अख्तर का यॉर्कर गिलक्रिस्ट को

३- वासिम अकरम लारा के पैर के पंजे को कुचलते हुऐ


आभार!




...

गूगल इमेजेस व यू-ट्यूब को आभार सहित।




...

9 टिप्‍पणियां:

  1. रैना से तो फील्डिंग हर मैच में करवा ही रहे हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  2. इस झटके से क्या विश्व कप की उम्मीद है। वैसे क्रिकेट है कुछ भी हो सकता है. सामग्री काफी अच्छी लगी। टीम इंडिया को लेकर सोचने पर मजबूर करती है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. aapka blog shandar hai

    cricket se smbndhdit upyogi samgri milti hai yhan par

    lagta hai kafi kuchh sikhne ko milega aapse

    dhnyvad

    उत्तर देंहटाएं
  4. सिर्फ बॉलिंग ही नहीं बैटिंग में भी शुरू के तीन बल्लेबाजों के अलावा सबने निराश ही किया ...बौलिंग से तो वैसे भी ज्यादा आशा नहीं थी ...रन स्कोर कुछ ज्यादा होता तो सोचा जा सकता था ...
    आखिरी ओवर के लिए गेंदबाज का चयन भी ठीक नहीं रहा ..वैसे क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है , पता नहीं कब क्या हो जाए ...!

    उत्तर देंहटाएं
  5. हार जीत तो चलती ही रहती है , उसकी कोई बहुत ज्यादा अहमियत नहीं है । अहमियत है कारोबार की , धंधे , मुनाफे और प्रचार की जो कि उत्पादों को मिलता है खेलों के जरिए और इसीलिए कंपनियाँ खेल प्रतियोगिताओं को स्पॉन्सर करती हैं और अब इसी हेतु ब्लॉगोत्सव का आयोजन भी कोई कंपनी कर रही है ताकि बाँटने वाले रेवड़ियाँ बाँट सकें उन्हें जिन्हें वे अपना समझते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  6. अश्विन को शायद मौका मिल सकता है, लेकिन रैना की उम्मीद कम ही है…
    (वैसे कोहली का बैटिंग ऑर्डर बार-बार बदलकर धोनी पूरी कोशिश कर रहे हैं कि उनके "खास आदमी" रैना को लाया जाये) :)

    उत्तर देंहटाएं
  7. ये किरकेट ही चलता रहेगा क्या इस चैनेल पर ? :(

    उत्तर देंहटाएं
  8. मैंने इंग्लैंड वाले मैच को देखकर कह दिया था कि तेंदुलकर को अगले विश्वकप की तैयारी अभी से कर देनी चाहिए। अब भारतीय टीम अगर मगर के जंजाल में फंसी हुई है। 7 बल्लेबाज तो खेले ही नहीं, मैं तो दंग रह गया। अब इस टीम से और क्या उम्मीद की जा सकती है।

    आपका लेख सुंदर है।

    उत्तर देंहटाएं

मेरे इस आलेख को पढ़ कर ही यदि आपके मन में कोई विचार उत्पन्न हुऐ हैं तो कृपया उन्हें 'नेकी कर दरिया में डाल' की तर्ज पर ही यहाँ टिप्पणी रूप में दर्ज करें... इस टिप्पणी के पीछे कोई अन्य छिपा हुआ मंतव्य न रखें, आप इसे उधार में मुझे दी गयी टिप्पणी न समझें, प्रतिउत्तर में आपके ब्लॉग पर टिप्पणी करने की किसी बाध्यता को मैं नहीं मानता व मुझसे या किसी अन्य ब्लॉगर से भी ऐसी अपेक्षा रखना न तो नैतिक है न उचित ही !... मैं किसी अन्य के लिखे आलेखों पर भी इसी नियम व भावना के तहत टिपियाता हूँ !

असहमति को इस ब्लॉग पर पूरा सम्मान दिया जाता है, आप मेरे किसी भी विचार का खुल कर विरोध या समर्थन कर सकते हैं, परंतु अशिष्ट या अश्लील भाषा यु्क्त अथवा किसी के भी ऊपर व्यक्तिगत आक्षेपयुक्त टिप्पणियाँ कृपया यहाँ न दें... आप अपनी टिप्पणियाँ English, हिन्दी, रोमन में लिखी हिन्दी, हिंग्लिश आदि किसी भी तरीके से लिख सकते हैं... नहीं कुछ लिखना चाहते हैं तो भी चलेगा... आपके आने का शुक्रिया... आते रहियेगा भविष्य में भी... आभार!