मंगलवार, 1 मार्च 2011

आप लोगों का यूँ ' टाई ' पहनना जरा भी नहीं भाया अपन को, नील-मानवों !!!

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मेरे ' ओपन कॉलर ' मित्रों,

आखिरकार न वो जीते न हम हारे, और टाई पहन ली नील मानवों ने... मैच का स्कोर कार्ड आपकी पेशे-नजर है।...

ज्यादातर आशंकाये सच साबित हुई... ३३८ का स्कोर कम नहीं होता... २०-२० के इस दौर में भी यह उम्मीद तो की जाती है कि इतना बड़ा स्कोर करने वाली टीम १०० में से ९९ बार जीतेगी... परंतु क्या किया जाये, हमारे नील-मानव इतना कमजोर गेंदबाजी आक्रमण लेकर उतरे हैं कि एक समय तो लग रहा था कि इंग्लैंड आसानी से जीत जायेगी... परंतु घोर आश्चर्य, टीम ने हार के जबड़ों से टाई निकाल पहन ही ली...

मैं मैच की बात बाद में करूँगा पहले मशहूर कार्टूनिस्ट इरफान साहब ने एक सवाल उछाला है... और वह है कि क्या वाकई कल के टाई मैच के भी हीरो सचिन ही हैं ?... सवाल बहुत प्रासंगिक है... मुझे तो लगता है कि इस मैच के हीरो जहीर रहे... जो लगभग हारी हुई स्थिति से जीत के कगार पर टीम को ले गये...

इरफान साहब लिखते हैं...

"मगर आज सुबह अखबारों में पहले पेज पर सचिन की तस्वीर देखकर उनके प्रायोजकों के मीडिया मेनेजमेंट की तार्रेफ़ करनी होगी,जो भारतीय क्रिकेट टीम की हर जीत का सेहरा सचिन के सर बंधवाने में सफल हो जाते है,
क्या आज इस जगह ज़हीर खा की तस्वीर नहीं होने चाहिए थी?मीडिया ईमानदारी से सोचे!"


मैंने ईमानदारी से सोचा व ऊपर जहीर खान की तस्वीर लगाई... मैं इससे भी आगे बढ़कर सवाल करता हूँ कि क्या सचिन जो टेस्ट में कभी ओपन नहीं करते व वन-डे में कभी कभार खेलते हैं उनके लिये गंभीर को उसकी कड़ी मेहनत से अर्जित की गई ओपनर की पोजीशन से नीचे भेजना जरूरी है... जिसे देखो कह रहा है कि यह कप सचिन के लिये जीतना चाहिये... स्टीव वाग ने एक सवाल उठाया था कि क्या सचिन देश से बड़े हैं ?... आप बताइये कि क्या ऐसा हो नहीं रहा व क्या ऐसा होना चाहिये ?

अब बात करता हूँ मैच की... सहवाग हमेशा की तरह विस्फोटक शैली में बेफिक्र खेले... मेरे विचार में वह कई योगियों को तक एकाग्रचित्ता व दिमाग में चल रहे सभी झंझावातों को अपने स्टांस लेते ही एकदम भूल कर केवल व केवल गेंद को देख मारने की सोचने की दीक्षा दे सकते हैं... सचिन शुरूआत में बहुत धीरे व संभल कर खेले लेकिन बाद में सेंचुरी मार भरपाई कर गये... गंभीर मिस्टर भरोसेमंद की तरह खेले... युवराज की फॉर्म व विश्वास दोनों वापिस आते दिखे... धोनी जब तक क्रीज पर रहे किसी दिक्कत में नहीं दिखे... पठान ज्यादा धूमधड़ाका नहीं कर पाये... विराट को सातवें नंबर पर भेजना समझ से परे है वह भी जब वह बेहतरीन फार्म में है व स्ट्रोक खेल सकता है, इस युवा खिलाड़ी के कैरियर के साथ यह खिलवाड़ नहीं तो और क्या है...

इंग्लैंड ने अच्छी जमीनी फील्डिंग की... और टिम ब्रेसनन ने गेंदबाजी में काफी जिगरा दिखाया, पसीना बहाया, आक्रामक रहे व बल्लेबाजों को बैकफुट पर रखा... ४८ रन देकर पाँच विकेट लेना उनकी मेहनत का सबूत है और सबूत इस बात का भी कि सपाट पिच पर भी यदि बेसिक्स को न भूला जाये व हौसले के साथ मेहनत हो, तो नतीजे मिल सकते हैं...

इंग्लैंड की ओर से स्ट्रास ने सपनों सरीखी बैटिंग की... पीटरसन काफी कॉन्फिडेन्ट दिखे... इयन बैल फॉर्म में वापस लौटे... कॉलिंगवुड का फिर नाकाम रहना इंग्लैंड के लिये चिन्ता का विषय रहेगा...

बात करूँ बॉलिंग की तो आपने खुद देखा होगा कि जहीर व हरभजन को छोड़ सबकी ठुकाई हुई... जहीर भी पहले स्पैल में काफी पिटे पर बैटिंग पावरप्ले के दूसरे स्पैल में वे बहुत ही धारदार व हर गेंद से विकेट लेने में सक्षम दिखे...

अपना अगला मैच है छह मार्च को आयरलैंड से... लगभग सभी बैट्समैन फार्म में हैं... और यदि बैट्समैन फॉर्म में हैं तो छह खिलाओ या सात रन उतने ही बनने हैं... अगले मैच में मेरी राय में टीम इंडिया को जहीर व हरभजन को रेस्ट देकर श्रीसंथ, मुनाफ, नेहरा, चावला व अश्विन को खिलाना चाहिये... आखिर बॉलर की धार, आक्रमण की जिम्मेदारी ले पाने की क्षमता आदि का सही पता तो असली मैच सिचुएशन में ही चल पायेगा न...

देखते हैं तब तक...



क्रिकेट मसाला :-

ऑफ स्पिन :- दाहिने हाथ के बल्लेबाज के लिये दाहिने हाथ के गेंदबाज द्वारा फेंकी गई वह गेंद जो ऑफ स्टंप या उससे और बाहर गिर टप्पा खाने के बाद टर्न होकर अंदर की ओर यानी मिडिल स्टंप या लेग स्टंप की ओर टर्म करे तो वह ऑफ स्पिन कहलाती है... इस तरह के गेंदबाजी करने वाले बॉलर की गेंद पर पगबाधा आउट होने की संभावना ज्यादा रहती है व उनके विरूद्ध तेजी से रन बनाना मुश्किल होता है...

ऑफ स्पिनर अपनी ऊंगलियों व कलाई की मदद से डिलीवर करते समय गेंद को क्लॉकवाईज घूर्णन (Spin) देता है... ऑफ स्पिन करना सीखिये यहाँ पर...

फ्लाईट, लाइन-लेंग्थ व टर्न के वेरिएशन के अलावा एक ऑफ स्पिनर के दो अन्य हथियार हैं...

१- दूसरा :- यह वो गेंद है जो ठीक उसी एक्शन से व गेंद को क्लॉकवाइज स्पिन देते हुऐ की जाती है परंतु टर्न लेगस्पिन की तरह करती है... कैसे ? देखिये यहाँ...

दूसरा की खोज करने वाले पाकिस्तानी गेंदबाज सकलेन मुश्ताक को यह हथियार प्रयोग करते देखिये...

अ- डेमियन मार्टिन के खिलाफ...

ब- एडम गिलक्रिस्ट व डेमियन मार्टिन के खिलाफ...

२- कैरम बॉल:- लंका के अजान्था मेंडिस इस गेंद का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं... यह कोई नई गेंद नहीं है पर मध्यमा ऊंगली की मदद से गेंद को दोनों ओर टर्न करने की इस पुरानी व लुप्तप्राय: कला को मेंडिस ने जिन्दा किया है...

यहाँ देखिये Iverson-Gleeson Bent Middle Finger Grip यानी कैरम बॉल का इतिहास...

यहाँ देखिये कैसे फेंकी जाती है कैरम बॉल...

इन वीडियोज् में देखिये...

मेंडिस की कैरम बॉल खेलते (???) रोहित शर्मा...



बल्लेबाजों के साथ कैरम खेलते मेंडिस...



आभार!




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14 टिप्‍पणियां:

  1. bahut sunder smiksha aur rochk jankari

    -- dilbagvirk.blogspot.com

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  2. मैच के लिए सोचना पड़ेगा की क्या कहा जाये हारते हारते बच गए या जीतते जीतते मैच गवा दिया | धोनी की बेकार कप्तानी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार है पहले टीम का चयन गलत फिर आखरी दो ओवर अनुभवी गेंदबाजो की जगह पियूष (उनके चहेते) को दे दिया ४९वे ओवर की पिटाई महँगी पड़ी और आखरी ओवर मुनाफ को ( २०-२० के लक को आजमा रहे थे क्या ) दे दिया इन्हें पहले और जहीर हरभजन को आखरी दो ओवर देने थे | जिस इंगलैंड को नीदरलैंड से जितने में नको चने चबाने पड़े उसे हम हरा नहीं सके फिर वर्ड कप क्या खाक जीतेंगे |

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  3. एक बात पूछनी थी ये टीप्पणी देने के लिए आप का लिखा सन्देश नया है या मेरी नजर ही आज तक उस पर नहीं पड़ी थी | वैसे आप बाध्य नहीं है इसका भी उत्तर देने के लिए मै बस दरिया में डाल कर जा रही हूँ :))

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  4. आखिरी ओवर सचिन से करवा लेते . यह मैच हम हारते हारते बराबरी पर लाए, आपने सही कहा मैच के सही हीरो ज़हीर ही हैं. मेरा भी यही मानना है. सुन्दर पोस्ट

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  5. बहुत मोड़ आये इस मैच में, किसी एक को श्रेय या दोष देना उचित न होगा।

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    एक बात पूछनी थी ये टीप्पणी देने के लिए आप का लिखा सन्देश नया है या मेरी नजर ही आज तक उस पर नहीं पड़ी थी | वैसे आप बाध्य नहीं है इसका भी उत्तर देने के लिए मै बस दरिया में डाल कर जा रही हूँ :))

    @ अंशुमाला जी,

    आपने सही पकड़ा, यह सन्देश पहले नहीं था, २० फरवरी, २०११ को लगाया मैंने, वजह रही मित्र विचारशून्य (दीप पान्डेय) की यह टिप्पणी , वह व्यथित थे क्योंकि किसी दंभी ब्लॉगर ने असहमति व्यक्त करने पर उनकी टिप्पणी तो छापी नहीं, ऊपर से यह इल्जाम अलग लगा दिया कि वे अन्य ब्लॉगों पर टिप्पणी अपनी पोस्ट लगने के दिन करते हैं ताकि इसी बहाने लोग उनकी पोस्ट की ओर आकर्षित हों... अब मैं भी पोस्ट तभी लगाता हूँ जब फुरसत में होता हूँ, और उसी समय मन करे तो अन्य पोस्टों पर टिपियाता भी हूँ... इसलिये सोचा कि कल को कोई दंभी मुझे भी ऐसा ही कह अपमानित कर दे इससे पहले ही बचाव कर लेता हूँ... इसीलिये यह संदेश लिख दिया है टिप्पणी बॉक्स के ऊपर...



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  7. फिक्सिंग न हो तो खिलाड़ी को भी रोमांच होता होगा खेल का.

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  8. सचिन केवल अपने लिए खेलते हैं मौके के अनुरूप नहीं -उनका धीमा शतक ठुक जाय बाकी जाय ठेंगे पर !

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  9. पोस्ट पर कुछ नहीं कहेंगे, सिर्फ़ अरविन्द मिश्रा जी को (लायकी न होते हुए भी) दो बातें बताना चाहते हैं कि 1) सचिन के 47 वन डे शतकों में से भारत 34 में विजयी रहा है… 2) जिन 52-53 मैंचों में उसे मैन ऑफ़ द मैच मिला है (विश्व रिकॉर्ड) उसमें से 34 हटाने पर जो बचते हैं उसमें उन्होंने गेंदबाजी से मैच जितवाये थे…

    शायद मिश्रा जी चाहते हों कि सचिन हर मैच में उम्दा बॉलिंग भी करें और फ़ील्डिंग में भी 4-5 कैच पकड़ लें… बाकी के दस खिलाड़ी जुआघर में नाचें और लड़कियों के साथ मस्ती करें… :) :)

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  10. भाई क्रिकेट का शौक़ तो बौर्ज़ुआ कल्चर है , सो हम तो समय बर्बाद करके जीवन को बर्बाद न तो खुद करते हैं और न ही आप जैसे अपने प्रिय को सलाह देते है हैं .
    खैर , हम तो आज आपके पास यह कहने आये थे कि आपने जो स्टेटमैंट द्विवेदी जी की पोस्ट पर खुद को नास्तिक सा ज़ाहिर करने के लिए दिया है , वह आपने जानबूझकर दिया है ,
    केवल हमें निराश करने के लिए. लेकिन हम निराश होने वाले नहीं हैं . हमने आपके लिए टोपी और मुसल्ला ख़रीद लिया है और कुरते पजामे का ऑर्डर आपकी रज़ा मिलते ही दे दिया जायेगा .
    यार आपके बिना जन्नत में दिल उदास रहेगा . कुछ हंसी ठिठौली करने वाले ज़िंदादिल लोगों को साथ ले जाना बहुत ज़रूरी है . लिहाज़ा अब ना नुकुर मत करो . जैसे शादी करते वक़्त आपने भाई बहनों पर भरोसा किया था वैसे ही एक बार अपने प्रिय पर भी तो करके देखो न .
    एक शिकायत आपकी नास्तिक बिरादरी के सदस्य की :
    आपका कमेन्ट द्विवेदी जी ने छाप दिया और मेरे ४-५ कमेन्ट हालाक कर दिए और कहते हैं खुद को कहते हैं बुद्धिजीवी ?
    क्या यह ठीक किय गया मेरे साथ ?
    अनवरत: औरत और मर्द बराबर हैं लेकिन "एक जैसे' हरगिज़ नहीं हैं हर महीने औरतें कुछ ऐसी चीज़ें भी खरीदती हैं जो मर्द कभी नहीं खरीदते Women are different

    रांड तो यही चाहती है कि सबके खसम मर जावें , द्विवेदी जी के धर्म विरोधी उद्घोष की तथ्यात्मक समीक्षात्मक न्यूज़

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  11. कृपया ये भी देख लीजियेगा :

    http://commentsgarden.blogspot.com/2011/03/answer-me.html

    http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2011/03/get-wisdom.html

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