गुरुवार, 31 मार्च 2011

शनिवार २ अप्रैल को विश्वविजयी होंगे हम !!!... आप रविवार को कहाँ जा रहे हैं जश्न मनाने ?...

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सच कहूँ तो मोहाली की जीत के बाद अब मुंबई में क्या होगा शायद ही किसी को इस से कोई फर्क पड़े... अपने पड़ोसी पाकिस्तान पर पाई गयी यह जीत है ही इतनी बड़ी... बुधवार के मैच में हमारी टीम ने दिखा दिया कि 'टीम इन्डिया' में वाकई दम है... यदि किसी एक डिपार्टमेंट में टीम कुछ कम रहती है तो अन्य क्षेत्रों में खिलाड़ी अपने प्रदर्शन को बहुत-बहुत ऊँचा उठा ले जाते हैं... कुछ ऐसा ही हुआ इस मैच में... सहवाग की धमाकेदार शुरूआत के बाद २६० का स्कोर यकीनन कुछ कम ही था... पर भारतीय गेंदबाजी व फील्डिंग ने इसे काफी बड़ा बना दिया...

यह रहा स्कोरकार्ड... अपनी पिछली पोस्ट में मैंने एक अनुमान सा लगाया था कि खिलाड़ी जो कुछ खास करेंगे मोहाली में... भारत... धोनी, हरभजन व वीरेन्द्र सहवाग भज्जी ने खतरनाक उमर अकमल व शाहिद अफरीदी के विकेट लेकर, सहवाग ने उमर गुल के ऊपर शुरूआती हमला करके (जिससे गुल पूरे मैच में कभी उबर नहीं सके) व धोनी ने पिच को मिसरीड कर के (पोस्ट मैच कान्फ्रेंस में धोनी ने कहा कि उन्होंने पिच को मिसरीड किया व अश्विन की जगह तीन सीमरों के साथ उतरे) वह खास काम किया... भले ही तीन पेसर खिलाना पिच के अनुसार सही फैसला नहीं था परंतु मुनाफ ने दस ओवर में ४० रन व नेहरा ने दस ओवर में केवल ३३ रन दिये व दोनों ने ही दो-दो विकेट भी लिये... यानी यह फैसला टीम के लिये फलदायी ही रहा... साफ है कि टीम इंडिया के साथ मुकद्दर भी है... धोनी ने रन २५ ही बनाये परंतु दबाव के बावजूद उन्होंने बहुत ही अच्छी कप्तानी की... उनकी फील्ड सजावट व बॉलिंग चेन्ज शानदार रहे...

युवराज वहाब की जिस गेंद पर आउट हुऐ वह ऐसा 'अनप्लेयेबल इनस्विंगिंग यार्कर' था जिसे शायद ही कोई बल्लेबाज ख़ेल पाता... रैना की पारी भी अहम रही...

याद करिये कि पिछली बार ऐसा कब हुआ कि एक ही पारी में सचिन के चार कैच छूटे हों व एक बार डिसीजन रिव्यू के बाद उनका विकेट बचा हो... आखिरी में 'क्रिकेट के इस भगवान' के बनाये ८५ रन अनमोल साबित हुए... मैच की सुबह मैं टीवी देख रहा था तो एक सवाल के जवाब में महान पाकिस्तानी लेग स्पिनर अब्दुल कादिर कह रहे थे कि दुनिया के हर मुल्क के खेल प्रेमी अपने-अपने 'रब' से दुआ करें कि सचिन अपना सैकड़ों का सैकड़ा इसी मैच में करें... और यह सब कहते हुऐ कादिर के चेहरे पर पवित्रता और संजीदगी झलक रही थी... इतने अहम मैच के पहले भी कादिर ने यह कहा यह बताता है कि खिलाड़ी का केवल और केवल एक ही धर्म है और वह है खेल... दिलों को जोड़ने के लिये खेल से बेहतर कुछ नहीं...

फाइनल लंका से है... लंका का शीर्षक्रम इस पूरे टूर्नामेंट में बेहद शानदार बल्लेबाजी कर रहा है... वानखेड़े पर यदि पाटा पिच बनी तो भारत को नुकसान हो सकता है... मुझे लगता है कि ऐसी पिच मिलेगी जिससे गेंदबाजों को भरपूर मदद मिलेगी... लंका के पास दो गेंदबाज ऐसे हैं जिनका बॉलिंग एक्शन कुछ हटकर, कुछ अजीबोगरीब सा है... मुरली धरन का एक्शन तो हमेशा से ही विवादों में घिरा रहा है...

देखिये डारेल हेयर उनको नोबॉल करते हुऐ...



लसिथ मलिंगा भी कोई पाकसाफ नहीं हैं...

भारत को इन दोनों को ढंग से देख कर खेलने की जरूरत है... इनको विकेट देना घातक हो सकता है...

ज्यादा आपकी फिक्र नहीं बढ़ाउंगा...

क्योंकि जीतेंगे हम ही...



एक सवाल आपसे भी:-

कल के मैच से पहले मैंने चैनलों पर देखा कि दोनों मुल्कों में लोगों ने धर्मस्थलों पर अपनी टीम की जीत की दुआयें मांगी... खेल तो खेल है और जीत-हार खिलाड़ियों के खेल के ऊपर ही होगी...

क्या नतीजे में भी 'ऊपरवाले' का कोई रोल है/ होना चाहिये ?

जवाब देंगे न...


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विजयोत्सव:-

क्या आपको याद है १९८३ विश्व कप की हमारी यह जीत...

कपिल और साथियों ने एक सोते हुऐ मुल्क को जगा सा दिया था उस दिन...



यह रहा वीडियो भी...






जीतने के वाद सौरभ गांगुली के इस कमीज उतार लहराने को हम कैसे भूल सकते हैं...




देखिये वीडियो भी...



देखते हैं जीतने पर टीम इंडिया क्या अनोखा करती है विजयोल्लास प्रदर्शन को...





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सोमवार, 28 मार्च 2011

मोहाली की महाभिड़न्त... जीतेंगे हम ही !!!

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मैंने तो पहले ही कह दिया था कि कप अब हमारा है...
विपरीत परिस्थितियों में खेली गई रिकी पोंटिंग की महान पारी भी आखिर आस्ट्रेलिया को जीत नहीं दिला सकी... बल्लेबाजी भारतीय टीम की ताकत है और टीम ने क्वार्टरफाईनल के इस मैच में बखूबी इसे दिखाया भी...

'फॉर ए चेन्ज' हमारी फील्डिंग शानदार रही और मैच के बाद धोनी ने इस बात को स्वीकार भी किया कि भारतीय टीम इससे बेहतर फील्डिंग शायद नहीं कर सकती थी... गेंदबाजों ने भी नियंत्रित गेंदबाजी की... परंतु सही कहूँ तो धोनी के आउट होने के बाद भी जब तकरीबन सत्तर रन और करने थे, ऐसे समय में एक बार तो लग रहा था कि गया मैच हाथ से... परंतु तारीफ करनी होगी युवराज की जिन्होंने नियंत्रित पारी खेली व दबाव को कभी भी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया... हालांकि टूर्नामेंट की शुरूआत से रैना पर टीम प्रबंधन ने ज्यादा विश्वास नहीं जताया परंतु मोटेरा में उन्हें यह सोच लाया गया कि टीम को अपने पूरे पचास ओवर खेलना जरूरी है और यह कदम अंत में सही साबित हुआ...

खिलाड़ियों पर दबाव कितना ज्यादा था यह आप गंभीर के उदाहरण से समझ सकते हैं अपने पचास रन पूरे करने के बाद जीतने के लिये रन जल्दी बनाने का दबाव उन पर इतना हुआ कि Non Existent Runs के लिये वह दौड़ने लगे, दो बार बाल-बाल बचे पर तीसरी बार आखिरकार पैवेलियन का रास्ता नापना ही पड़ा उनको... ऐसे में जो खेल रैना व युवराज ने दिखाया, वाकई काबिले तारीफ है... ब्रेट ली के आखिरी स्पैल में ओवर की पहली ही गेंद पर रैना ने जिस तरह से फ्रंटफुट पर जाकर मिडऑन पर उनको छक्का जड़ा, उस शॉट से भले ही रन छह ही मिले, परंतु आस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजों के कंधे उस शॉट के बाद झुक से गये... और खत्म हो गया उनका यह विश्वास कि वे अपनी तेज गेंदों से बची हुई भारतीय बल्लेबाजी को दबाव में ले सकते हैं... इसके बाद के बाकी रन आसानी से बन गये...

अब वह मैच होगा जो हमारे दोनों मुल्कों के जीवन को लगभग रोक सा देगा ३० मार्च के दिन... उस दिन सिनेमाघर खाली रहेंगे, आफिसों में अचानक बहुत से लोग 'बीमारी' के कारण नहीं पहुंचेंगे, शादी-ब्याह, पारिवारिक आयोजन आदि आदि खाली खाली से दिखेंगे... एक एक गेंद के साथ देश के बहुतों की धड़कनें बढ़ेगी-घटेंगी...कहना बहुत आसान है कि और खेलों की तरह क्रिकेट भी एक खेल ही तो है... पर ३० मार्च को वह खेल नहीं रहेगा... एक जुनून में बदल जायेगा यह मैच...

पाकिस्तान के साथ विश्वकप में भारत चार बार पहले भिड़ चुका है और हर बार जीत हमारी ही हुई है... इस बार भी यदि टीम इंडिया अपनी ८० प्रतिशत क्षमता से भी खेले तो हमें जीतने में कोई मुश्किल नहीं आनी चाहिये... शाहिद आफरीदी ने बयान दिया है कि सचिन को अपने सौवें सैकड़े के लिये विश्वकप के बाद तक इंतजार करना होगा... टीवी में मैं देख रहा था तो कपिल देव से जब इसी बयान पर सवाल किया गया तो अपने खास बेफिक्र अंदाज में मुस्कुराते कपिल ने कहा " कोई बात नहीं हमारे लिये सचिन के ९९ रन ही काफी हैं "...

पाकिस्तान ने इस विश्व कप में अभी तक उम्मीदों से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है... उमर गुल ने बेहतरीन गेंदबाजी की है परंतु सबसे बड़ा असर डाला है कप्तान अफरीदी ने, अभी तक २१ विकेट ले चुके हैं वे और पाकिस्तान के सबसे मारक गेंदबाज के तौर पर उभरे हैं... अनुशासन तोड़ने के कारण पाकिस्तान पिछले कुछ मैचों से शोएब अख्तर को नहीं उतार रहा... परंतु मोहाली की पिच तेज गेंदबाजों को मदद करने के लिये मशहूर है इसलिये हो सकता है कि शोएब यहाँ खेलें...

मोहाली में गेंद को उछाल मिलता है व गेंद टप्पा पड़ने के बाद तेजी से बल्ले पर आती है तेज गेंदबाज के लिये यह मददगार तो है ही स्ट्रोकमेकर बल्लेबाज के लिये भी ऐसी पिच काफी मददगार होती है... मतलब यह कि वीरू, सचिन, धोनी, युवराज व रैना के बल्ले से मोहाली में खूब रन निकलेंगे... भारतीय गेंदबाज अफरीदी की गेंदें आराम से खेल ले जायेंगे... पिच में ज्यादा स्पिन नहीं मिलेगी और वैसे भी भारतीय बल्लेबाज स्पिन के विरूद्ध निर्विवाद रूप से विश्व में सर्वश्रेष्ठ हैं...

युनुस, मिस्बाह, अफरीदी व शोएब को छोड़ पाकिस्तान के अधिकतर खिलाड़ी अपेक्षाकृत नये हैं व दबाव में आ जायेंगे... स्थितियाँ जब अनुकूल न हों तो अफरीदी भी दबाव नहीं झेल पाते... भारतीयों को अफरीदी को दबाव में लेने की ओर भी काम करना होगा... मुझे आश्चर्य नहीं होगा कि खेल के दौरान दो-तीन बार गरमागरमी हो और इस की पहल भारतीय करें...

हमारी टीम कमोबेश वही रहेगी जो मोटेरा में खेली थी... पीयुष चावला के लिये मोहाली में जगह बनती नहीं दिखती... अगर खिलाया गया तो उनकी पिटाई भी हो सकती है... पठान के ऊपर रैना को वरीयता मिलेगी... मोहाली के मैदान पर श्रीसंथ ज्यादा प्रभावी होंगे, वैसे भी मुनाफ कभी भी विकेट ले सकने वाली गेंदबाजी करते नहीं दिखते... मैं तो यही उम्मीद करूंगा कि श्रीसंथ ही खेलें...

फिर मुझे लगता है कि हम यह मैच जीतने जा रहे हैं और वानखेड़े में कीवियों से फाइनल खेलेंगे...

खिलाड़ी जो कुछ खास करेंगे मोहाली में...

पाकिस्तान... उमर अकमल, अफरीदी व अब्दुल रज्जाक

भारत... धोनी, हरभजन व वीरेन्द्र सहवाग




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क्रिकेट मसाला:-

बॉल टेंपरिंग...

आज देखिये बॉल टेंपरिंग का वह मशहूर वीडियो जिसमें वर्तमान पाकिस्तानी कप्तान शाहिद अफरीदी क्रिकेट की गेंद को सेब समझ सरेआम अपने दाँतों से काट रहे हैं...

विस्तृत खबर यहाँ है...


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आभार : यू-ट्यूब गूगल इमेजे्ज...



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मंगलवार, 22 मार्च 2011

जीत जायेंगे कंगारूओं से, कप अब हमारा है !

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क्या मैच था वेस्टइंडीज से... दोनों ही टीमें आस्ट्रेलिया से बचने की कोशिश में लगी थी... वेस्टइंडीज ने तो क्रिस गेल, चंद्रपॉल व केमार रोच को रेस्ट देकर पहले ही अपनी टीम को कमजोर कर दिया था... कमेंटरी करते नवजोत सिंह सिद्धू ने इस बात की ओर ईशारा भी किया... "दोनों में से जो टीम जीतेगी वह क्वार्टरफाईनल खेलेगी आस्ट्रेलिया के साथ और यदि भारत हारेगी तो मुकाबला होगा लंका के साथ वेस्टइंडीज हारी तो खेलेगी पाकिस्तान के साथ"... अपने खास अंदाज में मुस्कुराते हुऐ सिद्धू ने पूछा " समझा करो, दोनों टीमें चाहती क्या हैं ?"...

बहरहाल मैच हुआ, वेस्टईंडीज की ओर से रामपाल ने तेज गेंदबाजी की शुरूआत की... जिस गेंद पर उन्होंने सचिन का विकेट निकाला वह अनप्लेयेबल गेंद थी... तेज गेंद, सीम होकर बाहर की ओर निकली और अप्रत्याशित उछाल लिया... बल्ले का किनारा ले गेंद विकेटकीपर के दस्तानों में... बॉलर की अपील, अंपायर 'ना' में गर्दन हिला रहे थे परंतु सचिन ने बल्ले को बगल में दबाया दस्ताने उतारे व पैवेलियन की ओर चल दिये बिना एक बार भी पीछे देखे... यकीन जानिये वह गेंद ही ऐसी थी, बहुत नाइन्साफी होती यदि उस गेंद को विकेट नहीं मिलता... उसके बाद विराट ने एक बार फिर आश्वस्त किया परंतु सबसे बड़ी बात रही युवराज का फॉर्म में वापस लौटना तथा उनके आत्मविश्वास का भी वापस आना... आगे की बड़ी लड़ाइयों में काम आयेगा यह...

अच्छा ही है कि हम अब आस्ट्रेलिया से लड़ने जा रहे हैं... इरादा यदि विश्वकप जीतने का हो तो आपको सभी तगड़ी टीमों को हराना होगा ही... विश्वकप के लगातार ३४ मैचों में अजेय रही कंगारू टीम को पिछले ही मैच में पाकिस्तान ने धूल चटाई है... अमदाबाद के मोटेरा में सबकुछ अपने साथ है... दर्शक, मौसम, परिस्थितियाँ व पिच भी... मोटेरा की पिच बल्लेबाजों का स्वर्ग कहलाती है... आस्ट्रेलिया का तेज गेंदबाजी आक्रमण काफी कुछ बेअसर हो जायेगा इन स्थितियों में... भारत यदि होश में रहते हुऐ अपनी मजबूतियों को ध्यान में रखते हुऐ खेले तो जीत अपनी है... हमारे स्पिनर अहम रोल अदा करेंगे... चावला की जगह अश्विन बेहतर रहेंगे और इसी तरह जहीर के जोड़ीदार के तौर पर मुनाफ या नेहरा के बजाय श्रीसंथ भी... दोनों दो अलग अलग वजहों से... अश्विन मध्य के ओवरों में किफायती रहने के कारण व श्रीसंथ महंगे होने के बावजूद जरूरत होने पर विकेट निकाल पाने की क्षमता के कारण... परंतु साफ है कि टीम प्रबंधन व कप्तान के इस मामले में दूसरे विचार हैं इसलिये ऐसा हो पाना मुझे संभव नहीं लगता...

इस आस्ट्रेलियाई टीम के पास हेडन, गिलक्रिस्ट, मैकग्रा व वार्न जैसे लेजेंड्स नहीं हैं... टीम की बल्लेबाजी काफी हद तक पोंटिंग, क्लार्क व माइकल हसी पर टिकी है... तेज गेंदबाजी में ली, टेट व जॉनसन तीनों काफी तेज गेंद फेंकते हैं... रन बनाने का काम हमारे शीर्षक्रम को ही करना होगा... अलग-अलग दौर में सचिन, गंभीर व विराट को एक छोर को सुरक्षित रख खेलना होगा... दूसरे छोर के बल्लेबाज को रिस्क लेने होंगे... बैटिंग क्रम में कोई भी छेड़छाड़ घातक होगी... गंभीर तीसरे, विराट चौथे व युसुफ को सातवें नंबर पर उतारना ही सही नीति रहेगी...

कंगारू भारतीय टीम के 'मेंटल डिस्इन्टीग्रेशन' की शुरूआत कर देंगे आज से ही... इस काम में उनके भूतपूर्व दिग्गज भी सोची समझी रणनीति के तहत भारतीय टीम के दो तीन खिलाड़ियों को टार्गेट करती बयानबाजी करेंगे... हमारे कुछ बड़े खिलाड़ियों की टीमभावना पर भी सवाल उठाये जायेंगे... मैदान पर भी भारतीय खिलाड़ियों को आस्ट्रेलिय स्लेजिंग सुनने के लिये तैयार रहना होगा... उम्मीद करिये कि हमारे खिलाड़ी अपने खेल से इसका जवाब दें...

सच कहूँ तो भारतीय होने के नाते मैं भी निरपेक्ष नहीं रह सकता अब... मुझे लगता है कि २४ मार्च को मोटेरा में हम आसानी से कंगारूओं को हराने जा रहे हैं...

कप अब हमारा है !!!


क्रिकेट मसाला :-


ऊपर का चित्र देखिये, एक मैच में किरन मोरे ने महान पाकिस्तानी बल्लेबाज जावेद मिंयादाद को इतना स्लेज किया कि वह परेशान हो मोरे की नकल उतारते तीन बार फ्राग-जंप कर बैठे...

देखिये खबर व वीडियो इस घटना का...

वही वीडियो यहाँ भी है...

पढ़िये क्रिकेट इतिहास के कुछ The greatest Cricket Sledges of all time...

१. Merv Hughes & Viv Richards:During a test match in the West Indies, Hughes didn’t say a word to Viv, but continued to stare at him after deliveries. “This is my island, my culture. Don’t you be staring at me. In my culture we just bowl.” Merv didn’t reply, but after he dismissed him he announced to the batsman: “In my culture we just say f**k off.”

२. And of course you can’t forget Ian Healy’s legendary comment that was picked up by the Channel 9 microphones when Arjuna Ranatunga called for a runner on a particularly hot night during a one dayer in Sydney… “You don’t get a runner for being an overweight, unfit, fat c**t!!!”

३. James Ormond had just come out to bat on an ashes tour and was greeted by Mark Waugh…….. MW : “F*ck me, look who it is. Mate, what are you doing out here, there’s no way you’re good enough to play for England” JO : “Maybe not, but at least i’m the best player in my family”

४. McGrath to Ramnaresh Sarwan: “So what does Brian Lara’s d*ck taste like?”
Sarwan: “I don’t know. Ask your wife.”
McGrath (losing it): “If you ever F*&king mention my wife again, I’ll F*ing rip your F*fing throat out.”

५. Mark Waugh standing at second slip, the new player (Adam Parore) comes to the crease playing & missing the first ball. Mark - “Ohh, I remember you from a couple years ago in Australia. You were sh*t then, you’re fu*king useless now”.Parore- (Turning around) “Yeah, that’s me & when I was there you were going out with that old,ugly sl*t & now I hear you’ve married her. You dumb c*nt”.

६. Yet another Australian witticism with this time porky Sri Lankan batsman Arjuna Ranatunga the victim. Shane Warne, trying to tempt the batsman out of his crease mused what it took to get the plump character to get out of his crease and drive. Wicketkeeper Ian Healy piped up, “Put a Mars Bar on a good length. That should do it.”

७. Ravi shastri v/s the aussie 12th man (don’t remember who, and don’t want to slander anyone) shastri hits it to this guy and looks for a single…this guy gets the ball in and says “if you leave the crease i’ll break your f***ing head” Shastri: “if you could bat as well as you can talk you wouldn’t be the f***ing 12th
man”

८. Malcolm Marshall was bowling to David Boon who had played and missed a couple of times. Marshall: “Now David, Are you going to get out now or am I going to have to bowl around the wicket and kill you?”

९. Fred Trueman bowling. The batsman edges and the ball goes to first slip,and right between Raman Subba Row’s legs. Fred doesn’t say a word. At the end of the over, Row ambles past Trueman and apologises sheepishly. “I should’ve kept my legs together, Fred”. “So should your mother” he replied.

१०. Rod Marsh & Ian Botham: When Botham took guard in an Ashes match, Marsh welcomed him to the wicket with the immortal words: “So how’s your wife & my kids?”

११. Daryll Cullinan & Shane Warne: As Cullinan was on his way to the wicket, Warne told him he had Been waiting 2 years for another chance to humiliate him. “Looks like you spent it eating,” Cullinan retorted.

१२. Glenn McGrath (bowling to portly Zimbabwean chicken farmer Eddo Brandes): “Hey Eddo, why are you so F**ing Fat?” Eddo Brandes:”Because everytime I F*** your mother, she throws me a biscuit”

१३. Robin Smith & Merv Hughes:During 1989 Lords Test Hughes said to Smith after he played & missed:”You can’t f**king bat“. Smith to Hughes after he smacked him to the boundary: “Hey Merv, we make a fine pair. I can’t f**king bat & you can’t f**king bowl.”

१४. Merv Hughes & Javed Miandad:During 1991 Adelaide Test, Javed called Merv a fat bus conductor. A few balls later Merv dismissed Javed: “Tickets please“, Merv called out as he ran past the departing batsman.


देखिये Some excellent Sledging Videos...

और भी देखिये Great Cricket Sledging Videos Ever ...


आभार!




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शुक्रवार, 18 मार्च 2011

चिट्ठा ट्रैफिक पथांतरण : Blog Traffic Diversion

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मेरे 'पूर्वपरिचित' व 'नवागंतुक' मित्रों,


आज अपने इस ब्लॉग पर आये पाठकों को आमंत्रित कर रहा हूँ तंत्र-मंत्र, उसकी उपादेयता, प्रभाव व आज के युग में उस पर विश्वास जैसे विषयों पर हो रहे एक स्वस्थ विमर्श की ओर...

'भड़ास' की इस पोस्ट पर क्लिक कीजिये !


नीचे दिये लिंक केवल उनके लिये जो इस पूरे विमर्श की वजहों की जड़ तक जाना चाहते हैं...

मुनेन्द्र सोनी का सवाल...

मेरी पोस्ट-पपीते में अंडे

अमित जैन की अनूप मंडल से नोंक-झोंक

भड़ास: ईनाम एक लाख का...


मेरे ब्लॉग तक आने के लिये आपका आभार...



आते रहियेगा!




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रविवार, 13 मार्च 2011

एक जोर का झटका धीरे से है लगा sss ... सही समय पर मिला एक सही सबक !

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ओह ! क्या मैच था...

यह रहा स्कोरकार्ड...

विस्फोटक शुरूआत वीरू और सचिन की... १० ओवर में ८७ रन, इस विश्व कप में सबसे ज्यादा... सहवाग जब आउट हुऐ तब तक १०७ गेंदों में १४२ रन बन चुके थे... रन रेट था आठ... इसके बाद सचिन व गंभीर ने बिना रिस्क लिये, अपने विकेटों को बचाते व रनरेट को लगभग साढ़े छह-पौने सात के आसपास रखते हुऐ खेला... इरादा था कि आखिरी के १२-१३ ओवर में दस रन के आसपास की दर से रन बना ३६०-३७० के आस-पास का टारगेट दिया जाये... पर इस महान खेल की अनिश्चितताओं का अंदाज किसे था... २६७ के स्कोर पर सचिन ने अपना पहला व एकमात्र क्रॉसबैटेड व बदन से दूर शाट खेला, मिसटाइम किया व लपक लिये गये... भारत ने अपने आखिरी नौ विकेट मात्र २९ रन पर गंवा दिये... इससे पहले एक दिवसीय क्रिकेट के इतिहास में ऐसा केवल दो बार हुआ था किसी भी टीम ने अपने आखिरी आठ विकेट २९ रन से कम में गंवा दिये... बहरहाल १११ (नेल्सन फिगर) पर आउट होने से पहले सचिन ने दिल खुश कर दिया... डेल स्टेन के बाउंसर को हुक कर मारा गया छक्का व आठवें ओवर में मोरने मोर्केल को मारा कवर ड्राइव, क्या कहूँ इनके बारे में... एक क्रिकेट प्रेमी इस तरह के शॉट देखने के लिये धूप में घंटों बिना किसी शिकायत के बैठ सकता है...

सचिन के आउट होने के बाद एक बेहतरीन कैच से कैलिस ने गंभीर को विदा किया... देखना चाहता था कि युसुफ व स्टेन एक दूसरे के लिये क्या रणनीति अपनाते हैं परंतु युसुफ मात्र दो गेंदें खेल स्मिथ को कैच दे चल दिये...

डेल स्टेन की यॉर्कर गेंदों पर किल्ली उड़वाने के बाद हरभजन व मुनाफ का Sheepish एक्सप्रेशन देखने काबिल था... दोनों उस छोटे बच्चे की तरह लग रहे थे जिसे अचानक गहरी नींद से उठाकर खूंखार शेर से लड़ने को भेज दिया गया था... और वह भी बड़ी उम्मीदों के साथ... डेल स्टेन समकालीन क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाज क्यों कहे जाते हैं यह उन्होंने अपने दूसरे स्पैल में दिखाया...

सच कहूँ तो भारत के कमजोर गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका २९७ रन बना लेगा इसमें शायद ही किसी को शक होगा... स्मिथ एक बार फिर जहीर के Bunny साबित हुऐ, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में जहीर तेरह बार उनका विकेट ले चुके हैं अबतक... रणनीति के तहत पहले आमला व कालिस व बाद में कालिस व डीविलियर्स ने पौने पाँच के आसपास की रनरेट बनाये रखते हुऐ रिस्क फ्री बल्लेबाजी की... उनकी टीम का अनुमान था कि यदि विकेट पास में रहें तो आखिरी पंद्रह ओवर में ८-८.५ के रनरेट से आसानी से चेज किया जा सकता है... केवल दो-तीन अच्छे ओवर (१४-१५ रन वाले) चाहिये होते हैं... आखिर में वही हुआ...

कुछ बातें टीम चयन व कप्तानी के बारे में... इस पिच पर पीटरसन व बोथा का प्रदर्शन जाहिर करता है कि तीन पेसरों की जगह यदि टीम हरभजन व अश्विन दो स्पिनरों को उतारती तो शायद हालात कुछ बेहतर होते... आखिरी ओवर डालने के लिये नेहरा के चयन पर भी सवाल उठता है, वर्तमान फॉर्म में जहीर इसके लिये बेहतर होते... युसुफ ने जहीर के बाद सबसे इकॉनॉमिकल बॉलिंग की, फिर भी उसे चार ही ओवर मिले...

कुल मिलाकर यह झटका सही समय पर लगा है... केवल बैटिंग के भरोसे विश्वकप जीतने का सपना सपना ही रह सकता है... हमें जल्दी से जल्दी अपनी गेंदबाजी व गेंदबाजी की रणनीति सुधारनी होगी... और टीम को जीतने के लिये पूरे देश की शुभकामनाओं ब भाग्य की जरूरत पड़ेगी...

उम्मीद करिये मेरी तरह ही कि अगले मैच में रैना व अश्विन को मौका मिले...




क्रिकेट मसाला:-

यॉर्कर:- तेज गेंदबाज की फेंकी वह गेंद जो बल्लेबाज के पंजों के आसपास टप्पा खाये व जिसका मकसद बल्ले व पैड के बीच के गैप से जा विकेट हिट करना हो यॉर्कर कहलाती है... इनस्विंगिंग यॉर्कर तेज गेंदबाजों का सबसे मारक हथियार है...

सीखिये कैसे डालते हैं यॉर्कर गेंद

देखिये...

१- क्रिकेट इतिहास की कुछ बेहतरीन यॉर्कर

२- शोएब अख्तर का यॉर्कर गिलक्रिस्ट को

३- वासिम अकरम लारा के पैर के पंजे को कुचलते हुऐ


आभार!




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गूगल इमेजेस व यू-ट्यूब को आभार सहित।




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मंगलवार, 1 मार्च 2011

आप लोगों का यूँ ' टाई ' पहनना जरा भी नहीं भाया अपन को, नील-मानवों !!!

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मेरे ' ओपन कॉलर ' मित्रों,

आखिरकार न वो जीते न हम हारे, और टाई पहन ली नील मानवों ने... मैच का स्कोर कार्ड आपकी पेशे-नजर है।...

ज्यादातर आशंकाये सच साबित हुई... ३३८ का स्कोर कम नहीं होता... २०-२० के इस दौर में भी यह उम्मीद तो की जाती है कि इतना बड़ा स्कोर करने वाली टीम १०० में से ९९ बार जीतेगी... परंतु क्या किया जाये, हमारे नील-मानव इतना कमजोर गेंदबाजी आक्रमण लेकर उतरे हैं कि एक समय तो लग रहा था कि इंग्लैंड आसानी से जीत जायेगी... परंतु घोर आश्चर्य, टीम ने हार के जबड़ों से टाई निकाल पहन ही ली...

मैं मैच की बात बाद में करूँगा पहले मशहूर कार्टूनिस्ट इरफान साहब ने एक सवाल उछाला है... और वह है कि क्या वाकई कल के टाई मैच के भी हीरो सचिन ही हैं ?... सवाल बहुत प्रासंगिक है... मुझे तो लगता है कि इस मैच के हीरो जहीर रहे... जो लगभग हारी हुई स्थिति से जीत के कगार पर टीम को ले गये...

इरफान साहब लिखते हैं...

"मगर आज सुबह अखबारों में पहले पेज पर सचिन की तस्वीर देखकर उनके प्रायोजकों के मीडिया मेनेजमेंट की तार्रेफ़ करनी होगी,जो भारतीय क्रिकेट टीम की हर जीत का सेहरा सचिन के सर बंधवाने में सफल हो जाते है,
क्या आज इस जगह ज़हीर खा की तस्वीर नहीं होने चाहिए थी?मीडिया ईमानदारी से सोचे!"


मैंने ईमानदारी से सोचा व ऊपर जहीर खान की तस्वीर लगाई... मैं इससे भी आगे बढ़कर सवाल करता हूँ कि क्या सचिन जो टेस्ट में कभी ओपन नहीं करते व वन-डे में कभी कभार खेलते हैं उनके लिये गंभीर को उसकी कड़ी मेहनत से अर्जित की गई ओपनर की पोजीशन से नीचे भेजना जरूरी है... जिसे देखो कह रहा है कि यह कप सचिन के लिये जीतना चाहिये... स्टीव वाग ने एक सवाल उठाया था कि क्या सचिन देश से बड़े हैं ?... आप बताइये कि क्या ऐसा हो नहीं रहा व क्या ऐसा होना चाहिये ?

अब बात करता हूँ मैच की... सहवाग हमेशा की तरह विस्फोटक शैली में बेफिक्र खेले... मेरे विचार में वह कई योगियों को तक एकाग्रचित्ता व दिमाग में चल रहे सभी झंझावातों को अपने स्टांस लेते ही एकदम भूल कर केवल व केवल गेंद को देख मारने की सोचने की दीक्षा दे सकते हैं... सचिन शुरूआत में बहुत धीरे व संभल कर खेले लेकिन बाद में सेंचुरी मार भरपाई कर गये... गंभीर मिस्टर भरोसेमंद की तरह खेले... युवराज की फॉर्म व विश्वास दोनों वापिस आते दिखे... धोनी जब तक क्रीज पर रहे किसी दिक्कत में नहीं दिखे... पठान ज्यादा धूमधड़ाका नहीं कर पाये... विराट को सातवें नंबर पर भेजना समझ से परे है वह भी जब वह बेहतरीन फार्म में है व स्ट्रोक खेल सकता है, इस युवा खिलाड़ी के कैरियर के साथ यह खिलवाड़ नहीं तो और क्या है...

इंग्लैंड ने अच्छी जमीनी फील्डिंग की... और टिम ब्रेसनन ने गेंदबाजी में काफी जिगरा दिखाया, पसीना बहाया, आक्रामक रहे व बल्लेबाजों को बैकफुट पर रखा... ४८ रन देकर पाँच विकेट लेना उनकी मेहनत का सबूत है और सबूत इस बात का भी कि सपाट पिच पर भी यदि बेसिक्स को न भूला जाये व हौसले के साथ मेहनत हो, तो नतीजे मिल सकते हैं...

इंग्लैंड की ओर से स्ट्रास ने सपनों सरीखी बैटिंग की... पीटरसन काफी कॉन्फिडेन्ट दिखे... इयन बैल फॉर्म में वापस लौटे... कॉलिंगवुड का फिर नाकाम रहना इंग्लैंड के लिये चिन्ता का विषय रहेगा...

बात करूँ बॉलिंग की तो आपने खुद देखा होगा कि जहीर व हरभजन को छोड़ सबकी ठुकाई हुई... जहीर भी पहले स्पैल में काफी पिटे पर बैटिंग पावरप्ले के दूसरे स्पैल में वे बहुत ही धारदार व हर गेंद से विकेट लेने में सक्षम दिखे...

अपना अगला मैच है छह मार्च को आयरलैंड से... लगभग सभी बैट्समैन फार्म में हैं... और यदि बैट्समैन फॉर्म में हैं तो छह खिलाओ या सात रन उतने ही बनने हैं... अगले मैच में मेरी राय में टीम इंडिया को जहीर व हरभजन को रेस्ट देकर श्रीसंथ, मुनाफ, नेहरा, चावला व अश्विन को खिलाना चाहिये... आखिर बॉलर की धार, आक्रमण की जिम्मेदारी ले पाने की क्षमता आदि का सही पता तो असली मैच सिचुएशन में ही चल पायेगा न...

देखते हैं तब तक...



क्रिकेट मसाला :-

ऑफ स्पिन :- दाहिने हाथ के बल्लेबाज के लिये दाहिने हाथ के गेंदबाज द्वारा फेंकी गई वह गेंद जो ऑफ स्टंप या उससे और बाहर गिर टप्पा खाने के बाद टर्न होकर अंदर की ओर यानी मिडिल स्टंप या लेग स्टंप की ओर टर्म करे तो वह ऑफ स्पिन कहलाती है... इस तरह के गेंदबाजी करने वाले बॉलर की गेंद पर पगबाधा आउट होने की संभावना ज्यादा रहती है व उनके विरूद्ध तेजी से रन बनाना मुश्किल होता है...

ऑफ स्पिनर अपनी ऊंगलियों व कलाई की मदद से डिलीवर करते समय गेंद को क्लॉकवाईज घूर्णन (Spin) देता है... ऑफ स्पिन करना सीखिये यहाँ पर...

फ्लाईट, लाइन-लेंग्थ व टर्न के वेरिएशन के अलावा एक ऑफ स्पिनर के दो अन्य हथियार हैं...

१- दूसरा :- यह वो गेंद है जो ठीक उसी एक्शन से व गेंद को क्लॉकवाइज स्पिन देते हुऐ की जाती है परंतु टर्न लेगस्पिन की तरह करती है... कैसे ? देखिये यहाँ...

दूसरा की खोज करने वाले पाकिस्तानी गेंदबाज सकलेन मुश्ताक को यह हथियार प्रयोग करते देखिये...

अ- डेमियन मार्टिन के खिलाफ...

ब- एडम गिलक्रिस्ट व डेमियन मार्टिन के खिलाफ...

२- कैरम बॉल:- लंका के अजान्था मेंडिस इस गेंद का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं... यह कोई नई गेंद नहीं है पर मध्यमा ऊंगली की मदद से गेंद को दोनों ओर टर्न करने की इस पुरानी व लुप्तप्राय: कला को मेंडिस ने जिन्दा किया है...

यहाँ देखिये Iverson-Gleeson Bent Middle Finger Grip यानी कैरम बॉल का इतिहास...

यहाँ देखिये कैसे फेंकी जाती है कैरम बॉल...

इन वीडियोज् में देखिये...

मेंडिस की कैरम बॉल खेलते (???) रोहित शर्मा...



बल्लेबाजों के साथ कैरम खेलते मेंडिस...



आभार!




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