रविवार, 20 फ़रवरी 2011

सामने रनों का पहाड़ था, और शेर दहाड़ा ही नहीं !!!

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मेरे ' नीले (Blue)' मित्रों,

भारत के बांग्ला शेरों के साथ हुऐ पहले मैच का स्कोरकार्ड आपके सामने है... न जाने क्या सोच बांग्ला कप्तान ने टॉस जीत पहले फील्डिंग करी... परंतु अगर उन्होंने यह सोच कर ऐसा किया कि भारत के स्कोर को चेज करना आसान रहेगा तो यह साफ दिखलाता है कि कितना कमजोर गेंदबाजी आक्रमण लेकर उतरे हैं हम...

बहरहाल सहवाग चले और क्या खूब चले... वैसे उनका बड़े मैचों में चलना ज्यादा जरूरी है... मनाईये कि Law of averages उनको किसी बड़े मैच में न पकड़े...

विराट उम्मीदों पर खरे उतरे और सैकड़ा जड़ दिया... वह आश्वस्त करती बैटिंग करते नजर आये... यह खिलाड़ी इस कप में काफी कुछ और करेगा...

सचिन और गंभीर भी जितने समय विकेट पर रहे, रन-ए-बॉल की गति से स्कोर किया... परंतु मुझे यह समझ नहीं आया कि पंद्रह बॉल बाकी रहते और अच्छा स्कोर टंगने के बाद भी युसुफ पठान युवराज से ऊपर क्यों भेजे गये... युसुफ ने दस गेंदो में आठ रन किये और बाउन्ड्री एक भी नहीं की... धोनी की तरह ही उनको भी कुटाई शुरू करने से पहले दस पंद्रह गेंदें खेलने की जरूरत होती है... जबकि युवराज आते ही पहली गेंद पर शॉट खेल सकता है... यदि बल्लेबाजी क्रम का यह परिवर्तन इस बात का संकेत है कि टीम प्रबंधन को ही युव्वी पर भरोसा नहीं रहा तो बहुत गंभीर मामला है यह...

चेज के दौरान बाँग्ला खिलाड़ी कभी भी जीत का प्रयास करते नहीं दिखे... बाँग्लादेश ने भारत के खिलाफ कभी भी ३०० का आंकड़ा नहीं छुआ है... शायद यह बात उनको दबाये रही... इमरूल केयस काफी क्लीनहिटर व आत्मविश्वास से भरा लगा...

श्रीसंथ की बहुत पिटाई हुई, उनको जल्दी से जल्दी इससे उबरना होगा... जहीर धारदार दिखे व हरभजन भी ठीकठाक गेंद डाल ले गये... मुनाफ को विकेट तो मिले पर उसमें बल्लेबाजों द्वारा खुद की गई गल्तियों का ज्यादा योगदान रहा...

हमारी फील्डिंग कमजोर रही और हमेशा की तरह १०-१२ अतिरिक्त रन विरोधी को भेंट किये गये...

ज्यादा चिंता की बात यह सही कि बांग्लादेश जैसी कमजोर माने वाली टीम भी चेज करते समय हमारे खिलाफ २८३ रन कर गई... अब हर मैच में ३०० से ज्यादा रन तो मिलने नहीं हमको... तो बहुत ही जल्दी अपनी गेंदबाजी ब फील्डिंग को सुधारना होगा टीम इंडिया को ...

अगला मैच २७ फरवरी को होगा बेंगालुरू में इंग्लैंड के साथ... बहुत थोड़ा सा पलड़ा इंग्लैंड का भारी नजर आता है मुझे गेंदबाजी के कारण...

अपनी आप बताइये...




क्रिकेट मसाला :-

फास्ट या मीडियम पेसर द्वारा हवा में फेंकी गई गेंद का टप्पा खाने के पहले मूवमेंट स्विंग कहलाता है... जिन्होंने कभी क्रिकेट नहीं खेला उनके लिये बता दूँ कि यदि दाहिने हाथ के बल्लेबाज को आती हुई गेंद देख यह लगता है कि गेंद ऑफस्टंप के बाहर पहली स्लिप की ओर जायेगी तथा वह इसी हिसाब से उसे खेलता है परंतु गेंद अंदर आकर उसका मिडिल स्टंप उखाड़ देती है या वह ठीक विकेट के सामने पगबाधा आउट हो जाता है तो यह हुआ इनस्विंग... और यदि दाहिने हाथ के बल्लेबाज को लगता है कि गेंद उसके मिडिल या ऑफ स्टंप पर आ रही है वह डिफेंड करता है परंतु गेंद उसके बल्ले का बाहरी किनारा ले विकेट कीपर या स्लिप के हाथों में समा जाती है तो यह हुआ आउटस्विंग...

स्विंग के लिये जरूरी है कि गेंद का आधा हिस्सा चिकना रहे व आधा खुरदुरा... आपने देखा भी होगा कि टीमें गेंद के एक हिस्से को बारबार कपड़े से रगड़कर, थूक व पसीना लगाकर एक हिस्से को चिकना रखने का प्रयास करती हैं... यही चिकना हिस्सा जिस दिशा की ओर रहेगा गेंद हवा में उसी ओर मूव होगी...

स्विंग के पीछे Bernoulli's theoremCoandă effect काम करते हैं... हवा से भारी हवाई जहाज भी इन्हीं प्रभावों के कारण उड़ पाते हैं...

हिन्दी में भी यह जानकारी आप यहाँ देख सकते हैं।






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चित्र साभार : Google images


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13 टिप्‍पणियां:

  1. मुझे भी कल श्रीशंत पर काफी गुस्सा आया, बंगलादेश जैसी टीम २८३ का स्कोर करती हैं तो भारत की टीम में कहीं न कहीं कमजोरी तो जरूर है

    देखते हैं क्या होता है, उम्मीद तो अच्छे की ही है

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  2. वीरू के दम पर टीम इंडिया की शुरुआत तो बहुत बढ़िया रही ! लेकिन अगर बात क्रिकेट की करें तो बंगलादेश ने बहुत जानदार खेल दिखाया ! बंगलादेश 283 के स्कोर पर भी इसलिए सिमट गयी क्योंकि दबाव 370 रन का था लेकिन अगर कहीं इंडिया का स्कोर महज 300 के आस पास होता तो ... :)

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  3. कल के मैच में सहवाग की बैटिंग देख कर बहुत मजा आया परन्तु मुझे लगता है की यदि बंगलादेश की टीम ने पहले खेलने का निर्णय लिया होता तो शायद इस मैच का नतीजा पिछले विश्वकप जैसा हो सकता था.



    नोट : मेरे उपरोक्त विचार आपके लेख को पढ़ कर ही उत्पन्न हुए हैं जिन्हें मैं "तेरा तुझको अर्पण" वाली तर्ज पर यहाँ टिपण्णी रूप में दर्ज कर रहा हूँ. इस टिपण्णी के पीछे कोई अन्य छिपा हुआ मंतव्य नहीं है. आप इसे उधार में दी गयी टिपण्णी समझ कर प्रतिउत्तर में मेरे ब्लॉग पर टिपण्णी करने के लिए बाध्य नहीं हैं.

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    @ विचारशून्य (दीप पान्डेय) जी,

    "तेरा तुझको अर्पण"... स्वीकार है देव...
    प्रत्युत्तर में टिप्पणी देने की किसी बाध्यता को न मैंने आज तक कभी माना है न ही कोई ऐसी आस है मुझे... आपका मंतव्य सही है मुझे विश्वास है।

    ... :))



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  5. मैदान के बाहर न जाने कितने क्रिकेट.

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  6. सबसे पहले क्रिकेटीय तकनीकी ज्ञान देने देने के लिए धन्यवाद | बंग्लादेश के सामने बालरो का ये हाल है तो बाकि मजबूत टीम के सामने क्या होगा | वीरू ने १७५ जरुर बनाये पर अपनी स्टाइल में नहीं कल वो ५० ओवर रुकने का लक्ष्य ले कर आये थे अफसोस की पूरा नहीं कर सके | आज न्यूजीलैंड के बालरो ने केन्या की क्या हालत की और हमारे पिटते रहे |

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  7. पूरे लेख पर भारी टिप्पणी :नोट : मेरे उपरोक्त विचार आपके लेख को पढ़ कर ही उत्पन्न हुए हैं जिन्हें मैं "तेरा तुझको अर्पण" वाली तर्ज पर यहाँ टिपण्णी रूप में दर्ज कर रहा हूँ. इस टिपण्णी के पीछे कोई अन्य छिपा हुआ मंतव्य नहीं है. आप इसे उधार में दी गयी टिपण्णी समझ कर प्रतिउत्तर में मेरे ब्लॉग पर टिपण्णी करने के लिए बाध्य नहीं हैं.


    हमारी चिन्ता : बांग्लादेश के २८३ रन ही है!

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  8. @मित्र प्रवीण

    तकनीकी ज्ञान बढ़िया है ...... अपन तो देखेंगे सेमी-फाइनल और फाइनल मेच ... बस .. इंडिया पहुचे या न पहुंचे .. कोई चिंता नहीं :)

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  9. गेंदबाजी चिंता का विषय हैं | और कुछ तो मेजबान का भी सम्मान करना चाहिए | अच्छी पोस्ट आभार आपके व्लाग पर पहली बार आया हूँ| यह मेरी गलती है क्षमा प्रार्थी हूँ |

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  10. @ प्रवीण शाह जी ,
    आप स्विंग सिखा रहे हैं और विचार शून्य साहब 'दूसरा' डाल रहे हैं बैटिंग बड़ी दुश्वार कर दी आप दोनों ने :)
    सुनील कुमार जी क्या कह गये ज़रा हमें भी समझाइयेगा :)

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    @ अली सैयद साहब,

    हुजूर, आप भी न... :)

    *** विचारशून्य जी का आक्रोश एकदम सहज-स्वाभाविक है बार बार कुछ लोग एक धारणा को स्थापित करने में लगे हैं कि टिप्पणियाँ केवल और केवल बदले में अपने ब्लॉग पर टिप्पणियाँ पाने के लिये की जाती हैं कुछ मामलों में यह सही भी है पर सभी मामलों में नहीं... ब्लॉग का संवाद दुतरफा है इसलिये यदि कभी कोई आलेख आपको भी कुछ कहने को प्रेरित करता है तो टिप्पणी की जाती है... यद्मपि अपनी कुछ मजबूरियों के चलते मैं बहुत ही कम टिप्पणी कर पा रहा हूँ आजकल, पर अपने सभी साथी ब्लॉगरों के लिये मैं भी दीप पान्डेय जी की बात दोहराना चाहूँगा...

    मेरे आलेख को पढ़ कर ही यदि आपके मन में कोई विचार उत्पन्न हुऐ हैं तो उन्हें 'नेकी कर दरिया में डाल' की तर्ज पर यहाँ टिपण्णी रूप में दर्ज कर दें। इस टिप्पणी के पीछे कोई अन्य छिपा हुआ मंतव्य न रखें, आप इसे उधार में मुझे दी गयी टिपण्णी न समझें, प्रतिउत्तर में मैं आपके ब्लॉग पर टिपण्णी करने के लिए बाध्य नहीं हूँ ! मैं आपके आलेखों पर भी इसी नियम के तहत टिपियाता हूँ !

    *** सुनील कुमार जी यह कह रहे हैं कि उनको पहले ही मेरे ब्लॉग पर आना चाहिये था... धन्यवाद उनको!



    ...

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  12. देखते है आगे क्या होता हैँ.वैसे मैच देखने से ज्यादा रोमांच आपकी पोस्टें पढने में आ रहा है.

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मेरे इस आलेख को पढ़ कर ही यदि आपके मन में कोई विचार उत्पन्न हुऐ हैं तो कृपया उन्हें 'नेकी कर दरिया में डाल' की तर्ज पर ही यहाँ टिप्पणी रूप में दर्ज करें... इस टिप्पणी के पीछे कोई अन्य छिपा हुआ मंतव्य न रखें, आप इसे उधार में मुझे दी गयी टिप्पणी न समझें, प्रतिउत्तर में आपके ब्लॉग पर टिप्पणी करने की किसी बाध्यता को मैं नहीं मानता व मुझसे या किसी अन्य ब्लॉगर से भी ऐसी अपेक्षा रखना न तो नैतिक है न उचित ही !... मैं किसी अन्य के लिखे आलेखों पर भी इसी नियम व भावना के तहत टिपियाता हूँ !

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