गुरुवार, 17 फ़रवरी 2011

आह क्रिकेट ! वाह क्रिकेट !! इक बार फिर से हम सभी को लुभा क्रिकेट !!!

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मेरे ' क्रिकेटप्रेमी ' मित्रों,

टेलीविजन से अपना बस इतना ही नाता है कि उसे स्वयं स्विच ऑन केवल पाँच वजहों से ही करता हूँ मैं...

सबसे पहली वजह है खबरें... दूसरी क्रिकेट... तीसरी फुटबाल... चौथी बॉक्सिंग... और आजकल कुछ समय से Zee TV का कार्यक्रम DID Doubles...

और आज से तो शुरू हो रहा है क्रिकेट का महाकुंभ ही...

एक ऐसा देश जहाँ अक्सर मिलने वाली खबरें होती हैं घोटालों की, सरकारें बचाने-चलाने को समझौते करते, जनता की संपत्ति की लूट की अनुमति देते साफ-सुथरों की, खेल कराने के नाम पर हजारों करोड़ के वारे न्यारे करते खेल प्रशासकों की,राष्ट्रहित को ताक पर रख केवल और केवल अंतर्राष्ट्रीय आडियेन्स के लिये मुँह खोल राष्ट्रद्रोही बातें करते मानवाधिकारवादियों व अभिव्यक्ति स्वतंत्रतावादियों की...

वहाँ पर आज केवल यही खेल है जो हम सबको देता है हंसने-मुस्कुराने-खुशियाँ मनाने के कुछ लम्हे...


अब कप खेलना है तो टीम भी होगी ही... आज चर्चा करते हैं अपनी टीम इंडिया के बारे में...




वीरेन्द्र सहवाग : वीरू अगर पचास फीसदी दिन भी चल निकले और पंद्रह ओवर तक भी खेल गये तो पैसा वसूल ! मनाइये कि वह बड़े मैचों में चले ...

गौतम गंभीर : इस विश्व कप में मैं अपना दाँव गंभीर पर लगाना चाहूँगा... उनकी बॉडी लेंग्वेज और आँखें यह बताती हैं कि कुछ करने की ठाने है यह खिलाड़ी इस बार...

सचिन तेंदुलकर : सचिन को देख अब यह नहीं लगता कि अपने खेल को पूरी तरह इन्जॉय कर खेल रहा है यह खिलाड़ी... अक्सर वह अपनी और देश की उम्मीदों के नीचे डूबे नजर आते हैं... यदि एक आखिरी बार फिर से पूरा आनंद ले खेलना शुरू कर दे तो एक नई इबारत लिख देंगे वे... अन्यथा औसत ही रहेगा यह कप उनके लिये...

युवराज सिंह : युवराज में इस समय आत्मविश्वास की कमी साफ झलक रही है... क्रिकेट के खेल में बाजार बहुत अहम है औेर शायद इसीलिये युवराज भी टीम में है...

विराट कोहली : न जाने मुझे क्यों लगता है कि विराट इस विश्व कप का सितारा होगा... मैदान पर उसकी मौजूदगी ही बार बार आपको आश्वस्त करती है कि वह हार नहीं मानेगा आखिर तक... अच्छे फिनिशर के तौर पर भी विकसित हो रहा है यह खिलाड़ी...

सुरेश रैना : रैना के पास ताकत है बॉल यदि बल्ले से कनेक्ट होती है तो मिस्टाइम्ड शॉट भी सीमारेखा से बाहर होता है... पर छोटी और तेज बॉल ( फास्ट बाउंसर ) उसकी बहुत बड़ी कमजोरी है... दूसरा एक सवाल यह भी है कि प्लेइंग इलेवन में उनको जगह मिलती है या युसुफ पठान को...

महेंद्र सिंह धोनी : माही मेरी कमजोरी है इसलिये कि भले ही झारखंड में पला-बढ़ा हो पर यह खिलाड़ी कुमाँउनी मूल का है, मेरी ही तरह.... उसके पास शॉट हैं, टेम्परामेंट है, स्ट्रीट स्मार्ट है, अच्छा क्रिकेटीय-दिमाग है, सबसे बड़ी बात वह स्वयं ही कप्तान भी है... पूरी उम्मीद है कि अच्छा खेलेगा यह खिलाड़ी...

अभी इतना ही...

बाकी के आठ खिलाड़ियों के बारे में कल...

मिलेंगे न!






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चित्र साभार: गूगल इमेजेज

10 टिप्‍पणियां:

  1. उम्मीद तो हम भी करते हैं कि ये खिलाड़ी चलें

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  2. बल्लेबाज तो ठीक है लेकिन गेंदबाजी मे क्या होगा ?
    युवराज तो अब रणजी टीम के लिये भी बोझ है !

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  3. सच है जब चारों ओर से भ्रष्‍टाचार, खून-खराबे की ही खबरे आ रही हो तब खेल ही ऐसे हैं जिन्‍हें सुकून से देखा जा सकता है। मुझे भी आपकी तरह ही विराट कोहली से बहुत उम्‍मीदें हैं।

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  4. मैं टी वी एक वजह से स्विच ऑफ करता हूँ, वो है क्रिकेट :)

    प्रणाम

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  5. अब सब कुछ क्रीकेटमयी होने जा रहा है यहाँ तक की मीडिया भी.सरकार भी इससे थोडा राहत की साँस लेगी.टू जी,इसरो डील,डायन,विभिन्न कार्पोरेट घोटालों पर से मीडिया और जनता का ध्यान हट जाएगा.वोटिंग मशीन,बी टी बैंगन ,भोपाल कांड,विकीलीक्स,चीन से संबंध जैसे मुद्दे जिन पर सरकार की आलोचना मीडिया से लेकर आम आदमी भी ब्लॉगों और सोशल साईटों के जरीये कर रहा था सब पहले ही नेपथ्य में चले गये है अब बाकी मामलों के साथ भी यही होगा.एक एक बॉल और रन का बारीकी से विश्लेषण होगा.किसी खिलाडी की चोट पर देश का माहौल मानो गमगीन हो जाएगा.मंदिरों में जीत के लिये दुआऐं और चढावे होंगे.पाकिस्तान को गिरियाकर लोग अपनी देशभक्ति का सुबूत देंगें वो अलग.इसके अलावा कर्मचारी वर्ग जबर्दस्ती की छुट्टी मारेगा नहीं भी मारेगा तो काम पर ध्यान नही देगा,गृहणियो की सिरदर्दी बढ जायेगी,सट्टेबाजों के वारे न्यारे होंगे,करोडों की बिजली फूँक दी जाएगी,परीक्षायें पास होने के कारण बच्चों की पढाई प्रभावित होगी फिर भी आह क्रीकेट, वाह क्रीकेट.

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  6. भारतीय टीम अक्सर अपने अति आत्मविश्वास के कारण डूब जाती है पिछली दो शानदार जीत ख़ुशी से ज्यादा डरा रही है | टीम में हमेशा लगतार बेहतर प्रदर्शन की कमी रही है खिलाडी टुकड़ो में अच्छा प्रदर्शन करते है जैसे की हम कहते है की यदि वीरू टिक गए तो यदि विराट चल गए तो यानि ये हुआ तो वो होगा नहीं तो नहीं |

    और रही टीवी के कार्यक्रमों की बात कभी जीवन से मन उब जाये तो जरुर टीवी पर आ रहे धारावाहिकों को देखिएगा क्यों???

    उन्हें देख कर आत्महत्या करते समय आसानी होगी हिचक नहीं होगा |

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  7. हमारी वाह सबसे उपर लगे क्रिकेट की कलात्‍मक गेंद के चित्र के लिए.

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  8. सारी ,क्रिकेट नो मोर इंटेरेस्ट मी!

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  9. ऐसा हुआ एक बार
    चढ़ा था क्रिकेट का बुखार
    क्रिकेट बना था धरम अपुन का
    था इश्वर* पर जो ऐतबार
    होई गए टुकड़े युकड़े अरमानों के
    जब देखा फिक्सिंग की ख़बरों से अटा पड़ा वो अखबार
    इतना दम नहीं है की झटका झेल सकें और एक बार

    इश्वर = फेवरेट खिलाड़ी

    दिल में मेरे है दर्दे डिस्को .. ये समझाऊं मैं किस किस को


    अब कह ही दूँ .. जिस धर्म ( क्रिकेट ) के मामले में पब्लिक को नास्तिक होना चाहिए उस मामले में आस्तिक होना कुछ समझ में नहीं आया


    आस्थावान ध्यान दें ~~~~~ स्वामी विवेकानंद की आवाज और सच

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