बुधवार, 9 फ़रवरी 2011

ओऊर फुतुरे इस भैरी-भैरी दार्क !!!

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मेरे ' ब्राईट ' मित्रों,

एक मेरा सुना हुआ परंतु एकदम सच किस्सा सुनिये पहले तो...

डिग्री के इम्तहान की मौखिक परीक्षा चल रही है... बाहरी परीक्षक एक परीक्षार्थी की नाकाबलियत से परेशान हो चुका है और नाराज हो कहता है कि तुम्हें अपने विषय का ज्ञान तो है ही नहीं ऊपर से आप तुक्काबाजी भी कर रही हो... " नहीं नहीं सर जी, मैंने पढ़ा है सब पर क्या करूँ मेरा नटूरे ही ऐसा है कि मैं आपके सामने कुछ बोल नहीं पा रही हूँ... यह नटूरे क्या है ? परीक्षक दहाड़ा... वो सर N-A-T-U-R-E = नटूरे, शर्माते हुऐ बोली वह लड़की...

अब परीक्षक के गुस्से का कोई ठिकाना ही नहीं... तुम पास होने के एकदम लायक नहीं... वह बेचारी सुबकते हुऐ अपने Internal Examiner को बुला लाई... आते ही उन्होंने External Examiner को कहा... " यह क्या कह रहे हैं सर, ऐसा करेंगे तो बेचारी का तो फुतुरे ही बरबाद हो जायेगा...

फुतुरे = F-U-T-U-R-E

यदि अतिशयोक्ति लग रही हो तो आपको बता दूँ कि रिटायरमेंट के करीब पहुँचे अपने एक प्रोफेसर साहब को Muscle को अपने हर लेक्चर के दौरान मुसुल्ल कहते हुऐ तो मैंने भी सुना है इन्हीं कानों से

शाहजहाँ पुर में भेड़ बकरियों की मानिंद ट्रेनों की छतों पर लदे लड़कों के साथ हुआ हादसा जिसमें कईयों की जान गई व कईयों को जिंदगी भर के लिये लाचार होना पड़ा तो याद ही होगा आपको... मात्र ४०० पद थे... वह भी ट्रेडमैनों के...
यानी कुक, सफाईकर्मी, नाई, धोबी, मसालची, बढ़ई, मोची आदि आदि के... पर उमड़ पढ़ी लाखों की भीड़ सिर्फ यह सोचकर कि यहाँ चयन आसान होगा... पहले ऐसा होता भी था, ट्रेडमैन के पद के लिये बहुत कम लोग आते थे... इसी उम्मीद में थे यह लड़के भी...

आजकल उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में विकास विभाग के अंतर्गत ग्रामसभाओं में सफाईकर्मियों कि नियुक्ति के विज्ञापन निकले हैं... और खबरे हैं कि महज कुछ सौ पदों के लिये लाखों की तादाद में प्रार्थनापत्र आ रहे हैं... पोस्टग्रेजुएट यहाँ तक कि उससे भी बड़ी डिग्रियाँ लिये अभ्यर्थियों के भी...

लगभग यही हाल रेलवे में गैंगमैन की परीक्षा तक का होता है, कई अभ्यर्थी ईंजीनियरिंग में डिग्री या डिप्लोमा होल्डर तक थे... प्राइमरी मास्टर की नौकरी के लिये डेंटल सर्जन तक अप्लाई कर रहे हैं...

हुआ क्या है कि शिक्षा के निजीकरण व उदारीकरण की इस अंधी दौड़ में गुणवत्ता का कोई ध्यान नहीं रखा जा रहा... पढ़ाने वाले पढ़ाने काबिल नहीं... पढ़ने वाले पढ़ने की जरूरत नहीं समझते... परीक्षायें मैनेज की जाती हैं संस्थानों द्वारा... सेवारत जज तक नकल कर रहे हैं...


आज हमारी डिग्रियों की कीमत उनमें लगे कागज जितनी भी नहीं रही है...

ओऊर फुतुरे इस भैरी भैरी दार्क !!!

आप क्या कहते हैं ?







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17 टिप्‍पणियां:

  1. सही कह रहे हैं आप... फुतुरे इस भैरी भैरी दार्क!!!

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  2. सही है जी, देखें अब फुटेरे में क्‍या होगा?

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  3. यह असली कथा है देश के फतुरे का ! फंजाई को एक अध्येता फुनगी कहते रहे -८० प्रतिशत से पास हुए ..इस समय खैर छोडिये ..यी भारत की एक और असली तस्वीर है ...दुर्भाग्यपूर्ण !

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  4. मैं क्या कहूँ, मैं तो अपने प्रदेश में पढाई की दुर्दशा को देखकर पहले से ही परेशान हूँ, आप यकीन नहीं मानेंगे, बी.एस.सी. और एम.एस.सी. किया हुआ विद्यार्थी अपने नाम को इंग्लिश में नहीं लिख सकता, ये हालत है पढाई की

    पर ऐसा नहीं है कि गलती सिर्फ सरकार की है, वहाँ पर माना यही जाता है कि सिर्फ डिग्री चाहिए, आने ना आने से क्या फर्क पड़ता है, ऑर डिग्री तो रु. दे कर मिल ही जाती है|

    क्या बताएं विकट समस्या है

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  5. एक सच्ची कथा मै भी सुनाती हु | कुछ समय पहले टीवी पर देखा की कैसे नगरपालिका के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों में भर्ती के लाये पढ़े लिखे और बड़ी जाती के लड़को का फार्म भी आया था | रिपोर्टर रो रह था देखा आज देश में बेरोजगारी की क्या हालत है पढ़े लिखे लडके और बड़ी जात वाले भी सब भुला कर गलियों में झाड़ू लगाने को तैयार है | बनारस गई तो सारी पोल खुल गई हमारे मोहल्ले में देखा तो रोज झाड़ू नहीं लग रहा है जबकि पहले रोज लगता था फिर पता चला की इस मोहल्ले में जिसकी डियूटी लगी है वो ऐसे ही बड़ी जात वाला पढ़ा लिखा है वो खुद कभी झाड़ू नहीं लगाता है उसने बगल के मोहल्ले में झाड़ू लगाने वाले को अपने वेतन का ३०% दे देता है और वो यहाँ एक दिन छोड़ कर एक दिन झाड़ू लगाता है | खुद घर बैठ कर या कभी कदार आफिस का कोई काम है तो उसे कर कर ७० % वेतन पा रहा है | वैसे शिक्षा के सवरूप को लेकर आप ने जो बात कही है वो सच है |

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  6. मेरे 'ब्राईट' मित्रों,

    हम आपके bright ब्रिघ्‍ट मित्र बन कर बांच गए, कुछ-कुछ समझा भी फुतुरे.

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  7. बिलकुल सही है अभी मैंने इसी तरह की एक पोस्ट" शिक्षा की लय" दी है समय मिले तो कृपया पढने का कष्ट करे |
    लोंक है -http://shobhanaonline.blogspot.com/2011/02/blog-post.हटमल
    अन्शुमालाजी की कही बात के साथ साथ यः भी बता दू की जनगणना में भी ऐसे ही डयूटी लगाये जाने पर आधे रुपयों में दूसरो से काम करवा लेते है |

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  8. ऐसा ही है....एक फिजिक्स के अध्यापक आजीवन schrodinger को सोलिंजर कहते रहे.....
    गुणवता के अभाव में बहुत से chemistry के विद्यार्थी मीथेन का formula नहीं जानते....

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  9. सर्दियों का मौसम था गुरूजी रजाई के अंदर और चेले राम खाट के इर्द गिर्द जमीन पर , अंगरेजी का ट्यूशन चालू ! चेला बोला 'टीही' ! गुरु जी ने कहा , क्या बोला बे ? फिर से पढ़ ! चेले ने फिर से पढ़ा 'टीही' ! अब गुरु जी बौखलाये , साले 'टीही' कभी ना देखा ना सुना स्पेलिंग बोल ! इब छोरा बोल्या जी गुरुजी 'The' :)

    आपकी चिंताओं से सहमत !

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  10. ई फुतुरे तो चिंता का विषय हैं. छोटे छोटे कस्बो में रोजगार कि उम्मीद ईस फुतुरे में सहायता करेगी.

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  11. अच्छा किस्सा


    डॉ. दिव्या श्रीवास्तव ने विवाह की वर्षगाँठ के अवसर पर किया पौधारोपण
    डॉ. दिव्या श्रीवास्तव जी ने विवाह की वर्षगाँठ के अवसर पर तुलसी एवं गुलाब का रोपण किया है। उनका यह महत्त्वपूर्ण योगदान उनके प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, जागरूकता एवं समर्पण को दर्शाता है। वे एक सक्रिय ब्लॉग लेखिका, एक डॉक्टर, के साथ- साथ प्रकृति-संरक्षण के पुनीत कार्य के प्रति भी समर्पित हैं।
    “वृक्षारोपण : एक कदम प्रकृति की ओर” एवं पूरे ब्लॉग परिवार की ओर से दिव्या जी एवं समीर जीको स्वाभिमान, सुख, शान्ति, स्वास्थ्य एवं समृद्धि के पञ्चामृत से पूरित मधुर एवं प्रेममय वैवाहिक जीवन के लिये हार्दिक शुभकामनायें।

    आप भी इस पावन कार्य में अपना सहयोग दें।


    http://vriksharopan.blogspot.com/2011/02/blog-post.html

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  12. ओऊर फुतुरे इस भैरी भैरी दार्क !!-सत्य वचन!

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  13. किसी का कोई दोष नहीं। अंग्रेजी है ही टांग तोड़ू भाषा। he he..मेरा मतलब.. ही..ही...वैले टीही ज्यादा अच्छा है।
    ....सार्थक चिंतन के लिए प्रेरित करती पोस्ट।

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