सोमवार, 31 जनवरी 2011

' ताकि सनद रहे ' !!! गत्यात्मक होती भविष्यवाणियाँ...

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मेरे 'ज्योतिष-विश्वासी' मित्रो़,

यह पोस्ट मात्र इसलिये है 'ताकि सनद रहे'...
आदरणीय संगीता पुरी जी का सभी अन्य ब्लॉगरजनों की तरह ही मैं भी बहुत सम्मान करता हूँ...
परंतु मेरा यह भी मानना है कि आकाश में विद्ममान या घूमते ग्रहों, उपग्रहों, तारामंडलों व तारों की पृथ्वी के सापेक्ष स्थिति की चार्टिंग करना व उसके आधार पर किसी व्यक्ति, समाज, बाजार, मौसम व अन्य भूगर्भीय घटनाओं के बारे में कयास लगाना किसी भी तरह से वैज्ञानिक नहीं है...

इसीलिये यह पोस्ट है आज की...

आप पढ़िये...सभी लिंकों को खोलिये... मेरी टिप्पणियाँ जो वहाँ हैं उनको भी पढ़िये... आखिर में क्या हुआ यह भी आप सब के सामने है... तब बताईये कि आपके क्या विचार हैं...

१- दलाल स्‍ट्रीट में अगले सप्‍ताह रौनक बने रहने की संभावना है !!

और यह रही रौनक...

२१/१ - १९००७
२४/१ - १९१५१
२५/१ - १८९६९
२७/१ - १८६८४
२८/१ - १८३९५


२- हैती के बाद नवंबर 2010 के मध्‍य में एक और बडे भूकम्‍प की आशंकाभूकम्‍प का ग्रह योग 16 नवंबर 2010 को सर्वाधिक प्रभावी होगा !!

कहाँ आये यह भूकंप ?
औसतन हर तीन दिनों में आते हैं छोटे मोटे भूकंप तो...
क्या होता अगर खाली करा दिये जाते शहर के शहर या देश तक...



३- 2010 में किन तिथियों को प्राकृतिक या मानवकृत दुर्घटनाओं या अन्‍य आपदाओं की संभावनाएं बनेंगी ??

अब इनका आप ही हिसाब लगायें... वैसे मैं यह पोस्ट पहले ही लिख चुका हूँ इस मामले में...


मैंने तो अपनी कह ली... पर एक भविष्यवाणी आप मेरी भी सुनते जाइये... यह मानव व्यवहार पर आधारित है, वह ये कि मेरे ऐसा लिखने से लेशमात्र भी फर्क नहीं पड़ने वाला... ज्योतिषियों, अंकशास्त्रियों, रत्न बेचने-बताने वालों व तंत्र-मंत्र करने कराने वालों के ऊपर लोगों का विश्वास बढ़ता ही जायेगा...

और जारी रहेगा ज्योतिषियों का अपनी विद्मा को विज्ञान के समकक्ष खड़ा करने/ठहराने का महाअभियान भी...

२१ वीं सदी ज्योतिष की ही है शायद...



आभार!



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चित्र साभार :गूगल चित्र




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16 टिप्‍पणियां:

  1. मेरी पोस्‍ट मोती कुत्‍ता http://akaltara.blogspot.com/2011/01/blog-post_22.html पर शायद आप अब तक नहीं पधारे हैं, ज्‍योतिष से संबंधित इस पोस्‍ट ने एक विद्वान का शायद दिल दुखाया है, क्‍या कहें.

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  2. अच्छा सवाल उठाया आपने...
    _______________________
    'पाखी की दुनिया ' में भी आपका स्वागत है.

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  3. वाह प्रवीण शाह जी,
    इस बात के लिए मैं आपकी शुक्रगुजार हूं .. कि आप मेरी भविष्‍यवाणियों पर इतना गौर करते हैं .. शेयर बाजार के आधार पर मैं दो वर्षों से साप्‍ताहिक भविष्‍यवाणियां कर रही हूं .. पर आपको आज इसकी चर्चा की .. जिस सप्‍ताह मेरी भविष्‍यवाणियां गलत हुईं .. और मैं स्‍वयं इससे आहत हूं .. और इसका कारण भी ढूंढ चुकी हूं .. इसके पहले किसी सप्‍ताह आपने चर्चा की होती .. तो आप सच्‍चे समालोचक होते .. और मेरी नजरों में महान भी .. रहा अफगाकनस्‍तान में भूकम्‍प आने का सवाल तो वह मेरे कहे हुए दिन ऑरेंज एलर्ट का आ चुका था .. 12 जनवरी के बाद मौसम में सुधार हुआ था .. वैसे मैं गल्तियां ढूंढनेवालों की परवाह नहीं करती .. गल्तियां ढूंढने वाले तो विज्ञान में क्‍या .. भगवान में भी गल्‍ती ढूंढ लेते हैं !!

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  4. प्रवीण जी आपसे सहमत हूँ
    किसी के भी लिखने से लेशमात्र भी फर्क नहीं पड़ने वाला... ज्योतिषियों, अंकशास्त्रियों, रत्न बेचने-बताने वालों व तंत्र-मंत्र करने कराने वालों के ऊपर लोगों का विश्वास बढ़ता ही जायेगा...

    और
    २१ वीं सदी ही नहीं बल्कि २२ वीं सदी भी ज्योतिष की ही है ...

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  5. मेरी भविष्‍यवाणी के और भाग भी थे .. हमारे लिखे अनुरूप ही बाजार की शुरूआत मेटल सैक्‍टर की बढत के साथ उत्‍साहजनक जरूर हुई। 24 जनवरी से 25 जनवरी के मध्‍य दोपहर तक बाजार में तेजी बनी रही, लेकिन 26 जनवरी की छुट्टी एवं 27 को वायदा कारोबारियों का कटान का दिन होने से यह सप्‍ताह बुरी तरह बिकवाली का दबाब झेलता रहा और इसके बुरे प्रभाव से 28 जनवरी भी नहीं बच सका।हालांकि 28 जनवरी को दो बैंको के सकारात्‍मक परिणाम भी देखने को मिले, जिस दिन मैने बैंकिंग सैक्‍टर में बढत की संभावना जताई थी लेकिन वे बैंकिंग सैक्‍टर की ऋणात्‍मकता को सिर्फ कम ही कर सके , मेरे कहे अनुसार वृद्धि नहीं हो सकी।

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  6. बाकी आप जैसे वैज्ञानिको की मर्जी .. छोटे मोटे विदेशी अध्‍ययन को विज्ञान कह सकते हैं .. और अपने बडे देशी अध्‍ययन को अंधविश्‍वास .. एक दिन रोगी का गलत इलाज होने से मेडिकल साइंस गलत तो नहीं हो जाता ??

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  7. २१ या २२ सदी नहीं जब तक मानव अपनी समस्याओ का हल अपने बल बूते करना नहीं सीखेगा और चाहेगा की कोई अदृश्य शक्ति आ कर उसकी सभी समस्याओ को सुलझा दे, बैठे बिठाये अमीर बना दे ,जीवन आराम से कटा दे या अपनी गलतियों का ठीकरा आराम से भगवान या ग्रह नक्षत्रो के सर फोड़ता रहेगा तब तक ये सब भी चलता रहेगा |

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  8. यहाँ मजहबी अंधे कुए हैं यहाँ मेले लगे हैं भ्रांतियों के
    चल रही है क्रूर गृह वाली दशा भी मुहूरत क्या विचारे क्रांतियों के
    सगुन कैसे विचारें मंजिलों के हमें खाली घड़े दिखने लगे हैं ....
    नजरिये हो गए छोटे हमारे मगर बौने बड़े दिखने लगे हैं
    (कविवर सोम ठाकुर )

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  9. अच्छा लिखा है आपने. कल दिल्ली में बरसात नहीं होगी, यह भविष्यवाणी मैं कर रहा हूं. देखें कौन झुठलाता है मुझे

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  10. अब जब काजल भाई ने शुरुआत कर ही दी है तो एक बम्पर मेरा :

    'क्रिकेट वर्ल्ड कप' बंगलादेश नहीं जीतेगा
    लिख लो आप
    -
    अगर जीत भी गया तो भारत से नहीं ही जीतेगा
    पक्का
    -
    और अगर भारत से जीत भी गया तो ज्यादा रन से नहीं जीतेगा
    बिलकुल पक्का

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  11. sangeta ji
    worry not
    i am repeating what i am told time and again

    " only those who DO something are questioned "

    praveen at least reads you and writes on your blog and not on your personal life

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  12. अंधविश्वास तो नहीं ....मगर गणनाएं सही भी होती हैं...और गलत भी जैसे बहुत से झोला छाप डॉ भी होते हैं...अगर उनके इलाज से बीमार मर जाए तो सारे डॉ को बदनाम नहीं करना चाहिए...
    या किसी अच्छे डॉ के रोगी भी ठीक नहीं होते कई बार....
    मैं कहता हूँ की इनती विविधता है इसलिए किसी बात को generalize करना ठीक नहीं होगा....
    रत्न ताँता में तो मैं भी विश्वास नहें करता मगर ज्योतिष को अभी तक गलत नहीं मान पाया हूँ....
    कर्म की प्रधानता पर मेरे कुछ मुक्तक शायद आपको पसंद आयें....

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  13. सोच के भी हैरत होती है की कोई कैसे इस तरह की बात सोच सकता है. क्या किसी भी पढ़े लिखे ऊंचे डिग्री वाले की तो बात छोडिये ... क्या कोई साक्षर इंसान ऐसा सोच सकता है बशर्ते उसका दिमाग तर्कपूर्ण ढंग से सोचता हो ? क्या ये लोग बुद्धि से बिलकुल ही शून्य होते हैं ?
    लाखों करोड़ों मील दूर स्थित ये ग्रह शेयर बाजार, शादी-ब्याह, संतान उत्पत्ति, व्यवसाय, शुभ मुहूर्त और भी न जाने क्या क्या तय कर रहे हैं. कोई भी स्वस्थ मस्तिष्क का इंसान कैसे इस तरह की बात कर सकता है ? जो करता है वो तो चलो उसका धंधा हुआ लेकिन कोई कैसे यकीन कर लेता है ?
    जब की सभी ने जाने कितनी बार देखा होगा की जब भी ज्योतिष और विज्ञान आमने-सामने आये तो ज्योतिष को अपनी दुम छुपानी मुश्किल पड़ गयी.
    अगर कोई ज्योतिष या तांत्रिक है और उसको अपनी शक्ति अथवा ज्ञान पर भरोसा है तो सामने क्यों नहीं आता ? खुलकर क्यों नहीं कहता की ज्योतिष से क्या संभव है और क्या नहीं ? तुक्केबाजी तो कोई भी जाहिल से जाहिल आदमी भी कर सकता है.

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  14. mahatta ho na ho ..... lekin ......jyotish.....apne aap me ek porn
    garint se jura vaigyanik vidha hai...

    log apni alpagyata ke karan chahe ise
    kharij kar de.......lekin is se iska
    astitwa jhutlaya nahi ja sakta.....

    pranam.

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  15. रहने दीजिए लोगों के मन में आस्‍थाएं। इन्‍हीं आस्‍थाओं और विश्‍वास से व्‍यक्ति सुखी बना रहता है नहीं तो इस कठोर धरातल पर आदमी कैसे सुख खोजेगा?

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  16. यहाँ मैं अजीत जी से सहमत हूँ ...

    संगीता जी अपने काम को ईमानदारी से करती हैं , विश्वास , अविश्वास व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है ...वे किसी से जबरदस्ती अपनी बात मनवाने का प्रयास तो नहीं कर रही हैं ...सिर्फ इसलिए की आप ज्योतिष में विश्वास नहीं रखते , उनकी मेहनत पर सवाल उठाना ठीक नहीं है ...

    हमारा मौसम विभाग तो पूरी गणनाओं से ही भविष्यवाणी करता है ना , कितनी सटीक होती हैं , हम सब जानते हैं ...रॉकेट उपग्रह आदि भी पूरी वैज्ञानिक गणनाओं के बाद ही लॉन्च किये जाते हैं , मगर कई बार असफल तो वे भी होते ही हैं !

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