गुरुवार, 27 जनवरी 2011

एक बार देख ही लीजिये कि क्या आप भी अपनी नाक को अपनी जीभ से छू सकते हैं ?

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मेरे लम्बी-जिव्हा-धारी मित्रों,


एक दौर था जब मैं तमाम तरह के तंत्र-मंत्र, साधना आदि आदि के अनुभवों को सिरे से खारिज कर देता था... पर आजकल उम्र बढ़ने के साथ थोड़ी मैच्योरिटी आ रही है शायद { :) }... इसलिये 'बेनिफिट आफ डाउट' देने लगा हूँ सबको...सोचता हूँ सभी के अनुभवों का फायदा ले लिया जाये ... यह बात दीगर है कि आज तक भी कोई काम की बात नहीं पा पाया मैं अभागा... :(
'सत्य की खोज' मुझे काफी कुछ अपना जीवन-दायित्व लगता है... इसलिये इसी क्रम में जैसे ही देखा एक ब्लॉग सत्यकीखोज@आत्मग्यान SEARCH OF TRUTH@KNOW YOUR SOUL जो है बाबा राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ जी का... तो हम भी वहाँ पहुँच गये... उनकी एक पोस्ट में वे जो लिखते हैं वह अक्षरश: यहाँ उतार रहा हूँ...

"इसी कृम में एक मिलती जुलती साधारण बात आपको बता रहा हूँ । जिसका किसी पूजा किसी साधना से कोई सम्बन्ध न होकर शरीर के रहस्यों से सम्बन्ध है । वो ये कि आप अपनी जीभ को निकालकर नाक की तरफ़ लाने का अभ्यास करें । यह काफ़ी कठिन अभ्यास है । पर निरंतर प्रयास से जीभ बङने लगेगी । जिस दिन आपकी जीभ नाक की नोक को छूने लगेगी । उस दिन आप पर किसी भी प्रकार के विष का असर नहीं होगा । जिनकी जीभ सामान्य से बङी होती है । लचकीली होती है । उनके लिये तो ये अभ्यास करना बेहद सरल होता है ।"


अब बचपन में एक दोस्त तो होता था मेरा जो नाक छूकर दिखाता था जीभ से... पर आज दुर्भाग्यवश उस से संपर्क नहीं है... परंतु आप में से कोई न कोई ऐसे किसी व्यक्ति को शायद जानता हो...

यह भी हो सकता है कि आप में सी ही कोई स्वयं भी यह कारनामा आसानी से कर लेते हों... ;))
मेरा सवाल सिर्फ एक ही है कि क्या...

जिसकी जीभ नाक को छू लेती है उस पर वाकई किसी प्रकार के विष का असर नहीं होता या होगा ?


आप क्या सोचते हैं इस बारे में...




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डिस्क्लेमर:- मेरी इस पोस्ट को पढ़कर यदि अपनी जीभ से नाक छू लेने वाला कोई भी शख्स अपने ऊपर विष का कोई प्रभाव न होने संबंधी कोई प्रयोगादि करता है व उसे किसी भी प्रकार की कोई क्षति होती है तो यह ब्लॉगलेखक कतई जिम्मेदार न होगा, जो भी करें अपने रिस्क पर करें।




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16 टिप्‍पणियां:

  1. पहले तो ये डिस्क्लेमर हटाइये पोस्ट पढ़ कर तो मै खुश थी और अपने दुशमनो की गिनती करने लगी थी की किस किस को आप की पोस्ट का लिंक भेज कर ये प्रयोग करने के लिए उकसाऊ पर आप ने तो अरमानो पर पानी फेर दिया ये डिस्क्लेमर लगा कर , इसको पढ़ने के बाद कौन प्रयोग के लिए तैयार होगा | मेरी मानिये ये बढ़िया प्रयोग होने में बाधा ना उत्पन्न कीजिये और डिस्क्लेमर हटाइये और लोगों को खुल कर वैज्ञानिक बनने दीजिये |

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  2. प्रयोग करके बताते हैं। बधाइ इस खोज के लिये।

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  3. जीभ को मुँह के अन्दर ही रहने दीजिये, वही उसकी जगह है।

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  4. जीभ को जीभ ही रहने दो, कोई अन्‍य काम न दो।

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  5. नाक प्रतिष्ठा और मान का प्रतीक होती है और जीभ वाणी और स्वाद का केन्द्र।

    जीभ से नाक छूने का अर्थ है मधुर वाणी से प्रतिष्ठा को छूना। या प्राप्त करना।

    अब जो प्रतिष्ठा मधुरता से अर्जित हो उस पर निंदा-आलोचना रूपी विष असर नहीं करता॥ :))

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  6. हमारी जीभ ही तो छोटी है!
    क्या करें?
    लिखकर ही काम चला लेते हैं!

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  7. मैंने एक प्रयोग की रुपरेखा बनायी है -नाक जीभ से छूने वाले को कोबरा का जहर दिया जाय और न छू पाने वाले को प्लेसेबो पायजन ....फिर देखिये क्या होता है -प्लेसबो वाले के लिए पहले से स्वास्थ्य की जांच जरुरी होगी ..और एहतियातन एंटी वेनाम कोरामिन आदि का इंजेक्शन भी साथ में हो ....ताकि दोनों बन्दों की जान तो बचायी जा सके ...... फिर देखते हैं क्या होता है ?
    मुझे खुशी होगी अगर इसी ब्लॉग जगत से ही वालंटियर्स भी मिल जायं :) मैं प्लेसबो वाला खुद कर सकता हूँ क्योकि नाक तक ससुरी जीभ पहुँच ही नहीं रही है ..आपकी पोस्ट पढने के बाद इसी जिह्वा -नासिका सम्मिलन अभ्यास में जुटा हूँ !

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  8. हाहा,यदि यह डिस्क्लेमर न लगाते तो! तब भी मैं विषपान को तैयार न होती.जीभ का नाक से मिलन होने का यह अर्थ तो नहीं की आत्मा परमात्मा मिलन के लिए ही चल पड़े की देखें दोनों या एक है भी की नहीं.
    घुघूती बासूती

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  9. दिलचस्प पोस्ट
    अगर आप ऐसे प्रयोग करने को तत्पर हों तो आपको बहुत सारे चमत्कार बताऊँ !
    बस आपको शेर के नाखून, उल्लू के पंख, भालू के बाल, कौवे की चोंच वगैरह वगैरह जुटाने होंगे
    बस आप करते रहिये इत्मीनान से प्रयोग

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  10. मेरे भैया की जीभ नाक से छूती है. मगर कभी उन्होंने विष-पान नहीं किया सो असर का पता नहीं और ना ही मैं उन्हें ये बताने वाला हूँ.
    वैसे ऐसा दावा करना सफे है....कैसे वो बताता हूँ...
    मान लिया जाए किसी की जीभ नाक को छूती है....और वो ज़हर खा लेता है....अगर वो नहीं मरा तो वो कहेगा की ये सही बात है की नाक को जीभ से छूने वाले लोगों पर जहर असर नहीं करता....
    और अगर वो मर गया तो वैसे भी वो इस दावे को खारिज करने के लिए नहीं आयेगा....
    सो इस दावे के विरुद्ध कोई गवाह नहीं होगा...
    है ना safe दावा.

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  11. @ प्रवीण शाह जी ,
    लंबी जुबान वालों के लिए आपकी पोस्ट भी विषपान जैसी हो सकती है :)

    अब पता ये कीजिये कि वो बचे या नहीं :)

    जिनकी जुबान लंबी ना हो वो अपनी नाक की लम्बाई का सहारा लेके ये प्रयोग कर सकते हैं :)

    जिनकी जुबान और नाक दोनों ही छोटी हों उन्हें परमार्थवश दूसरों की जुबान खींचने और नाक काटने के बारे में सीरियसली सोचना चाहिए :)

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  12. लम्बी जुबां अपने आप में ज़हरीली होती है. ज़हर पर ज़हर क्या असर करेगा?

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  13. और कोई काम नहीं है आपको। यूज़लैस पोस्ट।

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  14. प्रवीण जी दिलचस्प पोस्ट है
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    इस तरह की अनेकों बातें सुनता रहता हूँ
    इसकी विश्वसनीयता कितनी है, नहीं जानता
    यह भी सुना है कि दो-तीन वर्ष तक नमक का सेवन न करने से भी जहर का असर नहीं होता
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    पूर्वकाल में कई राजाओं द्वारा विष-कन्याएं बनायी जाती थीं जो दुश्मन का खात्मा करने में अचूक अस्त्र का काम करती थीं.

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