शुक्रवार, 21 जनवरी 2011

पपीते में अंडे दे कर भाग गई मुर्गी...पर कहाँ गई वो... इसी बहाने वर्चुअल थॉट स्पेस पर एक चिंतन भी...

.
.
.
मेरे 'महा-वीर' मित्रों,
शायद ही कोई ऐसा ब्लॉगर हो जो भड़ास के बारे में न जानता हो, 'जय जय भड़ास' का उद्घोष करने वाला, किसी भी मुद्दे पर किसी को भी जनता की जुबान में खरी-खरी कहने का दम रखने वाला यह ब्लॉग ब्लॉगवुड के प्रमुख आकर्षणों में से एक है... अभी हाल ही में एक दुखद बात यह हुई कि इसके संचालकों में से एक डॉ० रूपेश श्रीवास्तव जी की पुज्य माता जी की असमय मृत्यु हो गई, दिवंगत आत्मा को मेरी श्रद्धाँजलि... माता जी को कुछ ऐसा बुखार हुआ जिसके कारण का अंत तक नहीं पता चल पाया...
अब भड़ास पर ही अकसर पोस्ट लिखता है 'अनूप मंडल', बकौल डॉ० रूपेश श्रीवास्तव यह 'अनूप मंडल' तकरीबन ३००० लोगों का एक समूह है जिसमें कई ख्यात प्रतिष्ठित वैज्ञानिक तक शामिल है इनकी वैबसाइट है जगतहितकारिणी... यह सभी लोग जैन समुदाय से खास नफरत करते हैं व उन्हें राक्षस तक कहते हैं... 'जय नकलंक देव' का नारा देने वाल यह समूह तंत्र-मंत्र में भी यकीन करता है...

अब इन्हें अच्छा मौका मिल गया व इन्होंने 'डॉ० रूपेश जी की माता जी मृत्यु नैसर्गिक नहीं अपितु एक क्रूर हत्या थी' नाम से एक ___दो___तीन ___ चारपाँच भागों में एक पूरी सीरिज ही छाप दी इस पर... जो इन्होंने लिखा उसका लब्बो लुबाब यह है कि बाजार से खरीद कर लाये अनछुऐ पपीतों से तांत्रिक ने कुछ सामान निकाला... इन्हीं के शब्दों में...

***तांत्रिक ने पूजा आदि का विग्रह सजा कर हल्दी के चूर्ण से एक वृत्ताकार मंडल बनाया जिसमें रख कर उसने पपीतों पर बंधा लाल कपड़ा खोला और एक एक करके उन्हें घर के चाकू से ही काटा। पपीते काटने पर बीजों के अलावा क्या निकलेगा ये तो उम्मीद ही न थी लेकिन जब पहले पपीते में से साड़ी का एक तिहाई टुकड़ा, करीब दो सौ ग्राम सूखी लाल मिर्चें आदि जैसी सामग्री निकली तो सभी लोग भौचक्के रह गये

***दूसरा पपीता तांत्रिक ने काटा तो उसमें से बकरे की घुटनों से काटी हुई चार टांगें, दो अंडे, दो शंख जिनके मुंह बालों के गुच्छे से बंद करे गए थे,ब्लाउज की दो काटी हुई आस्तीनें, अगरबत्तियां आदि सामग्री निकली।

***तीसरा पपीता काटने पर उसमें से कुछ हड्डियां, दो लाल कपड़े और लकड़ी से बनाई गुडियानुमा आकृतियां, दो नींबू जिनमें कि पचास साठ आलपिनें चुभोई हुई थी आदि निकली।


अब यह साधारण समझ की बात है कि अंडा तो मुर्गी ही दे सकती है इसी तरह बकरे की कटी टाँगें होने के लिये बकरे का पैदा होना व किसी के द्वारा उसे काटना भी जरूरी है, साड़ी को कोई बुनेगा भी...शंख समंदर से लाने होंगे... पर 'अनूप मंडल' के अनुसार यह सब सामान पपीतों के अंदर बिना उनको काटे तंत्र से पहुंच गया... और यही माताजी की बीमारी का कारण भी था... है न मजेदार बात...

क्योंकि यह अनूप मंडल जैनों को गाली देता है इसलिये प्रतिवाद करते हैं अमित जैन (जोक्पीडिया )... पर एक खूबी है कि तमाम बेसिरपैर की बातों व अपने पूरे धर्म को दी जा रही अपमानजनक गालियों के बावजूद वे कभी भी अदालत या कानून की धमकी नहीं देते...

ऐसे में मुझे दिखाई देती हैं ब्लॉगवुड में दी जा रही कानूनी कार्यवाही की धमकी व एक दूसरे सज्जन द्वारा अपने प्रभाव का प्रयोग कर कार्यवाही करने की परोक्ष धमकी भी... तो मुझे लगता है कि यह कहाँ आ गया मैं ?...

मित्रों, यहाँ आप किसी को कुछ भी लिखने से रोक नहीं सकते... जिसे लिखना होगा वह टोर के जरिये लिख देगा... फिर क्या बिगाड़ लोगे उसका ?

इस वर्चुअल थॉट स्पेस की यही तो खूबी है यारों कि यहाँ सब कुछ जो किसी आदमी के दिमाग में चलता या चल सकता है...छपा मिलेगा... यह नये दौर का वैचारिक विश्व है दोस्तों...अगर कोई बात चुभे तो जवाब दो, मुकाबला करो, या मैदान छोड़ भाग जाओ... पर किसी को संकलकों से ही बाहर कर दो, किसी का बहिष्कार कर दो, किसी को जेल भिजवा दो... यह सब नहीं चलने वाला...

हम सभी समझें कि ब्लॉगिंग क्या है... इसी उम्मीद के साथ कि कोई अन्यथा नहीं लेगा...

आभार!




...

चित्र साभार : Google images.

18 टिप्‍पणियां:

  1. प्रवीण शाह साहब,
    वे कदाचित सही ही कहते है जैन राक्षस है। वीतराग प्रभु महावीर के उपदेशो का कहीं न कहीं जैन समाज पालन नहीं कर पाया, सुक्ष्म अहिंसा को जीवन में उतारने को तत्पर यह शान्त समुदाय अनोप बाबा के द्वेष का कारण बना (अनोपा का नाम ही नकलंक है) शायद किसी जैन नामधारी नें उन्हें वाचिक चोट पहूंचाई हो, जैन मान्यता में किसी को वचनों से आहत करना भी पाप है। इस दृष्टि से राक्षस ही हुए न, उस जैन के कारण जिसने अनोप के मन में अपार द्वेष व दुर्भावना पैदा की।

    इसलिये इस 'अनोप मंडल'पर लिखना, एक तरह से उसके द्वेषभाव और दुर्भाव को हवा देना है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. धर्म की धमकी
    तंत्र-मंत्र की धमकी
    कानून की धमकी
    सरकार में अपने प्रभाव से कार्यवाही करके विनाश करने की धमकी
    माफिया की धमकी
    गुस्से से धमकी
    प्यार से धमकी
    लेखनी से धमकी
    तलवार से धमकी

    धमकियां कैसे-कैसे दी जा सकती हैं?
    एक पोस्ट आनी चाहिये :) हम भी कुछ सीख लेंगे।

    प्रणाम

    उत्तर देंहटाएं
  3. किस किस को देखिये, किस किस को रोइये

    आराम बड़ी चीज है, मुंह ढ़क से सोइये

    उत्तर देंहटाएं
  4. Praveen jee,

    Who-who to cry for, for who-who to weep,
    Rest is big thing, cover your face and sleep.

    उत्तर देंहटाएं
  5. कैसे कैसे मूढ़ मगज अन्धविश्वासी पड़े हैं दुनिया में -हंसी से ज्यादा अफ़सोसनाक है !

    उत्तर देंहटाएं
  6. जब वास्तविक दुनिया में हम किसी का कानून से कुछ नहीं बिगाड़ सकते तो आभासी दुनिया में तो बहुत ही मुश्किल है | जैन लोग राक्षस होते है ये ज्ञान अब मिला बोलिए डॉ भी जादू टोने पर इतना भरोषा करते है और ये ये तकनीक भाई वाह यदि ये सब ब्लॉग में ना लिख जाये तो हमें पता कैसे चलेगा की लोगो के दिमाग में क्या दुरुस्त करना है |

    उत्तर देंहटाएं
  7. हुजूरे आला मुर्गियां दिमाग में हों तो कहीं भी अंडे दे सकती हैं !

    उत्तर देंहटाएं
  8. हम्म्म्म!!!! राक्षस
    जैन राक्षस हैं या नहीं. ये जानने से पहले ये जाने की राक्षस क्या है? मैंने कहीं संस्कृत में पढ़ा था वो श्लोक मिल नहीं रहा है. परन्तु अर्थ जरूर लिखना चाहूंगा.
    राक्षस को संस्कृत में "राक्षसाः" कहा जाए. इसके शब्दों को उलटा कर के लिखा जाए तो वो हो जाएगा "साक्षरा:" मतलब शाब्दिक रूप से. साक्षर का उलटा हुआ राक्षस.
    जो साक्षर नहीं वो राक्षस हो सकता है. चाहे वो किसी भी कौम के हों.
    कृपया निरक्षर लोग इस टिप्पणी को अन्यथा ना लें.
    बल्कि, मैं तो ये कहना चाहता हूँ की लोगो को अग्रसर कीजिये ताकि वो साक्षर बनें...

    उत्तर देंहटाएं
  9. "एक धमकी तो यहाँ भी थी आज तक कुछ न भया"
    क्षमाशीलता भी श्रेष्ठ मानवीय मूल्यों में से है,
    जाओ देवि क्षमा किया!

    उत्तर देंहटाएं
  10. जय तंत्र-मन्त्र
    जय विज्ञान
    जय भारत

    उत्तर देंहटाएं
  11. इन्हीं कारणों से मृणाल पाण्डेय या राजेंद्र यादव ब्लॉग विधा को ही गरिया देते हैं |

    उत्तर देंहटाएं
  12. जैन अगर वास्तविक मे सही है तो वो हमारा विरोध क्यो नहीं करते????

    उत्तर देंहटाएं
  13. जैन लोग जैनम् जयती शाशनम् क्यों लगाते है ऐसा नारा??????????

    उत्तर देंहटाएं
  14. जैन लोग अनोप मंडल से डरते कयों है????

    उत्तर देंहटाएं

मेरे इस आलेख को पढ़ कर ही यदि आपके मन में कोई विचार उत्पन्न हुऐ हैं तो कृपया उन्हें 'नेकी कर दरिया में डाल' की तर्ज पर ही यहाँ टिप्पणी रूप में दर्ज करें... इस टिप्पणी के पीछे कोई अन्य छिपा हुआ मंतव्य न रखें, आप इसे उधार में मुझे दी गयी टिप्पणी न समझें, प्रतिउत्तर में आपके ब्लॉग पर टिप्पणी करने की किसी बाध्यता को मैं नहीं मानता व मुझसे या किसी अन्य ब्लॉगर से भी ऐसी अपेक्षा रखना न तो नैतिक है न उचित ही !... मैं किसी अन्य के लिखे आलेखों पर भी इसी नियम व भावना के तहत टिपियाता हूँ !

असहमति को इस ब्लॉग पर पूरा सम्मान दिया जाता है, आप मेरे किसी भी विचार का खुल कर विरोध या समर्थन कर सकते हैं, परंतु अशिष्ट या अश्लील भाषा यु्क्त अथवा किसी के भी ऊपर व्यक्तिगत आक्षेपयुक्त टिप्पणियाँ कृपया यहाँ न दें... आप अपनी टिप्पणियाँ English, हिन्दी, रोमन में लिखी हिन्दी, हिंग्लिश आदि किसी भी तरीके से लिख सकते हैं... नहीं कुछ लिखना चाहते हैं तो भी चलेगा... आपके आने का शुक्रिया... आते रहियेगा भविष्य में भी... आभार!