बुधवार, 5 जनवरी 2011

उफ्फ़ यह ठंड तो आइडियाज् तक को जमा देती है... टैंट के भीतर से एक पोस्ट खास आपके लिये !

.
.
.
मेरे 'उष्ण (Warm)' मित्रों,

छुट्टी है आज अपन की... ऊपर से सोने पर सुहागा यह कि श्रीमती भी मायके गई हैं... दो तारीख को जब ठंड ज्यादा पड़ने लगी तो जिला प्रशासन ने स्कूल बंद कर दिया बिटिया का दस दिन के लिये... सुनहरा अवसर जान श्रीमती ने भी मायके जाने की बात चलाई... 'मन मन भावे, मूंड हिलावे' की तर्ज पर हमने भी तमाम एतराज करते हुऐ (यह ध्यान रखते हुऐ कि इतना फोर्सफुल एतराज न हो कि वे जाने का इरादा ही छोड़ दें) उनको जाने की इजाजत { ;-)} दे दी... अब आज के लिये सोचा तो था कि सुबह-सुबह उठ कर एक ठो पोस्ट ठेल ही देंगे...


मगर...

उफ्फ यह ठंड...

कौन नामाकूल कह रहा है कि गर्म हो रही है दुनिया ?... अब ग्लोबल वार्मिंग न हो इसके लिये अपना भी फर्ज कुछ बनता है न... इसलिये मैं कमरे में रूम हीटर या ब्लोअर जैसी कोई चीज नहीं चलाता... अब छुट्टी और अपन घर में अकेले... उठे ठीक सात बजे...चाय बनाई और चाय हाथ में लेकर लैपटॉप गोद में रख फिर रजाई के अन्दर... जब तक चाय चलती रही तो तमाम आइडिया थे दिमाग में... पर जैसे ही चाय खतम... अचानक ही दिमाग से विचार भी गायब... अजब-गजब चीज है यह ठंड भी... आदमी तो आदमी यह तो आइडिया तक को जमा देती है...

अब आप पूछोगे कि और दिन ऐसा क्यों नहीं होता...

बताता हूँ तफसील से...

जब भी मैं घर पर होता हूँ तो मेरी श्रीमती जी को मेरी चन्द बातों से एलर्जी है... वे हैं अखबार पढ़ना, दूसरा लैपटॉप पर नैटसर्फिंग करना, तीसरा किसी भी तरह की कोई किताब पढ़ना, चौथा टेलीविजन पर खेल देखना, पाँचवाँ जब वे बात कर रहीं हों तो उनके चेहरे के अलावा किसी और देखना, छठा एक जगह पर नजर गड़ाये विचार मग्न बैठना (जिसे वे अपनी भाषा में दीवार तोड़ना कहती हैं), सातवाँ... :-(... अब क्या क्या गिनाऊँ... 'वह' अनंत उनकी कथा अनंता...

अब होता यह है कि जब भी मैं लैपटॉप पर बैठा होता हूँ हर थोड़ी-थोड़ी देर में वे अपने कीमती समय से थोड़ा वक्त निकालकर मेरे पास आती हैं और एकाध व्यंग्य बाण दाग जाती हैं...या फिर उन नजरों से घूर कर देखती हैं जो सियाचिन ग्लेशियर तक को पिघला दें... अब इन सब से बचने, तोड़ खोजने व जवाब ढूंढने में जो मेहनत लगती है वह मेरे पोस्ट आइडियाज् को भी जमने से बचा लेती है...एक डर यह भी होता है कि अगर सब्र खोकर मेरे लैपटॉप का पावर बटन दबा दिया गया तो सारी मेहनत मटियामेट हो जायेगी... इन सब वजहों से आइडियाज् भी फ्लो में होते हैं और की बोर्ड पर उंगलियाँ भी...

आज यह सब कुछ नहीं हैं...

दूसरी बार की चाय देने वाला भी कोई नहीं... :-(

टीवी पर एशेज का आखिरी टेस्ट चल रहा है और इंग्लैंड एक समय अजेय और आज भी उसी अकड़ में रहने वाली कंगारू टीम का मान-मर्दन जारी रखे है... ऐसे में रजाई से बाहर कौन निकले... कम से कम मैं तो नहीं...

ठान कर बैठा हूँ कि चाहे जो हो पोस्ट तो आज ठेली ही जायेगी... आईडियाज् भी जमने नहीं चाहिये ठंड से... तो मैंने हल भी बहुत ही आसान निकाला है... गया लैपटॉप भी रजाई के अंदर... टैंट जैसा बना लिया है रजाई का... केवल एक झिरी सी छोड़ी है मैच देखने को... ठीक ठाक काम चल रहा है, आइडियाज् भी गर्मी पा तरल हो गये हैं... नतीजा है यह पोस्ट...

कैसी लगी आप बताओगे ही... नहीं भी बतायेंगे तो अपने को क्या फर्क पड़ना है... अभी अपना पैक्ड लंच आता ही होगा... उसके बाद ?... हा हा हा, फिर से रजाई के आगोश में जाने वाला हूँ मैं...

वो एक जुमला है न ' ब्वायज विल आलवेज बी ब्वायज '... चालीस पार का ही सही... अपनी माँ का तो आज भी ' ब्वाय ' ही हूँ मैं भी...

कड़ाके की ठंड... उस पर छुट्टी... उस पर टोकाटाकी करने को बीबी भी न हो घर में... कुछ भी खाने-पीने की आजादी... धरा पर यदि कहीं स्वर्ग है तो यहीं है, यहीं है, यहीं है... मेरी रजाई के भीतर...


बस श्रीमती जी को बता न देना कोई... :)








...



19 टिप्‍पणियां:

  1. ऐसे ही स्वर्ग भ्रमण का इंतजार हमें भी है जी
    बच्चों के स्कूल में रोज फोन करके पूछता हूं कि छुट्टियां कब कर रहे हो, ताकि श्रीमति जी मायके जायें :)

    प्रणाम

    उत्तर देंहटाएं
  2. अपने ससुराल का पता तो दीजिये ...:):)

    अक्सर भारतीय पतियों को अपनी पत्नियों से यही शिकायत रहती है ...

    मौसम की तो क्या कहिये ...प्रकृति खूब इम्तिहान ले रही है ...जब वे ग्लोबल वार्मिंग की बात कर रहे थे , ठण्ड ने रिकोर्ड तोड़ दिया ..जब रेगिस्तान के विस्तार की बात करते हैं , बरसात रिकोर्ड तोड़ जाती है ...!

    उत्तर देंहटाएं
  3. बस पता बता दीजिये अभी बता कर आते हैं…………बहुत ऐश हो रही है। हा हा हा।

    उत्तर देंहटाएं
  4. इस मौसम में रजाई से बड़ा कोई हितैषी नहीं।

    उत्तर देंहटाएं
  5. ओह कितना याद करते हैं आप पत्‍नीजी को? वे क्‍या गयी आपने तो सारी पोस्‍ट ही उनपर लिख दी। अब शायरी करने मत लग जाना।

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (6/1/2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

    उत्तर देंहटाएं
  7. उन नजरों से घूर कर देखती हैं जो सियाचिन ग्लेशियर तक को पिघला दें..

    आपने तो ग्लोबल बात लिख दी, वार्मिंग के बारे में :-)

    उत्तर देंहटाएं
  8. ".या फिर उन नजरों से घूर कर देखती हैं जो सियाचिन ग्लेशियर तक को पिघला दें..."
    बाप रे ,मुझे भी ऐसे घूरने और रक्त के बर्फ मानिंद जम जाने के पूर्व अनुभव हैं ! याद न दिलाएं ...ये तो यही हैं बगल में ही !

    उत्तर देंहटाएं
  9. कसम खा रखी है की ठण्ड की बात कर मेरा जी जलाने वाली पोस्टो पर टिप्पणी नहीं करुँगी | :)

    आज कल देख रही हु की लोग पत्नी के मायके जाने पर कुछ ज्यादा ही खुश हो रहे है, तो बता दू की पत्निया भी मायके जाने पर दुखी नहीं होती है वो भी खुश होती है एक तो घर गृहस्थी से छुट्टी दूसरे पति को बीच बीच में याद दिलाते रहना चाहिए की घर में उनके होने का क्या अर्थ है मालूम है दो दिन मजे के काटेंगे पतियों के फिर उसके बाद पत्नियों की कीमत पता चल जाएगी |:)))

    उत्तर देंहटाएं
  10. "जब भी मैं घर पर होता हूँ तो मेरी श्रीमती जी को मेरी चन्द बातों से एलर्जी है... वे हैं अखबार पढ़ना, दूसरा लैपटॉप पर नैटसर्फिंग करना, तीसरा किसी भी तरह की कोई किताब पढ़ना, चौथा टेलीविजन पर खेल देखना, पाँचवाँ जब वे बात कर रहीं हों तो उनके चेहरे के अलावा किसी और देखना, छठा एक जगह पर नजर गड़ाये विचार मग्न बैठना (जिसे वे अपनी भाषा में दीवार तोड़ना कहती हैं), सातवाँ... :-(... अब क्या क्या गिनाऊँ... 'वह' अनंत उनकी कथा अनंता..."



    जनाब मेरे साथ भी यही सब होता है और तो और मेरे दो बच्चे भी अपनी माताश्री की इन्ही सब बातों का अनुसरण करते हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  11. लगता है लंबी (अनंत) पेंडिंग लिस्‍ट होगी, मौसम न हो मौका तो है, एक-एक कर निपटाते चलिए.

    उत्तर देंहटाएं
  12. समझ नहीं आता कि विवाह में पीड़ित यह पति नामक प्राणी ही क्यों होता है.प्रतीक्षा है कभी किसी पत्नी की ऐसी सी पोस्ट की.या कि स्त्री को व्यंग्य लिखना नहीं आता? यदि नहीं तो क्यों?
    वैसे शिकायतों की सूची कुछ लम्बी नहीं हो गई?जरा श्रीमती जी से पूछिए कोचिंग क्लासेस चलाने के बारे में क्या विचार है?मैं पहली छात्रा होना चाहूंगी.
    घुघूती बासूती
    pl consider a big :D attached to the comment.
    gb

    उत्तर देंहटाएं
  13. मित्र प्रवीण ने कहा ....
    उन नजरों से घूर कर देखती हैं जो सियाचिन ग्लेशियर तक को पिघला दें..

    अन्तर सोहिल जी ने कहा ....
    बच्चों के स्कूल में रोज फोन करके पूछता हूं कि छुट्टियां कब कर रहे हो, ताकि श्रीमति जी मायके जायें :)

    पाबला जी ने कहा .....
    आपने तो ग्लोबल बात लिख दी, वार्मिंग के बारे में :-)

    मिश्र जी ने कहा ...
    बाप रे ,मुझे भी ऐसे घूरने और रक्त के बर्फ मानिंद जम जाने के पूर्व अनुभव हैं ! याद न दिलाएं

    पाण्डेय जी ने कहा .....
    जनाब मेरे साथ भी यही सब होता है और तो और मेरे दो बच्चे भी अपनी माताश्री की इन्ही सब बातों का अनुसरण करते हैं

    और अब मै कह रहा हूँ ....

    अरे मित्रों क्यों डराते हो मेरे जैसे मासूमों को , सीधी सी बात है ....मुझे लगता है वही बात सही मानी जाएगी , सुन राजा शादी लड्डू मोतीचूर का .. जो खाए पछताए जो न खाए पछताए ..... बाकी मेरी और से तो "नो कमेंट्स" :))))

    उत्तर देंहटाएं
  14. ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
    मित्र प्रवीण,
    आपको व आपके परिवार को नववर्ष की ढेर सारी शुभकामनाएँ
    ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

    उत्तर देंहटाएं
  15. दस दिन का बैचलरहुड मुबारक हो. पोस्ट में सभी पतियों के मनोभाव व्यक्त हुए हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  16. Nice post .
    प्रिय प्रवीण जी ! दो लिंक्स देखकर अपने विचार उपलब्ध कराने का कष्ट करें। इन दोनों में आपका नाम मौजूद है।

    http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2010/12/virtual-communalism.html

    http://ahsaskiparten.blogspot.com/2010/12/patriot.html

    ये दो लिंक्स अलग से वास्ते दर्शन-पठन आपके नेत्राभिलाषी हैं।

    http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/01/standard-scale-for-moral-values.html

    http://www.pyarimaan.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  17. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं

मेरे इस आलेख को पढ़ कर ही यदि आपके मन में कोई विचार उत्पन्न हुऐ हैं तो कृपया उन्हें 'नेकी कर दरिया में डाल' की तर्ज पर ही यहाँ टिप्पणी रूप में दर्ज करें... इस टिप्पणी के पीछे कोई अन्य छिपा हुआ मंतव्य न रखें, आप इसे उधार में मुझे दी गयी टिप्पणी न समझें, प्रतिउत्तर में आपके ब्लॉग पर टिप्पणी करने की किसी बाध्यता को मैं नहीं मानता व मुझसे या किसी अन्य ब्लॉगर से भी ऐसी अपेक्षा रखना न तो नैतिक है न उचित ही !... मैं किसी अन्य के लिखे आलेखों पर भी इसी नियम व भावना के तहत टिपियाता हूँ !

असहमति को इस ब्लॉग पर पूरा सम्मान दिया जाता है, आप मेरे किसी भी विचार का खुल कर विरोध या समर्थन कर सकते हैं, परंतु अशिष्ट या अश्लील भाषा यु्क्त अथवा किसी के भी ऊपर व्यक्तिगत आक्षेपयुक्त टिप्पणियाँ कृपया यहाँ न दें... आप अपनी टिप्पणियाँ English, हिन्दी, रोमन में लिखी हिन्दी, हिंग्लिश आदि किसी भी तरीके से लिख सकते हैं... नहीं कुछ लिखना चाहते हैं तो भी चलेगा... आपके आने का शुक्रिया... आते रहियेगा भविष्य में भी... आभार!