शुक्रवार, 31 दिसंबर 2010

आखिर क्यों मारा गया बेचारा हेमराज... क्या इस मामले में कोई कुसूरवार था ही नहीं, या बड़े लोगों के लिये खून माफ है ?

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आखिर हार मान ली सीबीआई ने, रहस्य ही रहेगा आरूषि-हेमराज की हत्या का यह मामला, नहीं मिलेगी गुनहगारों को सजा...


कौन सी वह मजबूरी या दबाव था, जिसके चलते सीबीआई का यह वरिष्ठ अफसर तक केस को सही तरह हैंडल नहीं कर पाया।


किस के असर या दबाव के चलते ऐसा हुआ, कि सीबीआई तक ने माना कि आरूषि के वैजाइनल स्वाब सैम्पल किसी दूसरी अज्ञात महिला से बदल दिये गये !


विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि टच डीएनए टैस्ट से भी कोई लाभ नहीं होगा इस मामले में...


क्या नौएडा के सरकारी अस्पताल की पैथोलॉजिस्ट ने सैंपलों में हेराफेरी की ?


या फिर इज्जत बचाने के लिये यह कहा जा रहा है, कि शायद पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टरों ने लापरवाहीवश वैजाइनल स्वाब लिये ही नहीं!


पूरे केस में शुरू से जाहिर है कि सबूतों को मिटाया गया, सबूतों को बदला गया... क्या हमारी प्रीमियर जाँच एजेंसी यह भी पता नहीं लगा सकी कि किसने ऐसा किया या किसके इशारे पर ऐसा किया गया... क्या परिस्थिति जन्य साक्ष्यों की कानून की नजर में कोई अहमियत नहीं... क्या इस दोहरे हत्याकांड के उद्धेश्य का पता लगाना वाकई इतना मुश्किल था...


क्या यह सच नहीं कि अगर इलेक्ट्रानिक मीडिया ने हर पल इतना दबाव न बनाया होता, टीआरपी की होड़ में इतनी कांव-कांव न की होती... तो न कातिलों का हौसला बढ़ता, और पुलिस सभी संदिग्धों से थाने में ले जाकर की 'सामान्य पूछताछ' करने को आजाद होती... तो कत्ल के सारे सबूत आसानी से मिल जाते... और कातिल भी आज सजा काट रहे होते...


क्या यह सच नहीं कि ब्रेन मैपिंग व नारको एनालिसिस क्राइम इन्वेस्टिगेशन के नाम पर एक महंगा मजाक है...


केस आज भले ही बन्द हो जाये...पर मैं उम्मीद का दामन नहीं छोड़ूंगा... हर एक हत्यारा कभी न कभी अपने करमों के बारे में 'गाता' जरूर है...


देर से ही सही यह केस सोल्व होगा जरूर, मेरे जीवनकाल में ही...


क्या आप भी मेरी ही तरह आशावान हैं ?


बताईये अवश्य...









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अरे हाँ, नया साल आपको मुबारक इस उम्मीद के साथ कि इस साल मेरे देश में सभी को न्याय मिलेगा... हेमराज जैसों को भी !


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14 टिप्‍पणियां:

  1. जी,आशावान तो हम है...पर उस से होने वाला क्या है?

    कुंवर जी,

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  2. इसे सख्त से सख्त सजा मिलेगी... देश का कानून लाचार हे तो उस ऊपर वाले से बचपाना आसान नही,

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  3. यह तो बहुत शाकिंग है ,और शायद अकर्मण्यता और बेशर्मी की पराकाष्ठा-मेरी गत फीलिंग है कि आरुशी के पिता की भूमिका संदिग्ध है! मगर हाय हाय रे सबूत ?
    आशावाद जिंदाबाद ! :)

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  4. उम्मीद पर ही दुनिया कायम है | आप को भी नया साल मुबारक हो |

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  5. खबरों की भेंट चढ़ी इस घटना के लिए हम तो अफसोस कर सकने के ही स्‍तर पर हैं. आशा यह करते हैं कि ऐसी पुनरावृत्ति न हो.

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  6. is vishya par itna kehaa jaa chuka haen ki ab kuchh bhi kehna useless hi haen

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  7. सी बी आई ने आजतक एक केस भी सॉल्व किया है क्या ?

    क्या आशा रखें?

    प्रणाम

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  8. अरे साहब हम तो बड़े मामूली से आदमी हैं. इतने बड़े घटनाक्रम पर क्या प्रतिक्रिया दे सकते हैं. वैसे एक घर में दो हत्याएं हो जाएँ और पड़ोस के कमरे में सो रहे लोगो को इस बात की जरा सी भी भनक ना पड़े ये बात अपनी समझ से तो बाहर ही रही. और फिर इसके बाद आनन फानन में बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया गया. क्या कह सकते हैं. ये मामला तो जाग जाहिर हो गया. ऐसे तो पता नहीं कितने मामले होंगे जो इसी प्रकार की व्यवस्था की भेट चढ़ चुके होंगे. इस एक मामले में फैसला हो भी गया तो क्या होगा.

    शाह साहब समझदार लोगों ने इसलिए ही तो भगवान की सत्ता को स्वीकार किया.अब आप भी भगवान पर विश्वास करना शुरू कर दो और सारा मामला उसे सौप दो की सीबीआइ तो जो कर सकती थी उसने कर दिया, चल प्यारे अब तू ही इंसाफ कर. इस तरह से आप चिंताओं से मुक्त हो जाओगे.

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  9. आशा यह करते हैं कि ऐसी पुनरावृत्ति न हो.सत्य की जीत होती है, अन्ततः।आप को भी नया साल मुबारक हो |

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  10. नववर्ष आपके लिए मंगलमय हो और आपके जीवन में सुख सम्रद्धि आये…एस.एम् .मासूम

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  11. इस केस के तार बहुत उपर तक जुड़े हैं, इस कहानी में एक और कहानी है शायद!

    केस साल्व करने की "निठारी पद्दति" (यानिं नौकर पर इलज़ाम लगाओं और मालिक का नाम हटाओं)इस केस में कामयाब नहीं हो पायी नहीं तो कोशिश तो पूरी की थी देश की बदनाम जाचं एजेंसी नें!

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  12. परिस्थितिजन्य साक्ष्य तो इशारा साफ़ साफ़ करते हैं पर उतने से कोई भी बन्दा सजा नहीं पा सकता जिसने आरुषि को मारा उसने ही हेमराज को भी और साक्ष्य भी मिटाए ! भले ही हेमराज मारा गया पर उसे बेचारा कहना ,उसे मारे जाने के कारण / कुसूर , जो भी रहा हो , की अनदेखी करना है ! आखिर को वे दोनों अकारण तो नहीं मारे गए होंगे ?

    सब जानते हैं कि साक्ष्य कौन मिटा सकता है पर इतना जानने मात्र से उसे सजा कैसे होगी ?

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