बुधवार, 29 दिसंबर 2010

माँ तुझे सलाम !...

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वह जब बहुत कम उम्र की थीं तो पोलियो की शिकार हो गईं...बड़ी हुई तो ब्याह दी गई...पति खेत-मजदूर थे, कभी कभी ईंट भट्टों में भी काम करते थे... पाँच लड़के-पाँच लड़कियाँ... मिट्टी की झोपड़ी...उस के नीचे बारह जन... ऊँची जात वालों के गाँव में रहता दलित परिवार... वह कहती हैं " गाँव के उस तालाब में जहाँ भैंसों तक को नहाने की आजादी थी वहाँ मेरे बच्चों को नहाने नहीं दिया जाता था"... पर इस बात को लेकर आज भी कोई कड़वाहट नहीं है उनके मन में... वह कहती हैं कि "ऊँची जात के गाँव वाले यह सब हमें प्रताड़ित करने के लिये नहीं करते थे, वे तो बस सदियों पुरानी परंपराओं का निर्वाह कर रहे थे"... भारी पानी होने के कारण गाँव की जमीन से उपज भी बहुत कम होती थी... कुल मिला कर बोलें तो स्थितियाँ बड़ी विषम... पर उस माँ को एक ही लगन थी... 'मुझे अपने बच्चों को पढ़ाना है।'... उसने कभी हिम्मत नहीं हारी... हाड़तोड़ मेहनत की... यहाँ तक कि फसल के खेत से काट लिये जाने के बाद खेतों में बिखरे सरसों के दाने तक बटोरे...अपने बच्चों की स्कूल की फीस देने के लिये... और आखिरकार वह माँ कामयाब हुई अपने लक्ष्य में... आज उनके सारे बच्चे कामयाब हैं जीवन में...


 


नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री मुकुल वासनिक ने मिश्री देवी को 'नेशनल अवार्ड फार बैस्ट मदर' से सम्मानित किया...


'माँ' मेरा भी तुझे सलाम !


अफसोस कि कोई मिश्री देवी पर फिल्म नहीं बनायेगा... फिल्में बनती रहेंगी गरीबी और लाचारी पर...लाचारी से, हालात से बिना लड़े, हार को ही अपनी नियति माने हुऐ इंसानों पर... नेशनल अवार्ड ऐसी ही फिल्मों को मिलता है...और ऑस्कर में भी ऐसी ही फिल्मों की पूछ जो है ।
भूख-गरीबी का महिमामंडन व गौरवगान बिकाऊ भी है और सहानूभूति बटेरू भी...



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भारत की इस श्रेष्ठ माता के बारे में और जानने के लिये कृपया यह भी पढ़ें...

दैनिक जागरण का समाचार...

जज्बे को मिला सम्मान:दैनिक ट्रिब्यून...

84-Year-Old wins Best Mother Award

MOTHER COURAGE:Times of India...

She battled polio and poverty to shape her children’s life: The Tribune







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12 टिप्‍पणियां:

  1. मेरा भी नमन है 'नेशनल अवार्ड फार बैस्ट मदर' से सम्मानित मिश्री देवी जी को ..उनकी हिम्मत को और उनकी परवरिश को [आज उनके सारे बच्चे कामयाब हैं जीवन में].
    *एक प्रेरक व्यक्तित्व .

    *आप ने लिखा-'भूख-गरीबी का महिमामंडन व गौरवगान बिकाऊ भी है और सहानूभूति बटेरू भी...'
    -सहमत.

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  2. आप की ये कहानी पढ़ कर मुझे सालो पहले टीवी पर ही देखी एक और ऐसी ही महिला की याद आ गई | वो गाव में सब्जी बेचा करती थी और पति भी नहीं थे १२ साल के बेटे की इलाज के कमी के कारण मौत हो गई क्योकि गांव में अस्पताल नहीं था बेटे के मौत के बाद उन्होंने ठान लिया को वो खुद अस्पताल बनवाएंगी और बीस साल तक सब्जी बेच बेच कर खुद अस्पताल खड़ा कर दिया | जब उनको टीवी पर देखा तो विश्वास नहीं हो रहा था की ये महिला ये काम कर सकती है वो वैसी ही आम निहायत ही गरीब अनपढ़ गवई महिला थी जैसी की अक्सर गांवो में सब्जी बेचने वाली महिला होती है अस्पताल बनाने के बाद भी वो उसी गरीबी में ही जी रही थी और उनके बदन पर ढंग के क्या पूरे कपडे भी नहीं थे | वाकई ऐसी महिलाए ही सम्मान के लायक है | जाने दीजिये इन पर फिल्म नहीं बनी तो क्या ये देश तो बना रही है ना |

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  3. हमारा भी नमन ऐसी माँ को जो हर मुसीबत से लड़कर अपने बच्चों को लायक बना पाई ...
    'भूख-गरीबी का महिमामंडन व गौरवगान बिकाऊ भी है और सहानूभूति बटेरू भी...'
    बहुत सही लिखा है आपने ...इस विषय पर कोई फिल्म नहीं बनेगी ...

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  4. मिश्री देवी पर फिल्‍म बने, न बने, इस युग में ऐसी मां हैं, होती रहेंगी. यही सभ्‍यता में मानवता के कायम रहने का सबसे बड़ा आश्‍वासन है.

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  5. यही है जीवट ,जज्बा और जीवन की सही राह ! ऐसे लोगों से सम्मान पुरस्कार सुशोभित होते हैं !

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  6. ऐसी महान माँ को नमन...
    :( आँखें नम हो आयीं...

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  7. ऎसी कई मां और होगी . चलिये सम्मान की शुरुआत तो हुई.

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  8. मिश्रा जी ने एकदम सही कहा ऐसे लोगों से तो पुरस्कार भी सम्मानित ही होते हैं. इस माँ को ह्रदय की सच्ची भावनाओं से मेरा भी नमन.

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  9. विचार शून्य जी से सहमत !

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