शुक्रवार, 24 दिसंबर 2010

अब उल्टे उस्तरे से हमें मूंडना बन्द करो यार... २६ जनवरी आने ही वाली है, हो जाये कुछ ईनाम-शिनाम !!!

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मेरे 'सम्मानित' मित्रों,

अगर कभी गाँव-देहात में रहे हों तो वहाँ का नाई याद होगा... जिसके पास कोई ब्लेड नहीं, बल्कि उस्तरा रहता था जिसे वह पत्थर पर आपके सामने ही घिस कर आपकी हजामत बनाता था... कभी कभी ग्राहक यदि सीधा-सादा हो तो नाई बिना धार लगाये भी हजामत बना देता था... नतीजा कई जगह से छिला हुआ चेहरा... सोचिये क्या होगा अगर वही नाई उस तरफ से आपकी हजामत बनाये जिस तरफ धार ही नहीं होती...

यानी उल्टे उस्तरे से हजामत बनवाना !!!

कुछ ऐसा ही महसूस कर रहा हूँ मैं...

देखिये...

हाल ही में कामयाब कॉमनवेल्थ खेलों के बारे में...

कुछ दिलजले कह रहे थे कि... मच्छरों को बेचे गये हैं शायद टिकट...

अनजान थे बेचारे, राज तो अब खुला है... कहाँ गये थे वो सारे टिकट...???

अब देखिये न सीबीआई को कितनी सारी काम करने की आजादी ??? दी गई है... जिनके खिलाफ जाँच चल रही है ऑफिस अभी भी उनके ईशारे पर चलता है।

अहम गवाहों की सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजामात ??? किये गये हैं ।

इसीलिये कहता हूँ कि थक गये हैं अब हम सरकार... दया कीजिये, मत मूंडिये उल्टे उस्तरे से हमको... बंद कीजिये यह सब जाँच-वाँच का नाटक... २६ जनवरी आने ही वाली है... सही मौका है इस महा-लूट-आयोजन से जुड़े हर किसी को... नेता-प्रशासक-खेल प्रशासक-इंजीनियर-सप्लायर-ठेकेदार-दलाल सभी को... चुन-चुन कर ढूंढ निकालिये... और थमा ही दीजिये एकाध सम्मान !


कम से कम हमारे रहे सहे गाल तो छिलने से बच जायेंगे ।


क्यों मित्रों,

आप साथ हैं इस अपील में ?...

गाल तो आपके भी छिल ही रहे हैं!



आभार!




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11 टिप्‍पणियां:

  1. आपका इ मेल चाहिए ...प्रवीण भाई ! कभी कभी चिट्ठी भी लिखा करो यार .

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  2. जो जितना बेईमान उसे उतना ही बड़ा सम्‍मान। एकाध को तो भारत रत्‍न भी दे देना चाहिए। एक हमारे यहाँ थे रोशन लाल। छोटी सादड़ी से सोने की सिल्लियां मिली और तात्‍कालीन मुख्‍यमंत्री जी ने उन्‍हें छिपाने के‍ लिए कहा। सोना छिपा दिया गया। लेकिन एक दिन रोशनलाल जी तैल की कढाई में गिर गए और तले गए। मुख्‍यमंत्रीजी मरते हुए रोशनलाल से पूछते ही रह गए सोने का राज लेकिन बता नहीं पाए और वह सोना आज भी राज बना हुआ है। ऐसे ही इनके पैसे का भविष्‍य है।

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  3. यह भाव आजकल बहुत आ रहा है मन में। और बहुत हताशा भी है!

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  4. सच कह रहे हैं सुन सुन कर कान पकने को आये -कुछ होना जाना है नहीं खामखाह चिल्लाये जा रहे हैं -बंद करो ये नौटंकी अब !

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  5. बहुत बढ़िया . ..२६ जनवरी को लगे हाथों क्यों न घोटालेबाजों को सम्मानित कर दिया जाए .... हा हा

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  6. .

    १.७६ लाख करोड़ का घोटाला करने वाले दूर-संचार मंत्री को एक 'पद्म-भूषण' पुरस्कार तो मिलना ही चाहिए। आखिर कोई मामूली वीरता तो नहीं दिखाई उन्होंने।

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  7. भाई जी जी बिल्कुल कमाल की आईडिया है ये तो....... बिल्कुल सही कह रहे है. कम से कम जनता को भी तो पता लगे की सबसे परमवीर कौन है इस कला का.
    फर्स्ट टेक ऑफ ओवर सुनामी : एक सच्चे हीरो की कहानी

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  8. आपका कार्य प्रशंसनीय है, साधुवाद !

    हमारे ब्लॉग पर आजकल दिया जा रहा है
    बिन पेंदी का लोटा सम्मान ....आईयेगा जरूर
    पता है -
    http://mangalaayatan.blogspot.com/2010/12/blog-post_26.html

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