बुधवार, 1 दिसंबर 2010

पर क्या यह सचमुच ' लीक ' ही हुऐ हैं... ' लीक्स ' को देखिये मेरी नजर से.. मेरे साथ-साथ... और जानिये उनके पीछे का सत्य भी !!!


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मेरे 'रहस्यखोजी' मित्रों,

आज बहुत ही हल्ला है दो दो लीक्स का...

*** हिन्दुस्तान में लीक हुऐ हैं कॉरपोरेट पोलिटिकल लाबीइस्ट नीरा राडिया के फोन वार्तालाप...

देखिये...

यहाँ...

और

यहाँ पर भी...


*** और अंतर्राष्ट्रीय परिदॄश्य पर लीक हुऐ हैं...


Secret US Embassy Cables...


मित्रों,

अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय, प्रदेशीय, नगरीय, ग्रामीण बल्कि परिवार स्तर तक की राजनीति/कूटनीति में सूचनायें गुप्त रखने के लिये नहीं होती... सूचनायें 'इस्तेमाल' की जाती हैं... अपने तात्कालिक हित साधन के लिये... कभी कभी कोई व्यक्ति, सरकार या देश ऐसी स्थिति में होता है कि उस को अपने सर्वाईवल के लिये अपने पास उपलब्ध कुछ सूचनाओं को नियंत्रित तरीके से दुनिया के सामने लाना होता है... अब यह सब आधिकारिक तौर पर तो किया नहीं जा सकता है... तो फिर तरीका होते हैं 'लीक्स'... सूचना या जानकारी यदि 'लीक' होकर दुनिया को मिलती है, तो उसका एक बहुत बड़ा फायदा यह भी है कि उसकी प्रामाणिकता/विश्वसनीयता पर कोई सवाल नहीं उठाता... उसे सच ही मान लिया जाता है...


अब इन्हीं मानकों पर हम दोनों लीक्स को देखेंगे...


१- कॉरपोरेट पोलिटिकल लाबीइस्ट नीरा राडिया के लीक हुऐ फोन वार्तालाप...

इनमें निकला क्या...

कि,टू जी घोटाले को लेकर जो इतना हंगामा मचाया जा रहा है...

* उसमें केवल तत्कालीन संचार मंत्री ही शामिल नहीं हैं...
* भारतीय राजनीति के सभी धुरंधर, मीडिया के बड़े-बड़े चेहरे, कॉरपोरेट जगत के सभी बड़े सितारे, टेलीकॉम की लगभग सभी कम्पनियाँ सभी या तो इनमें शामिल हैं या इनसे लाभान्वित...

मतलब यह कि...

* हमाम में सभी नंगे हैं...

असर यह हुआ कि...

सरकार पर होते विपक्ष व मीडिया के हमलों की धार कुंद हो गई... थोड़ी बहुत न्यायालय की सक्रियता बची है... अब कुछ समय बाद सारे हमले भी बंद हो जायेंगे!




२- विकिलीक्स के लीक किये Secret US Embassy Cables...


देखिये इनसे निकल क्या रहा है...


कि,

* वह देश भी जो ईरान के साथ या निरपेक्ष नजर आते हैं... चाहते हैं कि अमेरिका ईरानी परमाणु ठिकानों को नेस्तनाबूद करे...
* अकेले अपने बूते इजराइल यह काम करता है तो जरूरी नहीं कि प्रयास सफल रहे...
* अलकायदा पर अमेरिकी बमबारी में यमन सरकार की सहमति है...
* अफगानी राष्ट्रपति करजाई भरोसे लायक नहीं हैं और उनका सगा भाई ड्रग ट्रैफिकिंग में लिप्त है...

सबसे अहम खुलासे पाकिस्तान को व हमको लेकर हैं...

* पाकिस्तान बहुत तेजी से परमाणु हथियार बना रहा है, बना सकता है व उस के पास काफी परमाणु हथियार हैं... अस्थिर होने या आर्थिक बरबादी के बावजूद वह यह करता रहेगा...
* इन में से कुछ हथियार गलत नॉन स्टेट प्लेयर्स के हाथ भी जा सकते हैं...
* अमेरिका कुछ भी कर ले पाकिस्तान व पाकिस्तानी फौज भारत विरोधी आतंकवादियों को अपना समर्थन जारी रखेगी...
* सउदी अरब के शेख का मानना यह है कि आसिफ अली जरदारी जो पाकिस्तान सरकार का सिर हैं, वही सड़ा हुआ है... तो फिर शरीर तो खुद ही खराब हो जायेगा...
* आसिफ अली जरदारी खुद ही सुरक्षित व प्रभावी नहीं हैं...
* भारत यदि कभी पाक के साथ युद्ध करता है तो भारत के लिये मिश्रित परिणाम मिलेंगे...
* भविष्य में यदि भारत-पाक युद्ध होता है तो यह परमाणु युद्ध होगा...

इस तरीके से अमेरिका अप्रत्यक्ष रूप से दुनिया को व खास तौर पर हमको यह बता देना चाह रहा है कि...

* ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अमेरिकी नेतृत्व में नेस्तनाबूद करने की जरूरत है, ईजराइल अकेले यह दुस्साहस न करे...
* अफगानिस्तान में अमेरिका की नाकामी उसकी खुद की गलतियों के कारण नहीं अपितु अफगान सरकार के ही गलत हाथों में होने के कारण है...
* भारत के विरूद्ध पाक समर्थित इस्लामी आतंकी घटनायें और भी हो सकती हैं परंतु भारत युद्ध के बारे में कभी न सोचे...
* कश्मीर के मामले में अमेरिका हमारी कोई मदद नहीं कर सकता...
* पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को गलत हाथों में जाने से रोकने के लिये अमेरिका का उसके साथ रहना जरूरी है... और दुनिया को भी इस महान काम में अमेरिका को मदद करनी चाहिये...



अब आप बताईये... इतना सेलेक्टिव और स्ट्रेटेजिक लीक्स... और उनसे निकलते यह साफ-साफ ईशारे...


मैं तो यह मानने को तैयार नहीं कि यह सूचनायें असलियत में लीक हुई हैं।

This is carefully planned & controlled release of INFORMATION, Sugar Coated & Gift Wrapped as ' LEAK '... My foot !



आप क्या सोचते हैं ?






आभार!




...

13 टिप्‍पणियां:

  1. आपने बड़े ही सुलझे तरीके से अपनी बात कही है . आपका नज़रिया सही भी लगता है . कूटनीति में घाघ लोग परिस्थितियों का लाभ लेने के लिए कोई भी हथकंडा अपना सकते हैं

    इस आलेख से एक अलग और नयी दृष्टि मिली...आपका आभार !

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  2. पर इस बार खेल में कुछ बदलाव भी है।

    सरकार, विपक्ष और मीडिया तीनो का नगांपन सरेआम देखा जा रहा है।
    एक बड़ा बदलाव तो अपेक्षित है क्योकि इतने सन्देहों के साथ अब व्यव्स्था का कदम भर भी चलना मुश्किल होगा। पूरी व्यव्स्था लकवाग्रस्त लग रही है फिलहाल तो?

    विश्व परिदृष्य में भी अमेरेकी डालर की तरह अमेरिकी साख का भी अवमूल्यन जरुरी हो गया है!

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  3. वाह प्रवीण जी बिल्कूल सही और मेरे दिल की बात कहा दी | विकिलीक्स के पहले खुलासे में काफी बड़ी जानकारी सामने आई थी भले मीडिया ने इसे खूब उछाला लेकिन सरकारों ने शायद ही इस पर कोई कड़ी प्रतिक्रया दी हो पर अमेरिकी सरकार लगी थी ये समझाने में की ये सब सही है सारी खबरे सच है जबकि वो उसे आसानी से ख़ारिज कर सकती थी | दूसरे यदि ये सब सच है तो दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश एक मामूली से बेब साईट को इन्हें प्रकाशित करने से नहीं रोकने सकती थी बात हजम नहीं होती | फिर इस बार तो हद ही हो गई अमेरिकी सरकार पहले से ही हो हल्ला करने लगी की सूचना लिक होने वाली है जब उसे पता था पहले से ही की ऐसा होने वाला है तो उसके तकनीक के जानकार क्या छुट्टी पर चले गये थे जो उसे रोक नहीं सके | और रही सही पोल ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में साउदी अरब के बयान के सामने आने से ही खुल गयाकी असल निशाना और मकसद क्या है |

    ऐसा नहीं है की दुनिया के दूसरी सरकारे इस को नहीं समझ रही है तभी तो किसी के तरफ से इस पर कोई खास प्रतिक्रया नहीं आ रही है क्योकि सभी सरकारे अपने देश में ये करती रहती है | अपने देश का तोउदाहरन तो सामने ही है |

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  4. बहुत कम शब्दों में आपने बहुत कुछ समझा दिया। आभार इस पोस्ट के लिए।

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  5. मुझे भी कुछ कुछ ऐसे ही लग रहा था ... दुनिया में जो भी होता है ... छोटी-मोती बातों को छोड़ के सभी कुछ control किया जाता है ... हमारा समाज किस किस तरह से नियंत्रित किया जा रहा है ...

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  6. ऐसी बाते लीक नहीं होती ... करवाई जाती हैं .... पर जिसका जो भी मकसद हो ... बहुत बड़ा सच तो सामने आया ही है ... .

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  7. मतलब कहीं पर निगाह है कही निशाना है ...!
    ऐसा भी होता है !!!!!!!

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  8. बात में आपकी दम है, लगता है कि जानबूझ कर लीक किये गये हैं।

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  9. शाह जी हमारे देश के नेता ही बेवकूफ हैं. अगर ये लोग मिल बाट कर खाएं तो भला किसी को क्या पता चलेगा कि क्या हो रहा है . साले कुर्सी मिलते ही दुसरे को थोडा बहुत देकर ज्यादा हिस्सा खुद ही गड़प कर जाने कि फ़िराक में रहते हैं. अगर विपक्षियों को उनका पूरा हिस्सा मिल जाय तो वो कोई आवाज ही ना उठायें और फिर ये लीक वीक करने कि परेशानी हो ही ना. देश शांति से चले. अगर कमाई कम है तो दूसरी संभावनाएं तलाशें.

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  10. कुछ भी हो सकता है ..
    कितने ऊपर लोग बैठकर गणित सेट कर रहे हैं , हमें अनुमान भी नहीं चल पाता ! हकीकत चौंका देती है !

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  11. आप की बातों में दम लग रहा है अमेरीका वाले खुलासे में मेरी रूचि सिर्फ यह जानने में थी कि यह विकीलीक्स है क्या परंतु इतना दिमाग हमने नहीं लगाया जहाँ तक बात हैं हमारे देश में हुए घोटाले की तो इससे संबंधित खबरें पढ पढकर अब उबकाई आने लगी है मैं तो अब ध्यान ही नहीं देता क्योंकि थोडे दिन के शोर के बाद सब भूल जाते हैं

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