सोमवार, 22 नवंबर 2010

डोन्ट वरी, बी हैप्पी ! Happy days will remain here forever !... जय जय घोटाला !!!


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मेरे ' घोटालेबाज ' मित्रों,

सबसे पहले तो यह कहूँगा कि दिल मत छोटा करो यार... क्या हुआ जो कुछ जले-भुने ईमानदार नासपीटों की वजह से हाल फिलहाल में हमारे किये तीन तीन घोटाले उजागर हो गये...

क्या हुआ जो कलमाडी जी, ए० राजा जी और अशोक चवाण जी को इस्तीफा देना पड़ गया... भाई दिखाने के लिये करना पड़ता है यह सब... वैसे भी तीनों के पास काम की कोई कमी तो नहीं... जल्दी ही दूसरे काम का भी जुगाड़ कर ही देगी हमारी बिरादरी (कोऑपरेटिव सोसाइटी) उनके लिये...

आप तो यह भी तो देखो न कि कितने बड़े-बड़े नाम आज हमारे साथ खड़े हैं...

कॉमनवेल्थ खेल घोटाला, जिसमें हमने अपना खून-पसीना बहा कर जनता की हराम की कमाई का मात्र ६०-७० हजार करोड़ रूपया ही अपने लिये कमाया... कौन नहीं था उसमें हमारे साथ... पक्ष-विपक्ष के बड़े-बड़े नेता... खेल प्रशासक... नौकरशाह... सीपीडब्लूडी के बड़े-बड़े इंजीनियर... बड़ी-बड़ी रियल-एस्टेट कंपनियों के कर्ता धर्ता... सब ही तो शामिल थे...

आदर्श हाउसिंग घोटाला , क्या करते ये बेचारे फौजी उस जमीन पर 'खुखरी पार्क' बना कर या फालतू की परेड कर-कर के... पूरे १०४ आलीशान फ्लैट बनाये हमने... उन बेचारों के रहने के लिये जिनके पास रहने के लिये कहीं और छत नहीं थी... और कीमत भी कितनी कम रखी... केवल ८५ लाख... कौन कौन नहीं था इन फ्लैटों को पाने वालों में... दो-दो आर्मी चीफ... एक नेवी के एडमिरल... कई और जनरल... कैन्ट बोर्डों की जमीन ' सुरक्षित ' रखने का काम करने वाले अफसरान... मुंबई के कई नेता या उनके बेनामी चेले-चमचे... कारगिल के योद्धा और युद्ध में मारे गये शहीदों की विधवायें क्या करतीं इस प्राइम प्रापर्टी का...

टेलीकॉम २-जी घोटाला... फिर इस देश की जालिम जनता के हिस्से के एक लाख सत्तर हजार करोड़ रूपये को ही तो केवल लूटा है न हमने... अब हमारे बीबी-बच्चों को भी तो दाल-रोटी तो चाहिये ही न... देखो किस-किस को फायदा पहुंचा इसमें... नेता हर तरफ के... नौकरशाह कई कई विभागों के... टेलीकॉम क्षेत्र की लगभग हर बड़ी कंपनी के मालिक-प्रमोटर... कॉरपोरेट लाबीइस्ट... यहाँ तक कहा जा रहा है बड़े-बड़े पत्रकारों ने भी इस सब में भूमिका निभाई है...

देखा तुमने, कितनी तेजी से बढ़ रही है हमारी यह बिरादरी... आखिर यह जालिम-जनता कब तक हमारा खून चूसेगी... हम अपना खून-पसीना लगा कर दिन ब दिन नये नये, पहले से और भी बड़े घोटाले करते रहेंगे...

तुम में से कोई भी इस भय को मत पालना कि ऊपर लिखे तीनों बड़े कामों में की गई मेहनत के फलस्वरूप जो कुछ हमने कमाया है या सिर ढकने को जो छत पाई है... कोई उसे हमसे छीनेगा... इस जनता की याद्दाश्त बहुत ही कमजोर है... जाँचें बैठा दी गई हैं... चलते रहने और कभी खत्म न होने के लिये... नया ' हॉट-टॉपिक ' जल्द ही पैदा हो जायेगा... फिर सब भूल जायेंगे कि कोई घोटाला कहीं हुआ भी था...

इस लिये बार-बार कह रहा हूँ कि हिम्मत न हारो...

लगे रहो !

हम इस जालिम जनता से अपना ' हक ' हर हाल में छीन कर रहेंगे !

जय हे...

जय हे...

जय-जय-जय हे !

घोटाला तेरी जय हो !

जय जय घोटाला !




आपका ही,

महा ' घोटालेबाज '

अध्यक्ष,

घोटालेबाज बिरादरी,

भारत।







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यह मुगालता कतई न पालिये कि यह कोई व्यंग्य है... यह पत्र तो डाक विभाग की गलती से मेरे पास आ गया... पता साफ-साफ नहीं लिखा था... मुझे काम का लगा, तो मैंने छाप दिया... शायद इस तरह यह उस आदमी तक पहुंच ही जाये जिसकी बिरादरी ने उसे यह भेजा था !



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10 टिप्‍पणियां:

  1. काश ऐसे पत्र आपके पास यूं ही पहुँचते रहें… :)

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  2. बताईये, सारा मजा किरकरा कर दिया इन निष्कासनों ने।

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  3. अध्यक्ष बनाने की मुबारकबाद दूं क्या ...????
    ;-)

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  4. prvin ji ghotaalebaazon ki jy nhin murdabad ho aapne achche ptte khole hen mubark ho . akhtar khan akela kota rajsthan

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  5. अध्यक्ष, जी

    पहले तो आप को बता दू की "जले-भुने ईमानदार नासपीटों" इस तरह की कोई चीज कम से कम भारत में होती नहीं है | ये तो हमारे ही बिरादरी के कुछ छोटे घोटाले बजो का काम है |

    वैसे तो ये लोग इतना कमा चुके है कि इनकी सात पुस्तो को भी कमाने की जरुरत नहीं है पर बैठ कर खाना हमारी बिरादरी को आता नहीं है बड़े कर्मठ लोग है |

    जी बड़े बड़े नाम नहीं सारे बड़े नाम हमारे साथ ही खड़े है |

    जी कमाते समय हम सभी का ख्याल रखते है और अपनी बिरादरी के सभी लोगों को इसमे शामिल करते है ताकि बात कभी बाहर आ ही ना सके आये तो सब के सब फसे और सब मिल कर सबका बचाव करे |

    लोग तो फजूल कहते है की मुंबई में घर कभी सस्ते नहीं हो सकते हमने तो कर के सबको दिखा दिया |

    एक हम है की देश में करोड़ पतियों की संख्या बढाते जा रहे है देश का नाम रौशन कर रहे है और ये आम आदमी दिन पर दिन और देश का नाम ख़राब कर रहा है | अभी हाल ही में हमारी ही वजह से देश नाम भ्रष्ट देशों की सूची में और ऊपर गया है | पर यहाँ आम आदमी हमारी कदर ही नहीं करता है |

    आशा है की आप की अध्यक्षता में हम देश का नाम और रौशन करेंगे दिन दुनी रात चौगनी घोटाला करेंगे और आम आदमी को और गरीब और लाचार आदमी बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे | हमारा उत्साह बढ़ाने के लिए धन्यवाद |

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    @ Suresh Chiplunkar जी,

    अगला जैसे ही पहुंचेगा, तुरंत छापेंगे... ;)


    @ प्रवीण पाण्डेय जी,

    बताइये तो... एक तो जालिम-आलसी जनता की हराम की कमाई को अपना खून-पसीना लगा कर हड़पा घोटालेबाजों ने... और दिलजलों ने इस्तीफे ले लिये...

    हद हो गई भाई, बिरादरी का कुछ ध्यान-लिहाज ही नहीं है आजकल... :(


    ...

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    @ सतीश सक्सेना जी,

    नहीं जी यह बधाई हम नहीं लेंगे... इतना बड़ा जिगरा नहीं अपुन का... ;)


    @ ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ जी,

    जय जय जय हे !!!


    ...

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    @ Akhtar Khan Akela जी,

    पत्ते खुले तो... पर काश वह उनको पढ़ पाते... जिनको चूना लगाया गया है ।


    @ anshumala जी,

    आप बिरादरी की काफी जोशीली व जानकार सदस्य मालूम होती हैं... अगली बार संगठन के चुनाव में आपको भी पद से नवाजा जायेगा...

    ... :)


    ...

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  9. अध्यक्ष महोदय,काहे टेंशनियाते है आप।कुछ नही हुआ है।मै आपको एक कहानी सुनाता हूँ जो इन ईमानदार नासपीटो को हमारी बिरादरी के खिलाफ ये chiggy viggy करते देखकर मुझे अक्सर याद आ जाती है।एक बार जंगल मे एक पेड की डाली पर दो चींटियाँ बैठी हुई थी तभी उस पेड के नीचे से एक हाथी गुजरा। उनमें से एक चींटी फिसलकर हाथी की पीठ पर आ गिरी ।तो पहली वाली दूसरे से कहने लगी-दबा दे,दबा दे साल्ले को दबा दे।....हा हा हा ....कुछ समझे 'बिरादर' ?बस इतना ही हो सकता है इस देश में हमारे खिलाफ।बाकी ये चीटियाँ क्या 'खा' के हमें दबा पाएंगी।हाँ थोडी देर इन्हें भी खुश हो लेने दीजिए।मुगालते में रह लेने दीजिए ।

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