सोमवार, 29 नवंबर 2010

कभी कभी हारना जीतने से भी ज्यादा जरूरी भी होता है और सुखद भी !



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मेरे ' विजेता ' मित्रों ,

आज सुबह की सैर को निकला तो अपनी-अपनी बाईकों पर खाली सड़कों का फायदा उठा रेस लगाते दिखे स्कूली बच्चे...
अपनी भी कुछ यादें तरोताजा हों गई उन्हें देख... सोचा आपसे शेयर करूं...


हाँ तो बात है तकरीबन १६ साल पहले की... मेरी Yamaha RXG 135 एकदम नई थी... जवान भी था ही तब मैं... और बाईक को तेज चलाने का शौक या सनक भी रखता था... अब उस दौर की सबसे तेज मोटरसाइकिल भी थी ही अपने पास... तो ऐसा कम ही होता था कि कोई दुपहिया मुझसे आगे निकल जाये...

अपने काम की जगह शहर से थोड़ा दूर थी... आफिस से घर जाते हुए पाँच-छह किलोमीटर का निर्जन सा इलाका पड़ता था... उस इलाके के खत्म होते ही नदी का एक पुल था जहाँ पर तीन रास्तों का ट्रैफिक आकर मिलता था और वहीं से शुरू होती थी एक अतिव्यस्त शहर की भागमभाग भी...

अब यही पाँच-छह किलोमीटर का हिस्सा ऐसा था जिसमें मैं हवा से बातें करने के अपने शौक को अंजाम देता था... वह हाफ-डे था... ऑफिस से घर को निकला तो बड़ी मस्ती में था मैं... जैसे ही मैं वहाँ पहुंचा और बाइक को तेज भगाने का इरादा किया ही था कि बगल से एक बच्चे की आवाज सुनाई दी " पापा चलो अंकल से रेस लगाते हैं। "... देखा LML स्कूटर पर सवार एक पिता-पुत्र की जोड़ी... बच्चे ने स्कूल यूनिफार्म पहनी थी... शायद स्कूल से घर जा रहे थे दोनों...

मुझे एकदम से खेल सा सूझा... मैंने क्लच दबाया और एकस्लरेटर को जोर से घुमाया... आवाज तो बहुत जोरों की आई पर स्पीड ज्यादा नहीं बढ़ी... पिता शायद समझ सा गया... और उसने भी स्कूटर की स्पीड तेज कर दी... अब यह मेरे लिये खेल सा हो गया... मोड़ों पर, स्पीड ब्रेकरों पर या उन जगहों पर जहाँ सड़क अच्छी नहीं थी मैं अपनी बाईक को धीमा कर स्कूटर को अपने से आगे निकलने देता... और सीधी सड़क पर फिर उसे पकड़ लेता और थोड़ा आगे हो जाता... बच्चा इस सबसे बहुत ही आनंदित था... और उत्साह से भर " पापा और तेज, और तेज ! " उसके यह चीखने से खेल का आनंद और बढ़ गया था...

पुल अब आने ही वाला था... एक आखिरी बार मैंने अपनी बाईक को स्कूटर से दो तीन गज आगे बढ़ाया... और फिर उसके बाद क्लच को दबा लिया... एक्सीलरेटर देने पर इंजन जोर से गरजा... परंतु बाईक की स्पीड यथावत ही रही... पिता ने इशारा समझा और स्कूटर को थोड़ा और तेज कर दिया... " हुर्रे !!! मेरे पापा जीत गये !... बच्चे की यह चीख गूंजी... पुल पर पहुंचने से पहले पिता ने अपना दाहिना हाथ हवा में उठाया और मुझे वेव किया...



कभी कभी हारना जीतने से भी ज्यादा जरूरी हो जाता है...


खास कर तब, जब आपकी इस हार से एक बच्चे का पिता उसकी नजर में हीरो हो जाता हो...


आपको क्या लगता है ?


आभार!






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24 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह पोस्ट मुझे भावुक कर दिया ... आपके अंदर जो एक अच्छा इंसान है उसे मेरा सलाम !

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  2. the laughter of a child is the sound of heaven . i loved this post

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  3. मानवीय संवेदना के धनी प्रवीण शाह !
    यह आज की लिखी गयी पोस्टों में सबसे बढ़िया पोस्ट है ! बधाई

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  4. मुझे, जब मेरा बच्चा छोटा था, तो ऐसी बाइक वाला कोई न मिला! पर अगर अब अगर मौका मिला तो प्रवीण शाह को एम्यूलेट करना चाहूंगा।

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  5. बहुत ह‍ी उत्‍कृष्‍ट श्रेणी की पोस्‍ट। आज बस इसी भाव की आवश्‍यकता है। बधाई।

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  6. बहुत अच्छा किया आपने, इतनी खुशी देकर उन बच्चों को।

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  7. 7/10

    ऐसी मखमली, ऐसी मासूम, ऐसी सरल पोस्ट कहाँ देखने को मिलती है. बड़ी-बड़ी बातों के बीच में ऐसी छोटी-छोटी बातें भाव-विभोर कर देती हैं.
    कभी-कभी हारना भी बेहद सुखद होता है.

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  8. मानवीय संवेदना से सिंधी यह पोस्ट बहुत ही भावुक कर गई। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
    विचार::पूर्णता

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  9. dusero ki khusi main apni khusi ek insaan hi khoj sakata hai.
    rachana sunder hai aur rachana yeh kehati hai aap bhee dil se sunder hai .

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  10. भावुक प्रस्तुति ।लेकिन एक सवाल है यदि आपके पीछे भी आपका बच्चा बैठा होता और यही जिद कर रहा होता तब आप क्या करते ? तब तो बडी मुश्किल हो जाती न ।हर बच्चा अपने पिता को सुपरमैन ही समझता है ।

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  11. एक अच्छा संस्मरण | बेटा हो या बेटी हमेसा पिता ही बच्चो का हीरो होता है और पिताओ को ये बात हमेसा याद रख कर व्यवहार करना चाहिए , बच्चे उन्ही का अनुसरण करते है |

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  12. इस पोस्ट पर दस में दस .......क्या कहने ,आप ह्रदय से भी अच्छे हैं !

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  13. किसी की मुस्कान के लिये हारने में सबसे बडी जीत है आज ही मैने जाना

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  14. किसी की मुस्कान के लिये हारने में सबसे बडी जीत है आज ही मैने जाना

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  15. बहुत प्यारी पोस्ट! बेहतरीन!

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  16. सैयद अली जी की पोस्‍ट पर आपकी टिप्‍पणी, 'जीना यहां, मरना यहां' देख कर यहां आया, आपसे संपर्क का कोई तरीका नहीं बना, सो यहां और फिलहाल इतना ही.

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  17. कई बार जानबूझ कर हार जाना जीतने से भी बड़ा सुख देता है ....
    मासूम ईमानदारी से भरी बेहद खूबसूरत पोस्ट ...

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  18. अब आपकी पोस्‍ट पढ़ा, आप तो बन गए हीरो नं.1.

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  19. इस आनंद की क्या कहूं .... बधाई इस जीत पर

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