मंगलवार, 2 नवंबर 2010

डियर चीफ, कब्जे में लो इस ' नासूर ' को और फिर ढहा दो बारूद लगाकर... तभी ' आदर्श ' स्थापित होगा, फिर से !!!


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प्रिय जनरल,

१- सबसे पहले तो यह कहूँगा कि पदासीन होने के बाद से आज तक का आपका आचरण और आपके किये कार्य़ उदाहरण देने योग्य रहे हैं, मुझे ही नहीं, हर उस आदमी को जिसने जीवन में कभी जैतूनी हरी वर्दी पहनी है या आज पहनता है, उसे गर्व है कि आप हमारे चीफ हैं।

२- पिछले काफी दिनों से संचार के हर माध्यम पर सुन और देख रहा हूँ कि मुंबई में कुछ लोगों के भ्रष्ट गठजोड़ ने सशस्त्र सेनाओं के कब्जे वाली एक बेशकीमती जमीन को कारगिल के शहीदों तथा युद्ध में मारे गये सैनिकों की विधवाओं के लिये फ्लैट बनाने के नाम पर कब्जाया और उसमें सौ से अधिक फ्लैट बना कर आपस में बंदरबाँट कर ली।

३- यह भी पता लग रहा है कि इन फ्लैटों को पाने वालों में कई सेवारत व रिटायर्ड शीर्ष सैन्य अधिकारी भी हैं जिनमें से कुछ ने अपने कार्यकाल में इस जमीन हड़पने में कुछ मदद पहुंचाई या चुप रहे या दूसरी तरफ देखा, जिसका ईनाम उन्हें भी एक एक फ्लैट देकर दिया गया।

४- इस सारे मामले को लेकर राजनीति में काफी तूफान मचा है व हर दल के द्वारा अपने घर को साफ करने व साफ दिखाने की कोशिशें जोरों पर हैं।

५- मुझे आज अखबार से पता चला कि सेना ने भी एक कोर्ट आफ इन्क्वायरी गठित की है।

६- मेरा कहना मात्र यह है चीफ कि गलत हुआ है, यह साफ जाहिर है, यह सब जाँचें और कमेटियाँ सालों साल चलती रहेंगी और समय कटता रहेगा और साथ-साथ बना रहेगा वह दाग भी जो जैतूनी-हरी वर्दी पर चिपक गया है।

७- आप के पास देश के संविधान ने कानूनी ताकत दी है, आप इस नासूर बन चुकी इमारत के ऊपर कब्जा करो, अनेकों कानून हैं इसके लिये, इसे देश की सुरक्षा के लिये खतरा घोषित करते हुऐ बारूद लगा कर ढहा दो, पूरा का पूरा, महज कुछ मंजिल तोड़ने से काम नहीं चलने वाला।

८- मैंने कहीं यह भी पढ़ा है कि इस जमीन पर हमारे सैनिक कभी परेड करते थे, इस बेहूदा इमारत को ढहाने व मलबा साफ करने के बाद फिर से जब हमारे सैनिक यहाँ परेड करेंगे, तो यकीन मानो चीफ, हर उस शख्स के होंठों पर विजय की मुस्कान होगी और सीना गर्व से चौड़ा होगा जिसने कभी अपने जीवन में जैतूनी हरी वर्दी पहनी थी या पहनता है आज, यह मुसकान होगी बेईमानी नाम के दुश्मन को अपनी फौज के दिल-दिमाग से बाहर रखने में पाई 'आदर्श बैटल विक्टरी' की।

९- मुझे पूरी उम्मीद है कि आप मेरी बात पर गौर करोगे, जनरल।


सादर आपका,



प्रवीण शाह






(मेरे नियमित पाठक मुझे क्षमा करें कि अपने चीफ को लिखे एक नितांत व्यक्तिगत पत्र को यहाँ छाप दिया है।)

15 टिप्‍पणियां:

  1. ek jaruri aalekh
    is building ko gira hi dena chahiaye

    aur un sab ne jo paesa is building mae allotment kae liyae jamaa kiyaa haen wo unko vaaps anhin dena chaiyae us paese ka upyog kisi aesae kaam kae liyae karna chaiyae jis sae janta ka bhalla ho

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  2. एक उदाहरण होगा। तत्काल प्रभाव से अधिग्रहण कर कारगिल वीरों को दी जाये।

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  3. प्रवीण जी

    जागिए आप शायद सपने में कुछ लिख गये है | जागिए और वास्तविक दुनिया में आ जाइये | आप शायद भूल गये की आप भारत में है |

    अब जो खबर आ रही है नंबर १- जमीन सेना की थी ही नहीं ????

    २- वो योजना कभी कारगिल शहीदों के लिए थी ही नहीं ????

    ३-ये सब के सब राजनैतिक चाल है ???

    अब बोलिये की कौन पकड़ा जायेगा और किसको सजा मिलेगी | यहाँ तो कोई जाँच बैठने से पहले ही मामला सेट कर लिया जाता है | खबर तो सुनी ही होगी की DDA खेल गांव के फ़्लैट उन जाँच एजेंसियों को देने के लिए इजाजत मांग रही है जो इस घोटाले की जाँच कर रहे है |

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  4. देखिए इस शर्मनाक प्रकरण पर कब तक लीपापोती चलती रहती है।

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    @ रचना,

    आपका आभार, यह भी पता लगाया जाना जरूरी है कि ८५-९० लाख कीमत के यह फ्लैट कितने शहीदों के परिवारों को मिले व फ्लैट खरीदने वालों के पास इतनी बड़ी रकम आई कहाँ से !


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    @ आदरणीय प्रवीण पान्डेय जी,

    अधिग्रहण नहीं ध्वस्तीकरण ही एकमात्र सही निदान है, कम से कम मैं तो यही सोचता हूँ !


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    @ अंशुमाला जी,

    अपनी युवावस्था के कुछ साल Olive Green वर्दी पहनने का सौभाग्य मिला है मुझे... अपनी आंखों से देखा है मैंने जांबाजों को वर्दी की इज्जत के लिये जान की बाजी लगाते... हंसते हंसते, चेहरे पर बिना कोई शिकन लाये विरगति का वरण करते... अब इस जैतूनी हरी वर्दी की ओर जब भी कोई उंगली उठती है, तो सच कहूँ, दिलो-दिमाग जिन्दा होते हुऐ भी लगता है कि भीतर ही भीतर कुछ मर सा गया है मेरे... और यह स्थिति उन सभी की होती है जिन्होंने यह वर्दी कभी पहनी थी या आज पहनते हैं...

    सपने में नहीं, पूरे होशोहवास में अपने वर्तमान चीफ को लिखा गया है यह पत्र... बता नहीं सकता कि इसे लिखते हुए मेरे अंदर क्या क्या टूट सा गया आज...


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    @ जाकिर अली 'रजनीश' जी,

    जब फौज व फौजियों के लिप्त होने के आरोप लग रहे हैं तो लीपापोती नहीं रिपीट नहीं चलेगी... मैं आशावान हूँ...

    और यदि सचमुच केवल लीपापोती ही होती है, तो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण दिन होगा वह हमारे देश के लिये... एकमात्र पाकसाफ किला भी ढह जायेगा उस दिन...


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    @ आदरणीय सतीश सक्सेना जी,

    आभार आपका,

    उत्तर मैं पहले ही दे चुका हूँ।


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  10. अजी जनरल खुद लिप्त हैं इन सब में, वो क्या करेंगे ...
    सारे चिराग बुझ चुके हैं ... अब तो पास माचिस भी नहीं है की कोई रौशनी करे ...

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  11. we dont need a long investigation
    if the construction is illegal then who so ever paid is irrelevent it should be demolished

    lot of illegal constructions come up and legal residents have to bear the brunt because every thing that is illegal gets saction on some pretext or other

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  12. ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
    आपको, आपके परिवार और सभी पाठकों को दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाएं ....
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  13. नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

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  14. प्रवीण शाह जी,
    नमस्कारम्‌!

    ‘स्व’ की उपत्यकाओं में ‘पड़े’ हुए बहुत लोग मिल जाते हैं, लेकिन ‘पर’ के चिंतन-शिखर पर ‘खड़े’ बहुत कम लोग दिखते हैं...!आपको धन्यवाद...! साधुवाद...!

    अब मैं इससे ज़्यादा और क्या कहूँ आपकी इस पोस्ट पर...हुज़ूर! बस इस उपर्युक्त ‘स्व’ तथा ‘पर’ के साथ-साथ ‘पड़े’ और ‘खड़े’ का अंतर ही बहुत है!

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