शुक्रवार, 22 अक्तूबर 2010

मेरे मन की मौज !... अब तुमको मिर्ची लगी तो मैं क्या करूँ ?


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मेरे 'मनमौजी' मित्रों,

आज का यह संवाद उनके लिये है जिन्हें कुछ ज्यादा ही जोर की मिर्ची लगी है शायद...


न जाने क्यों आज एक गीत, और वह भी गोविंदा द्वारा अभिनीत कुछ बदलाव कर गुनगुनाने का मन कर रहा है...

गाना कुछ इस तरह का है...

" मैं तो भेल पूरी खा रहा था...
बाजा बजा रहा था...

तेरी नानी मरी तो मैं क्या करूँ..."

मेरा बदलाव कुछ इस तरह से है:-

" मैं तो तुम्हारी अलग-अलग बातों में...
मौजूद विरोधाभास दिखा रहा था...
जो मजाक ही के लायक है, उसका...
मजाक ही तो उड़ा रहा था...

तुमको मिर्ची लगी तो मैं क्या करूँ ?"

सामान्य मसाले पड़ी किसी चीज को खाने पर यदि आपके अगाड़ी-पिछाड़ी दोनो तरफ जोरों से मिर्ची लग जाती हो...

तो कृपया यह जरूर देखें कि...

***

गलत जगह पर गलत मंत्रों के जाप से...
पुराने दिव्य मंत्रों के गलत उच्चारण से...
किसी मंत्र को १००१ के बजाय १००२ बार जाप करने से...
आपकी राशि के करीब शनि के ऊपर केतु के चढ़ जाने से, जिसकी शुक्र से मित्रता व गुरू से वैर है...
अपने हाथों की ऊंगलियों की राशि रत्न लगी अंगूठियों को अदल-बदल पहनने से...
जिसकी शान्ति करनी है उसे जगाने व जिसे जगाना है उसे शान्त करने से...


अक्सर मुँह पर छाले हो जाते हैं!...


और...


***

अज्ञान के छंटने पर दुकानदारी बन्द होने के डर से...
मंत्र जाप करते समय गलत आसन लगाने से...
बैठे-बैठे कुछ प्राचीन भाषाओं में लिखे उलजलूल विचारों की जुगाली करने से...
आपकी राशि के ऊपर शनि की तिरछी और मंगल की गोल गोल चाल से...
बोविस स्केल पर आसन स्थल की ऊर्जा १९७८९ यूनिट से कम आ जाने से...
खुद के अगले पल का पता न होते हुऐ भी दूसरों का भविष्य बताने के दबाव से...


अक्सर पिछवाड़े पर छाले या बबासीर जैसा मर्ज हो जाता है!...



कहीं आपके साथ ऐसा ही तो नहीं हो गया ?





आभार!



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डिस्क्लेमर:- विनम्र अनुरोध है कि कृपया किसी भी स्थिति में मेरे इस आलेख को इस पोस्ट से जोड़ कर न देखें, जो किसी भी हालत में इस पोस्ट से कोई संबंध नहीं रखती थी।





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15 टिप्‍पणियां:

  1. मुझे तो आपने सहजता सौम्यता और शान्ति की सलाह दी ..अब आपको यह क्या हो गया !

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  2. @ मिश्रा जी , लगता है शाह जी को भी लग गई :) :)

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    @ आदरणीय अरविंन्द मिश्र जी,

    'आत्मा' की कसम सर, 'आत्मा' को यह सब गवारा न हुआ... और 'मुझ' से यह सब करा ले गई...


    ...

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    @ आदरणीय गोदियाल जी,

    :).... :(

    स्नेह बना रहे आपका, यही कामना है।


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    उत्तर देंहटाएं
  5. हरी मिर्ची, लाल मिर्ची, मिर्ची बड़ी तेज!
    भैयाजी संभल के रहना, भाभी बड़ी तेज!

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  6. 00/10

    व्यर्थ / बेतुका / बतंगड़
    जब लिखने को कुछ न हो तो दूसरों को पढ़ें अन्यथा आस-पास टहलने जाएँ. ब्लागिंग को व्यसन न बनायें.

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  7. प्रवीण भाई
    इतना बड़ा "डिस्क्लेमर" देने की क्या जरुरत थी… :) :)

    यदि मिर्ची लगी होगी तब भी डिस्क्लेमर मरहम का काम नहीं करेगा और यदि मिर्ची नहीं लगी हो तो फ़िर डिस्क्लेमर रुपी मरहम की आवश्यकता ही नहीं… :) :)

    आप अपनी बात लिख रहे हैं, कोई जरुरी नहीं कि लोग उससे सहमत हों ही…। मिर्ची की परवाह किये बिना आप अपना "आत्मा", "विश्वास", "ज्योतिष" सम्बन्धी ज्ञान बाँटना जारी रखें… :)

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  8. कुछ वक़्त बाहर था इसलिए ज्यादा कुछ नहीं पकड़ पा रहा हूँ !
    हाँ , आत्मात्मक सांस्कृतिक चिरकुटई शातिर पक्ष का हथियार होता है , जैसे आत्मा-आत्मा उवाचते हुए धार्मिक लोगों ( संत आशाराम आदि ) द्वारा शोषण किया जाना या किसी चिरकुटात्मा द्वारा आत्मा-मिलन की १०८ गुरिया वाली छलिया-माला घुमाकर कर सुमेरु पर जाकर किसी की बुद्धि को सुप्तकर छद्म-प्रेमात्मक(?) शोषण करना ...आदि !
    आत्मवाद के साइडइफेक्ट तो बहुतेरे हैं ! अपनी सेकेण्ड लास्ट पोस्ट में मैं भी कुछ बौखियाया हूँ , यह समझते / समझाते हुए कि 'कुछ न समझे खुदा करे कोई' ! यही कहूंगा कि .... साधो जग बौराना ... मिर्ची लगना स्वाभाविक ही है ! आभार !

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  9. यह वाला 'भारी मजाक' तो नहीं जो 'मनमौजियों' के लिए लिखा गया है!

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  10. गलत जगह पर गलत मंत्रों का जाप...


    अपने रंग मे आओ भाई...

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