गुरुवार, 21 अक्तूबर 2010

आदरणीय संगीता पुरी जी को धन्यवाद... इसी बहाने ब्लॉग मैनर्स पर कुछ सवाल भी... हम लुट नहीं सकते यार !


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मेरे 'मौलिक' मित्रों,

आज सुबह सुबह अपने ब्लॉग के लेटेस्ट कमेंट दिखाने वाले ब्लॉगर विजेट पर आदरणीय संगीता पुरी जी का यह कमेंट देखा:-

क्‍या यह रचना आपकी है .. मैने नए चिट्ठों का स्‍वागत करते वक्‍त एक ब्‍लॉग में इस रचना को अभी अभी देखा है !!

तो तुरंत भाग कर उस नये ब्लॉग PRABHAKAR KANDYA पर पहुंचा और वहाँ यह टीप आया...


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प्रिय प्रभाकर कान्ड्य,

मुझे पता नहीं कि अपने इस ब्लॉग पर आप अपनी स्वयं की लिखी रचनायें लगाते हो या अपने द्वारा जगह-जगह पढ़ी गई अपनी पसंदीदा रचनाओं को प्रस्तुत मात्र करते हो...

परंतु आज जो अतुकांत कविता आपने लगाई है... मुझे उस का रचयिता होने का श्रेय हासिल है... यह रचना सबसे पहले २७ अगस्त २००९ को मेरे ब्लॉग पर यहाँ छपी, २०१० को डॉटर्स डे के दिन मुझ द्वारा इसे दोबारा री पोस्ट भी किया गया... यह भी बता दूँ कि मैंने इसे २७ अगस्त २००९ की सुबह ही लिखा था ।

आप को इस रचना को छापते समय मुझे श्रेय देना चाहिये था व मेरी पोस्ट का लिंक भी देना चाहिये था... यह सामान्य ब्लॉग शिष्टाचार है... यदि नया होने के कारण आप यह सब नहीं जानते हैं, तो अभी भी देर नहीं हुई है... आप अपनी भूल सुधार सकते हैं।

आभार!


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मेरी ओर से मामला यहीं खत्म...

पर कुछ बातें जो इस से निकली उन पर चर्चा करूँगा...

१- सबसे पहले तो सलाम आदरणीय संगीता पुरी जी की सजग नजरों को...मैंने जब पहली बार यह रचना २७ अगस्त २००९ को लगाई थी तो उन्होंने टिप्पणी भी दी थी, शायद यह सब उन्हें याद रहा और उन्होंने मुझे सूचित किया... शायद संगीता जी के सबसे नियमित आलोचकों में मेरी गिनती होती है... परंतु आलोचना को दिल से न ले वह नियमित तौर पर मेरे ब्लॉग पर आ उत्साह वर्धन भी करती हैं...अपनी बात भी कहती है मेरी भी सुनती हैं... एक अनुकरणीय ब्लॉगर हैं वे...उनको नमन...

२- लेटेस्ट कमेंट वाला यह ब्लॉगर विजेट न होता तो हो सकता है कि संगीता जी की टिप्पणी पर मेरी नजर ही नहीं पड़ती... बड़े काम का विजेट है यह...आप ने नहीं लगाया तो लगा ही लीजिये...

३- इत्तेफाक तो देखिये आज की पोस्ट मेरी १०० वीं पोस्ट है... और यह वाकया... यह कोई शुभ संकेत तो नहीं { ;) }... पर मैं लुटा नहीं, मेरी सब पोस्टें कॉपी-लेफ्ट हैं... जो चाहे लिंक या श्रेय दे कर जहाँ चाहे इस्तेमाल कर सकता है... हम लुट नहीं सकते यार !!!


आभार!






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14 टिप्‍पणियां:

  1. पुराने पापी हैं।
    यहाँ देखिए:
    http://prabhakarkandya.blogspot.com/2010/10/blog-post.html

    इससे सिद्ध हुआ कि निर्लज्ज भी हैं। हँसती हुई प्यारी सी गुड़िया का फोटो देख ढंग से हड़काया भी नहीं जाता।
    मैं तो कहूँगा कि ब्लॉगर एडमिन में शिकायत दर्ज कीजिए।

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  2. प्रवीण जी, यह तो आम हो गया है।
    कितनी ही रचनाएं ब्लॉग से चोरी होती हैं।
    कुछ लोगों की प्रत्रिका की दुकान ब्लॉग से ही चल रही है। कट-पेस्ट किया और पत्रिका तैयार।

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  3. रचना छापें तो कम से कम जहाँ से ली हैं , उसका जिक्र तो कर ही देना चाहिए ...
    100वीं पोस्ट की बहुत बधाई ...!

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  4. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  5. सबसे पहले १०० वी पोस्ट की बधाई

    प्रभाकर जी को सूचना देने के साथ-साथ लगे हाथ वहा पर आपकी कविता की प्रसंसा करने वालो को धन्यवाद भी दे देना था |

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  6. बेहद अफसोसजनक है ...संगीता जी की स्मरण शक्ति का कायल हो गया !

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  7. सबसे पहले संगीता जी की जय हो फिर आपके शतक को प्रणाम और सबसे अंत में अच्छी और चोरी लायक कविता की तस्दीक करने के लिये कंड्या जी को कंडेम करते हैं !

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  8. अब चुँकि निर्लज्ज शब्द का प्रयोग भ्राता गिरिजेश राव कर चुके हैं, अतः मैं बेशर्म की संज्ञा दे रहा हूँ. आपने सुबह 8 बजे उनको परामर्श दिया था, किंतु अभी मैंने देखा कि उनका स्पष्टीकरण नहीं आया है.
    एक देहाती कहावत है कि बेशर्म के पिछवाड़े ईख जम गई तो कहने लगा जाने दो छाया हो गई! आपको तो पता भी चल गया,कितने ऐसे होंगे जिनको पता भी नहीं चल पाता!

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  9. जागरूकों को आभार, सबको मिल कर यह चोरी बचानी पड़ेगी।

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  10. १०० वीं पोस्ट की बधाई।
    संगीता जी की सजगता काबिलेतारीफ़ है।
    जिसने आपकी रचना लगाई वह कम से कम अच्छी रचनाओं का प्रेमी तो कहा ही जा सकता है।

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  11. शतकीय जश्न में हम शामिल हैं -संगीता जी व्यक्ति के रूप में प्रणम्य हैं -बस उनका वह गत्यात्मक आब्सेसन !

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  12. अरविंद जी .. मुझसे अधिक प्रणम्‍य मेरा गत्यात्मक आब्सेसन है .. कभी किसी बहाने टेस्‍ट कर तो देखें !!

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  13. 100 वीं पोस्‍ट की बधाई .. उसमें मेरी चर्चा के लिए आभार !!

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